Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 11 वीरों को प्रणाम

Balbharti Maharashtra State Board Class 5 Hindi Solutions Sulabhbharati Chapter 11 वीरों को प्रणाम Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 5 Hindi Sulabhbharati Solutions Chapter 11 वीरों को प्रणाम

5th Standard Hindi Digest Chapter 11 वीरों को प्रणाम Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों को क्रम से लगाकर लिखिए:

  1. प्राणार्पण की सीख में।
  2. जिन्हें प्राण से प्यारा।
  3. सीखा हम लोगों ने कुछ तो।
  4. देश की मिट्टी का कण – कण है।

उत्तर:

  1. सीखा हम लोगों ने कुछ तो।
  2. प्राणार्पण की सीख में।
  3. देश की मिट्टी का कण – कण है।
  4. जिन्हें प्राण से प्यारा।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 11 वीरों को प्रणाम

Hindi Sulabhbharati Class 5 Solutions Chapter 11 वीरों को प्रणाम Additional Important Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1.
दो अक्टूबर को किसका जन्मदिन मनाया जाता है?
उत्तर:
2 अक्टूबर को महात्मा गाँधीजी का जन्मदिन मनाया जाता है।

प्रश्न 2.
‘शहीद’ किस क्रांतिकारी के नाम के आगे लगाया जाता है?
उत्तर:
‘शहीद’ भगत सिंह के नाम के आगे लगाया जाता है।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत कविता में किसको प्रणाम किया गया है?
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में देश के वीरों को प्रणाम किया गया है।

प्रश्न 4.
प्रस्तुत कविता के कवि का नाम बताइए?
उत्तर:
प्रस्तुत कविता के कवि का नाम श्री रमेश दीक्षित है।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 11 वीरों को प्रणाम

प्रश्न 5.
गंगा और यमुना नदियाँ कौन-से शहर में बहती हैं?
उत्तर:
गंगा और यमुना नदियाँ इलाहाबाद शहर में बहती हैं।

प्रश्न 6.
‘शेर-ए-पंजाब’ किस क्रांतिकारी के नाम के आगे लगता है?
उत्तर:
‘शेर-ए-पंजाब’ लाला लाजपत राय के नाम के आगे लगता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए:

प्रश्न 1.
देश की मिट्टी का कण-कण किसे प्यारा है?
उत्तर:
वीरों को।

प्रश्न 2.
वीरों को हमारा प्रणाम कितनी बार है?
उत्तर:
सौ बार।

प्रश्न 3.
वीरों को किस पर मर-मिटने की धुन लगी रहती है?
उत्तर:
देश पर।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 11 वीरों को प्रणाम

प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों में सही विरुद्धार्थी शब्द लिखिए:

  1. देश पर मर मिटने की, हरदम …………. रहती। (धुन-सी / तैयारी)
  2. वीरों के बलिदान से, चमका हिंद ………….. का तारा। (वतन / देश)
  3. देश की मिट्टी का कण-कण है, जिन्हें ……. से प्यारा। (हृदय / प्राण)
  4. यह …………… नहीं मिली है, हमें किसी से भीख में। (आज़ादी / मातृभूमि)

उत्तर:

  1. धुन-सी
  2. वतन
  3. प्राण
  4. आज़ादी

प्रश्न 5.
कविता की पंक्तियाँ पूरी कीजिए:

  1. देश की मिट्टी ……………………..
  2. जिन्हें प्राण ……………………
  3. यह ऐसी …………………
  4. गंगा ……………………….
  5. वीरों के ………………….
  6. चमका हिंद …………………

उत्तर:

  1. का कण-कण है
  2. से प्यारा
  3. धरती है जहाँ पर
  4. जमुना बहती
  5. बलिदान से
  6. वतन का तारा

व्याकरण

प्रश्न 1.
एक जैसी लय के शब्द लिखिए:

  1. प्यारा
  2. धरती
  3. भीख

उत्तर:

  1. हमारा
  2. बहती
  3. सीख

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प्रश्न 2.
‘कण-कण’ जैसे शब्द – युग्म की सूची बनाइए:
उत्तर:

  1. सौ – सौ
  2. बार – बार
  3. धीरे – धीरे
  4. ज़रा – ज़रा
  5. कभी – कभी
  6. जा – जा
  7. तार – तार
  8. अपने – अपने

वीरों को प्रणाम Summary in Hindi

कविता का सारांश:

प्रस्तुत कविता में देश के वीरों के बारे में बताया गया है, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान कर दिया। हमारे देश के इन वीरों के लिए इस देश की मिट्टी का कण-कण भी प्राण से प्यारा है। वीरों के बलिदान से हमारे देश का तारा चमका है। यह आज़ादी हमें भीख में नहीं मिली। देश और देशवासियों की खातिर जिन्होंने हमें प्राण न्योछावर करने की सीख दी, ऐसे वीरों को हम सौ-सौ बार प्रणाम करते हैं।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 11 वीरों को प्रणाम

शब्दार्थ:

  1. प्राण – जान (life)
  2. वीर – बहादुर (brave)
  3. आज़ादी – स्वतंत्रता (freedom)
  4. प्राणार्पण – प्राण अर्पित करना, बलिदान (to sacrifice life)
  5. आँखें भर आना – आँसू आना (being emotional)
  6. भीख माँगना – (beg)
  7. धरती – भूमि (earth)
  8. वतन – मातृभूमि (motherland)
  9. कण – छोटा टुकड़ा (small piece)
  10. प्रणाम – नमस्कार

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Sanskrit Solutions Anand Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम् Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

Sanskrit Anand Std 9 Digest Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम् Textbook Questions and Answers

भाषाभ्यास:

1. एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
भिक्षुकस्य नाम किम् ?
उत्तरम् :
भिक्षुकस्य नाम स्वभावकृपणः।

प्रश्न 2.
स्वभावकृपणेन घट: कुत्र बद्धः?
उत्तरम् :
स्वभावकृपणेन घटः नागदन्ते बद्धः।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

प्रश्न 3.
सोमशर्मा कस्मात् भीतः भविष्यति ?
उत्तरम् :
सोमशर्मा कुक्कुरात् भीतः भविष्यति।

प्रश्न 4.
सक्तुपिष्टेन पूर्णः घट: कस्मात् कारणात् भग्नः ?
उत्तरम् :
‘स्वप्नमग्न: ध्यानस्थित : भिक्षुकः लगुडप्रहारम् अकरोत्।’ तस्मात् घट: भग्नः।

प्रश्न 5.
सोमशर्मपितुः नाम किम् ?
उत्तरम् :
स्वभावकृपणः इति सोमशर्मपितुः नाम।

प्रश्न 6.
स्वभावकृपणेन कटः कुत्र प्रसारित: ?
उत्तरम् :
स्वभावकृपणेन कटः कलशस्य अधस्तात् प्रसारितः।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

2. माध्यमभाषया उत्तरत।

प्रश्न 1.
स्वभावकृपणः किमर्थं पाण्डुरताम् अगच्छत्?
उत्तरम् :
विष्णुशर्मा विरचित ‘पञ्चतन्त्र’ या जगप्रसिद्ध कथासंग्रहातील ‘अपरीक्षितकारकम्’ या तंत्रावर आधारित ‘मनोराज्यस्य फलम्’ ही कथा आहे. स्वभावकृपण नावाच्या भिक्षुकाच्या दिवास्वप्न पाहणाच्या स्वैर वृत्तीमुळे अंती त्याला नुकसान सोसावे लागते हे या कथेत मांडले आहे.

स्वभावकृपण नावाचा भिक्षुक भिक्षेतून मिळालेल्या सातूच्या पिठाने भरलेला घड़ा दोरीने खुंटीला अडकवून त्या खाली झोपला. तेव्हाच तो भविष्यात काय काय होईल याचा विचार करू लागला, ते पीठ विकून आपल्याला पैसे मिळतील त्यातून आपण दोन बकऱ्या विकत घेऊ पुढे आधिक श्रीमंत झाल्यावर, गायी त्यानतर म्हैस असे करत करत अनेक घोडेही विकत घेऊ असे दिवास्वप्नच जणू तो पाहू लागला.

त्यातही पुढे सोने मिळवून आपले रूपवती कन्येबरोबर लग्न होईल व आपल्याला सोमशर्मा नावाचा मुलगा असेल एवढे भविष्यातील सर्व विचार करत असताना त्याचा मुलगा सोमशर्मा कुत्र्याला घाबरतो म्हणून स्वभावकृपण कुत्र्याला काठीने मारतो हे सर्व स्वप्नात पाहत असताना, तंद्रीत असल्याने प्रत्यक्षातही स्वभावकृपणाने तीच कृती केली व त्यामुळे वर बांधून ठेवलेला पीठाचा घडा फुटला.

त्यातील पीठ स्वभावकृपणावर सांडल्यामुळे तो पांढरा झाला. जे घडलेलेच नाही त्या भविष्यातील गोष्टींचा सतत विचार करणे या अविवेकी वर्तनामुळे वर्तमानातील गोष्टीही भिक्षुक गमावून बसला.

The story ‘मनोराज्यस्य फलम् is based on the principle of ‘अपरीक्षितकारकम्’ from ‘पञ्चतन्त्र’ composed by विष्णुशर्मा, Amonk named स्वभावकृपण slept under a pot in which he had kept the flour of sattu. He started dreaming about his future.

He thought that he would sell the flour in the time of famine and earn hundred rupees. With those hundred rupees he would buy two goats. With those goats he would buy cows and with cows buffaloes. With them he would buy mares.

This is how he would earn a lot of gold with which he would build a mansion and get married to a beautiful girl. They would have a son whom he would name as सोमशर्मा, Once adog would come near his sons and he would hit that dog with wooden rod. Thinking this he actually hit and shattered the pot and got whitened. Day-dreaming always leads to losing what we actually have.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

प्रश्न 2.
‘अपि दिवास्वप्नदर्शनं योग्यम् ?” इति कथायाः आधारेण लिखत ।
उत्तरम् :
विष्णुशर्मा विरचित ‘पञ्चतन्त्र’ या जगप्रसिद्ध कथासंग्रहातील ‘अपरीक्षितकारकम्’ या तंत्रावर आधारित ‘मनोराज्यस्य फलम्’ ही कथा आहे भिक्षुकाच्या दिवास्वप्न पाहण्याच्या वृत्तीचे कथेच्या अंती त्याला मिळालेले फळ अविवेकी वृत्तीने वर्तन केल्यास नुकसानच पदरी पडते हा उपदेश नकळतपणे मनावर बिंबवणारेच ठरते.

भिक्षेतून मिळालेले सातूचे पीठ एका घड्यात ठेवून तो घडा दोरीने खुंटीला अडकवून स्वभावकूपण त्या खालीच झोपला व तो भविष्यातील गोष्टींची दिवास्वप्ने रंगवू लागला. पीठ विकून पैसे मिळवेन इथपासून ते पुढे पशुपालनाचा व्यवसाय व त्यातून सोने प्राप्त करेन अशी गुंफण स्वभावकृपण स्वप्नात करू लागला, त्याही पुढे लग्नाचे, संसाराचे, अपत्याचे दिवास्वप्न तो रंगवू लागला.

त्याच स्वप्नात मग्न होऊन गेलेले असताना भानावर नसल्यामुळे स्वप्नातील कृती तो प्रत्यक्षातही केली व सातूच्या पिठाचा घडा काठीच्या प्रहाराने फुटला. यावरून हाच उपदेश मिळतो की, दिवास्वप्न पाहणे अयोग्य आहे. स्वप्न पूर्ण करण्यासाठी कार्य न करताच असलेल्या गोष्टीही हातातून निसटून जातात. त्यामुळे भविष्यात प्रगती साधायची असेल तर त्या ध्येयावर लक्ष केंद्रित करुन सतत त्यादृष्टीने कृती करणे आवश्यक आहे. ‘Preperation is a key to success’ म्हणूनच दिवास्वप्न न पाहता सतत प्रयत्न करत राहिल्यास वर्तमान व भविष्यकाळातही यश संपादन करता येते.

In the lesson ‘मनोराज्यस्य फलम्’ a message about day-dreaming is conveyed through a very interesting story. This story is based on one of the five principles of ‘पञ्चतन्त्र’ i.e ‘अपरीक्षितकारकम्’. A monk had a pot full of flour of sattu. He slept under that pot. He started dreaming how he would get rich after selling that flour in famine. Actually, there was no such situation of famine. He thought that he would sell flour of sattu and earn hundred rupees.

With that money, he would buy many animals and start a poultry business. In this way he would earn a lot of gold and build a mansion. He would get married to a beautiful girl and have a child whose name would beसोमशर्मा. Once when hthyref would be playing, a dog would come there and I would hit him with wooden rod.

While dreaming this he actually hit the pot and the pot got shattered. The flour on the basis of which the beggar was dreaming big things itself was vanished. The story tells us that a man should certainly dream big, but his dreams should be based on the reality.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

3. अ. सन्धिविग्रहं कुरुत।

प्रश्न 1.

  1. तस्याधस्तात्
  2. सोमशर्मेति
  3. ततोऽहम् ।

उत्तरम् :

  1. तस्याधस्तात् – तस्य + अध: + तात्।
  2. सोमशमति – सोमशर्मा + इति।
  3. ततोऽहम् – तत: + अहम्।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

आ. वर्णविग्रहं कुरुत।

प्रश्न 1.

  1. दुर्भिक्षम्
  2. रूपाढ्याम्
  3. ध्यानस्थितः
  4. स्वभावकृपणः

उत्तरम् :

  1. दुर्भिक्षम् – द् + उ + र + भ् + इ + क् + ष् + अ + म्।
  2. रूपाढ्याम् – र + ऊ + प् + आ + ढ् + य् + आ + म्।
  3. ध्यानस्थितः – ध् + य् + आ + न् + अ + स् + थ् + इ + त् + अः।
  4. स्वभावकृपणः – स् + व् + अ + भ + आ + व् + अ + क् + ऋ + प् + अ + ग् + अः।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

4. समानार्थकशब्द लिखत।
कृपणः, दुर्भिक्षम्, अश्वः, धेनुः, सुवर्णम्, कुक्कुरः ।

प्रश्न 1.
समानार्थकशब्द लिखत।
कृपणः, दुर्भिक्षम्, अश्वः, धेनुः, सुवर्णम्, कुक्कुरः ।
उत्तरम् :

  • कृपणः – कदर्यः, क्षुद्रः, किम्पचानः।
  • दुर्भिक्षम् – वर्षाभावः।
  • अश्वः – हयः, तुरगः, वाजी, घोटकः।
  • धेनुः – गौः।
  • सुवर्णम् – कनकम्, हेम, काञ्चनम्, हिरण्यम्।
  • कुक्कुरः – सारमेयः, शुनकः, कौलेयकः।

Sanskrit Anand Class 9 Textbook Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम् Additional Important Questions and Answers

उचितं पर्यायं चिनुत ।

प्रश्न 1.
कोऽपि भिक्षुकः ………… स्म।
(अ) प्रतिवसामि
(आ) प्रतिवसति
(इ) प्रत्यवसत्
(ई) प्रत्यवसन्
उत्तरम् :
(आ) प्रतिवसति।

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प्रश्न 2.
कलशः ………… सम्पूरितः?
(अ) जलेन
(आ) धनेन
(इ) सक्तुपिष्टेन
(ई) रूप्यकेण
उत्तरम् :
(इ) सक्तुपिष्टेन।

प्रश्न 3.
भिक्षुक: अजाभिः प्रभूताः ………… ग्रहीष्यति।
(अ) अश्वाः
(आ) धेनूः
(इ) अश्वान्
(ई) महिषी:
उत्तरम् :
(आ) धेनूः

प्रश्न 4.
स्वभावकृपणस्य पुत्रस्य नाम …………।
(अ) सोमदेवः
(आ) विष्णुशर्मा
(इ) सोमशर्मा
(ई) देवदत्तः
उत्तरम् :
(इ) सोमशर्मा

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प्रश्न 5.
कोपाविष्ट: भिक्षुकः काम् अभिधास्यति ?
(अ) सोमशर्माणम्
(आ) अजाम्
(इ) भार्याम्
(ई) बालकम्
उत्तरम् :
(इ) भार्याम्

प्रश्न 6.
स्वप्ने भिक्षुक: कं ताडयिष्यति?
(अ) महिषीम्
(आ) अश्वम्
(इ) अजाम्
(ई) कुक्कुरम्
उत्तरम् :
(ई) कुक्कुरम्

एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
यदि दुर्भिक्षं भवति तर्हि कस्य विक्रयणेन भिक्षुक: रूप्यकाणां शतं प्राप्स्यति?
उत्तरम् :
यदि दुर्भिक्षं भवति तर्हि सक्तुपिष्टेन परिपूर्णघटस्य विक्रयेण रूप्यकाणां शतं प्राप्स्यति।

प्रश्न 2.
स्वप्ने भिक्षुक: कति अजा: केष्यति?
उत्तरम् :
स्वप्ने भिक्षुक; अजाद्वयं क्रेष्य

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प्रश्न 3.
वडवापसवत: किं भविष्यति?
उत्तरम् :
वडवाप्रसवतः प्रभूताः अश्वाः भविष्यन्ति ।

प्रश्न 4.
भिक्षुकः कीदृशीं कन्याम् इच्छति?
उत्तरम् :
भिक्षुकः प्राप्तवयस्का रूपाझ्या कन्याम् इच्छति।

सत्यं वा असत्यं लिखत।

प्रश्न 1.

  1. भिक्षुकेन भिक्षया प्राप्तेन सक्तुपिष्टेन कलश: सम्पूरितः।
  2. भिक्षुकः भूमौ सुप्तः।
  3. भिक्षुकस्य नाम स्वभावकृपणः आसीत्।
  4. सोमशर्मा अन्धकारात् भीत: भविष्यति।
  5. लगुडप्रहारेण जलेन पूर्णः घट: भग्नः अभवत्।
  6. स्वभावकृपणः स्वप्नमग्नः आसीत् ।
  7. अश्वानां विक्रयणात्पभूतं सुवर्ण प्राप्स्यामि।
  8. स्वभावकृपणस्य पिता सोमशर्मा ।
  9. सुवर्णेन चतुःशालं गृहं सम्पत्स्यते।

उत्तरम् :

  1. सत्यम्
  2. असत्यम्
  3. सत्यम्
  4. असत्यम्
  5. असत्यम्
  6. सत्यम्
  7. सत्यम्
  8. असत्यम्
  9. सत्यम्

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

शब्दस्य वर्णविग्रहं कुरुत।

  • कस्मिंश्चित् – क् + अ + स् + म् + इ + न् + श् + च् + ई + त्।
  • सम्पूरितः – स् + अ + म् + प् + ऊ + र + इ + त् + अः।
  • रज्ज्वा – र + अ + ज् + ज् + व् + आ।
  • बद्ध्वा – ब + अ + द् + ध् + व् + आ।
  • प्रसार्य – प् + र + अ + स् + आ + र + य् + अ।
  • मत्समीपम् – म् + अ + त् + स् + अ + म् + ई + प् + अ + म्।
  • कोपाविष्टः – क् + ओ + प् + आ + व् + ई + ष् + ट् + अः।
  • स्वप्नमग्नः – स् + व् + अ + प् + न् + अ + म् + अ + ग् + न् + अः।
  • षाण्मासिक – ष् + आ + ण + म् + आ + स् + इ + क + अ।
  • ग्रहीष्यामि – ग् + र् + अ + ह् + ई + ष् + य् + आ + म् + इ।

प्रवनिर्माणं कुरुत।

प्रश्न 1.

  1. लगुडप्रहारेण: घट: भग्नः अभवत्।
  2. सोमशर्मा कुक्कुरात् भीत: भविष्यति।
  3. अश्वानां विक्रयणात्प्रभूतं सुवर्णं प्राप्स्यामि।

उत्तरम् :

  1. केन घट: भग्नः अभवत्?
  2. सोमशर्मा कस्मात् भीतः भविष्यति?
  3. केषां विक्रयणात्प्रभूतं सुवर्ण प्रास्यामि?

त्वान्त/ल्यबन्त/तुमन्त अव्ययानि।

त्वान्त अव्यय धातु + त्वा / ध्वा / ट्वा / ढ्वा / इत्वा अयित्वाल्यबन्त अव्यय उपसर्ग + धातु + य / त्यतुमन्त अव्यय   थातु + तुम् / धुम् / टुम् / ढुम् / इतुम् / अयितुम्
बद्ध्वाप्रसार्य
दृष्ट्वासमुत्थाय

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

विभक्त्यन्तरूपाणि।

  • प्रथमा – भिक्षुकः, कलश:, अयम्, परिपूर्णः, घटः, नाम, अहम्, अजा, वडवाः, अश्वाः, धनिकः, पुत्र:, सः, सोमशर्मा, अहम्, कुक्कुरः,सः, घटः, पाण्डुरः, सोमशमपिता, ध्यानस्थितः।
  • द्वितीया – तम्, घटम्, कटम्, धेनूः, महिषी:, सुवर्णम्, गृहम, कन्याम, रूपाढ्याम्, बालकम, भार्याम्, कुक्कुरम्, लगुडप्रहारम्, चिन्ताम्, माम्।
  • तृतीया – तेन, भिक्षया, सक्तुपिष्टेन, विक्रयणेन, रज्ज्वा, अजाभिः, धेनुभिः, महिषीभिः, सुवर्णेन, लगुडेन, प्रहारेण।
  • चतुर्थी – महाम् पझमी – ताभ्याम्
  • पञ्चमी – तस्मात्।
  • षष्ठी – अस्य, तेषाम् , आवयोः, तस्य, मम।
  • सप्तमी – नगरे, नागदन्ते, विषये।

लकारं लिखत।

  • प्रतिवसति – प्रति + वस् धातुः प्रथमगणः परस्मैपदं लट्लकार प्रथमपुरुष: बहुवचनम्।
  • अचिन्तयत् – चिन्त् धातुः दशमगण: उभयपदम् अत्र परस्मैपदं लङ्लकारः प्रथमपुरुष: एकवचनम्।
  • प्राप्स्यामि – प्र + आप् धातुः पञ्चमगण: परस्मैपदं लुट्लकार: उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • वेष्यामि – की धातुः नवमगणः परस्मैपदं लुट्लकार: उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • भविष्यति – भू धातुः प्रथमगणः परस्मैपदं लूट्लकार: प्रथमपुरुष: एकवचनम्।
  • ग्रहीष्यामि – गृह धातुः नवमगण: उभयपदम् अत्र परस्मैपद लुट्लकार: उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • दास्यामि – दा धातः प्रथमगण:/तृतीयगण: उभयपदम् अत्र परस्मैपदं लट्लकार: उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • करिष्यामि – कृ धातुः अष्टमगण: उभयपदम् अत्र परस्मैपदं लुट्लकार: उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • आगमिष्यति – आ + गम् धातुः प्रथमगण: परस्मैपदं लुट्लकार: प्रथमपुरुष: एकवचनम्।
  • अभिधास्यामि – अभि + धा धातु: तृतीयगणः परस्मैपदं लट्ल कार: उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • श्रोष्यति – शृ धातुः पञ्चमगण: परस्मैपदं लट्लकार: प्रथमपुरुष: एकवचनम्।
  • ताडयिष्यामि – ताधातुः दशमगण: परस्मैपदं लुट्लकार: उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • ब्रवीमि – ब्रूधातुः द्वितीयगण: उभयपदम् अत्र परस्मैपदं लट्लकारः उत्तमपुरुष: एकवचनम्।
  • शेते – शी धातु: द्वितीयगण: आत्मनेपदं लट्लकारः प्रथमपुरुष: एकवचनम्।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

विशेषण-विशेष्य-सम्बन्ध: (स्तम्भमेलनं कुरुत)।

प्रश्न 1.

विशेष्यम्विशेषणम्
1. जानुचलनयोग्यःकन्या
2. चतुःशालम्सोमशर्मा
3. प्राप्तवयस्कागृहम्
4. स्वप्नमग्नःघट:
5. भग्नःचिन्ता
6. अनागतवतीभिक्षुकः

उत्तरम् :

विशेष्यम्विशेषणम्
1. जानुचलनयोग्यःसोमशर्मा
2. चतुःशालम्गृहम्
3. प्राप्तवयस्काकन्या
4.  स्वप्नमग्नःभिक्षुकः
5. भग्नःघट:
6. अनागतवतीचिन्ता

कः कं वदति।

प्रश्न 1.
“गृह्मण बालकम्”।
उत्तरम् :
स्वभावकृपणः/ भिक्षुकः भार्या वदति।

उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

प्रश्न 1.
सक्तुपिष्टेन पूर्ण: घट: भग्नः अभवत् यतः……….।
a. स्वप्नमग्न; ध्यानस्थितः भिक्षुक: लगुडप्रहारम् अकरोत्।
b. घट: भूमौ अपतत्।
उत्तरम् :
सक्तुपिष्टेन पूर्ण: घटः भग्नः अभवत् यतः स्वप्नमग्नः ध्यानस्थित : भिक्षुकः लगुडप्रहारम् अकरोत्।

सूचनानुसारं वाक्यपरिवर्तनं कुरुत।

प्रश्न 1.
स: अचिन्तयत्।
(लट्लकारं योजयत।)
उत्तरम् :
स: चिन्तयति।

प्रश्न 2.
घटस्य विक्रयणेन रूप्यकाणां शतं प्राप्स्यामि।
(लङ्लकारे परिवर्तयत।)
उत्तरम् :
घटस्य विक्रयणेन रूप्यकाणां शतं प्राप्नवम्।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

प्रश्न 3.
अजाभिः प्रभूताः धेनू: ग्रहीष्यामि।
(बहुवचने परिवर्तयत।)
उत्तरम् :
अजाभिः प्रभूताः धेनूः ग्रहीष्यामः।

प्रश्न 4.
एकदा सोमशर्मा मां दृष्ट्वा मत्समीपम् आगमिष्यति।
(‘त्वान्त’ निष्कासयत।)
उत्तरम् :
एकदा सोमशर्मा मां दर्शविष्यति मत्समीपम् आगमिष्यति च।

प्रश्न 5.
स्वभावकृपणः सः पाण्डुरताम् अगच्छत्।
(‘स्म’ योजयत।)
उत्तरम् :
स्वभावकृपणः सः पाण्डुरतां गच्छति स्म।

समानार्थकशब्द योजयित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

  1. प्रभूता: – वडवाप्रसवतः प्रभूता: अश्वाः भविष्यन्ति। वडवाप्रसवत: बहवः/प्रचुराः अश्वा: भविष्यन्ति।
  2. पूर्णम् – यत्परिपूर्णोऽयं घटस्तावत् सक्तुपिष्टेन वर्तते। यत्परिसमग्र:/सकल:/अखण्डे ऽयं घटस्तावत् सक्तुपिष्टेन वर्तते।
  3. शोभनम् – बालस्य रूपं शोभनम् अस्ति। बालस्य रूपं सुन्दरं/रुचिरं/साधु अस्ति।
  4. कृपणः – कस्मिंश्चित् नगरे कश्चित् स्वभावकृपणो नाम कोऽपि भिक्षुकः प्रतिवसति स्म ।
    कस्मिंशित् नगरे कश्चित् स्वभावकदर्य:/क्षुद्रः/किंपचान: नाम कोऽपि भिक्षुकः प्रतिवसति स्म।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

व्याकरणम् :

शब्दानां पृथक्करणम्

नामसर्वनामक्रियापदम्विशेषणम्
स्वभावकृपणः, नगरे, भिक्षया, रज्ज्वा, नागदन्ते, कटम्, सक्तुपिष्टेन, अजा, धेनूः, धेनुभिः, महिषीभिः, वडवाः, भार्याम्, कुक्कुरम्, लगुडेनतेन, तम्, तत्, सः, अयम् अस्यः, अहम्, ताभ्याम्, तेषाम् माम्-माप्रतिवसति, वर्तते, भवति, अचिन्तयत्, प्राप्स्यामि, भविष्यति, ग्रहीष्यामि, सम्पत्स्यते, दास्यति, करिष्यामि आगमिष्यति, अभिधास्यामि, श्रोष्यति, ताडयिष्यामि, क्रेष्यामिसम्पूरित:, परिपूर्णः, प्रभूताः, प्रभूतम्, रूपाढ्याम्, पाण्डुर:

समासाः।

समस्तपदम्अर्थ:समासविग्रहःसमासनाम
स्वभावकृपणःmiser by natureस्वभावेन कृपणः।तृतीया तत्पुरुष समास।
कोपाविष्टःovercome by angerकोपेन आविष्टः।तृतीया तत्पुरुष समास।
लगुडप्रहार:blow of a stickलगुडस्य प्रहारः।षष्ठी तत्पुरुष समास।
जानुचलनम्walking by the kneesजानुभ्याम् चलनम्।तृतीया तत्पुरुष समास।
सक्तुपिष्टेनwith flour of sattuसक्तो : पिष्टं, तेन।षष्ठी तत्पुरुष समास।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

मनोराज्यस्य फलम् Summary in Marathi and English

प्रस्तावना :

भारतात कथाकथनाची परंपरा फार पूर्वीपासून आहे. शर्करावगुण्ठित उपदेश करून सहजपणे एखादे मूल्य पटविण्यासाठी गोष्ट हे प्रभावी माध्यम ठरते. विष्णुशर्मारचित पंचतंत्र या कथा संग्रहात पुढील 5 तंत्रे गोष्टीरूपाने मांडली आहेत.1) मित्रभेदः 2) मित्रसम्प्राप्तिः 3)काकोलुकीयम् 4)लब्धपणरा: 5) अपरीक्षितकारकम्. राजा अमरशक्तीच्या तीन मुलांना नीती व राज्यशास्त्राचे शिक्षण देण्यासाठी, व्यवहारज्ञानात चतुर बनविण्यासाठी विष्णुशर्माने हा ग्रंथ रचला.

विष्णुशर्मा विरचित ‘पंचतंत्र’ या जगप्रसिद्ध कथासंग्रहातील ‘अपरीक्षितकारकम्’ (अविचाराने केलेले काम) या तंत्रावर आधारित प्रस्तुत कथा आहे. आपल्या स्वप्नांच्या पूर्तीसाठी जिद्दीने झटणे आवश्यक असते. केवळ दिवास्वप्न पाहून, न घडलेल्या गोष्टींबद्दल विचार करत राहिल्यास वर्तमानात असलेल्या गोष्टीही हातातून निघून जातात, हा बोध भिक्षुकाच्या या कथेतून मिळतो.

India has a wide history of story literature. Stories have been a very strong and effective method of inculcating moral and ethical things since time immemorial A classical example of this is king Amarshakti whose sons could not be taught by any traditional means.

It uses only when the scholar Vishnusharma took them into this fold and narrated to them stories that could make them proficient in administration. It is these stories which form the basis of the five principles of पञ्चतन्त्र – 1) मित्रभेद: 2) मित्रसम्प्राप्ति: 3) काकोलूकीयम् 4) लब्धप्रणाश: 5) अपरीक्षितकारकम् The present story is taken from the अपरीक्षितकारकम् which deals with the effect of actions done without proper thinking. This story presents to us the ill-effects of daydreaming and building castles in air without proper action to follow it.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

परिच्छेद : 1

कस्मिंश्चित् ………………. शतं प्राप्स्यामि।
कस्मिंश्चित् नगरे कश्चित् स्वभावकृपणो नाम कोऽपि भिक्षुकः प्रतिवसति स्म । तेन भिक्षया प्राप्तेन सक्तुपिष्टेन कलश: सम्पूरितः । तं च घट नागदन्ते रज्ज्वा बद्ध्वा तस्याधस्तात् कटं प्रसार्य सततं तद्विषये चिन्तयन् सः सुप्तः । स: अचिन्तयत् – “यत्परिपूर्णोऽयं घटस्तावत् सक्तुपिष्टेन वर्तते । यदि दुर्भिक्षं भवति तर्हि अस्य विक्रयणेन रूप्यकाणां शतं प्राप्स्यामि ।

अनुवादः

कोण्या एका नगरात कोणी एक स्वभावकृपण नावाचा भिक्षुक राहात असे. त्याने भिक्षा मागून मिळालेल्या सातूच्या पिठाने घडा पूर्ण भरला, आणि (त्याने) त्या घड्याला दोरीने खुंटीवर बांधून त्याच्या खालीच चटई पसरून सतत त्या विषयीच विचार करत तो (तिथे) झोपला. त्याने विचार केला – “हा घडा सातूच्या पिठाने पूर्ण भरलेला आहे. जर दुष्काळ पडला तर याच्या (सातूच्या पीठाच्या) विक्रीतून शंभर रूपये मिळवेन.

In certain city there lived a certain monk named स्वभावकृपण. He filled a pot with the flour of sattu which he obtained as alms. After hanging that pot with a rope to the nail, spreading a mat exactly below it, he fell asleep constantly thinking about it. He thought this pot is filled with sattu flour. If there is a famine, (scarcity of food) I’ll get hundred rupees by selling it.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

परिच्छेद : 2

ततस्तेन ………….. जानुचलनयोग्यः भविष्यति।
ततस्तेन अहम् अजाद्वयं क्रेष्यामि। तत: पाण्मासिक-प्रसववशात् ताभ्यां यूथः भविष्यति। ततोऽजाभिः धेनू: ग्रहीष्यामि, धेनुभिः महिषी:, महिषीभिः वडवाः, वडवाप्रसवतः प्रभूता: अश्वाः भविष्यन्ति । तेषां विक्रयणात्प्रभूतं सुवर्ण प्राप्स्यमि। सुवर्णेन चतु:शालं गृहं सम्पत्स्यते। ततः कश्चित् धनिकः प्राप्तवयस्कां रूपाढ्यां कन्यां मां दास्यति । आवयोः पुत्रः भविष्यति । तस्याहं सोमशमति नाम करिष्यामि । तत: स: जानुचलनयोग्यः भविष्यति।

अनुवादः

त्यानंतर त्यातून मी दोन बकऱ्या विकत घेईन. त्यानंतर सहा महिन्यांनी त्यांच्या प्रजननातून त्यांचा कळप तयार होईल. त्यानंतर पुष्कळ बकऱ्या झाल्यावर गायी विकत घेईन. गाईंनंतर म्हशी, म्हशींनंतर घोड्या, घोड्यांच्या प्रजननातून पुष्कळ घोडे जन्माला येतील. त्यांच्या विक्रीतून पुष्कळ सोने मिळवेन.

त्या सोन्यामुळे चौसोपी घर होईल. तेव्हा कोणी एक धनिक वयात आलेली रूपवती कन्या मला देईल. आम्हां दोघांना मुलगा होईल. त्याचे मी सोमशर्मा असे नाव ठेवेन त्यानंतर तो रांगू लागेल.

Then, with that, I shall buy two goats. Then, after six month of their pro-creation, there will be a flock of them. Then with the goats, I shall get cows, with the cows buffaloes, with the buffaloes, many mares, from many mares there will be many horses.

I shall obtain lots of gold by selling them. With the gold there will be a mansion (four buildings enclosing a quadrangle). Then some rich man will give me his beautiful daughter of marriageable age. Then we will have a son. I will name him as Somasharma. Then he’ll be able crawl on knees.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

परिच्छेद : 3

एकदा सोमशर्मा ………… यया ।।
एकदा सोमशर्मा मां दृष्ट्वा मत्समीपम् आगमिष्यति । ततोऽहं कोपाविष्टः अभिधास्यामि भार्याम्, “गृहाण बालकम्’ इति । साऽपि मम वचनं न श्रोष्यति । तावत्काले कश्चन कुक्कुरं तत्र आगमिष्यति । सोमशर्मा तस्मात् भीतः भविष्यति। ततोऽहं समुत्थाय लगुडेन तं कुक्कुर ताडयिष्यामि।” एवं स्वनमग्नः ध्यानस्थितः सः तथैव लगुडप्रहारम् अकरोत् । तेन लगुडपारेण सक्तुपिष्टेन पूर्णः सः घट: भग्नः अभवत् । स्वभावकृपणः सः पाण्डुरताम् अगच्छत् । अत: ब्रवीमि – अनागतवती चिन्तामसम्भाव्यां करोति यः । स एव पाण्डुर: शेते सोमशर्मपिता यथा ।।

अनुवादः

एकदा सोमशर्मा मला पाहून माझ्याजवळ येईल. तेव्हा रागावलेला मी पत्नीला म्हणेन, “मुलाला घे.” ती सुद्धा माझे बोलणे ऐकणार नाही. त्याचवेळी कोणी एक कुत्रा तेथे येईल. सोमशर्मा त्याला घाबरेल. तेव्हा मी उठून काठीने त्या कुत्र्याला मारेन, अशा प्रकारे स्वप्नात गढून गेल्याने विचारमग्न झालेल्या त्याने तशाच प्रकारे काठीचा प्रहार केला. त्या काठीच्या प्रहाराने सातूच्या पिठाने भरलेला तो घडा फुटला. तो स्वभावकृपण पांढरा झाला.

म्हणून म्हणतो – अद्याप न घडलेल्या गोष्टींची आणि अशक्य गोष्टींची जो उगाचच चिंता करतो (विचार करतो), तो झोपलेल्या सोमशाच्या पित्याप्रमाणेच पांढरा होतो.

Once after seeing me Heref will come to me. Then, I will angrily say to my wife ” Take the boy”. She too will not hear my words. By that time, a certain dog will come there. Somasharma will get scared of it. Then after getting up, I shall hit that dog with a stick.

Thus engrossed in the dream he who was thinking, struck a blow with the stick. Due to the blow of the stick, the pot filled with sattu flour was shattered (broke) and that स्वभावकृपण got all whitened. Hence I tell you, he who sleeps over (worries over) something yet to come, or something impossible, gets whitened (pale) just like Somasharma’s father who was sleeping.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

सन्धिविग्रहः

  • कश्चित् – क: + चित्।
  • ततस्तेन – ततः + तेन। ततोऽजाभिः – ततः + अजाभिः।
  • तस्याहम् – तस्य + अहम्।
  • विक्रयणात्प्रभूतम् – विक्रयणात् + प्रभूतम्।
  • तावत्काले – तावत् + काले।
  • चिन्तामसम्भाव्याम् – चिन्ताम् + असम्भाव्याम्।
  • साऽपि – सा + अपि।
  • तथैव – तथा + एव।
  • स्वभावकृपणो नाम – स्वभावकृपणः + नाम।
  • कोऽपि – क: + अपि।
  • तद्विषये – तत् + विषये।
  • यत्परिपूर्णोऽयम् – यत् – परिपूर्ण: + अयम्।
  • घटस्तावत् – घटः + तावत् ।
  • कस्मिंचित् – कस्मिन् + चित् ।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

समानार्थकशब्दाः

  • भिक्षुकः – भिक्षुः, परिव्राजकः, परिव्राट्।
  • रज्जुः – गुणः, सूत्रम्।
  • नगरम् – पत्तनम्, पुरी।
  • कलशः – घटः, कुम्भः ।
  • वडवा – अश्वा, वामी।
  • कन्या – तनया, पुत्री, दुहिता।
  • पुत्रः – आत्मजः, सुतः, सुनः।
  • प्रभूताः – बहुलाः, बहवः।

विरुद्धार्थकशब्दाः

  • सुप्तः × जागरितः।
  • पूर्णः × अपूर्णः ।
  • प्रभूताः × स्तोकाः।
  • समीपे × दूरे।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 11 मनोराज्यस्य फलम्

शब्दार्थाः

  1. स्वभावकृपणः – miserly by nature – स्वभावाने कंजूष
  2. सक्तुपिष्टम् – saktu flour – सातूचे पीठ
  3. नागदन्तः – bracket on the wall – खुंटी
  4. दुर्भिक्षम् – famine – दुष्काळ
  5. विक्रयणेन – by selling – विकून
  6. बद्ध्वा – having tied – बांधून
  7. प्रसार्य – having spread – पसरून
  8. अजा – goat – बकरी, शेळी
  9. महिषी – buffalo – म्हैस
  10. वडवा – mare – घोड़ी
  11. अश्वः – horse – घोडा
  12. प्रभूतम् – a lot – पुष्कळ
  13. प्राप्तवयस्का – of proper age – वयात आलेली
  14. जानुचलनयोग्य: – able to crawlon knees – रांगण्यायोग्य
  15. भ्यूथः – flock / shed – समूह, कळप
  16. ‘चतुःशालम् – quadrangle with four building (mansion) – वाडा
  17. मत्समीपम् – near me – माझ्याजवळ
  18. कोपाविष्टः – angry – अतिशय रागावलेला
  19. अभिधास्यामि – I will say – मी बोलेन
  20. गुहाण – you take – तू घे
  21. कुक्कुरः – dog – कुत्रा
  22. समुत्थाय – after getting up – उठून
  23. लगुडेन – with a stick – काठीने
  24. पाण्डुरः – white – पांढरा
  25. अनागतवती – not arrived – न आलेली
  26. असम्भाव्यम् – impossible – अशक्य
  27. शेते – sleeps – झोपतो

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 10 मुझे जानो

Balbharti Maharashtra State Board Class 5 Hindi Solutions Sulabhbharati Chapter 10 मुझे जानो Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 5 Hindi Sulabhbharati Solutions Chapter 10 मुझे जानो

5th Standard Hindi Digest Chapter 10 मुझे जानो Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नांकित चित्रों और उनके नामों की उचित जोड़ियाँ मिलाओ:
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 10 मुझे जानो 1
उत्तर:

  1. बस
  2. डायरी
  3. शर्ट
  4. रेडिओ
  5. ट्रक
  6. ऑटो
  7. शिप
  8. कप

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 10 मुझे जानो

Hindi Sulabhbharati Class 5 Solutions Chapter 10 मुझे जानो Additional Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
स्वर विज्ञान के द्वारा अंग्रेजी एवं हिन्दी के वर्ण दिए गए हैं, जिन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए:
उत्तर:
A B C D E F G H I J K L M N O T U V W X Y Z
अ ब क ड इ फ ग ह इ ज क ल म न ओ ट उ व व क्ष य झ /ज़
उदाहरणः
राम – Ram कमल – Kamal घर – Ghar

प्रश्न 2.
उदाहरण के अनुसार शब्दों के नाम रोमन लिपी (अंग्रेजी) में लिखिए:
उत्तर:
उदाहरण – जहाज़ – Jahaz

  1. शर्ट – shirt
  2. प्लेट – plate
  3. कृष्णा – Lord krishna
  4. पैसा – paisa
  5. कॉफी- coffee
  6. डॉक्टर – doctor
  7. हिन्दी – Hindi
  8. ब्रश – Brush
  9. सी.डी. – C.D.
  10. मोबाइल – mobile
  11. सूटकेस – suitcase
  12. किताब – kitab
  13. बैग – bag
  14. रुपया – Rupya
  15. चाय- chai
  16. गाना – gana
  17. घड़ी – Ghadi
  18. मेला – Mela
  19. लड़का – Ladka
  20. पाउडर – Powder

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों को देवनागरी लिपि (हिन्दी) में लिखिए:
उत्तर:

  1. Komal – कोमल
  2. carpet – कारपेट
  3. engine – इंजिन
  4. Ishaan – ईशान
  5. train – ट्रेन
  6. phone – फोन
  7. chawal- चावल
  8. Dal – दाल
  9. chowk – चौक
  10. plastic – प्लास्टिक
  11. kalam – कलम
  12. Simran – सिमरन

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 10 मुझे जानो

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वर्गों की बाराखड़ी को पढ़िए एवं लिखिए:
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 10 मुझे जानो 2
उत्तर:

शब्दलिप्यंतरणअनुवाद
पैसाPaisaRupee (अंग्रेजी)
बैलBailBull (अंग्रेजी)
बोटBoatनाव (हिन्दी)
कलरColourरंग (हिन्दी)
कम्प्यूटरComputerसंगणक (हिन्दी)
सिजरscissorकैंची (हिन्दी)

प्रश्न 5.
देवनागरी लिपि (हिन्दी) एवं रोमन लिपि (अंग्रेजी) की उचित जोड़ियाँ मिलाइए:

(अ)(ब)
1. उँगली(अ) house (Ghar)
2. अंगूठी(आ) khakee
3. हाथ(इ) hair (Bal)
4. बाल(ई) hand (Hath)
5. घर(उ) game(Khel)
6. खाकी(ऊ) shoe(Jute)
7. जूता(ए) ring (Anguthi)
8. खेल(ऐ) finger (Ungali)

उत्तरः

(अ)(ब)
1. उँगली(ऐ) finger (Ungali)
2. अंगूठी(ए) ring (Anguthi)
3. हाथ(ई) hand (Hath)
4. बाल(इ) hair (Bal)
5. घर(अ) house (Ghar)
6. खाकी(आ) khakee
7. जूता(ऊ) shoe(Jute)
8. खेल(उ) game(Khel)

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 10 मुझे जानो

प्रश्न 6.
अपने मित्रों का नाम देवनागरी तथा रोमन लिपि में लिखिए:

  1. मोहन – ……………………….
  2. रमन – ……………………….
  3. हरी – ……………………….
  4. सीमा – ……………………….
  5. रहीम – ……………………….
  6. सीता – ……………………….

उत्तर:

  1. Mohan
  2. Raman
  3. Hari
  4. Seema
  5. Rahim
  6. Sita

प्रश्न 7.
पढ़ो और समझोः
उत्तर:

  1. क् + ष = क्ष – क्षमा, कक्षा
  2. त् + र = त्र – पत्र, चित्र
  3. ग् + य = ज्ञ – यज्ञ, ज्ञान
  4. श् + र = श्र – श्रम, श्रेय
  5. क् + त = क्त – भक्त, रक्त
  6. क् + क = क्क – पक्का, चक्का
  7. क् + ख = क्ख – मक्खी, चक्खा
  8. च् + छ = च्छ – अच्छा, गुच्छा
  9. ट् + ठ = ट्ठ – गट्ठा, कवट्ठी
  10. त् + त = त्त – पत्ता , गत्ता
  11. त् + य = त्य – सत्य, हत्या
  12. द् + द = द्द – गद्दी, भद्दा
  13. द् + ध = द्ध – श्रद्धा, युद्ध
  14. प् + य = प्य – प्यास, प्यारा
  15. ल् + ल्ल = ल्ल – पिल्ला, दिल्ली
  16. स् + य = स्य – स्यार, स्याही
  17. श् + य = श्य – श्याम, श्यामा
  18. ब् + ब = ब्ब – अब्बा, डिब्बा
  19. ष् + ट = ष्ट – कष्ट, रुष्ट

प्रश्न 8.
नीचे दिए गए वाक्य फिर से लिखिए:
उत्तर:

  1. शर्म कर।
  2. गर्म खा ।
  3. पर्व मना।
  4. ट्रक चला।
  5. धर्म पर चल ।
  6. ट्रॉफी जीत ।
  7. प्रेम कर।
  8. वज्र उठा।
  9. प्रश्न कर।
  10. कर्म कर ।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 10 मुझे जानो

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

Balbharti Maharashtra State Board Class 5 Hindi Solutions Sulabhbharati Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 5 Hindi Sulabhbharati Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

5th Standard Hindi Digest Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम Textbook Questions and Answers

1. पढ़ो और समझो:

प्रश्न 1.
पढ़ो और समझो:
1. सप्रेम – प्रेम – प्रेमभरा।
2. प्रतिदिन – दिन – दैनिक ।
3. विज्ञान – ज्ञान – ज्ञानी ।
4. अदृश्य – दृश्य – दृश्यमान ।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

Hindi Sulabhbharati Class 5 Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम Additional Important Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1.
आप अपने छोटे भाई-बहन की सहायता कैसे करते हैं?
उत्तर:
हम अपने छोटे भाई-बहन के साथ खेलते, खाना खाते एवं – पढ़ाई में उनकी मदद करते हैं।

प्रश्न 2.
क्या आप अपने दोस्तों के साथ नाश्ता बाँट कर खाते हैं?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 3.
अनाज खेत से काटकर कहाँ रखा जाता है?
उत्तर:
अनाज खेत से काटकर खलिहान में रखा जाता है।

प्रश्न 4.
फसल किसे कहते हैं?
उत्तर:
खेत में लगे अनाज के पौधों को फसल कहा जाता है।

प्रश्न 5.
गाँव के लोगों का व्यवसाय क्या होता है?
उत्तर:
गाँव के लोगों का व्यवसाय खेती होता है।

प्रश्न 6.
क्या दोनों भाई एक साथ रहते थे?
उत्तर:
नहीं, उनके घर अलग-अलग थे।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

प्रश्न 7.
अलग-अलग रहने के बावजूद दोनों भाइयों का व्यवहार कैसा था?
उत्तर:
अलग-अलग रहने के बावजूद दोनों भाइयों में बड़ा प्रेम था।

प्रश्न 8.
एक – दूसरे की मदद करने से क्या मिलता है?
उत्तर:
एक-दूसरे की मदद करने से बड़ा सुख और आनंद मिलता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए:

प्रश्न 1.
गाँव का नाम क्या था?
उत्तर:
गाँव का नाम मनोहरपुर था।

प्रश्न 2.
मनोहरपुर गाँव कैसा था?
उत्तर:
मनोहरपुर गाँव सुंदर था।

प्रश्न 3.
मनोहरपुर गाँव की मिट्टी कैसी थी?
उत्तर:
मनोहरपुर गाँव की मिट्टी उपजाऊ थी।

प्रश्न 4.
यह कहानी किसकी है?
उत्तर:
यह कहानी दो भाइयों की है।

प्रश्न 5.
किसकी शादी नहीं हुई?
उत्तर:
छोटे भाई की शादी नहीं हुई।

प्रश्न 6.
बड़े भाई के कितने बच्चे थे?
उत्तर:
बड़े भाई के दो बच्चे थे।

प्रश्न 7.
दोनों भाई हमेशा क्या सोचते थे?
उत्तर:
दोनों भाई हमेशा एक-दूसरे की भलाई की बात सोचते थे।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

प्रश्न 8.
खलिहान में किसके ढेर लगे थे?
उत्तर:
खलिहान में अनाज के ढेर लगे थे।

प्रश्न 9.
बड़े भाई ने छोटे भाई की सहायता करने का निर्णय क्यों लिया?
उत्तर:
बड़े भाई को लगा कि छोटे भाई की अभी शादी नहीं हुई है और उसे सारा काम अकेले सँभालना पड़ता है।

प्रश्न 10.
दोनों भाइयों ने एक-दूसरे की किस प्रकार मदद करने का निश्चय किया?
उत्तर:
दोनों भाइयों ने एक-दूसरे को दस गठरी अनाज देने का निश्चय किया।

प्रश्न 11.
अनाज के ढेर में से बड़े भाई ने कितना अनाज बाँधा?
उत्तर:
अनाज के ढेर में से बड़े भाई ने दस गठरी अनाज बाँधा।

3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

  1. गाँव के अधिकांश लोग …………. किया करते थे।
  2. दोनों भाइयों में बड़ा ………….. था।
  3. अंधेरी रात में दोनों भाई एक-दूसरे से ………… गए।
  4. दोनों भाई रोते – रोते हुए एक-दूसरे के लग गए।

उत्तर:

  1. खेती
  2. प्रेम
  3. टकरा
  4. गले

किसने किससे कहा:

प्रश्न 1.
“तुम्हारी मदद करनेवाला कोई नहीं है।”
उत्तर:
बड़े भाई ने छोटे भाई से कहा।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

प्रश्न 2.
“आप बाल-बच्चे वाले हैं।”
उत्तर:
छोटे भाई ने बड़े भाई से कहा।

प्रश्न 3.
“मेरे दो बच्चे हैं।”
उत्तर:
बड़े भाई ने अपने आप से कहा।

प्रश्न 4.
“मैं तो अकेला हूँ, जितना चाहे उतना काम कर सकता हूँ।”
उत्तर:
छोटे भाई ने अपने आप से कहा।

प्रश्न 5.
“आपको अधिक मात्रा में अनाज की आवश्यकता होती है।”
उत्तर:
छोटे भाई ने बड़े भाई से कहा।

निम्नलिखित वाक्य पढ़कर सही विकल्प चुनकर लिखो:

प्रश्न 1.
गाँव के अधिकांश लोग खेती किया करते थे।
(अ) गाँव के अधिकतर लोग किसान थे।
(ब) गाँव की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी।
उत्तर:
गाँव की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी।

प्रश्न 2.
खलिहान में सबके अनाज के ढेर लगे थे।
(अ) कटाई हो चुकी थी।
(ब) किसानों के पास अनाज रखने की जगह नहीं थी।
उत्तर:
कटाई हो चुकी थी।

प्रश्न 3.
छोटा भाई बड़े भाई की सहायता करना चाहता था।
(अ) बड़ा भाई बूढ़ा हो गया था।
(ब) बड़े भैया बाल-बच्चेवाले हैं।
उत्तर:
बड़े भैया बाल-बच्चेवाले हैं।

प्रश्न 4.
दोनों भाइयों ने कितने गठरी अनाज बाँधा?
(अ) पाँच गठरी
(ब) दस गठरी
उत्तर:
दस गठरी

प्रश्न 5.
बड़ा भाई छोटे भाई की सहायता करना चाहता था, क्योंकि
(अ) छोटे भाई को सारा काम अकेले सँभालना पड़ता था।
(ब) छोटा भाई कुछ काम नहीं करता था।
उत्तर:
छोटे भाई को सारा काम अकेले सँभालना पड़ता था।

प्रश्न 6.
दोनों भाई किस तरह एक-दूसरे के अनाज के ढेर की ओर बढ़े?
(अ) धीरे-धीरे
(ब) जल्दी-जल्दी
उत्तर:
धीरे-धीरे

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

प्रश्न 7.
दोनों भाइयों ने एक-दूसरे को कैसे गले लगाया?
(अ) हँसते हुए
(ब) रोते हुए
उत्तर:
रोते हुए

प्रश्न 8.
दोनों भाइयों की प्रेम कहानी लोग कैसे सुनाते हैं?
(अ) भाव विभोर होकर
(ब) गा – गाकर
उत्तर:
भाव विभोर होकर

व्याकरण:

उपसर्ग: शब्द से पहले जुड़कर उन शब्दों के अर्थ में परिवर्तन लाते हैं।
प्रत्ययः शब्द के अंत में जुड़कर उन शब्दों के अर्थ में परिवर्तन लाते हैं।
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम 1

प्रश्न 1.
समान अर्थवाले शब्द लिखिए:

  1. गाँव
  2. सुंदर
  3. प्रेम
  4. घर
  5. बच्चा
  6. आँख
  7. हमेशा
  8. शादी
  9. फायदा
  10. अचानक
  11. मदद

उत्तरः

  1. ग्राम
  2. खूबसूरत
  3. प्यार
  4. गृह
  5. बालक
  6. नेत्र
  7. हरदम
  8. विवाह
  9. नफा
  10. एकाएक
  11. सहायता

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

प्रश्न 7.
विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखिए:

  1. सुंदर
  2. दिन
  3. छोटा
  4. जवान
  5. फायदा
  6. अँधेरा
  7. अधिक
  8. रोना

उत्तर:

  1. कुरूप
  2. रात
  3. बड़ा
  4. बूढ़ा
  5. नुकसान
  6. उजाला
  7. कम
  8. हँसना

प्रश्न 8.
कहानी में आए प्रत्यय लगे शब्द ढूँढकर लिखिए:

  1. खेत
  2. कटना
  3. गृहस्थ
  4. आवश्यक

उत्तर:

  1. खेती
  2. कटाई
  3. गृहस्थी
  4. आवश्यकता

प्रश्न 9.
पाठ में आए योजक चिह्न (Hyphen) वाले शब्द लिखिए:
उत्तर:

  1. अलग – अलग
  2. लेटे – लेटे
  3. कुछ -न -कुछ
  4. बाल – बच्चेवाले
  5. धीरे – धीरे
  6. एक – दूसरे
  7. कहते – सुनते
  8. सुनते – सुनाते

प्रश्न 10.
निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग लगाइए:

  1. प्रेम
  2. दिन
  3. ज्ञान
  4. दृश्य
  5. पढ़
  6. डर
  7. पूर
  8. खबरी
  9. खुश
  10. वारिस

उत्तर:

  1. सप्रेम
  2. प्रतिदिन
  3. विज्ञान
  4. अदृश्य
  5. अनपढ़
  6. निडर
  7. भरपूर
  8. खुशखबरी
  9. नाखुश
  10. लावारिस

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

प्रश्न 11.
निम्नलिखित शब्दों में प्रत्यय लगाइए:

  1. भला
  2. उपज
  3. मीठा
  4. कटा
  5. बल
  6. मेल
  7. चट
  8. रेत
  9. पाँच
  10. चाँद

उत्तर:

  1. भलाई
  2. उपजाऊ
  3. मिठाई
  4. कटाई
  5. बलवान
  6. मेला
  7. चटनी
  8. रेतीला
  9. पाँचवाँ
  10. चाँदनी

प्रश्न 12.
प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए:
शब्द + प्रत्यय

  1. भला + ई = भलाई
  2. सोच + ना = सोचना
  3. गृहस्थ + ई = गृहस्थी
  4. शेर + नी = शेरनी
  5. मोर + नी = मोरनी
  6. टोकरा + ई = टोकरी
  7. बैंगन + ई = बैंगनी

उत्तर:

  1. भलाई
  2. सोचना
  3. गृहस्थी
  4. शेरनी
  5. मोरनी
  6. टोकरी
  7. बैंगनी

भाई-भाई का प्रेम Summary in Hindi

कहानी का सारांश:

प्रस्तुत पाठ दो भाइयों के आपसी प्रेम की कहानी है। इसी प्रेम के कारण वे एक-दूसरे की मदद करना चाहते हैं। उन्हें एक-दूसरे की मदद करने में बड़ा सुख मिलता है। जब हम दूसरे की मदद करते हैं, तब हमें बड़ी खुशी मिलती है। हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए। दूसरों को कुछ देने में जो खुशी मिलती है, उसे बताया नहीं जा सकता है। दोनों भाई एक-दूसरे को बिना जताए, सहायता करना चाहते हैं, लेकिन पकड़े जाते हैं और एक-दूसरे के गले लग जाते हैं।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 3 भाई-भाई का प्रेम

शब्दार्थ:

  1. उपजाऊ – कृषि के लिए उपयुक्त (fertile)
  2. अधिकांश – ज्यादातर (extensively)
  3. भलाई – नेकी, अच्छाई (betterment)
  4. कटाई – फसल को काटना (cutting)
  5. फसल – खेत में लगे अनाज के पौधे (crop)
  6. गृहस्थी – घर-बार (household)
  7. खलिहान – कटी हुई फसल रखने का स्थान (barn)
  8. गठरी – कपड़े में बँधा हुआ सामान (bundle)
  9. ढेर – इकट्ठा किया गया, जमाव (heap)
  10. वातावरण – परिस्थिति (environment)
  11. अचानक – एकाएक (suddenly)
  12. भाव-विभोर – प्रेम से (overwelmed)
  13. किसान – (farmer)

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Sanskrit Solutions Anand Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

Sanskrit Anand Std 9 Digest Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः Textbook Questions and Answers

भाषाभ्यास:

श्लोकः 1

1. एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न अ.
विपर्ययः कस्मिन् शब्दे दृश्यते ?
उत्तरम् :
विपर्ययः ‘साक्षराः’ इति पदे दृश्यते।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

प्रश्न आ.
विपर्यय: कस्मिन् शब्दे न दृश्यते ?
उत्तरम् :
विपर्ययः ‘सरस’ इति पदे न दृश्यते।

प्रश्न इ.
मानवाः कीदृशाः भवेयुः?
उत्तरम् :
मानवा: साक्षराः भवेयुः।

प्रश्न ई.
मानवाः कीदृशाः न भवेयु:?
उत्तरम् :
मानवा: राक्षसाः न भवेयुः।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

2. समानार्थकशब्द लिखत ।
राक्षसः, सरसः

प्रश्न 1.
समानार्थकशब्द लिखत ।
राक्षसः, सरसः
उत्तरम् :

  • राक्षस: – असुरः।
  • सरस: – रसपूर्णः।

3. सन्धिविग्रहं कुरुत।

प्रश्न 1.
अ) विपरीतोऽपि = …………..
आ) विपरीताश्चेत् = प्रलोकः
उत्तरम् :
अ) विपरीतोऽपि – विपरीतः + अपि।
आ) विपरीताश्चेत् – विपरीताः + चेत्।

श्लोक: 2.

1. एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न अ.
वृक्षाग्रवासी कः?
उत्तरम् :
पक्षिराजः वृक्षाग्रवासी।नारिकेलं वृक्षाग्रवासी।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

प्रश्न आ.
कः पक्षिराजः?
उत्तरम् :
गरुडः पक्षिराजः अस्ति ।

प्रश्न इ.
क: त्रिनेत्रधारी?
उत्तरम् :
शङ्करः त्रिनेत्रधारी। नारिकेलं त्रिनेत्रधारी।

प्रश्न ई.
कः शूलपाणिः ?
उत्तरम् :
शङ्करः शूलपाणिः।

प्रश्न उ.
क: जलं बिभर्ति ?
उत्तरम् :
घट: मेघः च जलं बिभर्तः। नारिकेलं जलं बिभर्ति।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

प्रश्न ऊ.
कः त्वम्वस्त्रं धारयति ?
उत्तरम् :
सिद्धयोगी त्वम्वस्त्र धारयति। नारिकेलं त्वग्वस्वं धारयति।

2. शब्दसमूहस्य कृते एकं संक्षेपशब्द लिखत ।

प्रश्न 1.
अ) यः वृक्षस्य अग्रभागे निवसति – ……………
आ) पक्षिणां राजा – ……………
इ) यस्य त्रीणि नेत्राणि – …………..
ई) शूलं पाणौ यस्य सः – ……………
उ) यः त्वग्वस्त्रं धारयति – …………….
उत्तरम् :
अ) यः वृक्षस्य अग्रभागे निवसति – वृक्षाग्रवासी।
आ) पक्षिणां राजा – पक्षिराजः।
इ) यस्य त्रीणि नेत्राणि – त्रिनेत्रधारी।
ई) शूलं पाणौ यस्य सः – शूलपाणिः।
उ) य: त्वग्वस्त्रं धारयति . त्वग्वस्त्रधारी।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

3. योग्यं पर्यायं चिनुत –

प्रश्न 1.
अ. पक्षिराजः वृक्षाग्रे (वसति/न वसति)।
आ. घटः त्रीणि नेत्राणि (धारयति/न धारयति)।
इ. शूलपाणिः जलं (बिभर्ति न बिभर्ति)।
ई. नारिकेलं त्वग्वस्त्रं (धारयति/न धारयति)।
उत्तरम् :
अ. पक्षिराज: वृक्षाग्रे वसति।
आ. घट: त्रीणि नेत्राणि न धारयति।
इ. शूलपाणि: जलं न बिभर्ति।
ई. नारिकेलं त्वग्वस्वं धारयति।

4. समानार्थकशब्दयुग्मं चिनुत लिखत च।
पक्षिराजः, शूलपाणिः, जलम्, मेघः, शङ्करः, वृक्षः, सिद्धयोगी, गरुडः, तरुः, तोयम्, जलदः, तपस्वी।

प्रश्न 1.
पक्षिराजः, शूलपाणिः, जलम्, मेघः, शङ्करः, वृक्षः, सिद्धयोगी, गरुडः, तरुः, तोयम्, जलदः, तपस्वी।
उत्तरम् :

  • पक्षिराज: – गरुडः।
  • शूलपाणिः – शङ्करः।
  • जलम् – तोयम्।
  • मेष: – जलदः।
  • वृक्षः – तरुः।
  • सिद्धयोगी – तपस्वी।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

श्लोकः 3.

1. कः कं वदति? ‘पत्रं लिख।’

प्रश्न 1.
कः कं वदति? ‘पत्रं लिख।’
उत्तरम् :
पिता पुत्रं वदति।

2. एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न अ.
केन आज्ञा दत्ता?
उत्तरम् :
तातेन आज्ञा दत्ता।

प्रश्न आ.
केन आज्ञा न लजिता ।
उत्तरम् :
पुत्रेण आज्ञा न लङ्घिता।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

प्रश्न इ.
पत्रं केन लिखितम् ?
उत्तरम् :
पुत्रेण पत्रं लिखितम्।

3. विशेषण-विशेष्य-अन्वितिं पूरयत ।

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः 1
उत्तरम् :
1. कथितः
2. पत्रम्

4. सन्धिविग्रहं कुरुत।

प्रश्न 1.
ममाज्ञया, पितुराज्ञा
उत्तरम् :

  • ममाज्ञया – मम + आज्ञया।
  • पितुराज्ञा – पितुः + आज्ञा।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

5. श्लोकात् ‘क्त’ प्रत्ययान्तरूपाणि (क.भू.धा.वि.)
चिनुत लिखत च।

प्रश्न 1.
श्लोकात् ‘क्त’ प्रत्ययान्तरूपाणि (क.भू.धा.वि.)
चिनुत लिखत च।
उत्तरम् :

  1. कथितम्
  2. लिखितम्
  3. लक्षिता

श्लोकः 4.

1. क्रमानुसारं रचयत।

प्रश्न 1.
अ. त्रि-अक्षरयुक्ते शब्दे ‘य’ मध्ये तिष्ठति ।
आ. शब्दस्य आरम्भे ‘न’ विद्यते।
इ. शब्दस्य अन्ते अपि ‘न’ विद्यते।
उत्तरम् :
आ. शब्दस्य आरम्भे ‘न’ विद्यते,
अ. त्रि-अक्षरयुक्ते शब्दे ‘य’ मध्ये तिष्ठति।
इ. शब्दस्य अन्ते अपि ‘न’ विद्यते।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

2. प्राप्तम् उत्तरम्  – [ ] [ ] [ ]

प्रश्न 1.
प्राप्तम् उत्तरम्  – [ ] [ ] [ ]

3. सन्धिं कुरुत।

प्रश्न 1.
अ. तस्य + आदिः (अ + आ) ………….
आ. तस्य + अन्तः (अ + अ) ………..
इ. तव + अपि (अ + अ) ………..
ई. अपि + अस्ति (इ + अ) ……….
उत्तरम् :
अ. तस्यादिर्न – तस्य + आदि: + न।
आ. तस्यान्तः – तस्य + अन्तः।
इ. तवाप्यस्ति – तव + अपि + अस्ति।
ई. ममाप्यस्ति – मम + अपि + अस्ति।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

4. श्लोकात् षष्ठ्यन्तपदानि चिनुत लिखत च।

प्रश्न 1.
श्लोकात् षष्ठ्यन्तपदानि चिनुत लिखत च।

श्लोकः 5.

1. एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न अ.
कस्याः नद्याः वर्णनं सुभाषिते वर्तते?
उत्तरम् :
गङ्गानद्या: वर्णनं सुभषिते वर्तते।

प्रश्न आ.
शतचन्द्रं नभस्तलं कुत्र शोभते ?
उत्तरम् :
गढ़ानद्या: चञ्चलतरे वारिणि शतचन्द्रं नभस्तलं शोभते।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

2. विशेषणैः जालरेखाचित्रं पूरयत ।

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः 2

उत्तरम् :

  1. प्रतिबिम्बितम्
  2. शतचन्द्रम्
  3. तारकायुक्तम्

3. विशेषणं लिखत।

प्रश्न 1.
विशेषणं लिखत।
1. …………. वारिणि।
2. ……………नभस्तलम्।
उत्तरम् :
1. चञ्जलतरे वारिणि।
2. तारकायुक्तम् नभस्तलम्।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

4. गङ्गा इति शब्दस्य अमरपङ्क्तिं लिखत।

प्रश्न 1.
गङ्गा इति शब्दस्य अमरपङ्क्तिं लिखत।
उत्तरम् :
गङ्गा – जाह्नवी, भागीरथी जहुतनया, विष्णुपदी।

Sanskrit Anand Class 9 Textbook Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः Additional Important Questions and Answers

एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
सरसत्वं कदा न मुञ्चति?
उत्तरम् :
‘सरस’ इति पदस्य अक्षराणां क्रम: विपरीतं क्रियते चेत् अपि तस्य सरसत्वं न मुञ्चति।

प्रश्न 2.
‘साक्षरा’ इति पदं विपरीतं क्रियते चेत् किं भवति?
उत्तरम् :
‘साक्षरा’ इति पदं विपरीतं क्रियते चेत् ‘राक्षसा’ इति भवति।

प्रश्न 3.
गङ्गायाः वारिणि किं शोभते?
उत्तरम् :
गङ्गायाः वारिणि तारकायुक्तं शतचन्द्रं नभस्तलं शोभते।

प्रश्न 4.
मृगाः किं खादन्ति?
उत्तरम् :
मृगाः तृणानि खादन्ति।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

प्रश्न 5.
मीनाः कुत्र विहरन्ति?
उत्तरम् :
मीनाः जले विहरन्ति।

प्रश्न 6.
सज्जनानां का वृत्तिः?
उत्तरम् :
सन्तोषः इति सज्जनानां वत्तिः।

प्रश्न 7.
अस्याः प्रहेलिकाया: उत्तरं किम् ?
उत्तरम् :
‘नयन’ इति अस्याः प्रहेलिकायाः

प्रश्न 8.
पुत्रेण कस्य आज्ञा न लचिता?
उत्तरम् :
पुत्रेण पितु: आज्ञा न लड़िता।

प्रश्न 9.
कुरङ्गः किं न ईक्षते?
उत्तरम् :
कुरङ्गः धनिनां वक्त्रं न ईक्षते।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

प्रश्न 10.
कुरङ्गः किं न शृणोति?
उत्तरम् :
कुरङ्ग: गर्ववचः न शृणोति।

प्रश्न 11.
कुरङ्गः किं खादति?
उत्तरम् :
कुरङ्गः बालतृणानि खादति।

प्रश्न 12.
कुरङ्गः किं न बूते?
उत्तरम् :
कुरङ्गः मृषा चाटून् न बूते।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

लकारं लिखत।

  • मुशति – मुच्-मुक् धातुः षष्ठगण: उभयपदम् अत्र परस्मैपदं लट्लकार : प्रथमपुरुष: एकवचनम्।
  • ईक्षसे – ईक्ष् धातुः प्रथमगण; आत्मनेपदं लट्लकार: मध्यमपुरुषः एकवचनम्।
  • खादसि – खाद् धातुः प्रथमगणः परस्मैपदं लट्लकार: मध्यमपुरुष: एकवचनम्।
  • पे – दूधातुः द्वितीयगण: उभयपदम् अत्र आत्मनेपदं लट्लकार: मध्यमपुरुष: एकवचनम्।
  • शृणोषि – शु धातुः पञ्चमगणः परस्मैपदं लट्लकार: मध्यमपुरुष: एकवचनम्।
  • धावसि – धाव् धातुः प्रथमगणः परस्मैपदं लट्लकार: मध्यमपुरुषः एकवचनम्।
  • शोभते – शुभ् धातुः प्रथमगण: आत्मनेपदं लट्लकार: प्रथमपुरुषः एकवचनम्
  • तिष्ठति – ‘स्था-तिष्ठ्’ धातुः प्रथमगण: परस्मैपदं लट्लकार: प्रथमपुरुषः एकवचनम्।
  • जानाति – ‘ज्ञा’ धातुः नवमगण: उभयपदम् अत्र परस्मैपदं लट्लकार: प्रथमपुरुष: एकवचनम्।
  • लिख – लिख् धातुः षष्ठगणः परस्मैपद लोट्लकार: मध्यमपुरुष: एकवचनम्

विभक्त्यन्तपदानि।

  • प्रथमा – वृक्षाप्रवासी, पक्षिराजः, त्रिनेत्रधारी, त्वग्वसधारी, सिद्धयोगी, घटः, मेघः, वैरिणः, पिशुनाः, तृणम्, जलम्, सन्तोषः, प्रतिबिम्बितम्, तारकायुक्तम्, शतचन्द्रम्, नभस्तलम्।
  • द्वितीया – वक्त्रम्, चाटून, तान, बालतृणानि।
  • तृतीया – आशया, भवता।
  • षष्ठी – सज्जनानाम्, वृत्तीनाम्, धनिनाम्, एषाम्।
  • सप्तमी – जगति, चञ्चलतरे, वारिणि।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

प्रश्ननिर्माणं कुरुत।

प्रश्न 1.

  1. पितुः आज्ञा न लाविता।
  2. पत्रं लिख।
  3. बालतृणानि खादसि।
  4. त्वं मृषा चाटून् न बूषे।
  5. तारकायुक्तं शतचन्द्रं नभस्तलं शोभते।
  6. गङ्गायाः वारिणि नभस्तलं प्रतिबिम्बितम्।

उत्तरम् :

  1. कस्य आज्ञा न लविता?
  2. किं लिख?
  3. त्वं किं खादसि?
  4. त्वं किं न बूषे?
  5. कीदृशं नभस्तलं शोभते?
  6. नभस्तलं कुत्र प्रतिबिम्बितम्?

पद्यांशं पठित्वा जालरेखाचित्रं पूरयत।

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः 3
उत्तरम् :
1. राक्षसाः
2. सरस

प्रश्न 2.
Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः 4
उत्तरम् :

  1. वक्षाग्रवासी
  2. जलं बिभ्रन्
  3. त्वग्वस्त्रधारी
  4. त्रिनेत्रधारी

प्रश्न 3.
Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः 5.1
उत्तरम् :

  1. प्रतिबिम्बितम्
  2. शतचन्द्रम्
  3. तारकायुक्तम्

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

समानार्थकशब्दं योजयित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

  1. पुत्र – पत्रं लिख। तनय, पत्रं लिख।
  2. नभस् – नभः शोभते। गगनं शोभते।
  3. वैरिन – जगति वैरी निष्कारणम् अस्ति। जगति शत्रुः निष्कारणम् अस्ति।

व्याकरणम् :

शब्दानां पृथक्करणम्

नामसर्वनामक्रियापदम्विशेषणम्
पक्षिराजः, मेघःतेन, यःमुञ्चतिसाक्षराः, त्रिनेत्रधारी
शूलपाणिः, तातेनतस्यतिष्ठतिसरसः, कथितः
सिद्धयोगी, पितुःसःअस्तिवृक्षाग्रवासी, लिखितम्
जलम्, वारिणितव – तेजानातिबिभ्रन्, प्रतिबिम्बितम्
घटः, नभः, गङ्गायाःमम – मेशोभतेत्वग्वस्त्रधारी, शतचन्द्रम्
लिखतारकायुक्तम्, चञ्चलतरे

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

काव्यशास्त्रविनोदः Summary in Marathi and English

प्रस्तावना :

काव्यशास्त्रविनोद म्हणजे काव्य आणि शास्त्र यांच्याद्वारे केलेले मनोरंजन.
हा शब्द –
‘काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्।
व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा।।’
या श्लोकात आला आहे. याचा अर्थ असा – बुद्धिमान लोक काव्य आणि शास्त्र यांद्वारे मनोरंजन करण्यात वेळ वापरतात. तर मूर्ख लोक व्यसन, झोप, भांडण यांत वेळ घालवतात. संस्कृत भाषा सुभाषितांनी नटलेली आहे. काही सुभाषिते इतकी चमत्कृतीपूर्ण असतात की ती समजण्यासाठी आपल्या बुद्धीला ताण द्यावा लागतो. ती सुभाषिते समजायला अवघड असली तरी मनोरंजकसुद्धा असतात.
टीप : – या पद्यातील श्लोक हे माध्यमभाषेत भाषांतरासाठी आहेत आणि त्यांचे स्पष्टीकरणसुद्धा अपेक्षित आहे.

काव्यशास्त्रविनोद means amusement derived from poetry and science. This phrase is a part of the shlok
‘काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्।
व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा।।’
This means wise people spend their time in deriving amusment through poetry and scriptures but foolish spend their time in addiction, sleep or quarrel. We know that Sanskrit abounds in subhashitas.

Some Subhashitas are so marvellous that understanding them requires us to tickle over brain cells. These are not only challenging but also amusing at times. Note:- These shlokas are for writing the meaning in medium of answer and explanation to them is also expected.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

श्लोकः – 1

साक्षरा …………….. मुञ्चति ।।1।।
श्लोकः : साक्षरा विपरीताश्चेद् राक्षसा एव केवलम्।
सरसो विपरीतोऽपि सरसत्वं न मुञ्चति ।।1।।
स्पष्टीकरणम् : साक्षरा: इति पदं विपरीतक्रमेण पठितं चेत् ‘राक्षसाः’ इति भवति। परं ‘सरसः’ इति पदं यथानुक्रमं वा विपरीतक्रमेण पठितं चेत् ‘सरसः’ इत्येव भवति। अत्र कविकल्पना एवं कविकौशलं विभाति।

अनुवादः

‘साक्षर’ हा शब्द उलट केला तर ‘राक्षस’ असा होतो. पण ‘सरस’ हा शब्द उलट केला तरी तो त्याचा सरसपणा सोडत नाही.
स्पष्टीकरण – ‘साक्षर’ मनुष्य जर विपरीत असेल तर तो राक्षसाप्रमाणे वागतो. म्हणजे तो त्याच्या ज्ञानाचा विपरीत वापर करून विघातक कृत्य करतो. पण ‘सरस’ म्हणजे उत्तम प्रवृत्तीचा मनुष्य संवेदनशील असतो. त्याचे वर्तन सरळ अथवा विपरीत परिस्थितीमध्ये सुद्धा बदलणार नाही.

The word ‘साक्षराः’ (literate) if reversed, becomes ‘राक्षसा:’ that is demons. But the word ‘सरस’ which means sensitive or filled with emotion doesn’t leave its sensitivity though reversed.

Explanation – This is poetic imagination which itself is the creativity of the poet. The poet says those who have only bookish knowledge whom we refer to as ‘pothi pandits’ if he is rubbed the wrong way will become evil like demons. Just as intelligent man has created weapons using science which is the wrong usage of knowledge.

On the other hand, a connoisseur is sensitive and even in difficult conditions, he still remains happy, because the word Rasa means आनंद i.e happiness, Rasika is always happy and also makes others happy.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

श्लोकः – 2

वृक्षाग्रवासी ………….. न मेघः।
श्लोकः : वृक्षानवासी न च पक्षिराज:
त्रिनेत्रधारी न च शूलपाणिः।
त्वग्वत्रधारी न च सिद्धयोगी
जलं च विभन्न घटोन मेघः।।

स्पष्टीकरणम् : सः वृक्षस्य अग्रे वसति किन्तु पक्षिराजः गरुडः न। तस्य त्रीणि नेत्राणि सन्ति किन्तु सः शूलपाणिः शङ्कर: न। सः वल्कलसदृशं वस्त्रं धारयति किन्तु स: सिद्धयोगी न। सः जलं धारयति किन्तु सः न घटः न च मेषः। अस्य उत्तरं वर्तते नारिकेलफलम्।

अनुवादः

तो वृक्षाच्या टोकावर राहतो पण पक्षीराज (गरुड) नाही. तीन डोळे आहेत पण शंकर नाही. वल्कले धारण करतो पण योगी नाही. पाणी धारण करतो पण घडा नाही व ढगही नाही.

स्पष्टीकरण – हे सुभाषित प्रहेलिका प्रकारातील आहे. प्रहेलिका म्हणजे कोडे. या कोड्याचे उत्तर आहे नारळ, नारळ झाडाच्या टोकावर असतो. त्याला तीन डोळे असतात, त्याला शेंडी असते आणि आत पाणी असते.

It lives on the top of the tree but is not the king of birds (garuda/eagle). It has three eyes but is not the one who holds the Trident (Shiva). It wears barkgarments but is not an accomplished ascetic (yogi), and it holds water but is neither a pot nor a cloud.

Explanation – This is a riddle or prahelika the answer to which is a coconut. A coconut grows on the top of the tree, it has three eyes below the tuft of coir on top, it has bark garments which is the coin and it has water in it.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

श्लोकः – 3

तातेन ……………… लड़िता।।3।।
श्लोकः : तातेन कथितं पुत्र पत्रं लिख ममाज्ञया।
न तेन लिखित पत्रं पितुराज्ञा न लड्डिता ।।3।।
स्पष्टीकरणम् : तातेन कथितं, “हे पुत्र, मम आज्ञया पत्रं लिख।” तेन पुत्रेण पत्रं न लिखितम्। तथापि पितुः आशा न लकिता। अर्थसङ्गतिः न दृश्यते। यदि ‘न तेन’ इति एकपदं क्रियते ‘नतेन’ इति पदेन अर्थबोधः भवति। नतेन नाम नमस्वभावेन पुत्रेण पत्रं लिखितम्। अपि च पितुः आज्ञा न लविता।

अनुवादः

वडिलांनी मुलाला सांगितले ‘माझ्या आज्ञेने पत्र लिही!’ त्याने पत्र लिहिले नाही आणि वडिलांची आज्ञा मोडली नाही. स्पष्टीकरण – हा श्लोक ‘कूटश्लोक’ या सुभाषितप्रकाराचे उदाहरण आहे. ‘न तेन’ हा शब्द एकत्र ‘नतेन’ असा वाचला तर ‘त्या नम्र मुलाने’ असा अर्थ होतो. संस्कृत भाषेमधील विभक्तिप्रत्यय व शब्द चमत्कृती येथे दिसून येते.

The father said, “O son, write a letter by my order. He did not write the letter nor did he disobey the father’s order.
Explanation – In this shloka the word has to be read as one word ‘1’ which means ‘by the modest one.’ So, the son who was modest wrote the letter and therefore did not disobey the father’s order. This is an example of a कूटश्लोक.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

श्लोकः – 4

न तस्यादिर्न ……………. स पण्डितः।
श्लोकः : न तस्यादिर्न तस्यान्त; यो मध्ये तस्य तिष्ठति।
तवाप्यस्ति ममाप्यस्ति यो जानाति स पण्डितः ।।4।।
स्पष्टीकरणम् : कूटप्रश्न: अयम्।
अस्य उत्तरम् – तस्य आदिः न , तस्य अन्त:न, तस्य मध्ये यः तिष्ठति (तत्) तव अपि अस्ति, मम अपि अस्ति।

अनुवादः

त्याच्या सुरुवातीला ‘न’, त्याच्या शेवटी ‘न’ वमध्ये ‘य’ आहे. तुझ्याकडेही आहे. माझ्याकडेही आहे. जो जाणतो तो पंडित आहे.
स्पष्टीकरण – हा सुभाषिताचा ‘कूटप्रश्न’ प्रकार आहे. ‘नयन’ हे त्याचे उत्तर आहे. कारण यात ‘न’ हे अक्षर सुरुवातीला आणि शेवटी येते तसेच ‘य’ हे अक्षर मध्ये येते.

It doesn’t have a beginning nor does it have an end and it stays in the middle. You too have it and I too have it, the one who knows this is a scholar. Explanation – This is an example of prahelika where the answer is ‘नयन’ means eye’. ‘न’ is at the beginning ‘न’ is at the end and ‘य’ is in the middle which is ‘नयन’.

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श्लोक: – 5

गङ्गायाश्चञ्चलतरे ………………. नभस्तलम्।।6।।
श्लोकः : गङ्गायाश्चलतरे वारिणि प्रतिबिम्बितम्।
शोभते तारकायुक्तं शतचन्द्रं नभस्तलम् ।।6।।
स्पष्टीकरणम् । गङ्गायाशजलतरे वारिणि प्रतिबिम्बितम् तारकायुक्तं शतचन्द्र नभस्तलम् शोभते। शतचन्द्र नभस्तलम्। इति काचन समस्या वर्तते। आकाशे चन्द्राणां शतं कथं शक्यते? इत्येषा समस्या।
समस्यापूर्तिः- गङ्गानद्याः जलं कल्लोलयुक्त विद्यते। यदा गगने तारकाः चन्द्रमा: च विलसन्ति तदा चन्द्रमसः शतं प्रतिबिम्बानि गङ्गानद्याः जले दृश्यन्ते । तदा कवि: कल्पनां करोति, ‘नभः शतचन्द्रम्’ इव दृश्यते।

अनुवादः

गंगेच्या चंचल पाण्यामध्ये प्रतिबिंबित झालेले आकाश जणू काही चांदण्यांनी व शेकडो चंद्रांनी युक्त असल्याप्रमाणे शोभून दिसत आहे.
स्पष्टीकरण – ही समस्यापूर्ती आहे. ‘शतचन्द्रं नभस्तलम्’ ही समस्या म्हणजे कोडे आहे. त्याचे उत्तर कवी असे देतो, आकाशात तर शंभर चंद्र असणे शक्य नाही, पण गंगेच्या लाटांवर जेव्हा चांदण्या व चंद्राने भरलेल्या आकाशाचे प्रतिबिंब पडते तेव्हा एकाचवेळी पाण्यात असंख्य चंद्र असल्याचे (पडल्याचे) भासते.

Hundred moons look beautiful along with stars in the sky reflected in the trembling waters of the Ganga.

Explanation – This shloka is an example of समस्यापूर्त where the last part ‘शतचन्द्रं नभस्तलम्’ is given and poets have to compose a shloka to make it meaningful. Now, this is really not possible.

So, to justify this sentence, the poet very beautifully says that the reflection of the moon is seen in the shaking waters of Ganga and this appears as if there are hundreds of moons. The reflection of the moon in the sky with many stars when seen in the trembling river water makes one see hundred moons.

सन्धिविग्रहः

  • घटोन – घट: + न।
  • यो मध्ये – यः + मध्ये।
  • गङ्गायाश्चञ्चलतरे – गङ्गायाः + चलतरे।
  • नभस्तलम् – नभः + तलम्।
  • मुहुरीक्षसे – मुहुः + ईक्षसे।
  • तन्मे – तद् + मे।
  • नैषाम् – न + एषाम्।
  • यद्वक्त्रम् – यत् + वक्वम्।

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समानार्थकशब्दाः

  1. तपः – तपस्या।
  2. दानव: – दैत्यः ।
  3. धनी – धनिक्, श्रीमत्, बहुधनः ।
  4. वच: – वाणी, भाषा।
  5. वारि – जलम, तोयम, आपः।
  6. तारका – नक्षत्रम्, तारा, ज्योतिः।
  7. चन्द्रः – हिमांशुः, इन्दुः, विधुः, सुधांशुः, सोमः ।
  8. तृणानि – शष्याणि।
  9. संतोषः – तुष्टिः।
  10. मीन: – मत्स्यः ।
  11. पिशुन: – दुर्जनः।
  12. लुब्धक: – व्याधः।
  13. सज्जनः – सुजनः, सत्पुरुष।
  14. वैरिणः – शत्रवः, रिपवः।
  15. कुरङ्ग – मृगः, हरिणः, सारङ्गः।
  16. पण्डितः – ज्ञानी, विद्वान्।
  17. तातः – पिता, जनक:
  18. पुत्रः – तनयः, सूनुः आत्मजः

विरुद्धार्थकशब्दाः

  • चञ्चलम् × स्थिरम्।
  • आदिः × अन्तः
  • पण्डित: × मूढः।
  • नतः × गर्विष्ठः, उध्दतः।
  • विपरीत: × सरलः।
  • सरस: × नीरसः।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 10 काव्यशास्त्रविनोदः

शब्दार्थाः

  1. विपरीत – reverse order – उलट क्रमाने
  2. मुञ्चति – does not leave – सोडत नाही
  3. सरसत्वम् – best qualities – रसिकता, रसाळपणा
  4. साक्षरा: – literate – साक्षर
  5. राक्षसा: – demons – दानव
  6. चेत् – if – जर
  7. वृक्षाग्रवासी – one who resides on top of the tree – वृक्षाच्या टोकावर राहणारा
  8. पक्षिराज: – king of birds, eagle – पक्ष्यांचा राजा, गरुड
  9. त्रिनेत्रधारी: – I having three eyes, Shiva – तीन डोळे असणारा, शंकर
  10. सिद्धयोगी – ascetic – योगी
  11. शूलपाणि: – the one who holds त्रिशूल in hand – त्रिशूलधारी (शंकर)
  12. त्वग्वस्त्रम् – clothes of bark – वल्कल
  13. घट: – pot – घडा
  14. मेघः – cloud – ढग
  15. बिभ्रत् – holds – धारण करणारा
  16. तात: – father – वडील
  17. आज्ञया – by order – आज्ञेवरून
  18. पत्रम् – letter – पत्र
  19. लहिता – crossed – मोडली
  20. आदिः – beginning – सुरुवात
  21. अन्त – end – शेवट
  22. मध्ये – in the middle – मध्ये
  23. जानाति – knows – जाणतो
  24. पण्डित: – intelligent, scholar – हुशार
  25. तिष्ठति – stands – राहते
  26. मृगः – deer – हरीण
  27. सज्जनः – good person – सज्जन
  28. मीन: – fish – मासा
  29. लुब्धकः – hunter – शिकारी
  30. ग्धीवरः – fisherman – कोळी
  31. पिशुन: – wicked – दुर्जन
  32. निष्कारण – without reason – निष्कारण
  33. जगति – in the world – ह्या जगात
  34. वैरिणः – foes, enemies – शत्रु
  35. चञ्चल – unsteady – चंचल, हलणारे
  36. प्रतिबिम्बित – reflected – प्रतिबिंबित झालेले
  37. तारकायुक्त – full of stars – चांदण्यानी युक्त
  38. नभः – sky – आकाश

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 2 जीवन

Balbharti Maharashtra State Board Class 5 Hindi Solutions Sulabhbharati Chapter 2 जीवन Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 5 Hindi Sulabhbharati Solutions Chapter 2 जीवन

5th Standard Hindi Digest Chapter 2 जीवन Textbook Questions and Answers

1. पढ़ो और गाओ

प्रश्न 1.
अपनी दिनचर्या बनाओ और सुनाओ ।

प्रश्न 2.
तुम्हारी माँ तुम्हारे लिए क्या-क्या करती हैं, बताओ।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 2 जीवन

Hindi Sulabhbharati Class 5 Solutions Chapter 2 जीवन Additional Important Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1.
आप सुबह कितने बजे उठते हैं?
उत्तर:
हम सुबह छह बजे उठते हैं।

प्रश्न 2.
आपके पिताजी दफ्तर कितने बजे जाते हैं?
उत्तर:
मेरे पिताजी सुबह सात बजे दफ्तर जाते हैं।

प्रश्न 3.
आपकी माँ आपके लिए क्या-क्या करती हैं, बताओ?
उत्तर:
हमारी माँ हमारे लिए खाना बनाती हैं। हमें स्कूल के लिए तैयार करती हैं। जब हम बीमार होते हैं, तब हमारा ध्यान रखती हैं।

प्रश्न 4.
हमें क्या करने से पद और नाम मिलता है?
उत्तर:
हमें मेहनत करने से पद और नाम मिलता है।

प्रश्न 5.
हमें सबको दिल से क्या करना चाहिए?
उत्तर:
हमें सबको दिल से प्रणाम करना चाहिए।

प्रश्न 6.
क्या आपकी माताजी दफ्तर जाती हैं?
उत्तर:
मेरी माताजी दफ्तर नहीं जाती हैं, वे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जाती हैं।

प्रश्न 7.
आपका परिवार एकल है या संयुक्त?
उत्तर:
हमारा परिवार संयुक्त परिवार है।

प्रश्न 8.
हमें कैसे काम करना चाहिए?
उत्तर:
हमें मिल-जुलकर काम करना चाहिए।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 2 जीवन

प्रश्न 9.
हमें सबको कैसा मानना चाहिए?
उत्तर:
हमें सबको अपने जैसा मानना चाहिए।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए:

प्रश्न 1.
जीवन किसका नाम है?
उत्तर:
जीवन चलने का नाम है।

प्रश्न 2.
हमें क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर:
हमें कभी विश्राम नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 3.
आसमान का हृदय कैसा है?
उत्तर:
आसमान का हृदय विशाल है।

प्रश्न 4.
मीठी बोली किसके जैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
मीठी बोली माँ के जैसी होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
मन में कैसे विचार होने चाहिए?
उत्तर:
मन में सच्चे, उच्च विचार होने चाहिए।

प्रश्न 6.
जो हमेशा चलता है, उसे क्या मिलता है?
उत्तर:
जो हमेशा चलता है, उसे पद और नाम मिलता है।

प्रश्न 7.
प्रकृति के किन तत्वों से हमें चलने की प्रेरणा मिलती है?
उत्तरः
प्रकृति के सूरज, नदी, धरती, आसमान सभी से हमें चलने की प्रेरणा मिलती है।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 2 जीवन

प्रश्न 8.
हमेशा चलने का अर्थ क्या है?
उत्तर:
हमें हमेशा कुछ ना कुछ कार्य करते रहना चाहिए।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए:

प्रश्न 1.
हमें सागर से क्या सीखना चाहिए?
उत्तर:
लहराना।

प्रश्न 2.
हमें किसके जैसा सहनशील बनना चाहिए?
उत्तर:
धरती।

प्रश्न 3.
कौन रुकने का नाम नहीं लेता?
उत्तर:
घड़ी।

प्रश्न 4.
हमें किसके जैसा ऊपर उठना चाहिए?
उत्तर:
सूरज।

प्रश्न 5.
हमें कण-कण में क्या देखना चाहिए?
उत्तर:
अपनत्व।

प्रश्न 6.
छात्रों को हमेशा किस पर ध्यान देना चाहिए?
उत्तर:
पढ़ाई पर।

प्रश्न 7.
हमेशा कार्य करने से क्या नहीं आएँगी?
उत्तर:
कठिनाइयाँ।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 2 जीवन

4. निम्नलिखित पंक्तियों को पूर्ण कीजिए:

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों को पूर्ण कीजिए:
1. घड़ी सदा ……………..
………….. नहीं लेती नाम,
2. जो चलता …………………
मेहनत कर …………………
3. माँ जैसी …………………..
…………………… उच्च विचार।
4. जीवन है ……….
…………. नहीं विश्राम।।
उत्तर:
1. टिक-टिक करती,
रुकने का
2. वह आगे बढ़ता,
पाता पद नाम
3. हो मीठी बोली,
मन में सच्चे
4. चलने का नाम।
करना कभी

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

  1. जीवन है …………. का नाम।
  2. लहराना ……………. से सीखो।
  3. सहनशील बन …………… जैसे।
  4. माँ जैसी हो ……………. बोली।
  5. करना कभी नहीं …………….

उत्तर:

  1. चलने
  2. सागर
  3. धरती
  4. मीठी
  5. विश्राम

प्रश्न 6.
इस कविता में घड़ी, सूरज, सागर, धरती सबसे हमने कुछ सीखा है। कुछ अन्य चीज़ों या लोगों के बारे में लिखो, जो हमें कुछ ना कुछ सिखाते हैं: (नदी, महान व्यक्ति, पेड़)
उत्तर:
नदी – हमेशा बहती रहती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, इसलिए हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना है।
महान व्यक्ति – इनसे हम सीखते हैं , किस प्रकार अच्छे कार्य करके नाम कमाना चाहिए।
पेड़ – पेड़ अपना फल खुद नहीं खाते। अपनी छाया में खुद
नहीं बैठते। इसी तरह हमें भी दूसरों के काम आना चाहिए।

प्रश्न 7.
उचित जोड़ियाँ मिलाइए:

(अ)(ब)
1. मोहनदास करमचंद गाँधी(क) मिसाइल मैन ऑफ इंडिया
2. सरदार वल्लभ भाई पटेल(ख) बर्ड मैन ऑफ इंडिया
3. सालिम अली(ग) लौह पुरुष
4. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम(घ) महात्मा, बापूजी

उत्तर:

(अ)(ब)
1. मोहनदास करमचंद गाँधी(घ) महात्मा, बापूजी
2. सरदार वल्लभ भाई पटेल(ग) लौह पुरुष
3. सालिम अली(ख) बर्ड मैन ऑफ इंडिया
4. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम(क) मिसाइल मैन ऑफ इंडिया

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 2 जीवन

व्याकरण:

प्रश्न 1.
समान अर्थवाले शब्द लिखिए:

  1. जीवन
  2. विश्राम
  3. सदा
  4. अपनत्व
  5. प्रणाम
  6. विशाल
  7. धरती
  8. उच्च

उत्तर:

  1. ज़िंदगी
  2. आराम
  3. हमेशा
  4. अपनापन
  5. नमस्कार
  6. बड़ा
  7. भूमि
  8. ऊँचा

प्रश्न 2.
विपरीत अर्थवाले शब्द लिखिए:

  1. चलना
  2. आगे
  3. ऊपर
  4. मेहनती
  5. मीठा
  6. सच्चा
  7. उच्च
  8. विश्राम
  9. आसमान
  10. जाना

उत्तर:

  1. रुकना
  2. पीछे
  3. नीचे
  4. आलसी
  5. कड़वा
  6. झूठा
  7. निम्न
  8. परिश्रम
  9. ज़मीन
  10. आना

प्रश्न 3.
लयात्मक शब्द लिखिए:

  1. नाम
  2. बढ़ना
  3. प्रणाम
  4. विचार

उत्तर:

  1. काम
  2. पढ़ना
  3. सलाम
  4. प्रचार

प्रश्न 4.
शब्दों से वाक्य बनाइए:

  1. जीवन
  2. विश्राम
  3. घड़ी
  4. सूरज
  5. प्रणाम
  6. मेहनत

उत्तर:

  1. जीवन चलने का नाम है।
  2. हमें कभी भी विश्राम नहीं करना चाहिए।
  3. घड़ी हमें समय बताती है।
  4. सूरज से हमें रोशनी मिलती है।
  5. सभी को प्रणाम करना अच्छी आदत है।
  6. हमेशा मेहनत से हर काम करना चाहिए।

जीवन Summary in Hindi

कविता का भावार्थ:

प्रस्तुत कविता में जीवन जीने की कला के बारे में बताया गया है। जीवन सदा ही चलता रहता है, इसलिए हमें कभी विश्राम नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार घड़ी हमेशा टिक-टिक करती रहती है, उसी प्रकार हमें भी आगे बढ़ना है। सूरज के समान हमें ऊपर उठना चाहिए। हमें सागर की तरह लहराना और आसमान के जैसा विशाल हृदय रखना चाहिए। धरती की तरह सहनशील बनकर – मिलजुल कर काम करना चाहिए, क्योंकि जो चलता रहता है, वही आगे बढ़ता है। हमारी बोली माँ के समान मीठी होनी चाहिए। मन में सदैव उच्च विचार रहने चाहिए। हमें अपने समान ही सब को समझना चाहिए। हमारे मन में सदैव सेवा का भाव रहना चाहिए। हमें दूसरों की सहायता के लिये सदैव तत्पर रहना चाहिए। इस परिश्रम से हमें पीछे नहीं हटना चाहिए, तभी हमारा जीवन सार्थक होगा।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 2 जीवन

शब्दार्थ:

  1. विश्राम – आराम (rest)
  2. अपनत्व – अपनापन (belongingness)
  3. विशाल – बहुत बड़ा (very big)
  4. सहनशील – सहने की शक्ति (tolerant)
  5. पद – पदवी (post)
  6. सदा – हमेशा (always)
  7. सागर – समुद्र (sea)
  8. मेहनत – श्रम (hard work)
  9. सेवा – मदद (help)
  10. हृदय – दिल (heart)
  11. उच्च – ऊँचा (high)

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २

Balbharti Maharashtra State Board Class 5 Hindi Solutions Sulabhbharati पुनरावर्तन २ Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 5 Hindi Sulabhbharati Solutions पुनरावर्तन २

5th Standard Hindi Digest पुनरावर्तन २ Textbook Questions and Answers

1. सुनो और दोहराओ:

बैल-बेल, ढाल-गढ़, ओज-भोज, रंग-रग, तमिळ-कमल, साड़ी-कढ़ी, छत-छत्र, विज्ञान-विज्ञापन, रिपु-ऋतु, गौरी-कसौटी, झाँझ-साँझ, चाभी-दीया, हाल-हॉल, साल-शॉल, तृण-हृदय, पेड़-डमरू।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २

2. परीक्षा के समय अचानक तुम्हारा पेन खराब हो जाए, तो तुम क्या करोगे?

प्रश्न 1.
परीक्षा के समय अचानक तुम्हारा पेन खराब हो जाए, तो तुम क्या करोगे?
उत्तर:
तो मैं हमेशा परीक्षा में दो-चार पेन साथ रखता/रखती हूँ। एक खराब हो गया तो दूसरा उपयोग करूँगा/ करूँगी।

3. अनुरेखन करो और पढ़ो:

4. ध्यान से देखिए और पत्तों के आधार पर पौधों / वृक्षों के नाम लिखिए।

प्रश्न 1.
ध्यान से देखिए और पत्तों के आधार पर पौधों / वृक्षों के नाम लिखिए।
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उत्तर:
आम, पीपल, कमल, केला, गुलाब, नीम।

5. पुस्तक मेले में जाकर पुस्तकों का निरीक्षण करो और उनपर चर्चा करो ।

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Hindi Sulabhbharati Class 5 Solutions पुनरावर्तन २ Additional Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नांकित चित्रों के नाम लिखो:
उत्तर:
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २ 2
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २ 3
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २ 4
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २ 5
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २ 6

प्रश्न 2.
अर्थपूर्ण शब्द तैयार कीजिए:

  1. ल द बा
  2. अं र गू
  3. नी स न स
  4. म की ह
  5. ल व के
  6. ज ना अ

उत्तर:

  1. बादल
  2. अंगूर
  3. सनसनी
  4. हकीम
  5. केवल
  6. अनाज

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions पुनरावर्तन २

प्रश्न 3.
सही मात्रा वाले शब्द पर बनाइए।

  1. सुरज / सूरज
  2. तीतली / तितली
  3. पंख / पँख
  4. कृष्ण / क्रष्ण
  5. तर्क / तक
  6. सौ । सो
  7. किसान / कीसान
  8. दरशन / दर्शन

उत्तर:

  1. (सूरज)
  2. (तितली)
  3. (पंख)
  4. (कृष्ण)
  5. (तर्क)
  6. (सौ)
  7. (किसान)
  8. (दर्शन)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों को वर्णक्रम के अनुसार लिखिए:

  1. ओखली
  2. गंगा
  3. उदार
  4. ऊपर
  5. इमारत

उत्तर:

  1. इमारत
  2. उदार
  3. ऊपर
  4. ओखली
  5. गंगा

प्रश्न 5.
मुझे पहचानो और लिखोः

  1. मैं एक दिन हूँ। मेरा दिन आता है, तब आपको छुट्टी मिलती है।
  2. मुझे रंग बिरंगे पंख मिले हैं।
  3. मैं कीचड़ में उगता हूँ। मैं एक फूल हूँ।
  4. मैं जंगल का राजा कहलाता हूँ।
  5. मैं बहुत मीठा गाती हूँ। आम की डाल मेरा बसेरा है।

उत्तर:

  1. रविवार
  2. तितली
  3. कमल
  4. शेर
  5. कोयल

प्रश्न 6.
सही जोड़ियाँ मिलाइए:

(अ)(ब)
1. दूल्हा(अ) गाय
2. बूढ़ा(आ) पत्नी
3. चिड़ा(इ) बुढ़िया
4. पति(ई) चिड़िया
5. बैल(उ) दुल्हन

उत्तर:

(अ)(ब)
1. दूल्हा(उ) दुल्हन
2. बूढ़ा(इ) बुढ़िया
3. चिड़ा(ई) चिड़िया
4. पति(आ) पत्नी
5. बैल(अ) गाय

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प्रश्न 7.
सही जोड़ियाँ मिलाइए:

(अ)(ब)
1. बच्चा(अ) थालियाँ
2. किताब(आ) कमरे
3. खिड़की(इ) किताबें
4. कमरा(ई) खिड़कियाँ
5. थाली(उ) बच्चे

उत्तर:

(अ)(ब)
1. बच्चा(उ) बच्चे
2. किताब(इ) किताबें
3. खिड़की(ई) खिड़कियाँ
4. कमरा(आ) कमरे
5. थाली(अ) थालियाँ

प्रश्न 8.
खाली जगह में सही शब्द लिखिए:

  1. सूरज ………….. रहा है।
  2. ड्राइवर गाड़ी …………. रहा है।
  3. बतख …………. रही है।
  4. माँ खाना ………….. रही है।

उत्तर:

  1. निकल
  2. चला
  3. तैर
  4. बना

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 8 मनसः स्वच्छता

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Sanskrit Solutions Anand Chapter 8 मनसः स्वच्छता Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 8 मनसः स्वच्छता

Sanskrit Anand Std 9 Digest Chapter 8 मनसः स्वच्छता Textbook Questions and Answers

भाषाभ्यास:

1. एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
निद्रा कदा उत्तमा भवति?
उत्तरम् :
शरीरं मन: च स्वच्छे तर्हि निद्रा उत्तमा भवति।

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प्रश्न 2.
स्नानेन किं भवति?
उत्तरम् :
स्नानेन शरीरं स्वच्छं, सतेजः, लघुभारमिव च भासते।

प्रश्न 3.
कदा प्रार्थनां बदामः?
उत्तरम् :
रात्रौ निद्रायाः पूर्व प्रार्थनां वदामः ।

प्रश्न 4.
माता श्यामस्य चरणौ केन मार्जयति?
उत्तरम् :
माता श्यामस्य चरणौ शाटिकाशलेन मार्जयति।

प्रश्न 5.
वयं प्रतिदिनं किमर्थ प्रयतामहे ?
उत्तरम् :
वयं पावित्र्यार्थ, स्वच्छतायै प्रतिदिनं प्रयतामहे ।

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2. माध्यमभाषया लिखत।

प्रश्न 1.
मनसः स्वच्छताविषये माता श्यामं कथं बोधितवती?
उत्तरम् :
‘श्यामची आई’ या पुस्तकातील कथेवर आधारित ‘मनस: स्वच्छता’ या पाठात मनाची शुद्धता व आत्मिक समाधान यावर भाष्य केले आहे. श्याम शारीरिक स्वच्छतेबद्दल खूप जागरुक होता. तो लहानपणापासून दररोज न चुकता दोनदा आंघोळ करीत असे. एकदा संध्याकाळी खेळून आल्यावर श्यामने आंघोळ केली.

आईने त्याचे अंग नेहमीप्रमाणे पदराने स्वच्छ पुसले नंतर तिने श्यामला देवपूजेसाठी फुले आणण्यासाठी जा असे सांगितले पण श्याम म्हणाला, ‘माझे तळवे ओले आहेत त्यांना माती लागेल. तू आधी मोझे तळवे पूस. आईने श्यामचे तळवे पुसले. श्याम फुले घेऊन आल्यावर आई त्याच्याजवळ गेली आणि म्हणाली, ‘श्याम पायाला माती लागू नये, म्हणून जसे जपतोस तसेच मनाला मळ लागू म्हणून सुध्दा जप! देवाकडे प्रार्थना कर, शुद्ध बुद्धी दे!’ श्यामचा शरीर स्वच्छ ठेवण्याचा हट्ट बघून आईला कौतुक वाटलेच पण ही संधी साधून तिने श्यामच्या कोवळ्या मनावर एक सुंदर विचार बिंबवला. शरीराप्रमाणेच आपले मन स्वच्छ ठेवणे गरजेचे आहे. श्यामच्या आईने श्यामला दिलेला हा विचार सर्वांनीच आचरणात आणायला हवा.

In the lesson ‘मनसः स्वच्छता।’ Shyam’s mother has given him the moral about purity of mind. Shyam was very keen about his physical cleanliness. He used to take a bath twice a day without fail ever since his childhood.

Once he came home and took bath after playing in the evening. His mother wiped his body clean as she used to do every day. Then she asked Shyam to bring some flowers for worship.

He refused to keep his feet on soil fearing his wet feet would get dirty. Mother spreaded her pallu on the floor then Shyam dried his feet went. After getting the flowers, he came to his mother.

That time his mother told his that just as you take care of your feet not to get dirty also take care about purity of mind. Pray to God for a pure mind. In this way, with the instance of Shyam’s own habit physical cleanliness, mother enlightens Shyam to strive for purity of the mind.

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3. अ. सन्धिविग्रहं कुरुत ।

प्रश्न 1.

  1. लघुभारमिव
  2. इत्यपि
  3. इतोऽपि
  4. तथैव
  5. कदापि

उत्तरम् :

  1. लघुभारमिव – लघुभारम् + इव।
  2. इत्यपि – इति + अपि।
  3. इतोऽपि – इत: + अपि।
  4. तथैव – तथा + एव।
  5. कदापि – कदा + अपि।

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आ. वर्णविग्रहं कुरुत।

प्रश्न 1.
1. पादतलौ
2. स्नानस्य
उत्तरम् :
1. पादतलौ – प् + आ + द् + अ + त् + अ + ल् + औ।
2. स्नानस्य – स् + न् + आ + न् + अ + स् + य् + अ ।

इ. विशेषण-विशेष्य-सम्बन्धः।

प्रश्न 1.

विशेष्यम्विशेषणम्
पादतलौसतेजः
अभ्यासःमलिनम्
मनःआर्द्रो
शरीरम्उत्तमः

उत्तरम् :

विशेष्यम्विशेषणम्
पादतलौआर्द्रो
अभ्यासःउत्तमः
मनःमलिनम्
शरीरम्सतेजः

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4. समानार्थकशब्दयुग्मं चिनुत ।
शरीरम्, मृत्तिका, चरणौ, मित्रम्, मनः, मृद्, सुहृद्, चित्तम्, पादी, देहः

प्रश्न 1.
शरीरम्, मृत्तिका, चरणौ, मित्रम्, मनः, मृद्, सुहृद्, चित्तम्, पादी, देहः
उत्तरम् :

  • शरीरम् – तनुः, कायः, देहः
  • मृत्तिका – मृद्।
  • चरणौ – पादौ।
  • सुहृद् – मित्रम्, वयस्यः, सखा।
  • मन: – चित्तम्, चेतः, अन्त:करणम्।

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5. विरुद्धार्थक शब्द लिखत ।
पवित्रम्, शुष्कम्, नीचैः, स्वच्छम्, अधिकम्, सत्वरम् ।

प्रश्न 1.
पवित्रम्, शुष्कम्, नीचैः, स्वच्छम्, अधिकम्, सत्वरम् ।
उत्तरम् :

  • पवित्रम् × अपवित्रम्, मलिनम्।
  • शुष्कम् × आर्द्रम्।
  • नीचैः × उच्चैः।
  • स्वच्छम् × अस्वच्छम् ।
  • अधिकम् × स्वल्पम्, न्यूनम् ।
  • सत्वरम् × शनैः।

6. उपपदविभक्तिं योजयत ।

प्रश्न 1.
1. …………. पूर्वं वयं प्रार्थनां वदामः । (निद्रायाः/निद्रायै)
2. एकदा नित्यमिव खेलित्वा अहं ………. आगतः। (गृहे/गृहम्)

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7. उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।।

प्रश्न 1.
मात्रा स्वशाटिका आर्द्रा कृता यतः …..।
अ) सा वर्षायां क्लिन्ना।
आ) तेन पुत्रेच्छा पूर्णा भवेत्।
उत्तरम् :
आ) तेन पुत्रेच्छा पूर्णा भवेत्।

Sanskrit Anand Class 9 Textbook Solutions Chapter 8 मनसः स्वच्छता Additional Important Questions and Answers

उचितं पर्यायं चिनुत ।

प्रश्न 1.

  1. बाल्यादेव ……… स्नानं करोमि स्म। (त्रिवार, द्विवार)
  2. ……… निद्रायाः पूर्व प्रार्थना करणीया। (दिने, रात्रौ)
  3. अहं ……… आगत्य स्नानार्थं गतवान् । (गृहे / गृहम्)
  4. सायङ्कालस्य स्नानार्थं ……… जलस्य आवश्यकता न भवति। (अधिकं / अधिकस्य)
  5. ………… पुष्पाणि आनय। (देवपूजार्थं / देवपूजया)
  6. मम………… आज़े। (पादतलं / पादतलौ)
  7. ………… पाषाणे विस्तारय। (वस्त्रं / शाटिकाञ्चल)
  8. मातुः वस्त्रम् ………… अभवत्। (शुष्कम् / आम्)

उत्तरम् :

  1. द्विवारं
  2. रात्रौ
  3. गृहम्
  4. अधिकस्य
  5. देवपूजार्थम्
  6. पादतलौ
  7. शाटिकाञ्चलम्
  8. आर्द्रम्

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एकवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
मनसः स्नानं नाम किम्?
उत्तरम् :
निद्रायाः पूर्वं कृता प्रार्थना नाम मनसः स्नानम्।

प्रश्न 2.
श्यामः कतिवारं स्नानं करोति स्म?
उत्तरम् :
श्यामः द्विवारं स्नानं करोति स्म।

प्रश्न 3.
कस्य स्नानस्य कृते अधिकस्य जलस्य आवश्यकता नास्ति?
उत्तरम् :
सायङ्कालस्य स्नानस्य कृते अधिकस्य जलस्य आवश्यकता नास्ति।

प्रश्न 4.
श्यामस्य माता कश्यं तस्य शरीरं मार्जयति स्म?
उत्तरम् :
श्यामस्य माता स्वशाटिकया तस्य शरीर मार्जयति स्म।

प्रश्न 5.
मात्रा किमर्थ स्वशाटिका आाकृता?
उत्तरम् :
मात्रा पुत्रेच्छा पूर्णा भवेत् एतदर्थ स्वशाटिका आर्द्राकृता।

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प्रश्न 6.
माता किं गृहीत्वा आगतवती?
उत्तरम् :
माता दीपं गृहीत्वा आगतवती।

प्रश्न 7.
वस्त्रस्वच्छतार्थ किम् अस्ति?
उत्तरम् :
वस्त्रस्वच्छतार्थ क्षालनचूर्णम् अस्ति।

प्रश्न 8.
शरीरस्वच्छतार्थ किम् अस्ति?
उत्तरम् :
शरीरस्वच्छतार्थ चन्दनफेनकानि अस्ति।

प्रश्न 9.
सर्वे किमर्थं प्रयत्नं कुर्वन्ति?
उत्तरम् :
शरीरं वस्त्राणि च मलिनानि न भवन्तु अत: सर्वे प्रयत्न कुर्वन्ति।

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सत्यं वा असत्यं लिखत।

प्रश्न 1.

  1. श्यामः बाल्ये एकवारमेव स्नानं करोति स्म।
  2. द्विवारं सानस्य अभ्यास: उत्तमः।
  3. निद्रायाः पूर्वं स्नानं कृतं चेत् शरीरं बहुभारमिव भासते।
  4. निद्रायाः पूर्व स्नानं कृतं चेत् शरीरं स्वच्छं भवति।
  5. निद्रायाः पूर्व स्नानं कृतं चेत् शरीरं सतेजः भवति।
  6. प्रार्थना नाम शरीरस्य स्नानम् ।
  7. शरीरमनसो: स्वच्छतया निद्रा उत्तमा भवति।
  8. मातुः वस्त्रं शुष्कम् अभवत्।
  9. मात्रा शाटिकाञ्चलं विस्तारितम्।
  10. माता श्यामस्य अङ्गं न मार्जितवती।
  11. मात्रा शाटिकापरिवर्तनं कर्तुं शक्यते।
  12. माता पुत्रार्थ किमपि न करोति।
  13. वयं प्रतिदिनं स्वच्छतार्थ प्रयतामहे ।
  14. वयं मनसः स्वच्छतायै न प्रयतामहे।
  15. शरीरस्वच्छतायै क्षालनचूर्णम् अस्ति।

उत्तरम् :

  1. असत्यम्
  2. सत्यम्
  3. असत्यम्
  4. सत्यम्
  5. सत्यम्
  6. असत्यम्
  7. सत्यम्
  8. असत्यम्
  9. सत्यम्
  10. असत्यम्
  11. असत्यम्
  12. असत्यम्
  13. सत्यम्
  14. सत्यम्
  15. असत्यम्

कः कं वदति।

प्रश्न 1.
“शुष्कय मे अङ्गम्।”
उत्तरम् :
श्याम: मातरं वदति।

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प्रश्न 2.
“जलं समाप्त, सत्वरं शुष्कय मे अङ्गम्’
उत्तरम् :
श्याम: मातरं वदति।

प्रश्न 3.
“बाल्यादेव द्विवारं स्नानं करोमि स्म अहम् ।”
उत्तरम् :
श्यामः सर्वान् वदति।

प्रश्न 4.
“देवपूजार्थं पुष्पाणि आनय।”
उत्तरम् :
माता श्यामं वदति।

प्रश्न 5.
“मम पादतलौ अपि स्वच्छीकुरु।”
उत्तरम् :
श्याम : मातरं वदति।

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प्रश्न 6.
“अधुना केन वस्रेण मार्जयामि।”
उत्तरम् :
माता श्यामं वदति।

प्रश्न 7.
“तव शाटिकाञ्चलं पाषाणे विस्तारय।”
उत्तरम् :
श्याम: मातरं वदति।

प्रश्न 8.
“प्रार्थय देवं शुद्धबुद्ध्यर्थम्।”
उत्तरम् :
माता श्यामं वदति।

प्रश्न 9.
“मन: मलिनं न भवतु एतदर्थम् अपि प्रयतस्व।”
उत्तरम् :
माता श्यामं वदति।

उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

प्रश्न 1.
रात्रौ निद्रायाः पूर्व स्नानं करणीयम् यतः ……….।
a. शरीरं स्वच्छं, सतेज: लघुभारमिव भासते।
b. प्रार्थना करणीया।
उत्तरम् :
रात्रौ निद्रायाः पूर्व स्नानं करणीयं यतः शरीरं स्वच्छं, सतेज: लघुभारमिव भासते।

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प्रश्न 2.
निद्रायाः पूर्व प्रार्थना करणीया, यतः ……….।
a. शरीरं स्वच्छं भवति।
b. मनः स्वच्छं भवति।
उत्तरम् :
निद्रायाः पूर्व प्रार्थना करणीया, यत: मन: स्वच्छं भवति।

शब्दस्य वर्णविग्रहं कुरुत।

  • निद्रायाः – न् + इ + द् + र + आ + य् + आः।
  • प्रार्थनाम् – प् + र + आ + र + थ् + अ + न् + आ + म्।
  • स्व च्छे – स् + व् + अ + च + छ् + ए।
  • खेलित्वा – + ए + ल् + इ + त् + व् + आ।
  • गृहम् – ग् + ऋ + ह् + अ् + म्।
  • सायकालस्य – स् + आ + य् + अ + ङ् + क् + आ + ल + अ + स् + य् + ।
  • शुष्कय – श् + उ + ष् + क् + अ + य् + अ। .
  • अङ्गम् – अ + इ + ग् + अ + म्।
  • समाप्तम् – स् + अ + म् + आ + प् + त् + अ + म्।
  • उच्चैः – उ + च् + च् + ऐः।
  • मार्जयति – म् + आ + र + ज् + अ + य् + अ + त् + इ।
  • पुष्पाणि – प् + उ + ष् + प् + आ + ण् + इ।
  • आर्द्रम् – आ + र + द् + र + अ + म्।
  • मृत्तिकया – म् + ऋ + त् + त् + इ + क् + अ + य् +आ।
  • भविष्यत: – भ + अ + व + इ + ष् + य् + अ + त् + अः।
  • तर्हि – त् + अ + र + ह् + इ।
  • वखम् – व् + अ + स् + त् + र् + अ + म्।
  • उक्त्वा – उ + क् + त् + व् + आ।
  • मात्रा – म् + आ + त् + र + आ।
  • तस्मिन् – त् + अ + स् + म् + इ + न्।
  • कर्तुम् – क् + अ + र् + त् + उ + म्।
  • पुत्रेच्छा – प् + उ + त् + र् + ए + च् + छ + आ।
  • गृहीत्वा – ग् + ऋ + ह् + ई + त् + व् + आ।
  • प्रयतस्व – प् + र + अ + य् + अ + त् + अ + स् + व् + अ।
  • शब्दाः – श् + अ + ब् + द् + आः।
  • प्रयत्नम् – प् + र + य् + अ + त् + न् + अ + म्।

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प्रश्ननिर्माणं कुरुत।

प्रश्न 1.

  1. द्विवारं स्नानस्य अभ्यासः उत्तमः।
  2. निद्रायाः पूर्वं प्रार्थना करणीया।
  3. शरीरः मनः च स्वच्छे तर्हि निद्रा उत्तमा भवति ।
  4. पूजार्थं पुष्पाणि आवश्यकानि।
  5. पादतलौ आद्रौं स्तः।
  6. मृत्तिकया पादतलौ मलिनौ भविष्यतः।
  7. शाटिकाचलं पाषाणे विस्तारय।
  8. शाटिकापरिवर्तनं कर्तुं न शक्यते।
  9. मन: मलिनं न भवतु एतदर्थं प्रयतस्व।
  10. प्रार्थय देवं शुद्धबुर्ध्वम्।

उत्तरम् :

  1. द्विवारं स्नानस्य अभ्यास: कीदृशः?
  2. निद्रायाः पूर्व का करणीया?
  3. निद्रा कदा उत्तमा भवति?
  4. किमर्थं पुष्पाणि आवश्यकानि?
  5. को आज़े स्त:?
  6. कया पादतलौ मलिनौ भविष्यतः?
  7. शाटिकाञ्चलं कुत्र विस्तारय?
  8. किं कर्तुं न शक्यते?
  9. किं मलिनं न भवतु एतदर्थं प्रयतस्व?
  10. किमर्थं देवं प्रार्थय?

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विशेषण-विशेष्य-सम्बन्धः।

प्रश्न 1.

विशेष्यम्विशेषणम्
शुष्कीचरणौ
आर्दम्वखम्
आर्द्रास्वशाटिका
मधुरा:शब्दाः
पूर्णावस्त्राणि
मलिनानिपुत्रेच्छा

उत्तरम् :

विशेष्यम्विशेषणम्
शुष्कीचरणौ
आर्दम्वखम्
आर्द्रास्वशाटिका
मधुरा:शब्दाः
पूर्णापुत्रेच्छा
मलिनानिवस्त्राणि

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वान्त/ल्यबन्त/तुमन्त अव्ययानि।

त्वान्त अव्यय धातु + त्वा / ध्वा / ट्वा / ढ्वा / इत्वा अयित्वाल्यबन्त अव्यय उपसर्ग + धातु + य / त्यतुमन्त अव्यय   थातु + तुम् / धुम् / टुम् / ढुम् / इतुम् / अयितुम्
खेलित्वासमाप्य
उक्त्वा
स्थापयित्वा
कारयित्वा
गृहीत्वा

व्याकरणम् :

शब्दानां पृथक्करणम्

नामसर्वनामक्रियापदम्विशेषणम्
बाल्यात्, श्यामेन, कथा, रात्रौ, प्रार्थनाम्, मनसः, जलस्य, शाटिकया, मृत्तिकया, पाषाणे, मात्रा, मनः, देवम्, वस्त्रम्, स्वच्छतायै, चरणौ, पादतलौ, पुष्पाणि, वस्त्राणिअहम्, एतत्, मया, मम-मे, तव – ते, तया, सर्वःकरोमि, भासते, भवति, मार्जयति, अस्ति, असि, शक्यते, करोति, सहते, समर्पयति, प्रयतसे, अभवत्, शुष्कय, आनय, भवेत्, स्तः, भविष्यतः, भवेताम्, कुर्मः, सन्ति, कुर्वन्ति, प्रयतामहेआर्द्रा, मधुराः, मलिनौ, भारकारि, पूर्णा, मलिनानि, उत्तमः, सतेजः, स्वच्छम्, लघुभारम, आर्दी, शुष्कौ, आर्द्रम्

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समासाः।

समासनामअर्थ:समासविग्रहःसमासनाम्
प्रतिदिनम्every dayदिने दिने।अव्ययीभाव समास
स्नानार्थम्for bathस्नानाय इंदम्।चतुर्थी तत्पुरुष समास
स्वशाटिकयाwith own sareeस्वस्य शाटिका, तया।षष्ठी तत्पुरुष समास
शाटिकाञ्चलम्pallu of sareeशाटिकाया: आञ्चलम्षष्ठी तत्पुरुष समास
पूजार्थम्for worshipपूजाय इदम्।चतुर्थी तत्पुरुष समास
पादतलौsurface of feetपादयो: तलौ।षष्ठी तत्पुरुष समास
वस्त्रस्वच्छतार्थम्for cleaning the clothesवस्त्रस्वच्छताय इदम्।चतुर्थी तत्पुरुष समास

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मनसः स्वच्छता Summary in Marathi and English

प्रस्तावना :

प्रख्यात समाजसुधारक आणि लेखक पांडुरंग सदाशिव साने उर्फ सानेगुरुजी यांच्या ‘श्यामची आई’ या आत्मकथनपर पुस्तकातून ही कथा घेतली आहे. मनाच्या स्वच्छतेचे महत्व सांगणारी ही कथा डॉ. मंजूषा कुलकर्णी यांनी संस्कृतात अनुवादित केली आहे. ‘श्यामची आई’ म्हणजे मातृप्रेमाचा आदर्शच.

आजच्या चंगळवादी युगात मनाच्या शुद्धतेचे महत्त्व सांगणारी ही कथा आत्मिक समाधानाकडेही नेणारी आहे. लोक मनाच्या शुद्धतेपेक्षा शरीराच्या स्वच्छतेकडेच जास्त लक्ष देतात. या कथेत श्यामची आई त्याला मनाच्या शुद्धतेचे महत्व पटवून

This story is based on a small extract from a celebrated Marathi story collection ‘श्यामची आई’ by a renowned social activist and author Panduranga Sadashiv Sane popularly known as सानेगुरुजी. This story translated by Dr. Manjusha Kulkarni renders a valuable message about the purity of heart.

‘श्यामची आई’ is a legend of motherhood. In the era of materialistic acquisitions, one really needs this message for inner purity which leads to eternal satisfaction. Generally, people focus on keeping their body clean but they don’t bother much about the purity of the mind and heart. In this story a mother addresses her son and tells him to be keen about the purity of the mind and thoughts.

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परिच्छेद : 1

बाल्यादेव द्विवारं ……………. मार्जयति स्म।

“बाल्यादेव द्विवार स्नान करोमि स्म अहम्।” श्यामेन कथा आरब्धा। “द्विवार स्नानस्य अभ्यासः उत्तमः एव। रात्री निद्रायाः पूर्व स्नानं कुर्मः चेत् शरीरं स्वच्छं, सतेजः, लघुभारमिव च भासते। निद्रायाः पूर्व वयं प्रार्थनां कुर्मः, एतत् भवति मनसः स्नानम्। शरीरं मनः च स्वच्छे तर्हि निद्रा उत्तमा भवति। एकदा प्रतिदिनमिव खेलित्वा अहं गृहम् आगत्य स्नानार्थं गतवान्।

सायकालस्य स्नानार्थम् अधिकस्य जलस्य आवश्यकता न भवति । स्नानं समाप्य मया उक्तम्, “अम्ब, शुष्कय मे अङ्गम्। जलं समाप्त, सत्वरं शुष्कय मे अङ्गम्” इति उच्चैः अवदम् अहम्। सायङ्काले में माता स्वशाटिकया एव मम शरीरं मार्जयति स्म।

अनुवादः

“लहानपणापासूनच मी दोनदा आंघोळ करत असे,” श्यामने गोष्ट सुरु केली. दोनदा आंघोळ करण्याची सवय चांगलीच! रात्री झोपण्यापूर्वी आपण आंघोळ केली तर शरीर स्वच्छ, तेजस्वी आणि हलके वाटते! रात्री झोपण्यापूर्वी आपण प्रार्थना करतो, हे मनाचे सान! शरीर आणि मन स्वच्छ असेल तर झोप कशी गाढ लागते.

एकदा नेहमीप्रमाणे खेळून झाल्यावर घरी आल्यानंतर मी आंघोळीला गेलो. संध्याकाळच्या आंघोळीसाठी जास्त पाण्याची गरज नसते. आंघोळ उरकून मी म्हणालो, “आई! माझे अंग कोरडे कर गं! पाणी संपले. लवकर कोरडे कर माझे अंग!” मी मोठ्याने ओरडू लागलो. संध्याकाळी माझी आई स्वत:च्या साडीनेच माझे अंग पुसत असे.

Shyam started the story, “Since childhood itself, I used to bathe twice a day. Taking a bath twice is indeed a good habit If we take a bath at the night before going to bed, our body remains clean, glowing and seems light. Before sleeping we pray, that itself is cleansing of the mind.

If body and mind are clean, we get sound sleep. Once like every day having come home after playing I went to take a bath. Much water is not needed for the evening bath. After finishing my bath I said, “O mother! please make my body dry. Water is over. Please dry up my body fast!” I shouted loudly. In the evening my mother used to wipe my body with her own saree.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 8 मनसः स्वच्छता

परिच्छेद : 2

माता आगता, …………… आर्द्रम् अभवत्?

माता आगता, मम अङ्ग मार्जितवती आज्ञां च दत्तवती “देवपूजार्थं पुष्पाणि आनय, श्याम” इति। “मम पादतलौ आद्रौं स्तः। मृत्तिकया मलिनी भविष्यतः। अतः मम पादतली अपि स्वच्छीकुरु।” इति “पादतलौ आद्रौ स्त: तर्हि किं जातं रे श्याम? अधुना केन वस्त्रेण मार्जयामि?” “अम्ब, तव शाटिकाशलं पाषाणे विस्तारय।” श्याम, अतीव हठस्वभावः असि।” इति उक्त्वा मात्रा शाटिकाञ्चल विस्तारितम्। अहं चरणी तदुपरि स्थापयित्वा शुष्कौ कारयित्वा निर्गतवान्। मातु: वस्त्रम् आर्द्रम् अभवत्।

अनुवादः

आई आली. माझे अंग पुसले आणि म्हणाली, “श्याम! देवपूजेसाठी फुले “माझे तळवे ओले आहेत. मातीने खराब होतील. म्हणून माझे तळवे पण स्वच्छ कर!” मी म्हणालो. तळवे ओले असले म्हणून काय झालं रे श्याम? आता कोणत्या कापडाने पुसू?” “आई तुझा पदर दगडावर पसर.” “खूप हट्टी आहेस हो श्याम! असे म्हणून आईने पदर पसरला. मी त्यावर पाय ठेवून कोरडे करून गेलो. आईचा पदर ओला झाला.

Mother came, wiped my body and ordered me, “O Shyam! bring some flowers for worshipping god.” “The soles of my feet are wet. They will get dirty with the mud. Hence wipe my feet too.” “I told mother, So what if your soles get wet Shyam? Now with which cloth should I wipe?” “O mother! spread the pallu of your saree on the rock.”

“OShyam! you are very stubborn!” Saying this the mother spread the pallus of her saree. I went putting my feet on that and drying them. Mother’s saree got wet.

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 8 मनसः स्वच्छता

परिच्छेद : 3

तस्मिन् समये …………….. स्वच्छतायै प्रयतामहे?

तस्मिन् समये तया शाटिकापरिवर्तनं कर्तुं न शक्यते इत्यपि मया न चिन्तितम्। परन्तु पुत्रचरणौ मलिनी न भवेताम, पुत्रेच्छा पूर्णा भवेत् एतदर्थ तया स्वशाटिका आा कृता। माता पुत्रार्थ किं किं न करोति, किं किं न सहते, किं किं न समर्पयति ? अहं गृहस्य अन्तर्भागं गतवान, पूजार्थ पुष्पाणि स्थापितवान्।

माता दीपं गृहीत्वा आगतवती उक्तवती च, “श्याम, चरणी मलिनी न भवतः अतः यथा प्रयतसे तयैव मनः मलिनं न भवतु एतदर्थम् अपि प्रयतस्व। प्रार्थय देवं शुद्धबुद्ध्यर्थम्।” भो मित्राणि, कियन्त; मधुराः शब्दाः! पावित्र्याचं स्वच्छतायै वयं प्रतिदिनं प्रयतामहे । वस्त्रस्वच्छतार्थ क्षालनचूर्णम् अस्ति, शरीरा) चन्दनफेनकानि सन्ति। शरीरं वस्त्राणि च मलिनानि न भवन्तु अत: सर्वे प्रयत्नं कुर्वन्ति । अपि वयं मनसः स्वच्छतायै प्रयतामहे?”

अनुवादः

त्यावेळी तिला साडी बदलणं शक्य नव्हते, याचासुद्धा मी विचार केला नाही. पण मुलाचे पाय खराब होऊ नयेत, मुलाची इच्छा पूर्ण व्हावी म्हणून तिने स्वत:ची साड़ी ओली केली. आई मुलासाठी काय काय नाही करत, काय काय सहन नाही करत, कशाचा त्याग नाही करत. मी घरात गेलो, पूजेसाठी फुले ठेवली.

आई दिवा घेऊन आली आणि म्हणाली, “श्याम, तळवे खराब होऊ नयेत म्हणून जशी काळजी घेतोस, तशीच मनसुद्धा अस्वच्छ होऊ नये म्हणून जप हो! देवाला सांग शुद्ध बुद्धी दे!” मित्रांनो ! किती सुंदर शब्द ! पावित्र्यासाठी, स्वच्छतेसाठी आपण दररोज प्रयत्न करतो. कपडे धुण्यासाठी साबण आहे, शरीरासाठी चंदनाचा साबण आहे. शरीर, कपडे खराब होऊ नयेत म्हणून सगळे प्रयत्न करतात. पण आपण मनाच्या पावित्र्यासाठी झटतो का?

That time I did not even think that it was not possible for her to change the saree. But she let her saree get wet. So that her son’s feet don’t get wet, her son’s wish get fulfilled. What a mother wouldn’t do for her child! What all she bears with! What all she sacrifices.

I went inside the house and put flowers for God’s worship, Mother came with a lamp in her hand and said, “O Shyam! Just as you try for not getting feet dirty, exactly likewise try hard, so that your mind won’t get dirty. Pray to god for pure intellect.

My friends!How sweet words! for purity,cleanliness we try everyday. For cleaning clothes we have detergents, for | (cleaning) body there is sandalwood soap. Everyone tries not to make one’s body and clothes dirty. But do we strive to keep our mind clean/pure?

सन्धिविग्रहः

  • बाल्यादेव – बाल्यात् + एव।
  • प्रतिदिनमिव – प्रतिदिनम् + इव।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 8 मनसः स्वच्छता

समानार्थकशब्दाः

  • रात्रिः – निशा, शर्वरी, यामिनी।
  • माता – जननी, अम्बा, जन्मदात्री।
  • पुष्पाणि – सुमनानि, कुसुमानि, प्रसूनानि।
  • वस्त्रम् – वासः, वसनम्।
  • इच्छा – आकाङ्क्षा।
  • प्रयत्न: – यत्नः।
  • देवः – ईश्वरः, ईशः।

विरुद्धार्थकशब्दाः

  • रात्रिः × दिनः ।
  • पूर्वम् × पश्चात् ।
  • पूर्णा × अपूर्णा।
  • मधुर: × कटुः/तिक्तः।
  • उपरि × अधः।
  • शुद्धम् × अशुद्धम्।

Maharashtra Board Class 9 Sanskrit Anand Solutions Chapter 8 मनसः स्वच्छता

शब्दार्थाः

  1. द्विवारम् – twice – दोनदा
  2. आरब्धा – started – सुरु केली
  3. अभ्यास: – practice, habit – पद्धत, सवय
  4. सतेज: – glowing – तेजस्वी, निर्मळ
  5. लघुभारम् – light – हलके
  6. भासते – feels – वाटते
  7. प्रार्थना – prayer – प्रार्थना
  8. मनसः स्नानम् – cleansing of the mind – मनाची आंघोळ/ स्वच्छता
  9. स्नानार्थम् – for bath – आंघोळीकरिता
  10. शुष्कय – please dry – कृपया कोरडे कर
  11. समाप्तम् – over, finished – संपले
  12. स्वशाटिकया – with own saree – स्वत:च्या साडीने
  13. मार्जयति – wipes out – पुसते
  14. देवपूजार्थम् – for worshiping – देवपूजेसाठी
  15. आनय – bring – आण
  16. पादतलौ – surface of feet – तळवे
  17. आर्द्रः – wet, moist – ओले
  18. मृत्तिकया – by soil – मातीने
  19. मलिनी – dirty – मळकट
  20. अत: – hence – म्हणून
  21. अधुना – now – आता
  22. शाटिकाशलम् – pallu of sarees – साडीचा पदर
  23. पाषाणे – on rock – दगडावर
  24. हठस्वभाव: – stubborn – हड़ी
  25. स्थापयित्वा – after putting – ठेवून
  26. पुत्रेच्छा – son’s wish – मुलाची इच्छा
  27. शाटिका – परिवर्तनम् – changing the saree – साडी बदलणे
  28. मधुराः – sweet – गोड
  29. पुत्रार्थम् – for son – मुलासाठी
  30. प्रयतसे – you try – प्रयत्न करतोस
  31. शुद्धबुद्ध्यर्थम् – for pure intellect – शुद्ध बुद्धीसाठी
  32. पावित्र्यार्थम् – for purity – पावित्र्यासाठी
  33. सहते – bears – सहन करते
  34. समर्पयति – sacrifices, gives, offers – समर्पित करते
  35. प्रयतामहे – we try, strive – आपण प्रयत्न करतो
  36. क्षालनचूर्णम् – detergents – कपड्याचा साबण
  37. चन्दनफेनकानि – sandalwood soap – चंदन साबण

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट

Balbharti Maharashtra State Board Class 5 Hindi Solutions Sulabhbharati Chapter 5 रोबोट Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 5 Hindi Sulabhbharati Solutions Chapter 5 रोबोट

5th Standard Hindi Digest Chapter 5 रोबोट Textbook Questions and Answers

जुड़ें हम:

अध्यापन संकेत: पृष्ठ 33 और 34 पर दी गई संपूर्ण पाठ्यसामग्री का उद्देश्य संयुक्ताक्षरों की पहचान करवाकर वाचन और लेखन कराना है । वर्णों को संयुक्त बनाने के लिए रूप के आधार पर इन्हें तीन भागों तथा ‘र’ को तीन प्रकारों में बाँटा गया है । इन्हें अलग-अलग दिया गया है । शिरोरेखा के नीचे र पूरा होता है।
1. सर्वप्रथम पाठ में आए चित्र के शब्द सुनाकर दोहरवाएँ । मोटे अक्षर के संयुक्ताक्षर को श्यामपट्ट पर लिखकर समझाएँ । सभी संयुक्ताक्षर की पहचान होने तक अभ्यास करवाएँ ।

2. पाठ्यांश पढ़वाकर संयुक्ताक्षरों को रेखांकित करने के लिए कहें । तत्पश्चात विद्यार्थियों से संपूर्ण पाठ्यांश का अनुलेखन करने के लिए कहें । देखें कि विद्यार्थी विरामचिह्नों सहित शुद्ध लेखन करते हैं । विरामचिह्नों-पूर्णविराम, प्रश्नचिह्न, अल्पविराम, विस्मयादिबोधक और अर्धविराम को समझाकर इनके उचित प्रयोग पर बल दें।

3. चित्र दिखाकर और दिए गए शब्दों का प्रयोग कराके एक-एक वाक्य लिखवाएँ ।

4. संयुक्ताक्षर का अभ्यास होने के पश्चात इन पाठ्यांशों का श्रुतलेखन करवाएँ । विरामचिह्नों सहित शुद्ध लेखन पर

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट

Hindi Sulabhbharati Class 5 Solutions Chapter 5 रोबोट Additional Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
पहले और बाद में आनेवाले वर्ण लिखिए:
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट 1
उत्तर:

  1. अ, र
  2. औ, र
  3. र, ना
  4. ड, रू

प्रश्न 2.
वर्ण जोड़कर शब्द बनाना:
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट 2
उत्तर:

  1. झर
  2. घर
  3. डर
  4. चर
  5. मर
  6. पर
  7. कर
  8. भर

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट

प्रश्न 3.
वर्ण जोड़कर शब्द बनाना:

  1. अ + ज + ग + र = ………………………..
  2. आ + म = ………………………….
  3. ई + ख = ………………………
  4. उ + ध + र = ……………………
  5. ऊ + न = ……………………….
  6. ए + क = ……………………….
  7. ऐ + न + क = …………………
  8. ओ + स = ………………………
  9. औ + ष + ध = …………………..
  10. ट + म + ट + म = …………………..
  11. म + ट + र = ………………………..
  12. क + र + व + ट = …………………..
  13. थ + र + म + स = …………………..
  14. फ + ल = ……………………..
  15. क + ल + र + व = …………………..

उत्तर:

  1. अजगर
  2. आम
  3. ईख
  4. उधर
  5. ऊन
  6. एक
  7. ऐनक
  8. ओस
  9. औषध
  10. टमटम
  11. मटर
  12. करवट
  13. थरमस
  14. फल
  15. कलरव

प्रश्न 4.
सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (गरम, टब, बतख, नल)

  1. रवि …………. बंद कर।
  2. …………. खाना मत खा।
  3. …………….. में पानी भर।
  4. तालाब में ……………. है।

उत्तर:

  1. नल
  2. गरम
  3. टब
  4. बतख

रोबोट Summary in Hindi

पाठ का परिचयः

प्रस्तुत पाठ में रोबोट के चित्र से वर्णमाला की जानकारी दी गई है। साथ ही अनुरेखन द्वारा लेखन का तरीका बताया गया है।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट

वर्णमाला:

स्वर:

अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ अं अः

व्यंजन:

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट 3
क ख ग घ ङ च छ ज झ ब ट ठ ड ढ ण ड़ ढ़ त थ द ध न । प फ ब भ म । य र ल व श ष स ह क्ष त्र ज्ञ श्र
(-) – इसे अनुस्वार कहते हैं।
(-) – यह चंद्र बिन्दु है।
(:) – यह विसर्ग है।
क्ष, त्र, ज्ञ, श्र संयुक्त व्यंजन हैं। ये दो व्यंजनों से मिलकर बने हैं।
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 5 रोबोट 4

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

Balbharti Maharashtra State Board Class 5 Hindi Solutions Sulabhbharati Chapter 1 गाँव और शहर Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 5 Hindi Sulabhbharati Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

5th Standard Hindi Digest Chapter 1 गाँव और शहर Textbook Questions and Answers

1. देखो और बताओ

प्रश्न 1.
देखो और बताओ

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

Hindi Sulabhbharati Class 5 Solutions Chapter 1 गाँव और शहर Additional Important Questions and Answers

पाठ्यपुस्तक : पृष्ठ 26 और 27 के चित्र को देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए:

प्रश्न 1.
पृष्ठ क्र.26 के चित्र में कहाँ का दृश्य दिखाया गया है?
उत्तर:
गाँव।

प्रश्न 2.
पृष्ठ क्र.27 पर कहाँ का चित्र दिखाई दे रहा है?
उत्तर:
शहर।

प्रश्न 3.
गाँव के चित्र में यातायात के कितने साधन दिखाए गए हैं?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 4.
गाँव के चित्र में दिखाए गए विद्यालय का नाम क्या है?
उत्तर:
समता।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

प्रश्न 5.
कूड़ादान किसके सामने रखा है?
उत्तर:
कूड़ादान विद्यालय के सामने रखा है।

प्रश्न 6.
चित्र में यातायात के कौन-कौन से साधन दिखाए गए हैं?
उत्तर:
चित्र में यातायात के तीन साधन दिखाये गए हैं – साइकिल, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर।

प्रश्न 7.
घर में सभी कैसे कार्य कर रहे हैं?
उत्तर:
घर में सभी मिलजुलकर कार्य कर रहे हैं।

प्रश्न 8.
क्या यह एक प्रगतिशील गाँव का चित्र है? कैसे?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि गाँव में विद्यालय है, बिजली की व्यवस्था है।

प्रश्न 9.
क्या गाँव में हरियाली है? कैसे?
उत्तर:
हाँ, जहाँ-जहाँ ज़रूरी है; वहाँ पेड़ लगे हैं। हरी घास भी है।

पाठ्यपुस्तक : पृष्ठ क्र. 26 एवं 27 को देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1.
पाठशाला की ओर कितने बच्चे जा रहे हैं?
उत्तर:
पाँच।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

प्रश्न 2.
चित्र में कितनी बकरियाँ दिख रही हैं?
उत्तर:
दो।

प्रश्न 3.
कुएँ के पास क्या रखा है?
उत्तर:
मटके।

प्रश्न 4.
विद्यालय के परिसर में बच्चे किससे खेल रहे हैं?
उत्तर:
गेंद से।

प्रश्न 5.
मुर्गी के चूज़े कितने हैं?
उत्तर:
दो।

प्रश्न 6.
चित्र में कुल कितने प्रकार के जानवर हैं?
उत्तर:
चार।

प्रश्न 7.
साइकिल कौन चला रहा है?
उत्तर:
एक आदमी।

प्रश्न 8.
पहिए से कौन खेल रहा है?
उत्तर:
छोटा लड़का।

प्रश्न 9.
चित्र में कुल कितनी औरतें हैं?
उत्तर:
आठ।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

प्रश्न 10.
चित्र में कुल कितने आदमी हैं?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 11.
चित्र में कुल कितने बच्चे हैं?
उत्तर:
पन्द्रह।

प्रश्न 12.
शहर के चित्र में दिखाए गए यातायात के साधनों के नाम बताइए।
उत्तर:
बस, रिक्शा, कार, स्कूटर।

प्रश्न 13.
गाँव के चित्र में कौन-कौन से जानवर दिखाई दे रहे हैं?
उत्तर:
मुर्गी, कुत्ता, बकरियाँ तथा बैल।

प्रश्न 14.
गाँव के चित्र में कौन-से वाक्य लिखे हुए है?
उत्तर:
गाँव-शहर की प्रगति, देश की उन्नति तथा स्वच्छ ग्राम, स्वस्थ ग्राम । लिखा हुआ है।

प्रश्न 15.
शहर के चित्र में कौन-से वाक्य लिखे हुए है?
उत्तर:
शुद्ध हवा-पानी का तंत्र, स्वस्थ जीवन का मंत्र, अनुशासन के साथ देश का विकास तथा स्वच्छ नगर, सुंदर नगर।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

प्रश्न 16.
गाँव में किस तरह के घर हैं?
उत्तर:
गाँव में कच्चे घर बने हुए हैं।

प्रश्न 17.
गाँव में लोग किस प्रकार के घरों में रहते हैं?
उत्तर:
शहर में लोग सीमेंटवाले पक्के घरों तथा बड़ी-बड़ी इमारतों में रहते हैं।

3. निम्नलिखित वाक्यों के सामने सही ✓ या गलत ✗ का निशान लगाइए:

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों के सामने सही ✓ या गलत ✗ का निशान लगाइए:

  1. हमें यहाँ-वहाँ कचरा फेंकना चाहिए।
  2. शहर में लोग कच्चे घरों में रहते हैं।
  3. गाँव में पेड़-पौधे अधिक होते हैं, जिससे वातावरण स्वच्छ व शीतल रहता है।
  4. गाँव के चित्र में बिजली के खंभे नहीं हैं।
  5. शहर में अधिक यातायात साधनों का उपयोग होता है।

उत्तर:

प्रश्न 4.
कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर चित्रों के नीचेलिखिए:
(बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, कुआँ, साइकिल, हल, बैल)
Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर 1
उत्तर:

  1. बैलगाड़ी
  2. ट्रैक्टर
  3. कुआँ
  4. साइकिल
  5. हल
  6. बैल

प्रश्न 5.
खाली जगह भरिए:

  1. ………….. की प्रगति,
    ………….. की उन्नति।
  2. ………….. ग्राम, ………….. ग्राम।
  3. शुद्ध ………….., …………… का तंत्र,
    ………………….. जीवन का मंत्र।
  4. ………….. के साथ देश का ………….. हो ।
  5. गाँव हो या शहर, दोनों को ………….. रखना ज़रूरी है।
  6. शहरों में कूड़ा फेंकने के लिए जगह-जगह
    …………………….. रखे जाते हैं।
  7. गाड़ियों के अनुशासन के लिए …………………
    ………….. होते हैं।
  8. राहगीरों को सड़क पार करने के लिए
    ………… बनाए होते हैं।
  9. चौराहों पर …………………. लगे होते हैं।

उत्तर:

  1. गाँव – शहर, देश
  2. स्वच्छ, स्वस्थ
  3. हवा पानी, स्वस्थ
  4. अनुशासन, विकास
  5. स्वच्छ
  6. कूड़ेदान
  7. ट्रैफिक सिग्नल
  8. ज़ेब्रा क्रॉसिंग
  9. फव्वारे

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

सही विकल्प चुनकर लिखिए:

प्रश्न 1.
गाँव में यातायात के साधन
(अ) कम होते हैं।
(आ) अधिक होते हैं।
उत्तर:
कम होते हैं।

प्रश्न 2.
गाँव में लोग समय कैसे बिताते हैं?
(अ) एक – दूसरे के साथ बैठकर बातचीत करके।
(आ) दूरदर्शन देखकर।
उत्तर:
एक – दूसरे के साथ बैठकर बातचीत करके।

प्रश्न 3.
गाँव के लोग ज्यादातर स्वस्थ होते हैं, क्योंकि
(अ) वे पौष्टिक आहार खाते हैं।
(आ) दो-चार दिन खाना ही नहीं खाते हैं।
उत्तर:
वे पौष्टिक आहार खाते हैं।

प्रश्न 4.
गाँव के लोग कैसे होते हैं?
(अ) मिलनसार
(आ) झगड़ालू
उत्तर:
मिलनसार

प्रश्न 5.
शहर के लोगों का जीवन कैसा होता है?
(अ) व्यस्त
(आ) आलसी
उत्तर:
व्यस्त

प्रश्न 6.
शहर के लोगों के पास जानकारी क्यों अधिक होती है?
(अ) इंटरनेट के कारण
(आ) व्यस्तता के कारण
उत्तर:
इंटरनेट के कारण

गाँव और शहर Summary in Hindi

चित्र का परिचयः

पाठ्यपुस्तक: पृष्ठ क्र. 26 पर गाँव का चित्र दिखाया गया है। इसमें गाँव का रहन-सहन एवं वातावरण दिखाया गया है। यहाँ लोग कच्चे घरों में रहते हैं। यातायात के लिए साइकिल, छकड़ा इत्यादि का उपयोग होता है। खेती के लिए ट्रैक्टर का उपयोग किया जाता है। जगह-जगह पेड़-पौधे लगाए जाते हैं, जिसके कारण वातावरण स्वच्छ एवं शुद्ध रहता है। गाँवों में विद्यालय खुल गये हैं। शौचालय बनाए गए हैं। बिजली की व्यवस्था भी होने लगी है। गाँव में पीने का शुद्ध पानी कुएँ आदि से मिलता है। लोग मिल-जुलकर रहते हैं, साथ में काम करते हैं, तथा खेती करते हैं। यहाँ लोगों के घरों में पालतू पशु भी पाए जाते हैं। यहाँ का जीवन बहुत ही शांतिपूर्ण एवं सादगी से भरा होता है।

पाठ्यपुस्तक: पृष्ठ क्र.27 पर शहर का चित्र है। इसमें शहर की जीवन शैली एवं वातावरण दिखाया गया है। यहाँ लोग बड़ी-बड़ी इमारतों में रहते हैं। यात्रा के लिए कार, बस, टैक्सी, स्कूटर आदि वाहनों का प्रयोग किया जाता है। शहर में जनसंख्या अधिक होने के कारण अनुशासन की आवश्यकता अधिक होती है। सड़क पर वाहनों को अनुशासन से चलाने के लिए कई नियम एवं कानून बनाए गए हैं।

जगह – जगह ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। लोगों के पैदल चलने के लिए फुटपाथ, सड़क पार करने के लिए ज़ेब्रा क्रॉसिंग बनाए गए हैं। गाँव और शहर दोनों जगह स्वच्छता एवं अनुशासन बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। ऐसा करने से हम खुशहाल एवं सुखद जीवन जी सकेंगे। अत: हम सभी को स्वच्छता एवं अनुशासन बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।

Maharashtra Board Class 5 Hindi Solutions Chapter 1 गाँव और शहर

शब्दार्थ:

  1. प्रगति – तरक्की (progress)
  2. कूड़ादान – कचरापेटी (dustbin)
  3. स्वच्छ – साफ (clean)
  4. स्वस्थ – तंदुरुस्त (healthy)
  5. उन्नति , – विकास (development)
  6. बैलगाड़ी – छकड़ा (bullock cart)
  7. शौचालय – पाखाना (toilet)