Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण

Balbharti Maharashtra State Board Hindi Yuvakbharati 12th Digest Chapter 1 नवनिर्माण Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 12th Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण

12th Hindi Guide Chapter 1 नवनिर्माण Textbook Questions and Answers

कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर

प्रश्न 1.
(अ) कृति पूर्ण कीजिए :

बल इसके लिए होता है ↓
(a) …………………………………….
(b) …………………………………….
उत्तर :
(a)
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(b)
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(आ) जिसे मंजिल का पता रहता है वह :

(a) …………………………………….
(b) …………………………………….
उत्तर :
(a) सब के बल बनना – सब की मदद करना।
(b) पथ के संकट सहना – मंजिल पर पहुँचने की कोशिश में होने वाला कष्ट सहन करना।

शब्द संपदा

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गयुक्त शब्द तैयार कर उनका अर्थपूर्ण वाक्य में प्रयोग कीजिए :

(a) नीति – …………………………………….
(b) बल – …………………………………….
उत्तर :
(a) उपसर्गयुक्त शब्द – अनीति।
वाक्य : अनीति के मार्ग पर नहीं चलना चाहिए।

(b) उपसर्गयुक्त शब्द – आजीवन।
वाक्य : कुछ पाठक पुस्तकालयों के आजीवन सदस्य होते हैं।

अभिव्यक्ति

प्रश्न 3.
(अ) ‘धरती से जुड़ा रहकर ही मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है’, इस विषय पर अपना मत प्रकट कीजिए।
उत्तर :
लक्ष्य का अर्थ है निर्धारित उद्देश्य, जिसे प्राप्त करने के लिए गंभीरता पूर्वक नजर रखी जाए और उसे अर्जित करने के लिए यथासंभव प्रयास किया जाए। हर व्यक्ति का अपने-अपने है ढंग से लक्ष्य निर्धारण करने और उसे अर्जित करने का अपना तरीका होता है। कोई इसे हल्के-फुल्के ढंग से लेता है और बड़े से बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर लेता है। ऐसे लक्ष्य क्षमता की कमी है और अपर्याप्त साधन के अभाव में कभी पूरे नहीं हो पाते। जो व्यक्ति अपनी क्षमता और अपने पास उपलब्ध साधनों के अनुसार लक्ष्य का निर्धारण और उसकी पूर्ति के लिए तन-मन-धन से प्रयास करता है, वह व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में अवश्य सफल होता है। ऐसे दूरदर्शी व्यक्ति जमीन से जुड़े हुए होते हैं और समझ-बूझ कर अपना लक्ष्य निर्धारित करते तथा उसके निरंतर प्रयासरत रहते हैं।

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(आ) ‘समाज का नवनिर्माण और विकास नर-नारी के सहयोग से ही संभव है’, इसपर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
हमारा समाज विभिन्न प्रकार की कुरीतियों और समस्याओं से भरा हुआ है। अनेक समाज सुधारकों के कठिन परिश्रम के बावजूद आज भी हमारे समाज में अनेक प्रकार की विषमताएँ व्याप्त हैं। असमानता, जातीयता, सांप्रदायिकता, प्रांतीयता, अस्पृश्यता आदि समस्याओं के कारण समाज के नर-नारी दोनों समान रूप से व्यथित हैं। जब तक हमारे समाज से ये बुराइयाँ दूर नहीं होती, तब तक समाज का नव निर्माण और विकास होना असंभव है। नर-नारी दोनों रथ के दो पहियों के समान हैं। बिना दोनों के सहयोग से आगे बढ़ना मुश्किल है। समाज की अनेक समस्याएँ ऐसी हैं, जिनके बारे में नारी को नर से अधिक जानकारियाँ होती हैं। नर-नारी दोनों कंधे से कंधा मिलाकर समाज उत्थान के कार्य में जुटेंगे, तभी समाज का . नव निर्माण और विकास संभव हो सकता है।

रसास्वादन

प्रश्न 4.
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर चतुष्पादियों का रसास्वादन कीजिए :
(1) रचनाकार का नाम – …………………………………….
(2) पसंद की पंक्तियाँ – …………………………………….
(3) पसंद आने के कारण – …………………………………….
(4) कविता का केंद्रीय भाव – …………………………………….
उत्तर :
(1) रचना का शीर्षक : नव निर्माण।
(2) रचनाकार : त्रिलोचन (मूलनाम – वासुदेव सिंह)
(3) कविता की केंद्रीय कल्पना : प्रस्तुत कविता में संघर्ष करने, अत्याचार, विषमता तथा निर्बलता पर विजय पाने का आवाहन किया गया है तथा समाज में समानता, स्वतंत्रता एवं मानवता की स्थापना की बात कही गई है।
(4) रस-अलंकार :
(5) प्रतीक विधान : कविता में विश्वास और प्रेरणा की मात्रा दर्शाने के लिए ‘आकाश’ तथा नर-नारी द्वारा नए समाज की रचना करने का कठिन कार्य करने के लिए ‘काँटों के ताज’ लेने जैसे प्रतीकों का सुंदर प्रयोग किया गया है।
(6) कल्पना : दबे-कुचले लोगों के प्रति आशावाद एवं उत्थान के स्वर बुलंद करना।

(7) पसंद की पंक्तियाँ तथा प्रभाव : कविता की पसंद की । पंक्तियाँ इस प्रकार हैं :
जिसको मंजिल का पता रहता है,
पथ के संकट को वही सहता है,
एक दिन सिद्धि के शिखर पर बैठ
अपना इतिहास वही कहता है।

(8) कविता पसंद आने का कारण : प्रस्तुत पंक्तियों में यह बात कही गई है कि एक बार अपने लक्ष्य का निर्धारण कर लेने के बाद मनुष्य को हर समय उसको पूरा करने के काम में जी-जान से लग जाना चाहिए। फिर मार्ग में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, उन्हें सहते हुए निरंतर आगे ही बढ़ते रहना चाहिए। एक दिन ऐसे व्यक्ति को सफलता मिलकर ही रहती है। ऐसे ही व्यक्ति लोगों के आदर्श बन जाते हैं। लोग उनका गुणगान करते है और उनसे प्रेरणा लेते हैं।

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साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान

प्रश्न 5.
(अ) चतुष्पदी के लक्षण लिखिए।
……………………………………………
……………………………………………
उत्तर :
चतुष्पदी चौपाई की भाँति चार चरणों वाला छंद होता है। इसके प्रथम, द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में पंक्तियों के तुक मिलते हैं। तीसरे चरण का तुक नहीं मिलता। प्रत्येक चतुष्पदी भाव और विचार की दृष्टि से अपने आप में पूर्ण होती है और कोई चतुष्पदी किसी दूसरी से संबंधित नहीं होती।

(आ) त्रिलोचन जी के दो काव्य संग्रहों के नाम
……………………………………………
उत्तर :
त्रिलोचन जी के कुल पाँच काव्य संग्रह हैं –

  • धरती
  • दिगंत
  • गुलाब और बुलबुल
  • उस जनपद का कवि हूँ
  • सब का अपना आकाश।

Hindi Yuvakbharati 12th Digest Chapter 1 नवनिर्माण Additional Important Questions and Answers

निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :

  1. अतिथि आए है, घर में सामान नहीं है।
    ……………………………………………
  2. परंतु अम्यान भी अपराध है।
    ……………………………………………
  3. उसके सत्य का पराजय हो जाता है।
    ……………………………………………
  4. प्रेरणा और ताकद बनकर परस्पर विकास मे सहभागी बनें।
    ……………………………………………
  5. दिलीप अपने माँ-बाप की इकलौती संतान थी।
    ……………………………………………
  6. आप इस शेष लिफाफे को खोलकर पढ़ लीजिए।
    ……………………………………………
  7. उसमें फुल बिछा दें।
    ……………………………………………
  8. कहाँ खो गई है आप।
    ……………………………………………
  9. एक मैं सफल सूत्र संचालक के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
    ……………………………………………
  10. चलते-चलते हमारे बीच का अंतर कम हो गया था।
    ……………………………………………

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उत्तर :

  1. अतिथि आए हैं, घर में सामान नहीं है।
  2. परंतु अज्ञान भी अपराध है।
  3. उसका सत्य पराजित हो जाता है।
  4. प्रेरणा और ताकत बनकर परस्पर विकास में सहभागी बनें।
  5. दिलीप अपने माता-पिता की इकलौती संतान था।
  6. शेष आप इस लिफाफे को खोल कर पढ़ लीजिए।
  7. उसमें फूल बिछा दें।
  8. कहाँ खो गई हैं आप?
  9. मैं एक सफल सूत्र संचालक के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
  10. हमारे बीच का अंतर चलते-चलते कम हो गया था।

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कृति-स्वाध्याय एवं उत्तर
पद्यांश क्र. 1
कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (अ) तथा प्रश्न 2 (आ) के लिए
प्रश्न. निम्नलिखित पद्यांश पढ़करदी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
कृति पूर्ण कीजिए :
(a)
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 1
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 4

(b)
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उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 5

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प्रश्न 2.
ऐसे दो प्रश्न बनाकर लिखिए जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों :

(a) उत्तर लिखिए :
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 3
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 6

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्द के अर्थ वाले दो शब्द पद्यांश से ढूँढ कर लिखिए :
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 7
उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 8

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के शब्द-युग्म बना कर लिखिए :
(1) तोड़ – ……………………………..
(2) काम – ……………………………..
(3) जाना – ……………………………..
(4) आकाश – ……………………………..
उत्तर :
(1) तोड़ – जोड़
(2) काम – काज
(3) जाना – आना
(4) आकाश – पाताल।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
(1) विश्वास x ……………………………..
(2) अँधेरा x ……………………………..
(3) सत्य x ……………………………..
(4) सामने x ……………………………..
उत्तर :
(1) विश्वास – अविश्वास
(2) अँधेरा x उजाला
(3) सत्य x असत्य
(4) सामने x पीछे।

पद्यांश क्र. 2
प्रश्न. निम्नलिखित पद्यांश पढ़करदी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के उपसर्गयुक्त शब्द तैयार कर उनका अर्थपूर्ण वाक्यों में प्रयोग कीजिए :
*(1) बल
(2) न्याय।
उत्तर :
(1) शब्द : निर् + बल = निर्बल।
वाक्य : निर्बल को सताना नहीं चाहिए।

(2)शब्द : अ + न्याय = अन्याय।
वाक्य : किसी व्यक्ति का अपनी बात कहने का अधिकार छीनना उसके साथ अन्याय करना है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए :
(1) सिद्धि – …………………….
(2) इतिहास – …………………….
(3) मंजिल – …………………….
(4) पथ – …………………….
उत्तर :
(1) सिद्धि – स्त्रीलिंग।
(2) इतिहास – पुल्लिंग।
(3) मंजिल – स्त्रीलिंग।
(4) पथ – पुल्लिंग।

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कृति 3 : (अभिव्यक्ति)

प्रश्न 1.
‘मानव सेवा ही सच्ची सेवा है’ इस विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
सेवा करने का अर्थ है किसी को प्रसन्न करने का प्रयत्न करना। दूसरों का दुख दूर करना सेवा का उद्देश्य है। दीनदुखी हमारे समाज के अंग हैं। अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए वे समाज से ही अपेक्षा रखते हैं। उनकी सेवा-सहायता करना समाज का कर्तव्य है। मानव सेवा विविध रूपों में की जा सकती है। पीड़ित व्यक्ति को बचाया जा सकता है। जिसके साथ अन्याय हो रहा है उसे न्याय दिलाया जा सकता है। निर्धन रोगियों को उनके इलाज का खर्च दिया जा सकता है। गरीब परिवार की कन्याओं के विवाह के लिए आर्थिक मदद की जा सकती है। अनेक संतों और समाज सेवियों ने अपना जीवन ही मानव सेवा को अर्पित कर दिया। दीनदुखियों की सेवा कर हम उनके चेहरों पर खुशी ला सकते हैं। इस तरह मानव सेवा ही सच्ची सेवा है।

पद्यांश क्र. 3
प्रश्न. निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
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उत्तर :
Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण 14

प्रश्न 2.
उत्तर लिखिए :
(1) आज नर-नारी –
(i) इस तरह निकलेंगे – ………………………..
(ii) यह लेंगे – ………………………..
(iii) दोनों की विशेषताएँ – ………………………..
(iv) दोनों रचना करेंगे – ………………………..
उत्तर :
(i) इस तरह निकलेंगे – साथ-साथ।
(ii) यह लेंगे – काँटों का ताज।
(iii) दोनों की विशेषताएँ – संगी हैं, सहचर हैं।
(iv) दोनों रचना करेंगे – समाज की।

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प्रश्न 3.
लिखिए –
(i) काँटों का ताज लेंगे, यानी क्या?
(ii) ‘गीत मेरा भविष्य गाएगा’ से कवि का तात्पर्य?
उत्तर :
(i) महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सँभालेंगे।
(ii) भविष्य में (जब वर्तमान अतीत हो जाएगा तब) लोग वर्तमान की प्रशंसा करेंगे।

प्रश्न 4.
वर्तमान का कथन –
(i) ………………………..
(ii) ………………………..
(iii) ………………………..
(iv) ………………………..
उत्तर :
(i) अतीत अच्छा था।
(ii) प्राण के पथ का गीत अच्छा था।
(iii) मेरा गीत भविष्य गाएगा।
(iv) अतीत का भी गीत अच्छा था।

प्रश्न 5.
दो ऐसे प्रश्न बनाकर लिखिए जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों :
(1) समाज की
(2) भविष्य।
उत्तर :
(1) नर-नारी किसकी रचना करेंगे?
(2) वर्तमान के गीत कौन गाएगा?

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के युग्म-शब्द बना कर लिखिए :
(1) ……………………………… मीत
(2) साथ – ………………………………
(3) संगी – ………………………………
(4) अच्छा – ………………………………
उत्तर :
(1) हित – मीत
(2) साथ – साथ
(3) संगी – साथी
(4) अच्छा – बुरा।

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रसास्वादन मुद्दों के आधार पर

कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (इ) के लिए

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर ‘नव निर्माण’ कविता का रसास्वादन कीजिए।

रसास्वादन अर्थ के आधार पर

प्रश्न 1.
अन्याय, अत्याचार से दीन-दुखियों को मुक्ति दिलाने के लिए उनका बल बन जाना ही बलवान व्यक्तियों के बल का सही उपयोग हैं। इस कथन के आधार पर ‘नव निर्माण’ कविता का रसास्वादन कीजिए।
उत्तर :
कवि त्रिलोचन द्वारा चतुष्पदी छंद में रचित कविता ‘नव निर्माण’ का मूलतत्त्व जीवन में संघर्ष करना बताया गया है। हमारे समाज में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, विषमता आदि का बोलबाला है। कवि इन बुराइयों पर काबू पाने के लिए लोगों को बल और साहस एकत्र करने का आवाहन करते हैं। यह सर्व विदित है कि ये सारी बुराइयाँ कुछ लोगों द्वारा अपने शारीरिक एवं आर्थिक बल का दुरुपयोग करने के कारण पनपती हैं। इसलिए इन पर विजय पाने का मार्ग भी बल का प्रयोग ही है। यहाँ बल प्रयोग से कवि का आशय किसी के विरुद्ध बल का अनावश्यक प्रयोग करने से न होकर सताए हुए, दबाए हुए बलहीन लोगों का बल बन कर दिखाने से है। बलहीन निरीह व्यक्तियों पर होने वाला अन्याय और अत्याचार तभी रुक सकता है और तभी उन्हें समाज में समानता का दर्जा मिल सकता है और वे निर्बलता पर विजय प्राप्त कर सकेंगे। इसी बात को कवि अपनी कविता में बिना किसी लाग-लपेट के सीधे-सादे सरल शब्दों में इस प्रकार कहते हैं –

बल नहीं होता सताने के लिए,
वह है पीड़ित को बचाने के लिए।
बल मिला है, तो बल बनो सबके,
उठ पड़ो न्याय दिलाने के लिए।

कवि ने इस कविता में अपनी बात कहने के लिए न कहीं रसअलंकार वाली शृंगारिक भाषा का प्रयोग किया है और न ही उन्हें अपनी बात कहने के लिए दुरुहता के मायाजाल में ही फँसना पड़ा है। कविता के शाब्दिक शरीर के रूप में सरल शब्दों की अमिघा शक्ति तथा कविता का प्रसाद गुण कविता में व्यक्त भावों को सरलतापूर्वक आत्मसात करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

व्याकरण

1. अलंकार :

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत अलंकार पहचानकर उसका नाम लिखिए :
(1) हाय फूल-सी कोमल बच्ची। हुई राख की थी ढेरी।
(2) मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों।
(3) इस काल मारे क्रोध के तनु काँपने उनका लगा। मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।
उत्तर :
(1) उपमा अलंकार।
(2) रूपक अलंकार।
(3) उत्प्रेक्षा अलंकार।

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2. रस :

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत रस पहचानकर उसका नाम लिखिए :
(1) उस काल मारे क्रोध के तन काँपने उनका लगा।
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।
उत्तर :
रौद्र रस

प्रश्न 2.
काहु न लखा सो चरित बिसेरवा। सो स्वरूप नृपकन्या देखा। मर्कट बदन भयंकर देही। देखत हृदय क्रोध भा तेही। जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि तेहिन विलोकी भूली। पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं। देखि दशा हर गान मुसुकाहीं।
उत्तर :
हास्य रस।

3. मुहावरे :

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
(1) अपना उल्लू सीधा करना।
अर्थ : अपना स्वार्थ सिद्ध करना।
वाक्य : रमेश से समाज के हित की उम्मीद करना व्यर्थ है, वह हमेशा अपना उल्लू सीधा करने में लगा रहता है।

(2) दिन दूना रात चौगुना बढ़ना।
अर्थ : दिन प्रतिदिन अधिक उन्नति करना।
वाक्य : जब से मुनीम जी की सलाह से सेठ करोड़ीमल ने काम-काज शुरू किया है, तब से उनका धंधा दिन दूना रात चौगुना बढ़ता जा रहा है।

4. काल परिवर्तन :

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों के साथ दी गई सूचना के अनुसार काल परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :
(1) तुमने मुझे विश्वास दिया है। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
(2) राह में अँधेरा है। (सामान्य भविष्यकाल)
(3) नर-नारी साथ निकलेंगे। (पूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
(1) तुम मुझे विश्वास दे रहे हो।
(2) राह में अँधेरा होगा।
(3) नर-नारी साथ निकले थे।

नवनिर्माण Summary in Hindi

नवनिर्माण कवि का परिचय

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नवनिर्माण कवि का नाम : त्रिलोचन। वास्तविक नाम वासुदेव सिंह। (जन्म 20 अगस्त, 1917; निधन 2007.)

प्रमुख कृतियाँ : धरती, दिगंत, गुलाब और बुलबुल, उस जनपद का कवि हूँ, सब का अपना आकाश (कविता संग्रह); देशकाल (कहानी संग्रह) तथा दैनंदिनी (डायरी) आदि।

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विशेषता : काव्यक्षेत्र में प्रयोग धर्मिता के समर्थक। समाज के दबे-कुचले वर्ग को संबोधित करने वाले साहित्य के रचयिता।

विधा : चतुष्पदी। इस विधा में चार चरणों वाला छंद होता है। यह चौपाई की तरह होता है। इसके प्रथम, द्वितीय और चतुर्थ चरण में तुकबंदी होती है। भाव और विचार की दृष्टि से प्रत्येक चतुष्पदी अपने आप में पूर्ण होती है।

विषय प्रवेश : प्रस्तुत पद्य पाठ में कुल आठ चतुष्पदियाँ दी गई हैं। ये सभी चतुष्पदियाँ भाव एवं विचार की दृष्टि से अपने आप में पूर्ण है। इन चतुष्पदियों में आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। कवि ने इनके माध्यम से संघर्ष करने तथा अन्याय, अत्याचार, विषमता और निर्बलता पर विजय पाने का आवाहन किया है।

नवनिर्माण चतुष्पदियों का सरल अर्थ

(1) तुमने विश्वास ……………………………….. आकाश दिया है मुझको।
मनुष्य के जीवन में किसी का विश्वास प्राप्त करने तथा किसी से प्रोत्साहन पाने का बड़ा महत्त्व होता है। इनके बल पर मनुष्य बड़े-बड़े काम कर डालता है।

कवि कहते हैं कि, तुमने मुझे जो विश्वास और प्रेरणा दी है वह मेरे लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। इन्हें देकर तुमने मुझे असीम संसार दे दिया है। पर मैं इन्हें इस तरह सँभाल कर अपने पास रखूगा कि मैं आकाश में न उहूँ और मेरे पाँव हमेशा जमीन पर रहें। अर्थात मुझे अपनी मर्यादा का हमेशा ध्यान रहे।

(2) सूत्र यह तोड़ ……………………………….. छोड़ नहीं सकते।

कवि मनुष्य के बारे में कहते हैं कि वह चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए, आकाश में उड़ानें भरता हो या अन्य कहीं उड़ कर चला जाए, पर अंत में उसे अपनों के बीच यानी धरती पर तो आना ही पड़ता है। कवि कहते हैं कि, यह बात शाश्वत सत्य है। इस सच्चाई को कोई नियम तोड़-मरोड़ कर झूठा साबित नहीं कर सकता। अर्थात मनुष्य कितना भी आडंबर क्यों न कर ले, पर वह अपनी वास्तविकता को छोड़ नहीं सकता।

(3) सत्य है ……………………………….. सामने अँधेरा है।
कवि संघर्ष करने का आवाहन करते हुए कहते हैं कि आपकी राह अँधेरों से भरी हुई है; भले यह बात सच हो या आपकी प्रगति के द्वार को अवरुद्ध करने के लिए तरह-तरह की कठिनाइयाँ रास्ते में आ रही हों, तब भी आपको संघर्ष के मार्ग पर रुकना नहीं है।

अँधेरे में भी आगे ही आगे बढ़ते जाना है, क्योंकि इसके अलावा आपके सामने और कोई चारा भी तो नहीं है। कवि का कहने का तात्पर्य यह है कि संघर्ष करना जारी रखना चाहिए। संघर्ष से ही सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

(4) बल नहीं होता ……………………………….. “दिलाने के लिए।

कवि कहते हैं कि मनुष्य को निरर्थक कार्यों के लिए अपने बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उसका प्रयोग सार्थक कार्यों के लिए होना चाहिए। वे कहते हैं कि मनुष्य के पास बल किसी असहाय, पीड़ित व्यक्ति को सताने के लिए नहीं होता। बल्कि वह किसी असहाय या पीड़ित व्यक्ति की रक्षा करने के लिए होता है। कवि बलवान व्यक्तियों को संबोधित करते हुए कहते हैं, यदि ईश्वर ने तुम्हें शक्ति प्रदान की है, तो तुम सभी कमजोर लोगों के बल बन ३ कर उनको न्याय दिलाने के काम में लग जाओ। तभी तुम्हारे बल की सार्थकता है।

(5) जिसको मंजिल ……………………………….. वही कहता है।

कवि कहते हैं कि जिस व्यक्ति को अपनी सफलता की मंजिल की जानकारी हो जाती है, वह व्यक्ति अपने मार्ग में आने वाली परेशानियों से नहीं डरता। वह हँसते-हँसते इन परेशानियों को झेल लेता है। ऐसे व्यक्तियों को ही जीवन में सफलता मिलती है। इस तरह सफलता के शिखर पर पहुँचने वाले व्यक्ति समाज के लिए इतिहास बन जाते हैं और लोग उससे प्रेरणा लेते हैं।

Maharashtra Board Class 12 Hindi Yuvakbharati Solutions Chapter 1 नवनिर्माण

(6) प्रीति की राह ……………………………….. चले आओ।
कवि प्यार-मोहब्बत और अच्छे आचार-व्यवहार को अपनाने की बात करते हुए लोगों का आवाहन करते हैं कि वे सब के साथ प्यार-मोहब्बत से रहें और सब के साथ अच्छा व्यवहार करें। यही सब के लिए अपनाने वाला सही मार्ग है। वे कहते हैं कि सब को हँसते-गाते जीवन जीने का मार्ग अपनाना चाहिए।

(7) साथ निकलेंगे ……………………………….. “समाज नर-नारी।
कवि स्त्री-पुरुष समानता की बात करते हुए कहते हैं कि स्त्री पुरुष दोनों एक साथ मिल कर विकट समस्याओं को सुलझाने का कार्य करेंगे। दोनों इस दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे और नए समाज की रचना करेंगे, जिसमें सब को समानता का अधिकार मिले।

(8) वर्तमान बोला……………………………….. गीत अच्छा था।

कवि वर्तमान और अतीत की बात करते हुए कहते हैं कि वर्तमान के अनुसार बीता हुआ समय अच्छा था। उस समय जीवन पथ में साथ निभाने वाले अच्छे मित्र थे। वर्तमान कहता है कि भविष्य में (जब हम अतीत हो जाएँगे और) लोग हमारा भी गुणगान करेंगे। वैसे अतीत भी गुणगान करने लायक था।

नवनिर्माण शब्दार्थ

  • व्योम = आकाश
  • सहचर = साथ-साथ चलने वाला, मित्र
  • सिद्धि = सफलता
  • मीत = मित्र, दोस्त

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण विरामचिन्हे

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest व्याकरण विरामचिन्हे Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण विरामचिन्हे

विरामचिन्हे प्रास्ताविकः

आपल्या बोलण्याचा आशय ऐकणाऱ्याला चांगल्या रीतीने समजावा म्हणून आवाजाच्या चढ-उताराबरोबरच एखाद दुसऱ्या ठिकाणी आपण काही क्षण थांबतो या थांबण्यालाच ‘विराम’ असे म्हणतात.

बोलण्यातील विराम लेखनात निरनिराळ्या चिन्हांनी दर्शविला जातो. अशा लेखनातील विविध चिन्हांना ‘विरामचिन्हे’ असे म्हणतात.

विरामचिन्हांमुळे वाक्य कोठे संपले, कोठे सुरू झाले की अपूर्ण आहे अशा विविध गोष्टी आपणास समजतात. म्हणूनच विरामचिन्हांना लेखनात अत्यंत महत्त्व आहे.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण विरामचिन्हे

विरामचिन्हे दोन प्रकारची आहेत.

  • विराम दर्शवणारी
  • अर्थबोध करणारी

विराम दर्शवणारी :

  • पूर्णविराम ( . ),
  • अर्धविराम ( ; ),
  • स्वल्पविराम ( , ),
  • अपूर्णविराम ( : ).

अर्थबोध करणारी :

  • प्रश्नचिन्ह ( ? ),
  • उद्गारचिन्ह ( ! ),
  • अवतरण चिन्ह (” ” दुहेरी व ” एकेरी),
  • संयोगचिन्ह ( – ),
  • अपसारण चिन्ह ( – )
  • याशिवाय लोप चिन्ह ( ……… ),
  • अधोरेखा चिन्ह ( ),
  • विकल्प चिन्ह ( / ),
  • काकपद/हंसपद ( , ),
  • कंस () साधा कंस,
  • { } महिरप कंस,
  • [ ] चौकोनी कंस),
  • वरीलप्रमाणे मजकूर / यथोपरिचिन्ह (” “, -।।-)
  • अवग्रह (ऽ) उच्चार लांब करण्यासाठी,
  • फुल्या (xxx) (अवशिष्ट व अयोग्य मजकुरासाठी),
  • दंड ( । एकेरी, ।। दुहेरी) ही लेखनात वापरली जातात.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण विरामचिन्हे

11th Marathi Book Answers व्याकरण विरामचिन्हे Additional Important Questions and Answers

1. खालील वाक्यांत योग्य त्या ठिकाणी विरामचिन्हे देऊन वाक्ये पुन्हा लिहा.

प्रश्न 1.
सर पोराचं लग्न हाय यायला पाहिजे.
उत्तर :
“सर, पोराचं लग्न हाय. यायला पाहिजे.”

प्रश्न 2.
ते म्हणाले गेले दोन दिवस मेघदूत वाचत होतो.
उत्तर :
ते म्हणाले, “गेले दोन दिवस, ‘मेघदूत’ वाचत होतो.”

प्रश्न 3.
मी सोपानदेवांना म्हणालो अहो हे बावनकशी सोने आहे
उत्तर :
मी सोपानदेवांना म्हणालो, “अहो, हे बावनकशी सोने आहे!”

प्रश्न 4.
वडील सहा आठ महिने दौऱ्यावर
उत्तर :
वडील सहा-आठ महिने दौऱ्यावर.

प्रश्न 5.
ड्रायव्हरनं गाडी सुरू केली आणि विचारलं कुठे जायचं
उत्तर :
ड्रायव्हरनं गाडी सुरू केली आणि विचारलं, “कुठे जायचं?”

2. पुढील वाक्यांत योग्य विरामचिन्हांचा पर्याय निवडून वाक्ये पुन्हा लिहा.

प्रश्न 1.
रसिकहो वहिानींचा सल्ला या कार्यक्रमाचा आजचा शेवटचा प्रयोग.

पर्याय :
(अ) उद्गारवाचक चिन्ह, एकेरी अवतरण
(आ) प्रश्नचिन्ह, उद्गारवाचक चिन्ह
(इ) दुहेरी अवतरण चिन्ह, स्वल्पविराम
उत्तर :
(अ) उद्गारवाचक चिन्ह, एकेरी अवतरण (रसिकहो! ‘वहिनींचा सल्ला’ या कार्यक्रमाचा आजचा शेवटचा प्रयोग)

प्रश्न 2.
पायच होऊ देत आता घट्ट मजबूत पोलादी पर्याय :

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण विरामचिन्हे

(अ) प्रश्नचिन्ह, लोपचिन्ह
(आ) स्वल्पविराम, अर्धविराम
(इ) लोपचिन्ह, स्वल्पविराम
उत्तर :
पर्याय : (इ) लोपचिन्ह, स्वल्पविराम (पायच होऊ देत आता… घट्ट, मजबूत, पोलादी)

प्रश्न 3.
जी ए कुलकर्त्यांचा एखादा कथासंग्रह तुम्ही वाचला आहे काय पर्याय :
(अ) स्वल्पविराम, अर्धविराम
(आ) पूर्णविराम, प्रश्नचिन्ह
(इ) अपूर्णविराम, अवग्रहचिन्ह
उत्तर :
(आ) पूर्णविराम, प्रश्नचिन्ह (जी. ए. कुलकर्त्यांचा एखादा कथासंग्रह तुम्ही वाचला आहे काय?)

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.4 व्याकरण काळ Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

11th Marathi Digest Chapter 5.4 व्याकरण काळ Textbook Questions and Answers

कृती

1. खालील वाक्यांतील रीती काळाचा प्रकार ओळखा.

प्रश्न 1.
नजमा उत्तम कविता लिहीत असे. …………………………………………
उत्तर :
रीती भूतकाळ

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 2.
मी लोकांना मदत करत राहीन. …………………………………………
उत्तर :
रीती भविष्यकाळ

प्रश्न 3.
अभिजित सतार उत्तम वाजवत असतो. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 4.
शिक्षक जे सांगतात, ते विदयार्थी लक्षपूर्वक ऐकत असतात. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 5.
एका गावात एक उत्तम चित्रकार राहत होता. …………………………………………
उत्तर :
रीती भूतकाळ

प्रश्न 6.
राहल प्रार्थनेला नेहमीच उशिरा येत असतो. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 7.
माधवराव नेहमीच सुगम संगीत ऐकत असत. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 8.
दादासाहेब दररोज फिरायला जात असतात. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

प्रश्न 9.
तो सदोदित आजारी पडत असतो. …………………………………………
उत्तर :
रीती वर्तमानकाळ

2. खालील वाक्यांतील काळ ओळखून त्यापुढे दिलेल्या कंसातील सूचनेनुसार वाक्यबदल करा.

प्रश्न 1.
मी तबला वाजवतो. (रीती भूतकाळ करा.)
उत्तर :
मी तबला वाजवत असे.

प्रश्न 2.
मुले खो-खो खेळत होती. (पूर्ण भूतकाळ करा.)
उत्तर :
मुले खो-खो खेळली होती.

प्रश्न 3.
रस्त्याच्या डाव्या बाजूने चालावे. (साधा वर्तमानकाळ करा.)
उत्तर :
रस्त्याच्या डाव्या बाजूने चल.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 4.
तो विदयार्थी अडखळत वाचत असतो. (साधा भूतकाळ करा.)
उत्तर :
तो विदयार्थी अडखळत वाचत होता

प्रश्न 5.
वर्गातील विद्यार्थी लक्षपूर्वक ऐकत होते. (साधा भविष्यकाळ करा.)
उत्तर :
वर्गातील विदयार्थी लक्षपूर्वक ऐकतील / वर्गातील विदयार्थी लक्षपूर्वक ऐकत असतील.

11th Marathi Book Answers Chapter 5.4 व्याकरण काळ Additional Important Questions and Answers

1. खालील कृती सोडवा व काळाचे नाव लिहा. (कंसातील क्रियापदांचे योग्य रूप वापरा)

प्रश्न 1.
या वर्षी मी काश्मीर सहलीला ……………………………. (जाणे)
उत्तर :
या वर्षी मी काश्मीर सहलीला जाईन. [भविष्यकाळ]

प्रश्न 2.
काल झालेल्या निबंध स्पर्धेत मी उत्तम निबंध ……………………………. (लिहिणे)
उत्तर :
काल झालेल्या निबंध स्पर्धेत मी उत्तम निबंध लिहिला. [भूतकाळ]

प्रश्न 3.
हे बघ आनंद, उदया तू सहलीला असल्यामुळे लवकर ……………………………. (जाणे, उठणे)
उत्तर :
हे बघ आनंद, उदया तू सहलीला असल्यामुळे लवकर ऊठ. [वर्तमानकाळ]

प्रश्न 4.
परवा सुरेशने सुरेल गीत ……………………………. (गाणे)
उत्तर :
परवा सुरेशने सुरेल गीत गायले. [भूतकाळ]

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 5.
काल बाळूने बागेतील आंबे शेजाऱ्यांना ……………………………. (देणे)
उत्तर :
काल बाळूने बागेतील आंबे शेजाऱ्यांना दिले. [भूतकाळ]

प्रश्न 6.
वकिलाने आरोपीला आपली बाजू मांडू ……………………………. (देणे)
उत्तर :
वकिलाने आरोपीला आपली बाजू मांडू दिली. [भूतकाळ]

प्रश्न 7.
भविष्यात मी कधीतरी विमानातून प्रवास ……………………………. (करणे)
उत्तर :
भविष्यात मी कधीतरी विमानातून प्रवास करेन. [भविष्यकाळ]

प्रश्न 8.
हसणे हा मनुष्यस्वभाव ……………………………. असणे.
उत्तर :
हसणे हा मनुष्यस्वभाव आहे. [वर्तमानकाळ]

प्रश्न 9.
काल रात्री सारखा विजांचा गडगडाट ……………………………. (होणे)
उत्तर :
काल रात्री सारखा विजांचा गडगडाट होता. [भूतकाळ]

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 10.
उदया मी ही मालिका पुन्हा ……………………………. (बघणे)
उत्तर :
उदया मी ही मालिका पुन्हा बघेन. [भविष्यकाळ]

सरावासाठी कृती :

1. खालील वाक्यांतील काळ ओळखा.

प्रश्न 1.
(a) दहा वर्षांपूर्वी मी या शाळेत रुजू झाले.
(b) आणखी वर्षानंतर मामू या शाळेतून सेवानिवृत्त होणार!
(c) माझ्या हाती पुस्तक देताना त्यानं त्यावरून मायेनं हात फिरविला.
(d) या मंडळींनी गेल्या पंचवीस वर्षांत साऱ्या जगाचं एका ‘मॉल’ मध्ये रूपांतर केलं.
(e) या वयातही ठणठणीत प्रकृती आहे माझी.
उत्तर :
(a) भूतकाल
(b) भविष्यत्काल
(c) वर्तमानकाल
(d) भूतकाल
(e) वर्तमानकाल

2. कंसातील सूचनेनुसार वाक्यबदल करा.

प्रश्न 1.
ही शाळा सरकारी आहे. (रीती भविष्यकाळ करा)
उत्तर :
ही शाळा सरकारी असेल.

प्रश्न 2.
सोपानदेवांची आणि माझी वीस-बावीस वर्षांची मैत्री आहे. (पूर्ण भूतकाळ करा)
उत्तर :
सोपानदेवांची आणि माझी वीस-बावीस वर्षांची मैत्री होती.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

प्रश्न 3.
प्रास्ताविकानंतर कार्यक्रमाला सुरुवात झाली. (पूर्ण भविष्यकाळ करा)
उत्तर :
प्रास्ताविकानंतर कार्यक्रमाला सुरुवात होईल.

प्रश्न 4.
एक फळ मात्र मी रोज नेमानं खात असतो. (रीती भूतकाळ करा)
उत्तर :
एक फळ मात्र मी रोज नेमानं खात असे.

प्रश्न 5.
सभागृहात टाचणी पडेल अशी शांतता पसरली. (काळ ओळखा)
उत्तर :
वर्तमानकाळ

3. खालील वाक्यातील रीती काळाचा प्रकार ओळखा.

प्रश्न 1.
a. विदयार्थी मामूचा हात खेचून त्याला आग्रहाने चहाला नेतात.
b. टी.व्ही.ची गाडी रोजच्यासारखी चारला येणार होती.
c. उषा वहिनी नेहमीप्रमाणे पर्स घ्यायला आत जातील.
d. ही आजची भीषण स्थिती असे.
e. पुस्तकांचा अविट सुगंध मनाच्या गाभाऱ्यात दरवळत जाईल.
उत्तर :
a. रीती वर्तमानकाळ
b. रीती भूतकाळ
c. रीती भविष्यकाळ
d. रीती भूतकाळ
e. रीती भविष्यकाळ

काळ प्रास्ताविकः

वाक्याचा अर्थ पूर्ण करणाऱ्या क्रियावाचक शब्दास क्रियापद असे म्हणतात. उदा. विदयार्थ्यांनी नियमित अभ्यास करावा. यातील ‘करावा’ या शब्दातून अभ्यास करण्याची क्रिया दर्शविली जाते. वाक्यात दिलेल्या क्रियापदावरून जसा क्रियेचा बोध होतो. तसाच ती क्रिया कोणत्या वेळी घडत आहे याचा बोध होतो. क्रिया कोणत्या वेळी घडत आहे याचा जो बोध होतो त्यास काळ असे म्हणतात.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ

उदा.

  • माधुरी गीत गाते. (गाण्याची क्रिया सुरू आहे – आता घडत आहे)
  • माधुरीने गीत गाईले/गायले (गाण्याची क्रिया पूर्वी घडत आहे – पूर्वी कधी तरी)
  • माधुरी गीत गाईल. (गाण्याची क्रिया पुढे घडणार आहे – भविष्यात कधी तरी)

यावरून काळाचे तीन मुख्य प्रकार पडतात.

  • वर्तमानकाळ – (क्रिया आता घडली आहे.)
  • भूतकाळ – (क्रिया पूर्वी घडली आहे.)
  • भविष्यकाळ – (क्रिया पुढे कधी तरी घडेल)

काळ व काळाचे प्रकार :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 काळ 1

‘वाचणे’ ही क्रिया काळाच्या सर्व प्रकारांत खालीलप्रमाणे दर्शविली जाते.

वर्तमानकाळभूतकाळभविष्यकाळ
साधा/सामान्य
उदा. मी पुस्तक वाचतो.
(क्रिया सुरू / घडत आहे.)
साधा/सामान्य
उदा. मी पुस्तक वाचले.
(क्रिया पूर्वी घडली आहे.)
साधा/सामान्य
उदा. मी पुस्तक वाचेन.
(क्रिया पुढे घडणार आहे.)
अपूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचत आहे.
(वाचन संपलेले नाही. क्रिया सुरू आहे, परंतु अपूर्ण आहे.)
अपूर्ण
उदा.
मी पुस्तक वाचत होतो.
अपूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचत असेन.
पूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचले आहे.
(पुस्तक वाचन पूर्ण झाले आहे.)
पूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचले होते.
पूर्ण
उदा. मी पुस्तक वाचले असेन.
रीती
उदा. मी पुस्तक वाचत असतो.
(पुस्तक वाचन क्रिया नेहमी घडत असते.)
रीती
उदा. मी पुस्तक वाचत असे.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ
रीती
उदा. मी पुस्तक वाचत जाईन.

लक्षात ठेवा :

  • वाक्यात क्रियापद एकटेच असेल तर तो साधा काळ असतो.
  • क्रिया सुरू आहे म्हणजेच संपलेली नाही तर अपूर्ण आहे हे समजते तो अपूर्ण काळ असतो.
  • क्रिया पूर्ण झाली याचा बोध होतो तेव्हा तो पूर्ण काळ असतो.
  • एखादी क्रिया नेहमी वा सतत घडत असेल तर तो रीती काळ असतो.

रीती काळ :

क्रियापदाच्या स्वरूपावरून त्या विशिष्ट क्रियेची रीत, पद्धत, सवय, वहिवाट समजते तेव्हा तो रीती काळ असतो.
उदा.

  • धावपटू धावण्याचा सतत सराव करत असतात. (रीती वर्तमानकाळ) (धावण्याच्या कृतीचा सराव – रीत)
  • माझ्या एकत्र कुटुंबात आजी उत्तम संस्कार करत असे. (रीती भूतकाळ) (आजीची उत्तम संस्काराची रीत)

हिरव्या पालेभाज्या आवश्यक असल्यामुळे सर्वच व्यक्ती रोजच्या आहारात त्या खात जातील. (रीती भविष्यकाळ) (हिरव्या पालेभाज्यांची आवश्यकता सर्वांना – खात जातील.)

रीती काळाची वैशिष्ट्ये :

वैशिष्ट्येउदाहरण
1. रीती काळात सामान्यपणे संयुक्त क्रियापदांचा वापर असतो.1. सुरेखा गीत गात असते. (वर्तमानकाळ) (नेहमी गीत गाण्याची सवय) गात असते संयुक्त क्रियापद
2. संयुक्त क्रियापदावरून क्रियेचे सतत चालणारे रूप समजते. क्रियेची पुनरावृत्ती दिसते.2. तो वर्गात नेहमी बोलत असे. (भूतकाळ) (पूर्वी त्याला असणारी बोलण्याची सवय)
3. क्रियापदाच्या स्वरूपावरून सतत चालणारी क्रिया कोणत्या काळात घडत आहे हे समजते. Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.4 व्याकरण काळ3. क्रीडांगणावर मुले खेळत असतील. (भविष्यकाळ) (मुलांची खेळण्याची सवय)
4. धातूला प्रत्यय लावून क्रियापद तयार होते. उदा. खात, बोलत, करत इ.4. समीर पुस्तक वाचत असे. (भूतकाळ) (वाच पासून वाचत हे धातूसाधित रूप असे – क्रियावाचक शब्द वाचत असे संयुक्त क्रियापद

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

11th Marathi Digest Chapter 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्यांचे संयक्त, मिश्रव केवल वाक्य असे वर्गीकरण करा.

a. मी माणसे मोजून पाहिली; पण ती आठच भरली.
उत्तरः
संयुक्त वाक्य (‘पण’ न्यूनत्वबोधक प्रधानत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

b. सोनाली चहा किंवा कॉफी घेते.
उत्तरः
संयुक्त वाक्य (‘किंवा’ विकल्पबोधक प्रधानत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

c. आम्ही मुंबईला पोहोचलो आणि खूप अडचणी निर्माण झाल्या.
उत्तरः
संयुक्त वाक्य (‘आणि’ समुच्चयबोधक प्रधानत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

d. पाऊस पडला, तर शेतकरी वर्ग आनंदी होईल.
उत्तरः
मिश्र वाक्य (‘तर’ या ठिकाणी ‘जर’ अध्याहृत धरावा) संकेतबोधक गौणत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय

e. मुले बागेत खेळली. ती खूप दमली.
उत्तरः
केवल वाक्य (दोन स्वतंत्र केवल वाक्ये – मुले उद्देश्य. खेळली – विधेय. ती उद्देश्य, दमली – विधेय

f. सर म्हणाले, की प्रामाणिक प्रयत्नांनी यश मिळते.
उत्तरः
मिश्र वाक्य (‘की’ स्वरूपबोधक गोणत्वसूचक उभयान्वयी अव्यय)

प्रश्न 2.
सूचनेनुसार वाक्यसंश्लेषण करा.

a. तो उत्तीर्ण झाला. सर्वांना आनंद झाला. (केवल वाक्य करा.)
उत्तरः
तो उत्तीर्ण झाल्यामुळे सर्वांना आनंद झाला.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

b. श्याम घरी आला. वादळाला सुरुवात झाली. (मिश्र वाक्य करा.)
उत्तरः
श्याम घरी आला तेव्हा वादळाला सुरुवात झाली.

c. आम्हाला शिकवायला नवीन शिक्षक आले. आमच्या अडचणी दूर झाल्यात. (संयुक्त वाक्य करा.)
उत्तरः
आम्हांला शिकवायला नवीन शिक्षक आले आणि आमच्या अडचणी दूर झाल्या.

d. माझे वडील म्हणाले. मला तुझे यश बघून तुझा अभिमान वाटला. (मिश्र वाक्य करा.)
उत्तरः
माझे वडील म्हणाले, की तुझे यश बघून मला तुझा खूप अभिमान वाटला.

e. हे आधुनिक लोकशाहीचे युग आहे. जाहिरातीला महत्त्व आहे. समाजाने जाहिरातीचा योग्य अर्थ समजून घ्यावा. (केवल वाक्य करा.)
उत्तरः
आधुनिक लोकशाही युगात जाहिरातींना महत्त्व असल्यामुळे समाजाने जाहिरातींचा योग्य अर्थ समजून घ्यावा.

11th Marathi Book Answers Chapter 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण Additional Important Questions and Answers

सरावासाठी कृती

प्रश्न 1.
सूचनेनुसार वाक्यसंश्लेषण करा.

(a) प्रार्थना संपते, ‘जनगणमन’ ची इशारत मिळते. (केवल वाक्य करा)
(b) पुस्तकं आपल्याला घडवतात; काही वेळा उद्ध्वस्तही करतात. (संयुक्त वाक्य करा)
(c) वाक्य संपलं आणि त्यांचे डोळे लकाकले. (केवल वाक्य करा)
(d) घरातली कामं मला दिसतात. त्यांना दिसत नाहीत. (मिश्र वाक्य करा)
(e) टॉलस्टायला वाचनाची आवड होती. त्याचा वाचनाचा वेग उत्तम होता. (संयुक्त वाक्य करा)
उत्तर :
(a) केवल वाक्य प्रार्थना संपताच ‘जनगणमन’ ची इशारत मिळते.
(b) संयुक्त वाक्य पुस्तकं आपल्याला घडवतात; पण काही वेळा उद्ध्वस्तही करतात.
(c) केवल वाक्य वाक्य संपताच त्यांचे डोळे लकाकले.
(d) मिश्र वाक्य घरातील कामं जशी मला दिसतात, तशी त्यांना दिसत नाहीत.
(e) संयुक्त वाक्य टॉलस्टायला वाचनाची आवड होती आणि त्याचा वाचनाचा वेगही उत्तम होता.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

प्रश्न 2.
खालील वाक्यांचे संयुक्त , मिश्र, केवल वाक्य असे वर्गीकरण करा.
उत्तर :

  • शाळेत तो शिपाई आहे; शाळेबाहेर तो बहुरूपी आहे. – संयुक्त वाक्य
  • जे आवडेल ते खुशाल घेऊन जा. – मिश्र वाक्य
  • एक गोष्ट मात्र खरी की, उत्तम साहित्यकृती आपल्याला जन्मभर भावनिक सोबत करतात. – मिश्र वाक्य
  • त्यांनी गाणी रचली आणि त्यातली थोडीशी कुणीतरी टिपून ठेवली. – संयुक्त वाक्य
  • पोट कितीही भरले तरी ते शेवटी रिकामे होणारच – मिश्र वाक्य

वाक्यसंश्लेषण प्रास्ताविक:

एक पूर्ण विचार व्यक्त करणाऱ्या शब्दसमूहास वाक्य असे म्हणतात. वाक्य म्हटले की, त्यात कोणाविषयी तरी बोलणे असते आणि ज्याच्याविषयी बोलायचे आहे त्याबद्दल काहीतरी सांगितलेले म्हणजे विधान केलेले असते. यामुळेच वाक्याचे दोन भाग पडतात.

उदा. सूर्य रोज पूर्वेला उगवतो.

वरील वाक्य सूर्याबद्दल आहे. ‘सूर्य’ हे वाक्याचे उद्देश्य आहे. सूर्याबद्दल ‘रोज पूर्वेला उगवतो’ हे विधान केलेले आहे.

व्याकरणाच्या भाषेत उद्देश्य म्हणजे कर्ता (सूर्य) व विधेय म्हणजे क्रियापद (उगवणे – उगवतो), वाक्यातील इतर शब्द हे उद्देश्य विस्तार आणि विधेय विस्तार आहेत.

एका वाक्यात किती विधाने असतात यावरून वाक्याचे पुढील प्रकार पडतात.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

वाक्यप्रकार:

वाक्यातील विधानांवरून वाक्यांचे पुढील प्रकार पडतात.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 1
केवल, मिश्र व संयुक्त वाक्य प्रकारांची वैशिष्ट्ये पुढीलप्रमाणे आहेत.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 2
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 3
लक्षात ठेवा :

मिश्र व संयुक्त वाक्यांत काही अव्यये समान असली तरी जोडली जाणारी वाक्ये आणि वाक्यांतील अव्ययांचे अर्थ लक्षात घेऊन वाक्य मिश्र वा संयुक्त आहे हे निश्चित करा.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 व्याकरण वाक्यसंश्लेषण

वाक्यसंश्लेषण/वाक्यसंकलन :

एकमेकांशी संबंध असलेलली दोन वा अधिक केवल वाक्ये दिली असता त्यांचे एक वाक्य तयार करण्याच्या प्रक्रियेला वाक्यसंश्लेषण असे म्हणतात.

वाक्यसंश्लेषणाचे महत्त्वः

  • वाक्यरचनेवर प्रभुत्व संपादन करण्यासाठी
  • आपल्या मनातील भाव नेमकेपणाने व्यक्त करण्यासाठी
  • सुटी – सुटी वाक्ये विस्कळीतपणे मांडण्याऐवजी ती एकत्रित करून मांडल्यामुळे आपल्या विचारात सुसूत्रता येते. वाक्य आटोपशीर, व्यवस्थित तयार करता येते.
  • उत्तम लेखनकौशल्य आत्मसात करण्यासाठी वाक्यसंकलनाची कला प्रत्येकास अवगत असणे आवश्यक आहे.

वाक्यसंश्लेषणाचे प्रकारः
वाक्य संकलनाच्या वेळी दोन वा अधिक वाक्ये एकत्र करून आपण एक जोडवाक्य तयार करतो. हे जोडवाक्य केवल, मिश्र वा संयुक्त यांपैकी एक असते. म्हणजेच वाक्यसंश्लेषण हे तीन प्रकारचे असते.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 4
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.3 वाक्यसंश्लेषण 5

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

11th Marathi Digest Chapter 5.2 व्याकरण काव्यगुण Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
खालील तक् पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 9
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 4

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

प्रश्न 2.
खालील उदाहरणांमधील काव्यगुण ओळखा
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 10
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 5

प्रश्न 3.
वाचा. चौकिती काव्गुण वलहा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 11
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 7

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

11th Marathi Book Answers Chapter 5.2 व्याकरण काव्यगुण Additional Important Questions and Answers

सरावासाठी कृती

प्रश्न 1.
खालील पदयपंक्तीतील काव्यगुण लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 8

काव्यगुण प्रास्ताविकः

मानवी जीवनात शब्दांचे, वाणीच्या व्यापाराचे महत्त्व अनन्यसाधारण आहे. मानवी मनात कोमलतेपासून कठोरतेपर्यंत अनेकविध भाव निर्माण करण्याचे सामर्थ्य शब्दांत असते.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

प्रत्येक व्यक्तीत काही समान तर काही विशेष गुण असतात. व्यक्तीप्रमाणेच सर्जनशील लेखनात काही गुण असतात. अशा या गुणांमुळेच ती वाङमयीन रचना उठावदार व प्रभावी होण्यास मदत होते. प्रसाद, माधुर्य व ओज या काव्यगुणांमुळेच अभिव्यक्ती परिणामकारक होते. पदय असो वा गदय वाचकांच्या अंत:करणाला भिडण्याची शक्ती काव्यगुणांमध्ये असते. काव्यात्मक गुणांमुळे साहित्यभाषेला सौंदर्याचा एक अनोखा साज चढतो.

काव्यगुण:

अभिव्यक्तीस पोषक असे योजलेले शब्द असतील तर काव्याची शोभा वाढते. काव्यरचनेतील अनेक काव्यगुणांपैकी प्रसाद, माधुर्य व ओज हे तीन गुण महत्त्वाचे आहेत.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 काव्यगुण 1

काव्यगुणातील शब्दांची वैशिष्ट्ये:

  • सोपे, सुटसुटीत व उच्चारण्यास सहजसुलभ असे शब्द
  • शब्दांमधील नादमधुरता – कोमल व मृदु वर्णांच्या योजनेत ते शब्द कानाला मधुर, सुखद व नादमाधुर्यामुळे ते गुणागुणावसे वाटतात.
  • शब्दांमधील गेयता व त्या शब्दांच्या अर्थाचा आंतरिक गोडवा.
  • काव्यपंक्तीतून व्यक्त होणारा भाव.

काव्यगुण असणाऱ्या शब्दांमधून काव्याची शोभा वाढते. ती काव्यरचना श्रवणीय ठरते. रसिकांना त्या पंक्ती, विधाने सहजपणे मुखोद्गत होतात कवितेचे रसग्रहण करताना काव्यगुण सांगणे आवश्यक असते.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.2 व्याकरण काव्यगुण

काव्यगुण प्रकार व त्यांची वैशिष्ट्ये:
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Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती

11th Marathi Digest Chapter 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती Textbook Questions and Answers

कृती

प्रश्न 1.
सूचनेनुसार सोडवा.
‘मी वि. स. खांडेकर’ वाचले. या वाक्यातील लक्ष्यार्थ लिहा.
(अ) मी वि. स. खांडेकर यांना पाहिले.
(आ) मी वि. स. खांडेकर यांच्याशी बोललो.
(इ) मी वि. स. खांडेकर यांचे साहित्य वाचले.
उत्तरः
(इ) मी वि. स. खांडेकर यांचे साहित्य वाचले.

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प्रश्न 2.
मूळ शब्दशक्ती …………………………….. आहेत.
(अ) एक
(आ) चार
(इ) तीन
उत्तरः
(इ) तीन

प्रश्न 3.
“निवडणुका आल्या, की कावळ्यांची कावकाव सुरू होते.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) अभिधा
(आ) लक्षणा
(इ) व्यंजना
उत्तरः
(इ) व्यंजना

प्रश्न 4.
‘आपल्याभोवती वावरणाऱ्या कोल्ह्यांपासून दूरच राहावे.’ या वाक्यातील कोल्हा’ या शब्दातून व्यक्त होणारा लक्ष्यार्थ….
(अ) जंगलातील धूर्त प्राणी
(आ) मळ्यातील मका खाणारा
(इ) धूर्त माणसे
उत्तरः
(अ) जंगलातील धूर्त प्राणी

प्रश्न 5.
‘घरावरून मिरवणूक गेली.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) अभिधा
(आ) लक्षणा
(इ) व्यंजना
उत्तरः
(आ) लक्षणा

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प्रश्न 6.
‘मी एक लांडगा पाहिला.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) व्यंजना
(आ) अभिधा
(इ) लक्षणा
उत्तरः
(आ) अभिधा

प्रश्न 7.
‘समाजातील असले साप ठेचलेच पाहिजेत.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती लिहा.
(अ) लक्षणा
(आ) व्यंजना
(इ) अभिधा
उत्तरः
(आ) व्यंजना

प्रश्न 8.
खालील तक्ते पूर्ण करा.

(अ) शब्दशक्ती ओळखा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 1
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 5

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(आ) शब्दशक्तीनुसार शब्द व वाक्य लिहा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 2
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 6

(इ) शब्दशक्तीनुसार तक्ता पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 3
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Bhag 5.1 शब्दशक्ती 7

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11th Marathi Book Answers Chapter 5.1 व्याकरण शब्दशक्ती Additional Important Questions and Answers

सूचनेनुसार कृती करा.

प्रश्न 1.
‘घड्याळाने पाचचे ठोके दिले.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती ओळखा.

पर्याय :
(अ) अभिधा
(आ) व्यंजना
(इ) लक्षणा
उत्तर:
(अ) अभिधा

प्रश्न 2.
आम्ही बाजरी खातो’ या वाक्यातून शब्दशक्तीचा हा अर्थ समजतो.
पर्याय :
(अ) वाच्यार्थ
(आ) लक्ष्यार्थ
(इ) व्यंगार्थ
उत्तर:
(आ) लक्ष्यार्थ

प्रश्न 3.
समाजमान्य अर्थ व्यक्त करणाऱ्या शक्तीस म्हणतात.
पर्याय :
(अ) लक्षणा
(आ) व्यंजना
(इ) अभिधा
उत्तर:
(इ) अभिधा

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प्रश्न 4.
‘आम्ही सगळे भारतीय आहोत.’ या वाक्यातील शब्दशक्ती ओळखा.
पर्याय :
(अ) व्यंजना
(आ) लक्षणा
(इ) अभिधा
उत्तर:
(इ) अभिधा

प्रश्न 5.
‘संप म्हणजे सामान्यांचे मरणच!’ या वाक्यातील शब्दशक्ती ओळखा.
पर्याय :
(अ) अभिधा
(आ) लक्षणा
(इ) व्यंजना
उत्तर:
(आ) लक्षणा

शब्दशक्ती प्रास्ताविकः

आपल्या मनातील विचार, भावना, कल्पना आपण भाषेतील शब्दांच्या माध्यमातून इतरांपर्यंत प्रभावीपणे पोहोचवत असतो. समाज जीवनात वावरताना माणसांचे परस्परांमधील व्यवहार भाषेच्या माध्यमातून सुलभपणे चालत असतात. भाषेच्या माध्यमातूनच साहित्याची निर्मिती होत असते. प्रतिभावंत लेखक-लेखिका, कवी-कवयित्रींकडून वैशिष्ट्यपूर्ण असे भाषिक आविष्कार निर्माण होत असतात.

श्रवण, वाचन, भाषण आणि लेखन ही महत्त्वाची भाषिक कौशल्ये आहेत. बोलण्याची तयारी ऐकण्यापासून होत असते. वाचनाने व्यक्तिमत्त्व बहुश्रुत होते. आपल्या बोलण्याला रंग, रूप, गुण, उंची, खोली असली की आपल्या मनातील आशय इतरांपर्यंत नेमकेपणाने आणि प्रभावीपणे पोहोचवता येतो. मनातील अमूर्त विचार शब्दांद्वारेच मूर्त होत असतात. म्हणूनच माऊली म्हणतात त्याप्रमाणे,

“बिंब जरी बचके एवढे। परी प्रकाशाशी त्रिभुवन थोकडे।

शब्दांची व्याप्ती येणे पाडे। अनुभवावी।।” आपले शब्द हे आपल्या समग्र व्यक्तिमत्त्वाचा हुंकार असतो. प्रसंगानुसार शब्दयोजना व आशयानुसार केलेली अभिव्यक्ती श्रोत्यांना व वाचकांना आपल्या कवेत घेते.

शब्दशक्ती

शब्दांच्या अंगी शब्दाच्या मूळ अर्थाव्यतिरिक्त वेगळा असा अर्थ संदर्भाने प्रकट करण्याचे विशिष्ट प्रकारचे सामर्थ्य असते. शब्दांच्या या सामर्थ्यालाच शब्दशक्ती असे म्हणतात.
उदा.

  • मी आज मोठा दगड पाहिला.
  • त्याचे बोलणे म्हणजे काळ्या दगडावरची रेघ.
  • माझ्या मना बन दगड.

पहिल्या वाक्यात ‘दगड’चा अर्थ पाषाण/धोंडा असा आहे. दुसऱ्या वाक्यात काळा दगड चा अर्थ पक्का/कधीही न बदलणारा/ठाम असा आहे. तिसऱ्या वाक्यात दगड चा अर्थ कठोर अंत:करण करणे असा आहे.

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शब्दांच्या अंगची ही शक्ती तीन प्रकारची आहे.

शब्दशक्ती :

  • अभिधा
  • लक्षणा
  • व्यंजना
अभिधालक्षणाव्यंजना
(१) शब्द वाचल्याबरोबर त्याचा शब्दश: अर्थ समजतो.(१) शब्दाचा मूळ अर्थ उपयोगी पडत नाही म्हणून संदर्भानुसार दुसराच अर्थ घ्यावा लागतो.(१) शब्दाच्या मूळ अर्थाशी सुसंगत असा वेगळाच अर्थ सूचित होतो.
(२) अभिधा शक्तीच्या साहाय्याने प्रकट होणाऱ्या अर्थाला ‘वाच्यार्थ’ म्हणतात.(२) लक्षणा शक्तीच्या साहाय्याने प्रकट होणाऱ्या अर्थास ‘लक्ष्यार्थ’ म्हणतात.(२) व्यंजना शक्तीच्या साहाय्याने प्रकट होणाऱ्या अर्थास ‘व्यंगार्थ’ म्हणतात.
(३) रूढ, समाजमान्य व शब्दकोशात हा अर्थ दिलेला असतो.(३) संदर्भानुसार दुसराच अर्थ घ्यावा लागतो. मूळ अर्थ दुसऱ्या अर्थाला लक्षितो.(३) मूळ अर्थाशी सुसंगत असा वेगळाच अर्थ घ्यावा लागतो.
(४) शब्दाचा मूळ अर्थ(४) शब्दाच्या मूळ अर्थास बहुतेक वेळा बाधा येते.(४) मूळ अर्थाला बाधा न येता दुसराच सुसंगत असा अर्थ.
उदा.
1. काल मला रानात साप दिसला. (साप सर्प / नाग)
2. नानां काल पर्वतीवर गेले. (काल म्हणजे कालच) अभिधा शक्तीत साधा, सरळ अर्थ समजतो.
उदा.
1. घरावरून साप गेला.(घरावरून घरासमोरून, घराजवळून)
2. नाना काल पर्वतीवर गेले. (पर्वतीवर मृत्यू पावले) लक्षणा शक्तीत हे कसे शक्य आहे? म्हणून दुसराच अर्थ घ्यावा लागतो.
उदा.
1. समाजातील असले साप ठेचलेच पाहिजेत. (साप दुष्ट/वाईट/लबाड व्यक्ती)
2. नाना काल पर्वतीवर गेले. (पर्वतीचा डोंगर चढून गेले) व्यंजना शक्तीचा वापर दुसऱ्याला नावे ठेवण्यासाठी केला जातो.

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व्यंगार्थाची गंमत :

व्यंजना या शब्दशक्तीने व्यंगार्थ समजतो.
उदा. सूर्य उगवला – म्हणजेच सूर्योदय झाला. परंतु व्यक्तिगणिक याचा अर्थ वेगवेगळा सूचित होतो.

वाक्यव्यक्तीव्यक्तींच्या दृष्टीने अर्थ
सूर्योदय झाला.घरातील काही व्यक्तीझोपेतून उठण्याची वेळ झाली.
घरातील गृहिणीझाडलोट व सडापाणी करण्याची वेळ झाली.
घरातील आजी – आजोबाप्रातः प्रार्थनेची वेळ झाली.
शाळेत जाणारे विदयार्थीमुला – मुलींची आंघोळीची वेळ झाली.

शब्दशक्तींची गरज :

साहित्यिकांना ललित वाङ्मयात आपल्या जीवनानुभवांचे दर्शन इतरांना प्रभावीपणे घडविण्यासाठी, शब्दांच्या पलिकडचा भाव व्यक्त करण्यासाठी, मूळ भावार्थाशी संलग्न अर्थच्छटांना दर्शविण्यासाठी, काव्यात व्यंगामुळे सूचकता व अधिक परिणामकारकता निर्माण करण्यासाठी शब्दशक्तीच्या माहितीची आवश्यकता आहे.
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Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण शब्दांच्या जाती

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest व्याकरण शब्दांच्या जाती Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण शब्दांच्या जाती

शब्दांच्या जाती

  • शब्द व शब्दांच्या जाती:
  • ठराविक क्रमाने आलेल्या अक्षरांच्या समूहास काही अर्थ प्राप्त झाला तर त्यास शब्द असे म्हणतात.
  • शब्दांचे विकारी (सव्यय – व्यय – बदल) व अविकारी (अव्यय – बदल न होणारे) असे दोन प्रकार आहेत.
  • नाम, सर्वनाम, विशेषण व क्रियापदाच्या मूळ रूपात लिंग, वचन, विभक्ती व काळानुसार बदल होतात म्हणून त्यांना विकारी शब्द असे म्हणतात.
  • लिंग तीन प्रकारची आहेत – पुल्लिंग, स्त्रीलिंग व नपुसकलिंग.
  • वचनाचे दोन प्रकार आहेत – एकवचन, अनेकवचन.
  • नाम / सर्वनामांचा वाक्यातील क्रियापदाशी / इतर शब्दांशी असणारा संबंध ज्या विकारांनी दर्शविला जातो त्यास विभक्ती असे म्हणतात.
  • विभक्ती प्रत्यय लावण्यापूर्वी नामाच्या / सर्वनामांच्या रूपात जो बदल होतो त्यास सामान्यरूप असे म्हणतात.
  • क्रियाविशेषण, शब्दयोगी, उभयान्वयी व केवलप्रयोगी अव्ययांच्या रूपात कोणताच बदल होत नाही. म्हणून त्यांना अविकारी शब्द असे म्हणतात.

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11th Marathi Book Answers व्याकरण शब्दांच्या जाती Additional Important Questions and Answers

1. अधोरेखित केलेल्या शब्दांच्या जाती ओळखा.

प्रश्न 1.
उषावहिनींनी एकशेबावन्नाव्यांदा आरशात पाहिलं.
उत्तरः
उषावहिनी – विशेषनाम

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प्रश्न 2.
तो कधी खाली पडत नाही.
उत्तरः
तो – सर्वनाम

प्रश्न 3.
काही पुस्तकं आपल्याला झपाटून टाकतात.
उत्तरः
पुस्तकं – सामान्यनाम

प्रश्न 4.
त्यात सहानुभूतीचा आणि कारुण्याचा ओलावा ओथंबलेला आहे.
उत्तरः
आणि – उभयान्वयी अव्यय

प्रश्न 5.
माझा एक कलावंत मित्र एका अपघातात मरण पावला होता.
उत्तरः
माझा – सार्वनामिक विशेषण

प्रश्न 6.
पुष्कळशी त्यांच्याबरोबर गेली.
उत्तरः
पुष्कळशी – क्रियाविशेषण अव्यय

प्रश्न 7.
अगदी पहिली आठवण अशी, की आपणास दुपट्यात घट्ट गंडाळून ठेवले आहे.
उत्तरः
की – उभयान्वयी अव्यय

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प्रश्न 8.
तिथे संवाद नसतो.
उत्तरः
तिथे – क्रियाविशेषण अव्यय

प्रश्न 9.
उषावहिनींनी घड्याळाकडे पाहिलं.
उत्तरः
कडे – शब्दयोगी अव्यय

प्रश्न 10.
मोहरीएवढ्या बिजापासून प्रचंड अश्वत्थ वृक्ष उभा रहावा तशी ही कादंबरी वाढत गेली.
उत्तरः
पासून – शब्दयोगी अव्यय

प्रश्न 11.
अलंकारामुळे कवितेला सौंदर्य प्राप्त होते.
उत्तरः
सौंदर्य – भाववाचक नाम

प्रश्न 12.
हे हायस्कूल शंभर वर्षांवर जुनं आहे.
उत्तरः
शंभर – संख्यावाचक विशेषण

प्रश्न 13.
कुत्रा आपले शेपूट इमानीपणाच्या भावनेने हलवतो.
उत्तरः
इमानीपणाच्या – गुणवाचक विशेषण

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प्रश्न 14.
त्याच्या वाचनाचा वेग उत्तम होता.
उत्तरः
उत्तम – विशेषण

प्रश्न 15.
समाधानी चर्येनं मामू स्टुलावरून खाली उतरतो.
उत्तरः
समाधानी – भाववाचक नाम

प्रश्न 16.
मामूनं केलेल्या कष्टमय चाकरीचं फळ म्हणून असेल, पण त्याची सगळीच मुलं गुणवान निघालीत.
उत्तरः
पण – उभयान्वयी अव्यय

प्रश्न 17.
ड्रायव्हर वर आला.
उत्तरः
वर – क्रियाविशेषण अव्यय

प्रश्न 18.
शीऽ, ही कसली साडी?
उत्तरः
शी – केवलप्रयोगी अव्यय

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2. सूचनेनुसार सोडवा.

प्रश्न 1.
निशाने सर्व सूत्रे आपल्या हातात घेतली. (क्रियापदाचा प्रकार ओळखा) – ………………………………
उत्तरः
सकर्मक क्रियापद

प्रश्न 2.
भूमीवरही फार मोठा भार पडू लागला. (क्रियापदाचा प्रकार ओळखा) – ………………………………
उत्तरः
संयुक्त क्रियापद

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण शब्दसिद्धी

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11th Marathi Guide व्याकरण शब्दसिद्धी Textbook Questions and Answers

शब्दसिद्धी

भाषा व्यवहारामध्ये म्हणजेच लिहिताना वा बोलताना आपण नानाविध शब्दांचा वापर करतो. आपल्या भाषिक व्यवहारातील सर्वच शब्द आपल्या मूळ मराठी भाषेतील असतीलच असे नाही. बऱ्याचदा मूळ भाषेतील शब्दांपासून आपण नवनवीन शब्द बनतो. केव्हा केव्हा इतर भाषेतील शब्दांचाही स्वाभाविकपणे आपण वापर करतो. बऱ्याचदा तो शब्द दुसऱ्या भाषेतील आहे हेही आपल्या लक्षात येत नाही.

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इतर भाषेतीलही काही शब्द मराठीत असे रुळले आहेत की त्यांचे वेगळेपणही बऱ्याचदा लक्षात न घेता तो आपल्याच भाषेतील शब्द आहे या पद्धतीने आपण त्याचा वापर करत असतो. यासाठीच आपल्या भाषेतील मूळ शब्द कोणते? आपल्या भाषेत रुळलेले कोणते शब्द आपण इतर भाषांमधून जसेच्या तसे घेतले आहेत वा कोणत्या शब्द रूपात कसा बदल केला आहे हे समजून घेणे भाषेच्या अभ्यासात अत्यंत महत्त्वाचे आहे.

भाषेतील शब्द कसा बनतो वा सिद्ध होतो या प्रक्रियेलाच शब्दसिद्धी असे म्हणतात.
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काही उपसर्गघटित शब्द :

उपसर्ग व त्याचा अर्थ उपसर्गघटित साधित शब्दांची उदाहरणे
अति (= फार / पलीकडे) अतिशय, अतिरेक, अतिक्रम, अतिलोभी, अतिसार इ.
आ (= पासून / पर्यंत / पलीकडे) आजन्म, आमरण, आक्रमण, आक्रोश इ. Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण शब्दसिद्धी
सु (= चांगले / सोपे) सुग्रास, सुभाषित, सुकर, सुगम, सुशिक्षित इ.
अव (= हीन / कमी) अवघड, अवजड, अवकळा, अवदसा, अवलक्षण इ.
दर (= प्रत्येक) दररोज, दरसाल, दरमहा, दरमजल, दरशेकडा इ.
आड (= लहान / गौण) आडनाव, आडवाट, आडकाठी, आडवळण, आडदांड इ.
दुर्, दुस् (= वाईट / दुष्ट) दुर्गुण, दुर्दशा, दुर्जन, दुर्लभ, दुराचरण, दुर्लक्ष इ.
प्रति (= उलट / फिरून) प्रतिकार, प्रतिबिंब, प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रत्येक इ.
वि (= विशेष / शिवाय) विख्यात, विज्ञान, विधवा, विसंगती, विपत्ती इ.
भर (= मुख्य / पूर्ण) भरधाव, भरजरी, भरदिवसा, भरचौकात, भरलोकात, भरपेट इ.
अनु (= मागून / सारखे) अनुकरण, अनुक्रम, अनुभव, अनुवाद, अनुमती इ.
उत् (= श्रेष्ठ / उंच) उत्कर्ष, उन्नती, उत्तीर्ण, उत्तम, उत्प्रेक्षा इ.
अभि (= पूर्वी/ जवळ) अभिनय, अभिनंदन, अभिरुची, अभिप्राय, अभिमुख इ.
गैर (= वाचून / विना) गैरहजर, गैरशिस्त, गैरसमज, गैरसोय, गैरहिशोबी इ.
सर (= मुख्य) सरकार, सरपंच, सरहद्द, सरदार, सरनौबत इ.
बे (= वाचून / शिवाय / रहित) बेडर, बेअब्रू, बेदम, बेईमान, बेइज्जत, बेशरम, इ.
ना (= अभाव) नाउमेद, नाराज, नापसंत, नालायक, नाकबूल इ.
प्र (= अधिक / पुढे) प्रताप, प्रबल, प्रगती, प्रवाह, प्रदोष, प्रस्थान, प्रसिद्ध इ.
बद (= वाईट) बदनाम, बदसूर, बदफैली, बदलौकिक इ.
हर (= प्रत्येक) हररोज, हरघडी, हरदम, हरकाम, Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण शब्दसिद्धी

काही प्रत्ययघटित शब्द

1. कृदन्ते / धातुसाधिते : धातूस कृतप्रलय लागून तयार होणारे नवीन शब्द.

प्रत्यय धातुसाधित शब्द (उदाहरणे)
अक लेखक, पाचक, रक्षक, भक्षक, गायक, वाहक इ.
अनीय श्रवणीय, मननीय, रमणीय, वंदनीय, पूजनीय इ.
आई खोदाई, चराई, उजळाई, शिलाई, अंगाई इ.
रा लाजरा, बुजरा, हसरा, कापरा, दुखरा इ.
ऊन करून, देऊन, बसून, हसून इ.
अना प्रार्थना, वेदना, कल्पना, तुलना, वंदना इ.
 धरण, जळण, तळण, चढण, भांडण, लोळण इ.
तव्य कर्तव्य, तालव्य, भवितव्य इ. Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण शब्दसिद्धी
आळू झोपाळू, लाजाळू, कनवाळू, विसराळू इ.
णावळ खाणावळ, जेवणावळ, धुणावळ, लिहिणावळ इ.

2. तद्धिते / शब्दसाधितेः धातूखेरीज अन्यशब्दांना प्रत्यय लागून तयार होणारे नवीन शब्द

प्रत्यय शब्द साधिते (उदाहरणे)
इक कायिक, वाचिक, मानसिक, धार्मिक, लौकिक इ.
कर सुखकर, खेळकर, खोडकर, दिनकर, प्रभाकर इ.
की माणुसकी, भावकी, गावकी, शेतकी, उनाडकी इ.
खोर भांडखोर, चिडखोर, चहाडखोर, चेष्टेखोर, मस्तीखोर इ.
दार दुकानदार, फौजदार, जमिनदार, इमानदार, धारदार, डौलदार इ.
कट तेलकट, मातकट, धुरकट, मळकट, पोरकट इ.
गर, गार सौदागर, जादूगार, गुन्हेगार, माहितगार, कामगार इ.
खाना कारखाना, तोफखाना, दवाखाना, हत्तीखाना, दारूखाना इ.
नामा करारनामा, हुकूमनामा, पंचनामा, जाहीरनामा इ.
आई लढाई, नवलाई, दांडगाई, शिष्टाई, खोदाई. इ. Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions व्याकरण शब्दसिद्धी

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Chapter 10 शब्द Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द

11th Marathi Digest Chapter 10 शब्द Textbook Questions and Answers

कृती

1. कृती करा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द 2
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द 1

2. योग्य पर्याय निवडून वाक्ये पूर्ण करा.

प्रश्न अ.
बिकट संकटांना कवीने म्हटले –
1. पोटाशी घेणारे शब्द.
2. निरुत्तर निखारे.
3. धावून आलेले शब्द.
उत्तरः
2. निरुत्तर निखारे.

प्रश्न आ.
शब्दांचा उजेड म्हणजे
1. शब्दांचे मार्गदर्शन.
2. शब्दांची मदत.
3. शब्दांचा हल्ला.
उत्तरः
1. शब्दांचे मार्गदर्शन.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द

प्रश्न इ.
चिडून सांडणारे ऊन म्हणजे
1. कठीण प्रसंग.
2. झाडाची सावली
3. तापदायक प्रसंग.
उत्तरः
3. तापदायक प्रसंग.

3. अ. खालील काव्यपंक्तींतून व्यक्त होणारा अर्थ लिहा.

प्रश्न 1.
‘दिवसाही दाटायचा अंधार तेव्हा, शब्दांनीच हातात बिजली दिली.’
उत्तरः
कवींच्या जीवनात असेही प्रसंग आले जे झेलणे कठीण होते. त्यांना काहीच मार्ग या कठीण प्रसंगातून बाहेर पडण्यासाठी सापडत नव्हता. समस्यांनी गांजून गेलेल्या कवींच्या डोळ्यांसमोर अंधारून येत होते तेव्हा शब्दांनीच मार्गदर्शन केले. समस्यांमधून बाहेर पडण्यासाठी जणू या शब्दांनीच अंधारात वीज दाखवण्याचे कार्य केले.

प्रश्न 2.
‘मरणाच्या धारेत सापडलो तेव्हा, शब्दांनीच माझ्याकडे किनारा सरकवला.’
उत्तरः
आयुष्यातील काही क्षण मन त्रस्त करणारे, जगूच नये अशी भावना निर्माण करणारे, निराशेच्या गर्तेत खोलवर नेणारे होते तेव्हा मृत्यूला जबळ करावे असे वाटू लागले. त्याही वेळी शब्दांनीच आयुष्याच्या या मार्ग भरकटलेल्या गलबताला किनारा दिला असे कवी म्हणतात.

आ. सूचनेप्रमाणे सोडवा.

प्रश्न अ.
‘आश्रय’ हे उत्तर येईल असा प्रश्न तयार करा.
उत्तरः
वाऱ्याने व निवाऱ्याने टाळले तेव्हा शब्दांनी कवीला केलेली मदत कोणती?

प्रश्न आ.
‘शब्द’ हे उत्तर येईल असा प्रश्न तयार करा.
उत्तरः
आकान्ताने हाका घातल्या तेव्हा कोण धावून आले?

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प्रश्न इ.
‘शब्दांनी मला खूप दिले; पण मी शब्दांना काहीच देऊ शकत नाही किंबहुना शब्दांच्या उपकाराची फेड करू शकत नाही’, या अर्थाच्या ओळी शोधून लिहा.
उत्तरः
मी भिकारी : मी शब्दांना काय देऊ?
मी कर्जदार : शब्दांचा कसा उतराई होऊ?

4. काव्यसौंदर्य.

प्रश्न अ.
‘एखादी आठवण आग घेऊन धावली, तेव्हाही शब्दांनीच हल्ला झेलला….’ या काव्यपंक्तीतील आशयसौंदर्य स्वभाषेत लिहा.
उत्तरः
माणसाच्या आयुष्यात अशा काही आठवणी असतात ज्यांनी खोलवर मनावर जखम केलेली असते. त्या आठवणी कायम मनात आग ओकत असतात. तेव्हा या आठवणींना, भावनांना शब्दांतून मोकळे करण्याचा मार्ग असतो. शब्दांमधूनही मनातील आग व्यक्त करता येते. ज्यामुळे काही प्रमाणात तरी आठवणींचा दाह कमी होण्यास मदत होते. आपले दुःख, मनातील तडफड कोणाशी तरी व्यक्त केल्यावर मनाला शांती मिळते हीच भावना वरील ओळीतून व्यक्त होते.

प्रश्न आ
‘मी शब्दांत शिरलो आणि स्वत:ला वाचवले : जहर मी प्यालो आणि शब्दांनी ते पचवले.’ या काव्यपंक्तीतील विचारसौंदर्य स्पष्ट करा.
उत्तरः
कवींसाठी ‘शब्द’ हे सर्वस्व आहे. शब्दांशिवाय ते जगूच शकत नाहीत. त्यांनी शब्दांना आपलेसे केले; म्हणजेच ते शब्दांत शिरले. त्यांनी त्यामळेच जीवनात येणाऱ्या अनेक समस्यांना, अडथळ्यांना दर्लक्षित करून ते आपले लिखाण करीत ष्टिीमधन मनाने बाहेर पडण्याचा मार्ग त्यांना सापडला. त्यांनी स्वत:ला वाचवले. जेव्हा त्यांना जळजळीत मनातील भाव व्यक्त करावे असे वाटले तेव्हाही त्यांनी ते व्यक्त केले. आयुष्यातील अन्यायाची चीड मी व्यक्त केली. शब्दांद्वारे माझे सर्व भाव हे शाब्दिक होते म्हणून शब्दांनी जहर पचवले.

5. अभिव्यक्ती.

प्रश्न अ.
आयुष्यात आलेले नकार कवीने कोणत्या शब्दांत व्यक्त केले आहेत. ते लिहा.
उत्तरः
आयुष्य हे सुखदुःखाने भरलेले आहे. जीवनात चम-उतार हे असतातच, जीवनातील समस्या, वाटेला आलेले दुःख म्हणजेच जीवनातील नकार होत. कवी भोवतालच्या जगातील विषमता, संधिसाधुपणा इत्यादी गोष्टींनी त्रासलेले आहेत. आयुष्यात वाट्याला आलेले आकान्त, अंधारनिष्ठ आयुष्य, चीड यावी असे प्रसंग, काही वाईट आठवणी, आप्तेष्टांनी, समाजाने फिरवलेली पाठ या सर्व जीवनातील वाईट अणांना कवीने आयुष्यातील नकार म्हणून उल्लेखले आहे. कवीने या सर्व नकारांना आपल्या लेखणीतून उत्तर दिले आहे. प्रत्येक वेळी सुचलेले शब्द हेच त्यांचे आधारस्तंभ म्हणून उभे राहिले आहेत.

प्रश्न आ.
‘शब्द म्हणजेच कवीचे सामर्थ्य’, हे विधान स्पष्ट करा.
उत्तरः
कवीला आयुष्यातील सगळ्यात महत्वाची वाटणारी गोष्ट म्हणजे शब्द. शब्द हे त्यांचे जीवन आहे. कवींची लेखणी हे सर्वस्व व शस्त्र आहे. कवीने आपले सर्व आयुष्य हे साहित्याला वाहिलेले आहे. त्यामुळे ते शब्दांचीच पूजा करतात. आजच्या या स्वार्थी, संधीसाधू, मूल्यविरहित जगात कवीला अनेक गोष्टी खटकतात. अनेक गोष्टींची चीड येते. लेखकाची लेखणी हे त्याचे शस्त्र असते व लेखक त्यांचा योग्य वापर करून समाजपरिवर्तन करू शकतात, चांगले विचार पिढीमध्ये रुजवू शकतात. कवीनाही वेळोवेळी शब्दांनीच दिलासा दिला, मार्गदर्शन केले, उमेद दिली म्हणूनच शब्द हे कवीचे सामर्थ्य आहेत.

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प्रश्न इ.
‘मानवी जीवनातील शब्दांचे अनन्यसाधारण महत्त्व’ तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तरः
शब्दाशिवाय मानव ही कल्पनाच करता येणार नाही. मानवाच्या विचार प्रकटीकरणाचे, संवादाचे प्रमुख माध्यम शब्द आहेत. शब्दांशिवाय भावना प्रकट करणाऱ्याला आपले मत व्यक्त करण्यासाठी खाणाखुणांचा वापर करावा लागतो. पण त्यातूनही जे सांगायचे आहे ते प्रभावीपणे मांडण्यासाठी शब्दच हवेत, शब्दांमुळे स्पष्टता येते, भाषा तयार होते, गैरसमज, गोंधळ होण्याची शक्यता कमी होते.

शब्द वळवावे तसे वळतात, काही शब्दांचे अनेक अर्थ असतात ज्यातून चमत्कृती, विनोद साधता येतो. शब्द हे मानवाचे सामर्थ्य आहे. शब्द फुलांसारखे वापरता येतात, शब्द धारदार शस्त्रासारखेही वापरता येतात. शब्दांनी एखादयाचे मन जिंकता येते तर शब्दांनी एखादयाला घायाळ करता येते. एकूणच मानवी व्यवहार, विचारांचे आदान-प्रदान योग्य रितीने होण्यासाठी मानवी जीवनात शब्दांचे अनन्यसाधारण महत्व आहे.

6. ‘शब्द’ या कवितेचे रसग्रहण करा.

प्रश्न 1.
‘शब्द’ या कवितेचे रसग्रहण करा.
उत्तरः
माणूस शब्दाविना जगाला पारखा आहे. हेच शब्द एका लेखकाचे/कवीचे जीवन सर्वस्व असतात. कवी यशवंत मनोहर एक विचारवंत, समीक्षक आहेत. त्यांच्या ‘शब्द’ या कवितेतून प्रत्ययकारी प्रतिमांनी समृद्ध अशी ओजस्वी लेखनशैली व्यक्त होते. त्यांची कविता शोषणाचा, जगातल्या विषमतांचा निषेध करते. कवींच्या जगलेल्या, भोगलेल्या जीवनाचा जीवनानुभव यातून व्यक्त होतो. कवींनी आपल्या मनातील त्वेष व्यक्त करण्यासाठी ‘शब्दांचा आधार घेतला आहे.

कवींना जेव्हा जेव्हा समाजातील मूल्यव्यवस्थेची चीड आली किंवा एखादया प्रसंगाने मन उदविग्न झाले तेव्हा मनाच्या आकांताला वाट फोडण्यासाठी शब्दांचाच आधार मिळाला. कवींनी मांडलेल्या मनातील उद्वेगाला उत्तर मिळाले नाही. तेव्हा मनातील राग शांत करण्यासाठी माऊलीने आपल्या लेकरास पोटाशी घेऊन समजवावे तसेच मनातील निखाऱ्यांना शब्दांनी मायेची कुंकर घातली. लोकांच्या वागण्यातला संधिसाधपणा, समाजात पसलेले विषमतांचे जाळे, समाजातला वाढत जाणारा असंतोष यामळे कवींच्या आले.

तेव्हा शब्दांनीच त्यातून बाहेर येण्यासाठी उजेडाचा मार्ग दाखवला. आयुष्यात घडून गेलेली जिव्हारी लागलेली आग ओक लागली तेव्हा शब्दांनीच मनातील विचारांचा हल्ला झेलला. शब्दांनीच त्यातून बाहेर निघण्यासाठी मार्ग दाखविला. समाजातील कवीला सहन न होणाऱ्या विषमतांमुळे मनातील ऊन, चीड बाहेर पडून बघत होती. तेव्हा शब्दांनीच व्यक्त होण्यास मनाची समजूत घालण्यास मदत केली, सायली धरली. मनातील चीडचिडीमुळे दिवसाही अंधारल्यासारखे व्हायचे.

आपण हतबद्ध आहोत असे वाटायचे तेव्हा शब्दांनीच यातून बाहेर पडण्यासाठी प्रकाशाचा मार्ग दाखविला. कवींच्या आयुष्यात काही क्षण हे मन प्रसन्न करणारे आले. त्यांना ते क्षण आयुष्यातून दूर घालवायचे होते, विसरायचे होते, शब्द हे वेळोवेळी मार्गदर्शक ठरले. वाहणाऱ्या नदीच्या जोरावर प्रवाहात अडकलेला माणूस मरणाच्या धारेत वाहत असतो, तशा परिस्थितीत काही वेळा कवी अडकले तेव्हासुद्धा शब्दांनीच त्यातून बाहेर पडण्यासाठी मार्गदर्शन केले.

जेव्हा कवी आयुष्यात कोणीच नव्हते, प्रसिद्ध नव्हते तेव्हा स्वतःविषयी त्यांच्या मनात भीती होती. तेव्हा शब्दांनी एखादया मित्रासारखा आधाराचा पाठीवर हात ठेवला, कधी जगाच्या वाऱ्याबरोबर ते टिकू शकले नाहीत. कोणी आप्तांनी निवारा दिला नाही, आधार दिला नाही तेव्हा कवीला आपलेसे वाटणारे शब्दच होते. या शब्दांनीच त्यांना आधार दिला.

कवींच्या आयुष्यातील शब्दांचे महत्व अनन्यसाधारण आहे. कारण ते त्यांचं शस्त्र आहे. शब्दांमुळेच कवी आज प्रसिद्ध आहेत. ‘ आयुष्यातील प्रत्येक वळणावर साथ देणारे शब्द यांनी मला सर्व काही दिले आहे असे कवी म्हणतात. या श्रीमंत शब्दांना मी काय देक? मी त्यांचा कसा उतराई होऊ? असे कवीला वाटते. मी शब्दांना आपले शस्त्र बनवून त्यावर माझ्या मनातील जहर, चीड उतरवली व शब्दांनी तीही पचवली, या शब्दांना काही देण्याची ताकद माझ्यात नाही, असे त्यांना वाटते. आपण या शब्दांचे कर्जदार आहोत. या शब्दसंपत्तीपुढे आपण भिकारी आहोत असे त्यांना वाटते.

एका कवीच्या मनातील शब्दांविषयीची भावना अतिशय योग्य प्रकारे कवी यशवंत मनोहरांनी ‘शब्द’ या कवितेत व्यक्त केली आहे. शब्दबद्ध केली आहे.

11th Marathi Book Answers Chapter 10 शब्द Additional Important Questions and Answers

आकलन कृती

खालील पठित पदध पंक्तींच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा.

चौकटी पूर्ण करा.

प्रश्न 1.

  1. शब्दांनी पोटाशी घेतले → [ ]
  2. डोळ्यांपुढे अंधारून आल्यावर शब्दांचे कार्य → [ ]
  3. चिडून सांडत होते → [ ]
  4. दिवसाचा अंधार दूर करण्यासाठी शब्दांनी केलेली मदत → [ ]

उत्तर:

  1. निरुत्तर निखाऱ्यांना
  2. उजेडाचा हात दिला
  3. ऊन
  4. शब्दांनी बिजली दिली

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द

स्वमत :

प्रश्न 1.
‘शब्दांचे सामर्थ्य अफाट असते’ या विधानाबाबत तुमचा अनुभव लिहा.
उत्तरः
मी नववीत असतानाची गोष्ट. आठवीत पहिला क्रमांक आल्याने सर्वच मित्र माझ्या अवती-भवती फिरायचे. त्यामुळे मीही जरा हवेतच तरंगत होतो, परिणाम व्हायचा तोच झाला, मी अभ्यासात मागे पडलो आणि पहिल्या घटक चाचणीत नापास झालो. मला स्वत:चीच लाज वाटू लागली. आता घरी काय सांगू? आई-बाबांना तोंड कसे दाखवू? असे मला झाले. माझी ही अवस्था गोरे सरांनी पाहिली.

माझ्या मनातले विचारही कसे कोण जाणे पण त्यांनी जाणले. त्यांनी मला जवळ बोलावले. माझे काय चुकले, ते मला सांगितले. इतकेच नाही तर मला धीरही दिला, प्रत्येकाच्या आयुष्यात चुका होतात, परंतु त्या सुधारून पुढे जाणारा यशस्वी होतो, ते त्यांनी समजावले. पुन्हा नव्याने उभं राहायला ते मदत करतील, असं आश्वासन दिलं. त्यांच्या शब्दांनी मलाही उभारी आली आणि मी जोमाने अभ्यास करून नववीला पुन्हा यश संपादन केलं व पुन्हा मागे वळून पाहिलं नाही. गोरे सरांच्या शब्दांनी त्यावेळी माझ्या विद्यार्थी दशेत योग्य दिशा दिली म्हणून मी आज आयुष्यात आत्मविश्वासाने उभा राहू शकलो.

आकलन कृती

खालील पठित पदय पंक्तींच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा.

चौकटी पूर्ण करा.

प्रश्न 1.

  1. कविला विसरायचे होते
  2. कवी सापडले होते
  3. शब्दांनी कविला आश्रय दिलेली जागा
  4. शब्दांनी हल्ला झेलण्याचे कारण

उत्तरः

  1. कविला विसरायचे होते – जगून देणाऱ्या गोष्टी
  2. कवी सापडले होते – मरणाच्या धारत
  3. शब्दांनी कविला आश्रय दिलेली जागा – उरात
  4. शब्दांनी हल्ला झेलण्याचे कारण – एखादी आठवण आग घेऊन धावला

आकृती पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द 3
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द 4

शब्दांचे कार्य :

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द 5
उत्तरः
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द 6

स्वमत :

प्रश्न 1.
‘शब्दाला शस्त्राची धार असते’ असे म्हणतात याविषयी तुमचे मत लिहा.
उत्तर :
‘शब्द, शब्द जपून बोल’ ही ओळ आपल्याला खूप काही सांगते. शब्द माणसाच्या भावना व्यक्त करण्याचे साधन असले तरी बोलताना प्रत्येकाने आपण काय बोलतो आहोत याचे भान ठेवणे जरूरी आहे. अनेक वेळा शब्दांचे गैर अर्थ निघतात. तर कधी आपला एखादा शब्द दुसऱ्याच्या भावना दुखावतो, त्याच्या जिव्हारी लागतो. एक वेळ शरीरावर झालेली जखम भरून निघेल पण शब्दांनी एखादयाच्या मनाला झालेली जखम, कधीही भरून निघत नाही. एखादयाला त्याच्या चुकीची जाणीव करून देण्यासाठी, एखादया गोष्टींवर टिका करण्यासाठी, विरोध दर्शवण्यासाठी शब्दांचा शस्त्रासारखा उपयोग होतो.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द

स्वाध्यायासाठी कृती

1. ‘शब्द’ हे विचार परिवर्तन करण्याचे काम करतात सोदाहरण स्पष्ट करा.
2. ‘कविता’ हा कविमनाचा आरसा असतो तुमचे विचार लिहा.

शब्द Summary in Marathi

प्रस्तावना :

परिवर्तनवादी जीवनमूल्ये जपणारे कवी यशवंत मनोहर यांनी आपल्या आक्रमक शब्द शैलीतून आजच्या जगातील विषमता, मूल्यांची होणारी पायमल्ली, संधिसाधुपणा, समाजातील वाईट गोष्टींवर ताशेरे ओढले आहेत.

‘शब्द’ या कवितेत त्यांनी आपल्या जीवनातील शब्दांचे स्थान सांगितले आहे. शब्द हेच त्यांचे सर्वस्व आहे ही भावना या कवितेतून व्यक्त होते.

कवितेचा आशय :

कवी म्हणतात समाजात घडणाऱ्या वाईट गोष्टींविरोधात माझे मन आक्रोश करू पाहत होते तेव्हा तो आक्रोश मी शब्दांद्वारे व्यक्त करण्याचा प्रयत्न केला. माझ्या मनातील चीड निरुत्तर होती कारण बजबजलेल्या समाजाकडे त्याची उत्तरे नव्हती तेव्हा माझ्या मनातील आग शांत करण्यासाठी शब्दांनीच आसरा दिला, एक माता जशी आपल्या मुलाला पोटाशी घेऊन समजवण्याचा प्रयत्न करते तसेच शब्द माझ्याबरोबर उभे राहिले. जेव्हा कधी आयुष्यात असे क्षण आले की पुढचा मार्गच शोधता येईना, अंधारून आले तेव्हासदधा शब्दांनीच मार्ग दाखवून उजेडाचा हात, दिला.

रू लागली तेव्हाही शब्दांनीच मन मोकळे करण्याची, मनाला समजावून हल्ला झेलण्याची शक्ती दिली. मनातील हतबलतेची चीड उन्हाचा दाह देत होती तेव्हाही शब्द सावली बनून आले. भरदिवसाही जेव्हा असहाय्यतेने डोळे भरून यायचे, डोळ्यापुढे अंधार दाटायचा, तेव्हा पुन्हा प्रकाशाचा किरण दाखवणारे शब्दच होते.

आयुष्यातील काही क्षण मन त्रस्त करणारे, जगू नये अशी भावना निर्माण करणारे होते. तेव्हा स्वत:चा तोल सावरण्यासाठी शब्दच मार्गदर्शक | ठरले. मरणाच्या दारात उभे राहून मरणाला जवळ करावे असे वाटू लागले. आयुष्याची नाव डुबत आहे असे वाटू लागले तेव्हा या मरणाच्या दारातून बाहेर पडण्यासाठी उमेदीचा, आशेच्या किरणांचा किनारा शब्दांनीच दिला.

काहीही हातात शिल्लक नव्हते, आपण काय करावे हे सुचत नव्हते, जेव्हा मी आयुष्यात अपयशाने ग्रासलो होतो. स्वत:चा आत्मविश्वास गमावून बसलो होतो. स्वत:चीच भिती वाटू लागली होती. कोणाच्या तरी आधाराची अपेक्षा होती तेव्हाही शब्दांनीच पाठीवर धीराचा हात ठेवला. कधी आप्तस्वकियांनी तर कधी समाजाने झिडकारले तेव्हाही शब्दच आश्रयास उभे राहिले.

हे शब्द जे माझे सर्वस्व आहेत. या शब्दांनी कधी मला लेखणीतून मनाला आधार दिला तर कधी चांगल्या वाचनातील विचारातून. या शब्दांमुळेच मी आज जगण्यास लायक आहे अशी कवीची भावना आहे म्हणून ते म्हणतात. शब्दांनी मला भरभरून दिले पण मी या शब्दांचा उतराई कसा होऊ? मी शब्दांना आपलेसे केले व त्यांनी मला वाचविले. मी माझ्या मनातील जळजळ, जहर शब्दांतून उतरविले म्हणजेच समाजातील अन्यायाची, विषमतेची चीड मी शब्दांतून मांडली. पण शब्दांनी माझ्या रागाचे त्यांवर होणारे प्रहारही पचविले.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 10 शब्द

समानार्थी शब्द / पर्यायी शब्द :

  1. आकान्त – आक्रोश, अनर्थ, कोलाहल – (loud wailing).
  2. निखारा – धगधगता कोळसा – (blaxing coal).
  3. बिजली – वीज – (lightning).
  4. किनारा – काठ, तट – (shore).
  5. निवारा – आश्रय – (shelter).
  6. कर्जदार – ऋणको, कर्ज घेणारा – (borrower)
  7. जहर – विष – (poison).

वाक्प्रचार:

  1. पोटाशी धरणे – मायेने जवळ घेणे.
  2. निरुत्तर होणे – शब्दच न सुचणे.
  3. धावून येणे – मदतीस येणे.
  4. अंधारून येणे – काळोखी येणे.
  5. हात देणे – साथ देणे.
  6. सावली धरणे – आश्रय देणे.
  7. पाठीवर हात ठेवणे – धीर देणे.
  8. उतराई होणे – कर्जातून मुक्त होणे.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

Balbharti Maharashtra State Board Marathi Yuvakbharati 11th Digest Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board 11th Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

11th Marathi Digest Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला Textbook Questions and Answers

कृती

1. अ. कृती करा:

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 1
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 2

आ. कारणे लिहा.

प्रश्न 1.
उषाताईंचा हा कार्यक्रम शेवटचा होता, कारण …………
उत्तर :
उषाताईंचा हा कार्यक्रम शेवटचा होता, कारण उषाताईंची वयाची अट्ठावन्न वर्षे पूर्ण होत होती. सरकारी नियमाप्रमाणे अठ्ठावन्न वर्षे वय हे सेवा निवृत्तीचे वय समजले जाते.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

प्रश्न 2.
निशाने चेहऱ्यावर प्रौढपणा आणण्याचा प्रयत्न केला, कारण ………….
उत्तर :
निशाने चेहऱ्यावर प्रौढपणा आणण्याचा प्रयत्न केला, कारण दोघींच्या वयात पाच वर्षांचे अंतर होते. उषावहिनी या वयाने निशापेक्षा पाच वर्षांनी मोठ्या होत्या. त्यांचीच भूमिका त्यांच्याच नावाने करायची होती म्हणून निशाने चेहऱ्यावर प्रौढपणा आणण्याचा प्रयत्न केला.

प्रश्न 3.
महिला प्रेक्षकांत अपेक्षाभंगाची एक जोरकस लाट आली;कारण ………..
उत्तर :
महिला प्रेक्षकांत अपेक्षाभांगाची एक जोरकस लाट आली, कारण आज त्यांनी उलटाच प्रकार अनुभवला होता. मागील वीस वर्षांमधल्या कार्यक्रमात उषावहिनींच्या साडीवर चर्चा व्हायची आणि अगदी तश्शीच साडी खरेदी करायला बायकांच्या शोधयात्रा निघायच्या. पण आज मात्र अगदी साधी साडी त्यांनी परिधान केली होती ती साडी काठापदराची व मळखाऊ रंगाची होती म्हणून महिला प्रेक्षकांत अपेक्षाभंगाची एक जोरकस लाट पसरली.

प्रश्न 4.
मुंबईत आलेल्या पाहुण्यांची पंचाईत होते; कारण …………..
उत्तर :
मुंबईत आलेल्या पाहुण्यांची पंचाईत होते, कारण मुंबईतल्या बहुतेक स्त्रिया नोकरी करतात, त्यामुळे मुंबईत आलेल्या पाहुण्यांची पंचाइत होते.

इ. वैशिष्ट्येलिहा.

प्रश्न 1.
दूरदर्शनवरील ‘वहिनींचा सल्ला’ हा कार्यक्रम.
उत्तर :
मुंबईला दूरदर्शन सुरू झालं, त्यानंतर आजतागायत चालू असलेला एकमेव असा सर्वात लोकप्रिय कार्यक्रम होता. या कार्यक्रमात उषावहिनी महिलांना संसाराच्या बाबतीत ‘जोडा, जुळवा व जमवून घ्या’ असे सल्ले देत असत. थोडक्यात ‘वहिनींचा सल्ला’ या कार्यक्रमात उषावहिनी महिलांना सबुरीचा सल्ला देत असत. तसेच दुसऱ्याच्या दृष्टिकोनातून बघायला शिका अशा त-हेच्या सूचना त्या महिला प्रेक्षकवर्गाला देत असत.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

प्रश्न 2.
शिवाजी मंदिर’ येथील ‘वहिनींचा सल्ला’ हा कार्यक्रम.
उत्तर :
‘बहिनींचा सल्ला’ हा लोकप्रिय कार्यक्रम होता या कार्यक्रमाने विशी गाठली होती. वयोमानाप्रमाणे निवृत्त व्हावे लागते याच नियमानुसार उपवहिनींना अट्ठावन्न वर्षे पूर्ण होत होती त्यामुळे या कार्यक्रमाला समाजातल्या अनेक मान्यवर व्यक्ती उपस्थित राहणार होत्या, तसेच उषावहिनींचा सत्कारही होणार होता. ह्या कार्यक्रमाची शेवटची दहा मिनिटं प्रेक्षकांना वहिनींशी फोनवरून थेट संपर्क साधता येणार होता. हा कार्यक्रम प्रथमच दूरदर्शन केंद्राच्या बाहेर होणार होता. तसेच शेवटचा म्हणूनच खास महत्त्वाचा होता.

ई. फरक स्पष्ट करून तक्ता पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 3
उत्तर :

उषावहिनींचा सल्लानिशावहिनींचा सल्ला
जोडा, जुळवा व समजून घ्या.थोडी भीड, थोडा संकोच, थोडी परंपरा गुंडाळून ठेवायची.
संसाराची दोन चाकं म्हणजे नवरा आणि बायको, एक चाक थोडसं कुचकामी असेल तर दुसऱ्या चाकाने आपल्यावर जास्त भार घ्यावा.संसाराच्या दोन्ही चाकांनी समसमान भार घ्यावा.
लोकांना वर्षानुवर्षे औषध म्हणून साखरेच्या गोळ्या दिल्या याचा अर्थ तडजोड व संयम यांचा सल्ला.लोकांना कडू क्विनाईचा डोस दिला म्हणजेच स्वत:चे अस्तित्व सिद्ध करण्याचा सल्ला.
भारतीय रूढी परंपरेला आव्हान न देणारे, शांत, सौम्य व्यक्तिमत्त्व व तसेच सल्ले, दुसऱ्याच्या दृष्टिकोनातून बघायला शिकायचा सल्ला.भारतीय रूडी-परंपरेला आव्हान देणारे सल्ले, स्वत:च्या मनाचा कौल घ्या, स्वतःला स्वत:च महत्त्व दिलं पाहिजे, आत्मसन्मान जपा असा सल्ला.

2. पाठातील खालील वाक्याचा तुम्हांला समजलेला अर्थ स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
रंगीबेरंगी पोकळ बुडबुड्यांचा आजचा अंतिम दिवस.
उत्तर :
मागील वीस वर्षे उषावहिनींचा वहिनींचा सल्ला’ हा कार्यक्रम दूरदर्शनवरून प्रसारित होत होता. उषावहिनींच्या जोडा, जुळवा व जमवून घ्या या सल्ल्यामुळे हा कार्यक्रम त्यावेळी यशाच्या शिखरावर होता पण या सल्ल्याचा उपयोग खरोखरच कोणी संसारात किंवा जीवनात करून घेत का? असा प्रश्न उपस्थित रहात होता. प्रेक्षकवर्ग कार्यक्रमाला उत्स्फूर्तपणे दाद देत होता. सलग वीस वर्षे कार्यक्रम यशस्वी होत होता. वहिनी सगळ्यांना कार्यक्रमात सबुरीचा सल्ला देत असत पण खरोखरच्या जीवनात त्याचा अवलंब किती होत होता याचे उत्तर अनुत्तरीत होतं म्हणून रंगीबेरंगी पोकळ बुडबुड्यांचा आजचा अंतिम दिवस होता हे स्पष्ट होतं.

प्रश्न 2.
मी माणसांना दुःखप्रूफ किंवा दुःखमुक्त होण्यासाठी मदत करते.
उत्तर :
संसारामध्ये प्रत्येकाला अनेक समस्यांना सामोरे जावे लागते. काही जणांच्या आयुष्यात संकटांमागुन यातना किंवा दुःख सहन करावे लागते. यातून त्यांना बाहेर काढावे लागते. दुःखातून बाहेर काढण्यासाठी विविध मागांचा अवलंब करावा लागतो. सर्वसामान्य लोकांना दुःखातून बाहेर काढण्यासाठी अनेक सामाजिक संस्था तसेच सामाजिक कार्यकर्ते अहोरात्र झटत असतात. तसेच कार्य निशावहिनी करत आहेत. त्या कामगार क्षेत्रात काम करतात. समस्यांच्या मुळापर्यंत जातात व त्या समस्येतून लोकांना बाहेर काढण्याचा प्रयत्न करतात. तात्पर्य दुःखातून मुक्त होण्याचा योग्य तो मार्ग दाखवणारी व्यक्ती म्हणजेच खऱ्या अर्थाने समाजाची सेवा करणारी व्यक्ती होय, मात्र अगदी साधी साडी त्यांनी परिधान केली होती ती साडी काठापदराची व मळखाऊ रंगाची होती म्हणून महिला प्रेक्षकांत अपेक्षाभंगाची एक जोरकस लाट पसरली.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

प्रश्न 3.
इतर घरांत नोकरीवाली बाई हे वॉटरप्रूफींग केलेलं असल्यामुळे आमच्या घरी पाहुण्यांचा जोरदार मारा!
उत्तर :
मुंबईसारख्या शहरात जर राहायचे असेल तर घरातील पुरुष व स्त्रिया यांनी नोकरी करणे आवश्यक असते नाहीतर खर्च भागवता भागवता नाकी नऊ येतात असा अनेकांचा अनुभव आहे. जर घरातील महिला नोकरी करीत असेल तर मुंबईत जे पाहुणे येतात ते त्यांच्या घरी जात नाहीत कारण त्यांची पंचाईत होते. त्यांची ऊठ-बस किंवा सरबराई करायला यजमानाच्या घरात हक्काची बाई नसते. याचाच अर्थ जर घर व्यवस्थित वॉटरप्रूफ केलं असेल तर पावसात गळायची भीती नसते. त्याचप्रमाणे घरातील महिला जर कामावर जात असेल तर पाहुणेरूपी पावसाची अजिबात भीती नसते.

प्रश्न 4.
‘कीड मुळापासून उपटून काढली पाहिजे, तरच झाड जगेल’
उत्तर :
कोणत्याही समस्येवर जर उपाय शोधायचा असेल तर त्या समस्येचा सखोल अभ्यास करून त्यावर उपाय शोधला पाहिजे तरच ती समस्या कायमची संपुष्टात येईल, ज्याप्रमाणे एखादया झाडाला जर कीड लागली आणि त्याकडे जर दुर्लक्ष केले गेले तर कीड ते झाड पूर्णपणे खाऊन टाकते. त्यामुळे जर कीड मुळापासून औषधमागांनी उपटून काढली तरच झाड जगेल. अन्यथा ते मरेल. त्याचप्रमाणे औषधरूपी सल्ल्याचा उपयोग जर संसारात केला किंवा रोजच्या जगण्यात केला तर त्याच त्याच समस्या पुन्हा उद्भवणार नाहीत व आयुष्य सुखासमाधानाने जगता येईल.

3. व्याकरण

अ. विशेष्य-विशेषणांच्या जोड्या पाठाधारे जुळवा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 4
उत्तर :

विशेष्यविशेषणे
आठवणीकडूगोड
कळजीवघेणी
वेळफावला
पुळकापोकळ
असहकारअंजन

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

आ. केवल वाक्ये, मिश्र वाक्ये आणि संयुक्त वाक्येयांची पाठातील प्रत्येकी दोन-दोन उदाहरणे शोधून लिहा.

प्रश्न 1.
केवल वाक्ये, मिश्र वाक्ये आणि संयुक्त वाक्येयांची पाठातील प्रत्येकी दोन-दोन उदाहरणे शोधून लिहा.
उत्तर :
1. केवल वाक्ये :
(अ) उषावहिनी पर्स घ्यायला आत गेल्या.
(ब) शिवाजी मंदिरच्या मागच्या पार्किंग स्पेसमध्ये गाडी थांबली.

2. मिन वाक्ये
(अ) जर या प्रश्नांची उत्तरं नकारार्थी असली तर हे अंजन वापरण्यावाचून तुम्हांला पर्याय नाही.
(ब) म्हणजे महाराष्ट्रात जेवढं जग सामावलेलं आहे त्यातल्या हजारो व्यक्तींना वहिनींनी सल्ले दिले होते.

3. संयुक्त वाक्ये:
(अ) पाहुण्यांचा पाऊस पडायला लागला, की डोक्यावर उलटी छत्री धरायची.
(ब) माझ्या पावसासाठी तुम्हीच रेनकोट पुरवू शकाल, अशी माझी खात्री आहे. कारण माझ्याकडे पाऊस पडतो तो पाहुण्यांचा.

इ. खालील विरामचिन्हांची नावे कंसातील यादीतून शोधून लिहा.

(अपूर्णविराम, संयोगचिन्ह, अर्धविराम, अपसारणचिन्ह, लोपचिन्ह)

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 5
उत्तर :

विरामचिन्हेनावे
;अर्धविराम
…………लोपचिन्ह
अपसरण चिन्ह
:अपूर्ण विराम
संयोगचिन्ह

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

ई. खालील वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहून वाक्यांत उपयोग करा.

प्रश्न 1.
अ. काजवे चमकणे – ………………….
आ. डोळे लकाकणे – ………………..
इ. कायापालट होणे – ………………..
ई. कडेलोट होणे – …………………..
उत्तर :
अ. काजवे चमकणे- अंधारी येणे किंवा अतिशय घाबरणे.
वाक्य : अचानकपणे दुचाकी घसरून झालेल्या अपघातामुळे माझ्या डोळ्यांसमोर काजवे चमकले.

आ. डोळे लकाकणे – आशेचा किरण दिसणे,
वाक्य : अर्जुनाची भूमिका करणारा अभिनेता मिळाल्यावर दिग्दर्शकाचे डोळे लकाकले.

इ. कायापालट होणे – अनपेक्षित बदल होणे.
वाक्य: बऱ्याच वर्षांनतर गावी गेल्यावर गावचा कायापालट झालेला मला दिसला.

ई. कडेलोट होणे – गोंधळाची परिस्थिती निर्माण होणे.
वाक्य : काहीही चूक नसताना पोलिस चौकशीला येत आहेत हे समजल्यावर श्यामची अवस्था कडेलोट झाल्यासारखी झाली.

उ. खालील शब्दांचे वर्गीकरण करा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 6
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 7

4. स्वमत

प्रश्न अ.
वहिनींचा सल्ला ‘सुसाट’ वाटण्याची तुम्हांला समजलेली कारणे लिहा.
उत्तर :
कथेचा अभ्यास केला असता वहिनींचा सल्ला सुसाट आहे. उघावहिनी निशावहिनी यांच्या सल्ल्यात जमीन अस्मानाचा फरक आहे. उषावहिनी या ‘जोडा’, ‘जुळवा’ व ‘जमवून घ्या’ असा सल्ला देत असत. पण निशावहिनींचे सल्ले मात्र अगदी त्यांच्या विरुद्ध असल्याचे जाणवते. भीड, संकोच व परंपरा गुंडाळून ठेवायच्या, पाहुण्यांना येणारा प्रेमाचा पोकळ पुळका ओळखायला शिकायचा. त्याचप्रमाणे नोकरी करणाऱ्या स्त्रीला ‘जोडा, जुळवा व जमवून घ्या’ यांऐवजी ‘असहकार’ पुकारायला सांगणे व त्याच मार्गाने म्हणजे जशास तसे उत्तर देऊन वठणीवर आणायचे असे सल्ले वहिनींनी दिले.

एका बाजूला उषावहिनींचा सामोपचाराचा सल्ला व दुसऱ्या बाजूला निशावहिनींचा अगदी त्यांच्या विरोधातला म्हणजे जशास तसे उत्तर देण्याचा सल्ला, कीड मुळापासून उपटून काढली पाहिजे, तरच झाड जगेल असा साधारणपणे समाजाच्या रूढी परंपरेशी विसंगत असा निर्णय घेण्याची हिंमत म्हणूनच वहिनींचा सल्ला आम्हांला ‘सुसाट’ वाटतो.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

प्रश्न आ.
‘पाहुण्यांचा पाऊस यासंबंधी कथेत आलेला विनोद तुम्हाला आवडला का, ते सकारण स्पष्ट करा.
उत्तर :
निलंजना बॅनर्जी यांनी पावसाप्रमाणे येणाऱ्या पाहुण्याविषयीच्या समस्येचा प्रश्न विचारला पण तो त्यांनी सांगताना किंवा मांडताना वेगळ्या पद्धतीने मांडला. त्यामुळे येथे विनोदाची निर्मिती झालेली दिसून येते. निलंजना बॅनर्जी या गृहिणी आहेत. त्या एका सेवाभावी संस्थेत घरची जबाबदारी सांभाळून काम करतात. त्यांची कुटुंबियांच्या संदर्भात कोणतीच समस्या नव्हती, त्या गृहिणी असल्यामुळे त्यांच्याकडे सतत पाहुण्यांचा राबता असायचा, पाऊस जसा धो धो कोसळतो व तो अनियमित असतो त्याचप्रमाणे त्यांच्याकडे भरपूर पाहुणे यायचे. हे सांगताना त्यांनी पाहण्यासाठी पावसाची उपमा वापरली.

त्यावरून त्यांच्याकडे येणाऱ्या पाहुण्यांचे प्रमाण जास्त असल्याचे लक्षात येते म्हणून त्यांनी अशी समस्या मांडली. त्यावर निशा बहिनींनी उत्तर दिले, माझा वॉटरप्रूफिंगशी काहीही संबंध नाही यामुळे प्रश्नाचा अर्थ समजण्यात किंवा समजावण्यात थोडीशी गफलत झालेली दिसून येते. त्यामुळे विनोदाची निर्मिती होते म्हणजेच शब्द फिरवल्यानंतर हलका फुलका विनोद निर्माण होतो. त्यामुळे मला हा विनोद आवडला.

प्रश्न इ.
सल्ला मागण्यासाठी मांडलेल्या समस्यांविषयी तुमचे मत लिहा.
उत्तर :
प्रत्येकाला आयुष्यात अनेक प्रकारच्या समस्या असतात त्यावर जर त्यांना उपाय सापडला नाही तर मात्र इतरत्र सल्ले मागितले जातात. कथेमध्ये ज्या काही समस्या मांडल्या आहेत. त्या सर्वसामान्य गृहिणींच्या आहेत. बऱ्याच घरात नवरा व बायको दोघेही नोकरी करतात पण घरातल्या कामात मात्र बराचसा पुरुषवर्ग हात आखडता घेत असतो. त्यामुळे बऱ्याच नोकरदारांच्या घरी घरातल्या कामांसंबंधी समस्या निर्माण होते. दुसरी समस्या म्हणजे मुंबईत येणाऱ्या पाहुण्यांची समस्या. शक्यतो ज्या घरातील स्त्री नोकरी करत नाही त्याच घरात पाहुण्यांचा राबता असतो.

काही वेळा पाहुण्यांना प्रेमाचा पोकळ पुळका येतो. तसेच घराघरात सासू आणि सुनेची एकत्र नांदण्याची समस्या, अनेक महिलांना पुरुष सहकाऱ्यांचे, हाताखाली काम करणाऱ्या पुरुषांचे कामावर येणारे धक्कादायक अनुभव आहेत, मुलींची रस्त्यावरील छेडाछाड समस्या खरोखरच समाजाला एका वेगळ्याच मार्गावर नेत आहेत. त्यामुळे या सर्व समस्या गंभीर स्वरूपाच्या आहेत.

मुलींची रस्त्यावर होणारी छेडछाड यामुळे तिला बाहेर पडणे कठीण होते. कार्यालयात आलेल्या अनेक वाईट अनुभवांमुळे ती सुरक्षित नसते. दारूच्या व्यसनामुळे संसाराची झालेली वाताहात, दारूच्या आहारी गेलेल्या नवऱ्याबरोबर सतत होणारी भांडणे, त्यांचे कुटुंबावर होणारे परिणाम, खालावलेली आर्थिक परिस्थिती त्यामुळे या समस्या योग्य आहेत. असे माझे मत आहे.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

प्रश्न ई.
खऱ्या उषावहिनींनी आपल्या बहिणीच्या कामाला दिलेल्या पसंतीविषयी’ तुमच्या प्रतिक्रिया लिहा.
उत्तर :
उषावहिनी व निशावहिनी दोघीही सारख्या बहिणी होत्या. पण त्या दोघींच्या स्वभावात मात्र खूपच फरक होता. उषावहिनींचा स्वभाव जोडा, जुळवून घ्या असा होता म्हणजेच सबुरीच्या सल्ल्याप्रमाणे होता. पण अगदी त्यांच्या उलट निशावहिनींचा स्वभाव होता. समाजात जीवन जगत असताना सरळ मार्गी जाणाऱ्या माणसाशी सरळ मार्गाने वागावे पण जर तो वाकड्या मार्गाचा अवलंब करीत असेल तर आपणसुद्धा तशाच मार्गाचा अवलंब केला तर मात्र आपण यशस्वी होतो.

असे निशाबहिनींच्या स्वभावाचे पैलू होते. त्यामुळे शेवटच्या ‘वहिनींचा सल्ला’ या कार्यक्रमात निशावहिनी यांनी आपला ठसा उमटवला. उषावहिनींनी प्रतिक्रिया देताना असे म्हटले की “मी लोकांना वर्षानुवर्षे औषध म्हणून साखरेच्या गोळ्या देत आले. तू मात्र आज लोकांना कडू क्विनाईनचा डोस देण्याचं धाडस केलंस.” माझ्या मते दिलेली पसंती ही योग्य आहे कारण सध्याच्या काळात जर असे वागले तरच निभाव लागणे शक्य आहे. मग ती समस्या घरात असो किंवा घराच्या बाहेर असो मुंबईसारख्या शहरात तर असे वागणे हीच काळाची गरज आहे. त्यामुळे निशावहिनींनी महिलांना विविध समस्यांबाबत दिलेला सल्ला मला योग्य वाटतो.

5. अभिव्यक्ती :

प्रश्न अ.
वहिनींचा ‘सुसाट ‘ सल्ला ही कथा तुम्हांला का आवडते, ते लिहा.
उत्तर :
उत्तरासाठी कृती : 3 मधील स्वमत पहा.

प्रश्न आ.
‘स्त्रीने स्वतःच्या आत्मसन्मानाला जपले पाहिजे,’ याविषयीचे तुमचे विचार लिहा.
उत्तर :
सध्याच्या काळात स्त्रिया या पुरुषांच्या बरोबरीने प्रत्येक क्षेत्रात खांदयाला खांदा लावून काम करीत असतात. त्या कुठेही कमी पडत नाहीत. क्तिक पातळीवरसुद्धा स्त्रियांनी आपले अस्तित्व विविध क्षेत्रांत सिद्ध करून दाखवले आहे. अजूनही काही ठिकाणी तिचे अस्तित्व नाकारले जाते किंवा तिने केलेल्या कामाला फारसे महत्त्व दिले जात नाही. पण माझ्या मते स्त्रीला समाजात मानाचे स्थान मिळायला हवे तसेच प्रत्येक ठिकाणी समान हक्क मिळायला हवा.

जर तिने स्वतःला सिद्ध करून दाखवले तर तिचे महत्त्व समाजाला पटेल, खासकरून ज्या ठिकाणी पितृसत्ताक पुरुषप्रधान संस्कृती पद्धत आहे त्या ठिकाणी स्त्रियांचा आत्मसन्मानाचा प्रश्न निर्माण होताना आपणास दिसतो. प्राचीन काळापासून ते आत्तापर्यंतच्या विविध दाखल्यांतून आपणास हे समजते. संतांनी स्त्रियांच्या आत्मसन्मानाबद्दल प्रथम वाचा फोडली. संत जनाबाईना स्वतःचे अस्तित्व सिद्ध करण्यासाठी झटावे लागले. पण संत नामदेवांनी तिला ते प्राप्त करून दिले.

‘नामयाची दासी’ म्हणविण्यात जीवनाचे सार्थक मानणाऱ्या संत जनाबाईचे सुमारे 350 अभंग आज उपलब्ध आहेत. सावित्रीबाई फुले, बहिणाबाई चौधरी यांनी ही परंपरा पुढे चालू ठेवली. त्यानंतर विविध प्रकारच्या लिखाणातून हे वारंवार सिद्ध झाले आहे. आज अनेक सामाजिक क्षेत्रात, वैयक्तिक क्षेत्रात स्त्रिया मानाच्या पदावर आहेत. भारतासारख्या विशाल देशात तर पंतप्रधानपदी (स्व. इंदिरा गांधी) व राष्ट्रपतीपदी (प्रतिभाताई पाटिल) देखील महिलांनी आपल्या कार्याचा ठसा उमटवला आहे.

याचाच अर्थ स्त्रियांनी आपल्या मनातील न्यूनगंडाची भावना जर दूर सारली तर तिला समाजात मानाचे स्थान मिळेल. याचाच अर्थ स्त्रियांनी परंपरेच्या जोखडात न राहता गृहिणींनीसुद्धा आपला आत्मसन्मान जपला पाहिजे तसेच तिच्या घरातील आणि समाजातील लोकांनीसुद्धा तिचा आदर करणे/ जपणे फार महत्त्वाचे आहे.

प्रकल्प.

प्रश्न 1.
प्रसारमाध्यमांतून सतत दाखवल्या जाणाऱ्या जाहिराती व मालिका यांविषयी समवयस्कांशी चर्चा करा व त्यासंबंधी अहवाल तयार करा.

11th Marathi Book Answers Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला Additional Important Questions and Answers

कारणे लिहा.

प्रश्न 1.
सभागृहात टाचणी पडेल अशी शांतता पसरली, कारण ……
उत्तरः
सभागृहात टाचणी पडेल अशी शांतता पसरली, कारण सौम्य व्यक्तिमत्त्व आणि समतोल सल्ले देणाऱ्या उषाबहिनींच्या स्वभावात अचानक बदल झाला होता. त्यांचे स्वत:च्या मनाचा कौल घ्या, स्वत:ला स्वत:च महत्त्व दया, आत्मसन्मान जपा, असे भारतीय रूढी-परंपरेला आव्हान देणारे सडेतोड विचार ऐकन सभागृहात टाचणी पडेल अशी शांतता पसरली.

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प्रश्न 2.
खालील वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहून वाक्यांत उपयोग करा.
उत्तर :
1. किंकाळी फोडणे – अतिशय जोराने ओरडणे.
वाक्य : आपल्या मुलाचा आपल्या डोळ्यादेखत झालेला अपघात पाहून त्या मातेने किंकाळी फोडली.

2. प्रयत्नांची पराकाष्ठा करणे – खूप प्रयत्न करणे.
वाक्य : छत्रपती शिवाजी महाराजांबरोबर स्वराज्य निर्माण करण्यासाठी अनेक मावळ्यांनी प्रयत्नांची पराकाष्ठा केली.

3. गैरसमज होणे – चुकीचा समज होणे.
वाक्य : राम हा स्वार्थी आहे असा श्यामचा गैरसमज झाला.

4. आस्वाद घेणे- आनंद घेणे.
वाक्य : बऱ्याच प्रतिक्षेनंतर पडलेल्या पावसात मुलांनी कांदाभजीचा आस्वाद घेतला.

5. आसनाला खिळणे – मग्न होणे.
वाक्य : एका लग्नाची पुढची गोष्ट नाटकाचा प्रयोग पाहताना प्रेक्षकवर्ग आसनाला खिळला होता.

6. मान डोलावणे- होकार दाखविणे.
वाक्य : रमेशच्या लग्नाला पालीला जायचे आहे असे कबीरने सांगितल्यानंतर मी मान डोलावली.

शब्दसंपत्ती :

प्रश्न 1.
खालील वाक्यांचा अभ्यास करा. ‘कर’ या शब्दाची योग्य अर्थच्छटा कंसातील पर्यायातून निवडा. ती वाक्यांसमोर कंसांत लिहा.
टॅक्स. कृत्य, हात करणे (क्रयापद)
उत्तर :
अ. दाम करी काम वेड्या – (करणे) (क्रियापद)
आ. कर भरणे प्रत्येक नागरिकाचे कर्तव्य आहे – (टॅक्स)
इ. कर हा करी धरिला शुभांगी – हात
ई. कर नाही त्याला डर कशाला ? – कृत्या

आकलन कृती :

खालील पठित गदय उताऱ्याच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 8
उत्तर :
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 9

‘वहिनींचा सल्ला’ या कार्यक्रमाची शिवाजी मंदिरातील वर्षसंख्या व उषावहिनींचे त्यावेळेचे वय.

प्रश्न 1.
1. वर्षसंख्या – [ ]
2. उषावहिनींचे त्यावेळेचे वय – [ ]
उत्तर :
1. वर्षसंख्या – 20
2. उषावहिनींचे त्यावेळेचे वय – 58

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चौकट पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
उषावहिनींच्या शेवटच्या कार्यक्रमाचे वैशिष्टय – [ ]
उत्तर :
उषावहिर्नीच्या शेवटच्या कार्यक्रमाचे वैशिष्ट्य – हा कार्यक्रम स्टुडिओमधून काढून शिवाजी मंदिरमध्ये ठेवला होता. त्यासाठी समाजातल्या मान्यवर व्यक्ती निमंत्रित केल्या होत्या. उघावहिनींचा सत्कार होणार होता.

प्रश्न 2.
मागील वीस वर्षांत उषावहिनींनी कार्यक्रमादरम्यान सुखी संसारासाठी वापरलेली आयुधे.
1. ……… 2. ……… 3. ……… 4. ………
उत्तर :
1. हंडाभर फेविकॉल.
2. दोन-चार मैल लांबीच्या चिकटपटट्या.
3. शंभर एक किलो डिंक.
4. पाच सात बरण्या च्युइंग गम

प्रश्न 3.
‘आला प्रॉब्लेम समोर की, लाव त्याला चिकटपट्टा
परिणाम – …………….
उत्तर:
कृती – ‘आला प्रॉब्लेम समोर की, लाव त्याला चिकटपट्टी
परिणाम – कार्यक्रम यशस्वी

प्रश्न 4.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 10
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 11

प्रश्न 5.
मुंबईला दूरदर्शन सुरू झाल्यानंतरचा एकमेव असा सर्वात लोकप्रिय कार्यक्रम – [ ]
उत्तर :
बहिनींचा सल्ला

उपयोजित कृती

प्रश्न 6.
गटात न बसणारा शब्द ओळखा.
दूरदर्शन, गाडी, कार्यक्रम, स्टुडिओ.
उत्तर :
गाडी.

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प्रश्न 7.
घटनाक्रम योग्य क्रमानुसार लावा.
समाजातल्या अनेक मान्यवर व्यक्ती आज निमंत्रित होत्या.
उषावहिनींनी एकशेबावन्नाव्यांदा आरशात पाहिलं.
उषावहिनींनी एकशेचौपन्नाव्यांदा घड्याळात पाहिलं.
चार पावलं भराभरा मागे जाऊन, चार पावलं भराभरा पुढे येऊन स्वतःला पाहिलं.
उत्तर :
उषावहिनींनी एकशेबावन्नाव्यांदा आरशात पाहिलं.
चार पावलं भराभरा मागे जाऊन, चार पावलं भराभरा पढे येऊन स्वत:ला पाहिलं.
समाजातल्या अनेक मान्यवर व्यक्ती आज निमंत्रित होत्या.
उषावहिनींनी एकशेचौपन्नाव्यांदा घड्याळात पाहिलं.

प्रश्न 8.
योग्य विरामचिन्हांचा पर्याय ओळखा.
वहिनींच्या सल्ल्याचा शेवटचा कार्यक्रम.
पर्याय :
(अ) एकेरी अवतरणचिन्ह, पूर्णविराम
(ब) स्वल्पविराम, पूर्णविराम
(क) स्वल्पविराम, उदगारवाचक चिन्ह
(ड) पूर्णविराम, अपसारण चिन्ह.
उत्तर :
एकेरी अवतरणचिन्ह, पूर्णविराम, विरामचिन्हे घालून वाक्य – ‘वहिनींच्या सल्ल्या’चा शेवटचा कार्यक्रम.

आकलन कृती :

खालील पठित गदय उताऱ्याच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा.

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 12
उत्तर:
Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला 13

खालील घटनेचा परिणाम लिहा.

  • घटन – वीस वर्षामधल्या प्रत्येक कार्यक्रमानंतर उपावहिनींच्या साडीवर चर्चा व्हायची.
  • परिणाम – अगदी तश्शीच साडी खरेदी करायला बायकांच्या शोधयात्रा निघायच्या.

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सूचननुसार कृता करा.

प्रश्न 1.
‘निशाने चेहऱ्यावर प्रौढपणा’ हे उत्तर येईल असा प्रश्न तयार करा.
उत्तर :
निशाने चेहऱ्यावर काय आणण्याचा प्रयत्न केला?

प्रश्न 2.
‘वहिनींचा सल्ला हा कार्यक्रम दरवेळी आवर्जून पाहिला जायचा कारण …. [ ]
उत्तर :
‘वहिनींचा सल्ला हा कार्यक्रम दरवेळी आवर्जून पाहिला जायचा कारण – उषावहिनींनी नेसलेली साडी

खालील शब्दसमूहासाठी उताऱ्यात योजलेले शब्द.

प्रश्न 1.
नाट्यप्रयोग सादर करतात ते ठिकाण – [ ]
उत्तर :
नाट्यप्रयोग सादर करतात ते ठिकाण – नाट्यगृह

प्रश्न 2.
कार्यक्रमाचं निवेदन करणारा – [ ]
उत्तर :
कार्यक्रमाचं निवेदन करणारा – निवेदक

उपयोजित कृती

कोण ते लिहा.

प्रश्न 1.
उषावहिनींच्या भूमिकेत स्वतःला सराईतपणे झोकून देणारी व्यक्ती – [ ]
उत्तर :
उषावहिनींच्या भूमिकेत स्वतःला सराईतपणे झोकून देणारी व्यक्ती – निशावहिनी

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प्रश्न 2.
अपेक्षाभंगाची लाट पसरवणारा प्रेक्षकवर्ग – [ ]
उत्तर :
अपेक्षाभंगाची लाट पसरवणारा प्रेक्षकवर्ग – महिला

प्रश्न 3.
गटात न बसणारा शब्द ओळखा.
उत्तर :
1. प्रौढ, वयस्कर, थोराड, तारुण्य – तारुण्य
2. लोकप्रिय, नावाजलेला, प्रसिद्ध, चर्चेतला – चर्चेतला

प्रश्न 4.
खालील शब्दांसाठी योग्य समानार्थी शब्दांचा पर्याय निवडा.
उत्तर :
प्रयोग – खेळ, नाटय, लोकरंग, नाट्यरंग –
खेळ सराईत – हुषार, तरबेज, अडाणी, डळमळीत – तरबेज

चूक की बरोबर ते लिहा.

प्रश्न 1.

  1. निशावहिनींची उषावहिनींच्या सहकाऱ्यांशी चांगली ओळख नव्हती.
  2. ‘वहिनींचा सल्ला’ या कार्यक्रमाचा शिवाजी मंदिरातील प्रयोग हा पहिलाच प्रयोग होता.
  3. उषावहिनींचा ‘वहिनींचा सल्ला’ हा कार्यक्रम आवर्जून पाहिला जायचा याचे प्रमुख कारण म्हणजे उपावहिनींनी नेसलेली साडी होय,

उत्तर :

  1. चूक
  2. चूक
  3. बरोबर

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

स्वमतः

प्रश्न 1.
वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला ही कथा तुम्हाला का आवडते ते लिहा.
उत्तर :
वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला ही कथा ‘एका फांदीवरची पाखरं’ या पुस्तकातून घेतली आहे. ही कथा शोभा बोंद्रे यांनी लिहिली आहे. ही कथा विनोदी अंगाने लिहिलेली एक हलकी-फुलकी कथा आहे. काही उलट-सुलट घटना, माणसाच्या वागण्यातील विरोधाभास आणि गमतीशीर व्यक्तिचित्रणे यांमुळे कथा गंमतदार झाली आहे.

वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला ही कथा महिला वर्गाच्या विविध प्रश्नांवर पैलू टाकणारी कथा आहे. उषावहिनी ‘वहिनींचा सल्ला’ हा कार्यक्रम मागील वीस वर्षांपासून सादर करीत होत्या. दूरदर्शनवरील हा सर्वात लोकप्रिय असा कार्यक्रम होता. पण काही कारणांमुळे उषावहिनींना त्यांच्या शेवटच्या कार्यक्रमात उपस्थित राहता आले नाही त्यामुळे त्या कार्यक्रमाची पूर्ण सूत्रे निशावहिनी यांच्याकडे आली. दोधी बहिणी जरी असल्या तरी दोर्षीच्या स्वभावात प्रचंड तफावत. उषावहिनी ‘जोडा’ ‘जुळवा’ व ‘जुळवून’ घ्या अशा स्वभावाच्या तर निशा वहिनी जशास तसे उत्तर देणाऱ्या होत्या त्यामुळे त्यांचे सल्लेही अनेपेक्षित होते.

नवऱ्याशी असहकार पुकारणे, पाहुण्यांना आपल्या कामाचे महत्त्व पटवून देण्याकरीता थोड्याफार प्रमाणात परंपरा गुंडाळून टाकावी लागली तरी चालेल, कोणत्याही समस्येच्या मुळाशी जाऊन ती समस्या मुळापासूनच उखडून टाकली पाहिजे असे सल्ले निशावहिनी यांनी या कार्यक्रमात दिले. याचा अर्थ दुःख व सुख, निराशा व आशा, बंधन व मोकळीक या भावनांचा अनुभव या कथेतून झालेला दिसतो आणि हा सगळा अनुभव घेत असताना सुखाची जाणीव आपल्या मनात निर्माण होते. त्यामुळे ही कथा आम्हाला आवडते.

वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला Summary in Marathi

प्रस्तावनाः

शोभा बोंद्रे कथाकार, कादंबरीकार, सूत्रसंचालक म्हणून प्रसिद्ध मराठी व इंग्रजी या दोन्ही भाषांत त्यांनी वैशिष्ट्यपूर्ण लेखन केले आहे. माहेर, जत्रा, स्त्री, किर्लोस्कर इ. नामवंत मासिकांमधून विपुल लेखन.

‘मुंबईचा अन्नदाता’, ‘नॉट ओन्ली पोटेल्स’, ‘एक मुट्ठी आसमान’, ‘सहावं महाभूत आणि मी’, ‘एका फांदीवरची पाखर’ ही त्यांची पुस्तके विशेष प्रसिद्ध आहेत. त्यांच्या लेखनातून वेगवेगळ्या क्षेत्रांतील माणसांच्या यशोगाथा वेधकपणे उलगडून दाखाविल्या आहेत. माणसातल्या ‘माणुसपणाची’ उत्तुंग झेप, त्या मागची तपश्चर्या यांचे दर्शन त्यांनी लिहिलेल्या पुस्तकांतून होते.

‘आभाळमाया’, ‘ऊनपाऊस’, ‘अर्धागिनी’, ‘मानसी’, इ मालिकांसाठी त्यांनी संवादलेखन केले आहे. सातासमुद्रापार या त्यांच्या कादंबरीला सर्वोत्कृष्ट कादंबरीचा महाराष्ट्र राज्य पुरस्कार मिळाला आहे.

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

पाठाचा परिचय:

‘एका फांदीवरची पाखरं’ या त्यांच्या पुस्तकातील ही एक हलकीफुलकी विनोदी कथा आहे. काही उलट-सुलट घटना, माणसांच्या वागण्यातील विरोधाभास आणि गमतीशीर व्याक्तिचित्रणे यांमुळे कथा रंगतदार झाली आहे. स्त्रियांना समाजात मानाचे स्थान आणि समान हक्क मिळायला हवा; तसेच तिने स्वत:ला सिद्ध करून स्वतःचे महत्व समाजास पटवून दयायला हवे, हा संदेश या कथेतून अधोरेखित झाला आहे.

उपावहिनींचा कार्यक्रम निशावहिनींकडे गेल्यानंतर जी काही गंमत झाली आहे त्याचे दिलखुलास व मार्मिक वर्णन या कथेत आले आहे. मुंबईला दूरदर्शन सुरू झाल्यानंतर जे काही कार्यक्रम प्रसारित झाले त्यातील सर्वात लोकप्रिय कार्यक्रम म्हणजे ‘वहिनींचा सल्ला’. उषा वहिनींना अट्ठावन्न वर्ष पूर्ण होत होती त्यामुळे पाठात आलेली विनोदी कथा हा त्याचाच एक भाग आहे.

शेवटचा प्रयोग असल्यामुळे हा कार्यक्रम स्टुडिओमधून काढून शिवाजी मंदिरमध्ये ठेवला होता. हा कार्यक्रम म्हणजे महाराष्ट्रात जेवढं जग सामावलेले आहे त्यातल्या हजारो व्यक्तींना बहिनींनी दिलेले त्यामुळेच हा कार्यक्रम यशाच्या शिखरावर होता. शेवटच्या कार्यक्रमासाठी त्यांची तयारी पूर्ण झाली होती पण दांडीवर वाळत असलेला रूमाल काढायला त्या स्टूलावर चहल्या. रूमाल हातात आला पण तोल जाऊन त्या खाली पडल्या.

त्याही अवस्थेत त्या कार्यक्रमासाठी जायला तयार होत्या पण डावा पाय गुडघ्यापासून वाकडा झाल्यामुळे नामवंत अस्थिव्यंगतज्ञ डॉ. बडव्यांकडे त्यांना नेण्यात आलं. त्यामुळे कार्यक्रम त्यांना स्वत:ला सादर करता आला नाही. त्यानंतर ही भूमिका करण्याची जबाबदारी निशावहिनींकडे आली, जरी आपण जळ्या बहिणी नसलो. दोघींमध्ये पाच वर्षांचे अंतर जरी असले तरी आपण सारख्याच दिसतो असे उषाबहिनींनी निशाबहिनींना समजावून सांगितले. मेकअपमध्ये सर्व काही व्यवस्थित करण्यात आले. निशावहिनींनी चेहऱ्यावर प्रौढपणा आणायचा प्रयत्न केला.

सेटवर थोड्याफार प्रमाणात ओळख असल्यामुळे काही वाटलं नाही. पण कार्यक्रम शिवाजी मंदिरात व थेट असल्यामुळे थोडासा ताण निशावहिनींना जाणवत होता. निशावहिनींचं खर कामाचं क्षेत्र एक युनियनची कार्यकर्ता म्हणून होतं. याचाच अर्थ ज्या गोष्टी मालकांकडून कामगारांना मागून मिळत नाहीत त्या गोष्टी भांडून किंवा संघर्ष करून मिळवणं हे होतं. पण आज मात्र त्यांच्या बहिणीसाठी स्टेजवर व विशेष करून त्यांच्याच रूपात उभं रहायचं होतं. हे काम एक आव्हानात्मक होतं.

एका नोकरी करणाऱ्या नवरेबाईना त्यांनी दिलेला सल्ला खरोखरच ‘सुसाट होता. नवरा घरात कोणत्याही कामाला हात लावत नाही या त्यांच्या प्रश्नावर त्यांनी असहकार नावाचं अंजन डोळ्यात घालायला सांगितलं. जेणेकरून नवरा बरोबर ठिकाणावर येईल, असा त्यामागचा हेत होता. मुला बाळांचा विचार करायचा व नवऱ्याचा मात्र जाणीवपूर्वक विचार करायचा नाही हा सुसाट सल्ला त्यांनी दिला. या सल्ल्यामुळे प्रेक्षकांत क्षणभर अवघडलेली शांतता पसरली, एका बाईने टाळी वाजवली व त्यानंतर उरलेल्या सर्वच स्त्रियांनी आणि शेवटी पुरुषांनीही नाइलाजाने टाळ्यांचा कडकडाट केला.

निलंजना बॅनर्जी या गृहिणीला दिलेला सल्लासुद्धा सुसाटच होता. त्यांच्या घरात त्यांच्या सेवाभावी वृत्तीचा तसेच त्यांनी एका सामाजिक संस्थेबरोबर केलेल्या कामाचा आदर होता. त्यांची समस्या पावसाच्या रूपात येणाऱ्या पाहुण्यांची होती. या प्रश्नाला निशावहिनींनी उत्तर दिलं. पाहण्यांना येणाऱ्या प्रेमाचा पोकळ पुळका ओळखायला शिकायचं, तुमची सोय-गैरसोय न पाहता पाहणे आले आहेत. तुम्ही त्यांची सोय-गैरसोय बघायचं कारण नाही. तुमचं वेळापत्रक तुम्हीच सांभाळायचं. तुमच्या कामाचं महत्त्व घरातल्यांना पटलं आहे ना ? तसच पाहुण्यांनाही पटवून दयायचं.

या त्यांच्या उत्तराने सभागृहात टाचणी पडेल अशी शांतता पसरली. आज काहीतरी वेगळंच घडत आहे याची जाणीव प्रेक्षकांना होत होती. कारण संयमाने उत्तर देणाऱ्या, समजुतीच्या चार गोष्टी सांगणाऱ्या उषावहिनींचा स्वभाव कसा काय बदलला? हे प्रेक्षकांना पटणारे नव्हते.

अशाच अनेक समस्यांना त्यांनी उत्तरे दिली. त्यांची उत्तरे म्हणजे ‘कीड मुळापासून उपटून काढली पाहिजे, तरच झाड जगेल’ हे तत्वज्ञान पाळणारी होती. याचाच अर्थ कोणताही प्रश्न वरवर विचार करून सोडविण्याऐवजी तो सखोल अभ्यास करून त्याचा बिमोड करणे हा आहे. त्यानंतर पोलिस इन्सपेक्टर मांडले यांचा आलेला फोन व त्यांच्या पश्चात घडलेले नाट्य आपल्यासमोर आहेच. त्यांनी दिलेली कबुली व त्यानंतर पडलेल्या टाळ्या हे सर्वकाही सांगून जाते. त्यांच्या या कार्यक्रमानंतर उषावहिनींची प्रतिक्रियासुद्धा दाद देऊन गेली.

‘हॅलो’, मी उषावहिनी बोलते आहे. निशा, मनःपूर्वक अभिनंदन! मी लोकांना वर्षानुवर्षे औषध म्हणून साखरेच्या गोळ्या देत आले. तू मात्र आज लोकांना कडू क्विनाईनचा डोस देण्याचं धाडस केलंस. हे कोणीतरी करायलाच हवं होतं, अशी प्रतिक्रिया उषा वहिनींनी दिली. त्यानंतर मात्र ‘वहिनींच्या सल्ल्या ‘ चं नाटक संपलं होतं. कायमचं!

Maharashtra Board Class 11 Marathi Yuvakbharati Solutions Chapter 9 वहिनींचा ‘सुसाट’ सल्ला

समानार्थी शब्द / पर्यायी शब्द :

  1. भराभरा – जलद – (hurry up).
  2. निमंत्रण – आमंत्रण – (invitation).
  3. मान्यवर – प्रतिष्ठित – (eminent).
  4. पर्स – बटवा – (purse).
  5. ममता – माया – (affection).
  6. पेशंट – आजारी व्यक्ती – (patient).
  7. अनेस्थेशिया – गुंगीचे औषध.
  8. बॅक स्टेज माणसे – रंगमंचाची व्यवस्था पाहणारे.
  9. कधीही समोर न येणारे कर्मचारी – (back stage artist).
  10. युनियन – संघटना – (union).
  11. रसिक – चाहता – (amateur).
  12. प्रयोग – खेळ – (act).
  13. असहकार – सहकार्य न करण्याची भावना – (non-cooperation).
  14. डीग – रास – (heap).
  15. अंजन – काजळ – (collyrium).
  16. विनावेतन – बिनपगारी – (without pay).
  17. प्रेमाचा प्रेमळ फुगा – वरवरचे दाखवलेले प्रेम – (apparent love).
  18. कायापालट – बदल – (transformation).
  19. सरबराई – आदरातिथ्य – (warm welcome).
  20. व्रत – वसा – (a rite ).
  21. लाभ – नफा – (profit).
  22. संधी – वाव – (an opportunity).
  23. सल्ला – उपदेश – (advice).
  24. गृहिणी – घरातील स्त्री, पत्नी – (a housewife).

वाक्प्रचार:

  1. काजवे चमकणे – अंधारी येणे, घाबरणे.
  2. डोळे लकाकणे – आशेचा किरण दिसणे.
  3. एखादी कल्पना सुचणे, कायापालट होणे – पूर्णपणे बदल होणे.
  4. कडेलोट होणे – एखादया गोष्टीचा अतिरेक होणे.
  5. असहकाराचे अंजन घालणे – सहकार्य न करण्याचा उपाय योजणे.