Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 12 पुन्हा एकदा Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा(कविता)

Marathi Aksharbharati Std 9 Digest Chapter 12 पुन्हा एकदा Textbook Questions and Answers

पाठाखालील‌ ‌स्वाध्याय:

1.‌ कवयित्रीला‌ ‌असे‌ ‌का‌ ‌म्हणावेसे‌ ‌वाटते?‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1.
पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌कोसळाव्यात,‌ ‌कारण‌ ‌….‌…..‌
उत्तरः‌
समाजातील‌ ‌असणारा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌मिटून‌ ‌जावा.‌

प्रश्न‌ ‌2.
भुलावी‌ ‌तहान‌ ‌विसरावी‌ ‌भूक,‌ ‌कारण‌ ‌….‌…… ‌
उत्तरः‌ ‌
नवनवीन‌ ‌गोष्टींची‌ ‌निर्मिती‌ ‌करण्याची‌ ‌इच्छा‌ ‌व्हा

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2. ‌खालील‌ ‌घटनांचे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌अपेक्षित‌ ‌परिणाम‌ ‌लिहा.‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1.‌
‌खालील‌ ‌घटनांचे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌अपेक्षित‌ ‌परिणाम‌ ‌लिहा.‌ ‌
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा 1
उत्तरः‌
1. वीज‌ ‌चमकणे‌ ‌-‌ ‌उत्साह‌ ‌निर्माण‌ ‌होतो,‌ ‌माणसात‌ ‌नवचैतन्य‌‌सळसळते.‌ ‌
2.‌ ‌वारा‌ ‌घु मणे‌ ‌-‌ ‌युवक‌ ‌भारला‌ ‌जाऊन,‌ ‌तहानभूक‌ ‌विसरून‌ ‌जाऊन,‌‌ नवनिर्मितीसाठी‌ ‌प्रयत्नशील‌ ‌होईल.‌

3. खालील‌ ‌प्रतिके‌ ‌व‌ ‌त्यांचा‌ ‌अर्थ‌ ‌यांच्या‌ ‌जोड्या‌ ‌लावा.

प्रश्न‌ ‌1.‌ ‌
खालील‌ ‌प्रतिके‌ ‌व‌ ‌त्यांचा‌ ‌अर्थ‌ ‌यांच्या‌ ‌जोड्या‌ ‌लावा.

‌ ‌’अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
‌1. वीज‌ ‌रक्तात‌ ‌भिनावी‌ ‌‌‌(अ)‌ ‌सर्वत्र‌ ‌भारत‌ ‌भूमी‌ ‌ चमकावी‌
‌2. मातीत‌ ‌माती‌ ‌एक‌ ‌व्हावी‌‌(आ)‌ ‌समाजातील‌ ‌भेदभाव‌ ‌नष्ट‌ ‌व्हावे‌‌
‌3. नवनिर्माणाची‌ ‌चाहूल‌ लागावी‌‌(इ)‌ ‌मातीने‌ ‌भेदभाव‌ ‌विसरावा‌‌
4. पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदभाव‌(ई)‌ ‌माणसांत‌ ‌उत्साह‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावा.‌
5. उजळावी‌ ‌भूमी‌ दिगंतात‌‌(उ)‌ ‌नवनवीन‌ ‌गोष्टीची‌‌ निर्मिती‌ ‌करण्याची‌‌ इच्छा‌ ‌व्हावी.‌ ‌

उत्तरः‌

‌ ‌’अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
‌1. वीज‌ ‌रक्तात‌ ‌भिनावी‌ ‌‌‌(ई)‌ ‌माणसांत‌ ‌उत्साह‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावा.‌
‌2. मातीत‌ ‌माती‌ ‌एक‌ ‌व्हावी‌‌(इ)‌ ‌मातीने‌ ‌भेदभाव‌ ‌विसरावा‌‌
‌3. नवनिर्माणाची‌ ‌चाहूल‌ लागावी‌(उ)‌ ‌नवनवीन‌ ‌गोष्टीची‌‌ निर्मिती‌ ‌करण्याची‌‌ इच्छा‌ ‌व्हावी.‌ ‌
4. पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदभाव‌(आ)‌ ‌समाजातील‌ ‌भेदभाव‌ ‌नष्ट‌ ‌व्हावे‌‌
5. उजळावी‌ ‌भूमी‌ दिगंतात‌‌(अ)‌ ‌सर्वत्र‌ ‌भारत‌ ‌भूमी‌ ‌ चमकावी‌

4.‌ ‌भावार्थाधारित.‌‌

‌प्रश्न‌ ‌1.
मातीत‌ ‌माती‌ ‌व्हावी‌ ‌एक…….‌ ‌पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदाभेद……..‌ ‌या,‌‌ काव्यपंक्तीतील‌ ‌समाजिक‌ ‌आशय‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌
उत्तरः‌
‌‘कृती‌ ‌3‌ ‌:‌ ‌काव्यसौंदर्य’‌ ‌मधील‌ (1)‌ ‌(ii)‌ ‌चे‌ ‌उत्तर‌ ‌पहा.‌

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‌5.‌ ‌अभिव्यक्ती‌

‌प्रश्न‌ ‌1.
आपल्या‌ ‌देशात‌ ‌शांती‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावी‌ ‌यासाठी‌ ‌’पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌काय‌ ‌व्हावे‌ ‌असे‌ ‌तुम्हांस‌ ‌वाटते‌ ‌ते‌ ‌स्वत:च्या‌ ‌शब्दांत‌ ‌सविस्तर‌‌ लिहा.‌ ‌
उत्तर‌:‌ ‌
‘कृती‌ 3:‌ ‌काव्यसौंदर्य’‌ ‌मधील‌ ‌(4)‌ ‌चे‌ ‌उत्तर‌ ‌पहा.‌ ‌

‌प्रश्न‌ ‌2.
‌कवितेचा‌ ‌तुम्हाला‌ ‌समजलेला‌ ‌भावार्थ‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌
उत्तर:‌ ‌
(कवितेचा‌ ‌भावार्थ‌ ‌पहा.)‌‌

अपठित‌ ‌गदय‌ ‌आकलन.‌‌:

1. ‌खालील‌ ‌उतारा‌ ‌काळजीपूर्वक‌ ‌वाचून‌ ‌त्याखालील‌ ‌कृती‌ ‌करा.‌

‌प्रश्न‌ ‌1.
चौकटी‌ ‌पूर्ण‌ ‌करा.‌‌
(अ)‌ ‌झेंड्याचा‌ ‌पांढरा‌ ‌रंग‌ ‌गुणांचा‌ ‌निदर्शक‌ ‌[‌ ‌]
(आ)‌ ‌झेंड्याचा‌ ‌केशरी‌ ‌रंग‌ ‌गुणांचा‌ ‌निदर्शक‌ ‌[ ]
(इ)‌ ‌झेंड्याचा‌ ‌हिरवा‌ ‌रंग‌ ‌गुणांचा‌ ‌निदर्शक‌‌ [ ]

आपल्या‌ ‌झेंड्याचा‌ ‌मधला‌ ‌भाग‌ ‌पांढरा‌ ‌आहे.‌ ‌त्याचा‌ ‌अर्थ‌ ‌काय?‌ ‌पांढरा‌ ‌रंग‌ ‌प्रकाशाचा‌ ‌सत्याचा‌ ‌व‌ ‌साधेपणाचा‌ ‌निदर्शक‌ ‌आहे‌ ‌आणि‌ ‌त्यावरील‌ ‌अशोकचक्र‌ ‌काय‌ ‌सांगते?‌ ‌ते‌ ‌सद्गुणांची,‌ ‌धर्माची‌ ‌खूण‌ ‌सांगते.‌ ‌या‌ ‌झेंड्याखाली‌ ‌काम‌ ‌करताना‌ ‌आपण‌ ‌धर्ममय‌ ‌राहू,‌ ‌सत्यमय‌ ‌राहू‌ ‌असा‌ ‌त्याचा‌ ‌अर्थ‌ ‌आहे.‌ ‌आपल्या‌ ‌वर्तनाची‌ ‌ही‌ ‌सूत्रे‌ ‌राहू‌ ‌देत.‌ ‌या‌ ‌चक्राचा‌ ‌आणखी‌ ‌काय‌ ‌अर्थ‌ ‌आहे?‌ ‌चक्र‌ ‌म्हणजे‌ ‌गती.‌ ‌हे‌ ‌चक्र‌ ‌सांगते,‌ ‌की‌ ‌गतिमान‌ ‌राहा.‌ ‌केशरी‌ ‌रंग‌ ‌त्यागाचा‌ ‌व‌ ‌नम्रतेचा‌ ‌निदर्शक‌ ‌आहे‌ ‌आणि‌ ‌हिरवा‌ ‌रंग‌ ‌म्हणजे‌ ‌हरितश्यामल‌ ‌भूमातेचा.‌ ‌या‌ ‌ध्वजाखाली‌ ‌उभे‌ ‌राहून‌ ‌सेवावृत्तीने‌ ‌व‌ ‌निरहंकारीपणाने‌ ‌आपण‌ ‌पृथ्वीवर‌ ‌स्वर्ग‌ ‌निर्मूया.‌‌

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2. झेंड्यातील‌ ‌अर्थपूर्णता‌ ‌स्वभाषेत‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.

‌प्रश्न‌ ‌1.
झेंड्यातील‌ ‌अर्थपूर्णता‌ ‌स्वभाषेत‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.

Marathi Akshar Bharati Class 9 Textbook Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा Additional Important Questions and Answers

पुढील‌ ‌पक्ष्याच्या‌ ‌आधारे‌ ‌दिलेल्या‌ ‌सूचनेनुसार‌ ‌कृती‌ ‌करा:‌ ‌

कृती‌ ‌1‌:‌ ‌आकलन‌ ‌कृती‌

प्रश्न‌‌ ‌1.‌ ‌
आकृतिबंध‌ ‌पूर्ण‌ ‌करा
उत्तरः‌ ‌
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Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा 3

प्रश्न‌‌ ‌2.‌ ‌
उत्तर‌ ‌लिहा.‌
1. ‌रक्तात‌ ‌भिनावी‌ ‌-‌ ‌[ ]
2. ‌पिंगा‌ ‌घालणाऱ्या‌ ‌-‌ ‌[ ]‌ ‌
उत्तर:‌
‌1. वीज‌ ‌
2.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी

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खालील‌ ‌प्रश्नांची‌ ‌उत्तरे‌ ‌एका‌ ‌वाक्यात‌ ‌लिहा.‌ ‌

प्रश्न‌‌ ‌1.
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌कोण‌ ‌चमकावे‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते?‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌वीज‌ ‌चमकावी‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌ ‌

प्रश्न 2.
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌पिंगा‌ ‌घालीत‌ ‌कोण‌ ‌यावे?‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌पिंगा‌ ‌घालीत‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌याव्यात.‌

प्रश्न‌‌ ‌3.
‌बेभान‌ ‌कोण‌ ‌व्हावे‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते?‌ ‌
उत्तर‌‌:‌ ‌
पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌बेभान‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌

प्रश्न‌‌ ‌4.
‌कवयित्रीच्या‌ ‌मते‌ ‌नवनिर्माणाची‌ ‌चाहूल‌ ‌कोणाला‌ ‌लागावी?‌ ‌
उत्तरः‌
‌कवयित्रीच्या‌ ‌मते‌ ‌नवनिर्माणाची‌ ‌चाहूल‌ ‌युवकाला‌ ‌लागावी.‌

प्रश्न‌‌ ‌5.
‌कवयित्री‌ ‌कोणाला‌ ‌तहान,‌ ‌भूक‌ ‌विसरायला‌ ‌सांगते?‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
कवयित्री‌ ‌युवकाला‌ ‌तहान,‌ ‌भूक‌ ‌विसरायला‌ ‌सांगते.‌‌

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कंसातील‌ ‌योग्य‌ ‌शब्द‌ ‌वापरून‌ ‌रिकाम्या‌ ‌जागा‌ ‌भरा.‌

प्रश्न‌‌ ‌1.‌

  1. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌चमकावी‌‌ ………………………. (वीज,‌ ‌तार,‌ ‌काच,‌ ‌काया)
  2. भिनावी‌ ‌…………..‌ ‌पेटावे‌ ‌स्नायू‌‌ (मातीत,‌ ‌पाण्यात,‌ ‌रक्तात,‌ ‌अंगात)‌ ‌
  3. ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घालीत‌ ‌………….”‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान.‌ (धिंगाना,‌ ‌पिंगा,‌ ‌वरी,‌ ‌नाच)‌ ‌
  4. ‌मातीत‌ ‌…………..‌ ‌व्हावी‌ ‌एक.‌‌ (मातीत,‌ ‌माती,‌ ‌धन,‌ ‌पाणी)‌
  5. पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌…………..‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकवेळ.‌‌ (जातीभेद,‌ ‌धर्मभेद,‌ ‌भेदाभेद,‌ ‌धर्म)‌
  6. ‌(पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा‌ ‌………… ‌इथला‌ ‌भारला‌ ‌जावा.‌‌ (माणूस,‌ ‌युवक,‌ ‌मुलगा,‌ ‌बाप)‌ ‌
  7. ‌नवनिर्माणाची‌ ‌लागावी‌ ‌चाहूल‌ ‌उजळावी‌‌ (भूमी,‌ ‌जमीन,‌ ‌पठार,‌ ‌दरी)‌ ‌

उत्तर‌‌:‌

  1. वीज‌
  2. रक्तात‌
  3. पिंगा‌
  4. ‌माती‌
  5. भेदाभेद‌‌
  6. युवक‌ ‌
  7. ‌भूमी‌ ‌

‌जोड्या‌ ‌जुळवा.‌ ‌

प्रश्न‌‌ ‌1.‌

‘अ’‌ ‌गट‌‘ब’‌ ‌गट‌ ‌
‌1. चमकावी‌ ‌(अ)‌ ‌पुकार‌
‌2. भिनावी‌ ‌(ब)‌ ‌स्नायू‌
3. पेटावे(क)‌ ‌रक्तात‌‌
4. करीत‌‌(ड)‌ ‌वीज‌‌

‌उत्तर:‌

‘अ’‌ ‌गट‌‘ब’‌ ‌गट‌ ‌
‌1. चमकावी‌ ‌(ड)‌ ‌वीज‌‌
‌2. भिनावी‌ ‌(क)‌ ‌रक्तात‌‌
3. पेटावे(ब)‌ ‌स्नायू‌
4. करीत‌‌(अ)‌ ‌पुकार‌

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प्रश्न‌‌ ‌2.‌

‘अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
‌1. घालीत‌ ‌याव्या‌ ‌पिंगा‌‌(अ)‌ ‌भेदाभेद‌
‌2. पावसाच्या‌ ‌सरी‌(ब)‌ ‌व्हावी‌ ‌एक‌
‌3. मातीत‌ ‌माती‌(क)‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान‌‌
‌4. पुसून‌ ‌टाकीत‌(ड)‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी.‌

‌उत्तर:‌

‘अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
‌1. घालीत‌ ‌याव्या‌ ‌पिंगा‌‌(ड)‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी.‌
‌2. पावसाच्या‌ ‌सरी‌(क)‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान‌‌
‌3. मातीत‌ ‌माती‌(ब)‌ ‌व्हावी‌ ‌एक‌
‌4. पुसून‌ ‌टाकीत‌(अ)‌ ‌भेदाभेद‌

प्रश्न‌‌ 3.‌

‘अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
‌1. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌(अ)‌ ‌भूक‌
‌2. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌(ब)‌ ‌तहान‌
‌3. भुलावी‌‌(क)‌ ‌भारला‌ ‌जावा‌
‌4. विसरावी‌‌(ड)‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा‌ ‌

उत्तर:‌

‘अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
‌1. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌(ड)‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा‌ ‌
‌2. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌(क)‌ ‌भारला‌ ‌जावा‌
‌3. भुलावी‌‌(ब)‌ ‌तहान‌
‌4. विसरावी‌‌(अ)‌ ‌भूक‌

कृती‌ ‌2‌:‌ ‌आकलन‌ ‌कृती‌ ‌

प्रश्न‌‌ 1.
‌समान‌ ‌अर्थाच्या‌ ‌काव्यपंक्ती‌ ‌शोधून‌ ‌लिहा.‌

  1. मातीत‌ ‌माती‌ ‌मिसळून‌ ‌जावी‌ ‌व‌ ‌एक‌ ‌व्हावी.‌‌
  2. पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌पिंगा‌ ‌घालीत‌ ‌बेभान‌ ‌होऊन‌ ‌याव्यात.‌ ‌
  3. ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌नव्या‌ ‌सुधारणांचा‌ ‌वारा‌ ‌आपल्या‌ ‌समाजात‌ ‌घुमत‌ ‌यावा.‌ ‌
  4. आपली‌ ‌भारतभूमी‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌प्रखर‌ ‌तेजाने‌ ‌तळपावी‌ ‌तिची‌‌ किर्ती‌ ‌सगळ्या‌ ‌जगभर‌ ‌पसरावी.‌ ‌

उत्तर:‌

  1. ‌मातीत‌ ‌माती‌ ‌व्हावी‌ ‌एक‌‌
  2. ‌घालीत‌ ‌पिंगा‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान‌
  3. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा‌‌
  4. उजळावी‌ ‌भूमी‌ ‌………….‌ ‌दिगंतात‌ ‌….‌……… ‌

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प्रश्न‌‌ 2.
काव्यपंक्तींचा‌ ‌योग्य‌ ‌क्रम‌ ‌लावा.‌

  1. ‌रीत‌ ‌पुकार‌ ‌
  2. भिनावी‌ ‌रक्तात‌ ‌
  3. चमकावी‌ ‌वीज‌ ‌
  4. पेटावे‌ ‌स्नायू‌ ‌
  5. ‌पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदाभेद‌ ‌
  6. ‌पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान‌ ‌
  7. ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घालीत‌ ‌पिंगा‌ ‌
  8. ‌पुन्हा‌ ‌एकवेळ‌ ‌…..‌
  9. ‌उजळावी‌ ‌भूमी‌ ‌…..‌ ‌दिगंतात‌ ‌….‌
  10. ‌युवक‌ ‌इथला‌ ‌भारला‌ ‌जावा‌ ‌
  11. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा‌ ‌
  12. नवनिर्माणाची‌ ‌लागावी‌ ‌चाहूल‌ ‌

उत्तर:‌ ‌

  1. ‌चमकावी‌ ‌वीज‌‌
  2. भिनावी‌ ‌रक्तात‌
  3. ‌पेटावे‌ ‌स्नायू‌
  4. ‌करीत‌ ‌पुकार‌ ‌
  5. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घालीत‌ ‌पिंगा‌ ‌
  6. पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान‌
  7. ‌पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदाभेद‌ ‌
  8. पुन्हा‌ ‌एकवेळ‌
  9. पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा‌‌
  10. ‌युवक‌ ‌इथला‌ ‌भारला‌ ‌जावा‌
  11. नवनिर्माणाची‌ ‌लागावी‌ ‌चाहूल‌‌
  12. उजळावी‌ ‌भूमी‌ ‌…….‌ ‌दिगंतात‌ ‌….‌ ‌

प्रश्न‌‌ 3.
काव्यपंक्तींवरून‌ ‌शब्दांचा‌ ‌योग्य‌ ‌क्रम‌ ‌लावा.‌‌

  1. पुकार,‌ ‌चमकावी,‌ ‌रक्तात,‌ ‌स्नायू‌ ‌
  2. ‌एकदा,‌ ‌उतरावी,‌ ‌एकवार,‌ ‌करीत‌ ‌
  3. ‌एकवेळ,‌ ‌एकदा,‌ ‌टाकीत,‌ ‌घालीत‌ ‌
  4. पिंगा,‌ ‌भेदाभेद,‌ ‌बेभान,‌ ‌कोसळाव्यात‌ ‌
  5. ‌युवक,‌ ‌वारा,‌ ‌भूक,‌ ‌भूमी.‌
  6. चाहूल,‌ ‌भारला,‌ ‌घुमावा,‌ ‌विसरावी‌

‌उत्तर:‌

  1. ‌चमकावी,‌ ‌रक्तात,‌ ‌स्नायू,‌ ‌पुकार‌‌
  2. एकदा,‌ ‌उतरावी,‌ ‌करीत,‌ ‌एकवार‌ ‌
  3. एकदा,‌ ‌घालीत,‌ ‌टाकीत,‌ ‌एकवेळ‌
  4. पिंगा,‌ ‌बेभान,‌ ‌कोसळाव्यात,‌ ‌भेदाभेद‌
  5. वारा,‌ ‌युवक,‌ ‌भूक,‌ ‌भूमी‌‌
  6. घुमावा,‌ ‌भारला,‌ ‌विसरावी,‌ ‌चाहूल‌

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प्रश्न‌ ‌तयार‌ ‌करा.‌ ‌

प्रश्न‌‌ 1.‌
‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌चमकावी‌ ‌वीज.‌
‌उत्तरः‌
‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌कोणी‌ ‌चमकावे?‌

प्रश्न‌‌ 2.
‌पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान‌
‌उत्तरः‌
‌बेभान‌ ‌कोणी‌ ‌व्हावे‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते?‌

प्रश्न‌‌ 3.
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा.‌ ‌
उत्तरः‌
‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌कोण‌ ‌घुमावा?‌ ‌

प्रश्न‌‌ 4.‌
‌नवनिर्माणाची‌ ‌लागावी‌ ‌चाहूल.‌ ‌
उत्तरः‌
‌कोणाची‌ ‌चाहूल‌ ‌लागावी?‌ ‌

कृती‌ ‌3 ‌:‌ ‌काव्यसौंदर्य‌

खालील‌ ‌काव्यपंक्तीतील‌ ‌आशयसौंदर्य‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌

प्रश्न‌‌ 1.
‌पुन्हा‌ ‌एकदा,‌ ‌चमकावी‌ ‌वीज,‌ ‌उतरावी‌ ‌खाली,‌ ‌भिनावी‌‌ रक्तात‌
‌उत्तरः‌
‌वीज‌ ‌हे‌ ‌सळसळत्या‌ ‌उत्साहाचे‌ ‌प्रतीक‌ ‌आहे.‌ ‌सध्या‌‌ समाजामध्ये‌ ‌जी‌ ‌मरगळ‌ ‌दिसते‌ ‌आहे.‌ ‌ती‌ ‌मरगळ‌ ‌नष्ट‌ ‌होऊन‌ ‌माणसांमध्ये‌ ‌उत्साह‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावा‌ ‌असे‌ ‌येथे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌सूचित‌ ‌करायचे‌ ‌आहे.‌ ‌प्रत्येकाच्या‌ ‌रोमारोमात‌ ‌चैतन्य‌ ‌निर्माण‌ ‌झाले‌ ‌पाहिजे.‌ ‌प्रत्येकजण‌ ‌उत्साहाने‌ ‌चांगले‌ ‌कार्य‌ ‌करण्यासाठी‌ ‌पुढे‌ ‌यावा‌ ‌आणि‌ ‌त्याच्या‌ ‌हातून‌ ‌देशासाठी‌ ‌काहीतरी‌ ‌चांगल्या‌ ‌गोष्टी‌ ‌घडल्या‌ ‌पाहिजेत.‌‌

प्रश्न‌‌ 2.
मातीत‌ ‌माती‌ ‌व्हावी‌ ‌एक…‌ ‌पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदाभेद…‌ ‌
उत्तरः‌
‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌बेभान‌ ‌होऊन‌ ‌कोसळाव्यात.‌‌ या‌ ‌बेभान‌ ‌सरींमुळे‌ ‌मातीत‌ ‌माती‌ ‌मिसळून‌ ‌जावी.‌ ‌ती‌ ‌एकजीव‌ ‌व्हावी.‌ ‌याचाच‌ ‌अर्थ‌ ‌या‌ ‌मातीतील‌ ‌म्हणजे‌ ‌समाजातील‌ ‌सगळा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌मिटून‌ ‌जावा.‌ ‌समाजात‌ ‌एकोपा‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावा.‌ ‌म्हणून‌‌ मातीत‌ ‌माती‌ ‌एक‌ ‌व्हावी‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रिला‌ ‌वाटते.‌

पुढील‌ ‌ओळींचा‌ ‌अर्थसौंदर्य‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌‌

प्रश्न‌‌ 1.
उतरावी‌ ‌खाली,‌ ‌भिनावी‌ ‌रक्तात‌ ‌
उत्तरः‌
‌निसर्गातील‌ ‌विविध‌ ‌प्रतिकांचा‌ ‌वापर‌ ‌करीत‌ ‌कवयित्री‌‌ नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌छान‌ ‌वर्णन‌ ‌करतात.‌ ‌त्या‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌वीज‌ ‌चमकून‌ ‌खाली‌ ‌उतरून‌ ‌यावी.‌ ‌त्या‌ ‌वीजेचे‌ ‌तेज,‌ ‌तिची‌ ‌प्रखरता‌ ‌माणसांच्या‌‌
रक्तात‌ ‌भिनावी.‌ ‌

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प्रश्न‌‌ 2.
‌मातीत‌ ‌माती‌ ‌व्हावी‌ ‌एक…पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदाभेद….‌ ‌
उत्तरः‌
‌बेभान‌ ‌सरींमुळे‌ ‌मातीत‌ ‌माती‌ ‌मिसळून‌ ‌जावी.‌ ‌याचाच‌‌ अर्थ‌ ‌या‌ ‌मातीतील‌ ‌म्हणजे‌ ‌समाजातील‌ ‌सगळा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌मिटून‌ ‌जावा,‌ ‌संपून‌ ‌जावा,‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌समाजात‌ ‌असलेला‌ ‌गरीब-श्रीमंत,‌ ‌उच्च-नीच,‌ ‌जात-धर्म,‌ ‌स्त्री-पुरुष‌ ‌असा‌ ‌विविध‌ ‌प्रकाराचा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌नष्ट‌ ‌होऊन‌ ‌भेदभावरहित‌ ‌नव्या‌‌ समाजाची‌ ‌निर्मिती‌ ‌व्हावी,‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रिला‌ ‌वाटते.‌ ‌

प्रश्न‌‌ 3.
‌उजळावी‌ ‌भूमी‌ ‌…‌….. ‌दिगंतात‌ ‌…‌……‌
उत्तरः‌
‌नव्या‌ ‌विचारांनी,‌ ‌नव्या‌ ‌कर्तृत्वाने‌ ‌आपली‌ ‌सारी‌ ‌भूमी‌‌ उजळून‌ ‌निघावी.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌आपली‌ ‌भारतभूमी‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌प्रखर‌ ‌तेजाने‌ ‌तळपावी,‌ ‌तिची‌ ‌कीर्ती‌ ‌सगळ्या‌ ‌जगभर‌ ‌पसरावी,‌ ‌असेच‌‌ कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌ ‌

प्रश्न‌‌ 4.
‌पुन्हा‌ ‌एकदा,‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा,‌ ‌युवक‌ ‌इथला,‌ ‌भारला‌ ‌जावा‌ ‌
उत्तरः‌
‌नवनिर्मितीचे‌ ‌विचार‌ ‌प्रखरतेने‌ ‌मांडताना‌ ‌कवयित्री‌ ‌म्हणतात‌‌ की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌नव्या‌ ‌सुधारणांचा‌ ‌वारा‌ ‌आपल्या‌ ‌समाजात‌ ‌घुमत‌‌ यावा.‌ ‌या‌ ‌वाऱ्याने‌ ‌इथला‌ ‌प्रत्येक‌ ‌युवक‌ ‌भारून‌ ‌जावा.‌ ‌

प्रश्न‌‌ 3.
क्रांती‌ ‌आपोआप‌ ‌होत‌ ‌नाही‌ ‌तर‌ ‌ती‌ ‌घडवून‌ ‌आणावी‌ ‌लागते,‌‌ यावर‌ ‌तुमचे‌ ‌मत‌ ‌सोदाहरण‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌
उत्तरः‌
‌क्रांती‌ ‌आपोआप‌ ‌होत‌ ‌नसली‌ ‌तरी‌ ‌ती‌ ‌घडवून‌ ‌आणण्यासाठी‌‌ तशी‌ ‌परिस्थिती‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावी‌ ‌लागते.‌ ‌क्रांतीमुळे‌ ‌समाजात‌ ‌परिवर्तन‌ ‌होत‌ ‌असते.‌ ‌संपूर्ण‌ ‌समाजात‌ ‌व‌ ‌देशात‌ ‌आमूलाग्र‌ ‌बदल‌ ‌घडवून‌ ‌आणण्याचे‌ ‌सामर्थ्य‌ ‌क्रांतीत‌ ‌असते,‌ ‌तिला‌ ‌घडवून‌ ‌आणण्यासाठी‌ ‌समाजातील‌ ‌कोणीतरी‌ ‌व्यक्ती‌ ‌पुढाकार‌ ‌घेते.‌ ‌ती‌ ‌आपले‌ ‌ज्वलंत‌ ‌विचार‌ ‌लिखित‌ ‌स्वरूपात‌ ‌मांडते‌ ‌व‌ ‌पुढे‌‌ व्यक्त‌ ‌करते.‌ ‌त्याचे‌ ‌वाचन‌ ‌करून‌ ‌लोकांमध्ये‌ ‌तत्कालीन‌ ‌रूढी,‌ ‌परंपरा‌ ‌वा‌ ‌विचारधारणेविषयी‌ ‌तिटकारा‌ ‌निर्माण‌ ‌होतो.‌ ‌जनता‌ ‌आपल्यावर‌ ‌होत‌ ‌असलेला‌ ‌अन्याय,‌ ‌अत्याचार‌ ‌यांविरोधात‌ ‌जागृत‌ ‌होते‌ ‌व‌ ‌क्रांतीस‌ ‌सिद्ध‌ ‌होते.‌ ‌रूसोचे‌ ‌विचार‌ ‌वाचून‌ ‌फ्रेंच‌ ‌लोक‌ ‌राज्यक्रांती‌ ‌करण्यास‌ ‌सिद्ध‌ ‌झाले‌ ‌होते.‌ ‌केसरीतील‌ ‌लोकमान्य‌ ‌टिळकांचे‌ ‌लेख‌ ‌वाचून‌ ‌लोक‌ ‌इंग्रजांविरोधात‌ ‌चिडून‌‌ उठले‌ ‌होते.‌

प्रश्न‌‌ 4.
‌आपल्या‌ ‌देशात‌ ‌शांती‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावी‌ ‌यासाठी‌ ‌’पुन्हा‌ ‌एकदा’‌‌ काय‌ ‌व्हावे‌ ‌असे‌ ‌तुम्हांस‌ ‌वाटते‌ ‌ते‌ ‌स्वत:च्या‌ ‌शब्दांत‌ ‌सविस्तर‌‌ लिहा.‌ ‌
उत्तरः‌
‌आपल्या‌ ‌देशात‌ ‌आज‌ ‌भ्रष्टाचार,‌ ‌अन्याय,‌ ‌अत्याचार,‌‌ स्त्रीशोषण,‌ ‌बालशोषण‌ ‌असे‌ ‌अनेक‌ ‌वाईट‌ ‌प्रकार‌ ‌घडत‌ ‌आहेत.‌ ‌त्यामुळे‌ ‌आपल्या‌ ‌देशात‌ ‌आज‌ ‌अशांतीचे‌ ‌वातावरण‌ ‌निर्माण‌ ‌झालेले‌ ‌आहे.‌ ‌यासाठी‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌क्रांती‌ ‌घडवून‌ ‌आणण्यासाठी‌ ‌सर्वांनी‌ ‌एकत्र‌ ‌येणे‌ ‌आवश्यक‌ ‌बनलेले‌ ‌आहे.‌ ‌देशात‌ ‌वाढत‌ ‌चाललेली‌ ‌अराजकता‌ ‌व‌ ‌अंधाधुंदी‌ ‌कमी‌ ‌करण्यासाठी‌ ‌सर्वांनी‌ ‌प्रामाणिकपणाने‌ ‌आपले‌ ‌कर्तव्य‌ ‌निभावले‌ ‌पाहिजे.‌ ‌’मी‌ ‌भ्रष्टाचार‌ ‌करणार‌ ‌नाही‌ ‌वा‌ ‌इतरांना‌ ‌करू‌ ‌देणार‌ ‌नाही’,‌ ‌यावर‌ ‌सर्वांनी‌ ‌ठाम‌ ‌असले‌ ‌पाहिजे.‌ ‌संविधानाच्या‌ ‌विरोधात‌ ‌कार्य‌ ‌करत‌ ‌असलेल्या‌ ‌लोकांना‌ ‌पकडून‌ ‌पोलीस‌ ‌ठाण्यात‌ ‌दिले‌ ‌पाहिजे.‌ ‌देशसेवेचे‌ ‌बाळकडू‌ ‌सर्वांनी‌ ‌प्राशन‌ ‌केले‌ ‌पाहिजे.‌ ‌यासाठी‌ ‌सर्वांनी‌ ‌मिळून‌‌ पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌अभियान‌ ‌चालविले‌ ‌पाहिजे.‌ ‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा

प्रश्न‌‌ 5.
‌नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेले‌ ‌लोक‌ ‌सर्वसामान्यांपेक्षा‌ ‌वेगळे‌ असतात,‌ ‌यावर‌ ‌तुमचे‌ ‌विचार‌ ‌सोदाहरण‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌
‌उत्तरः‌ ‌
नवनिर्मिती‌ ‌म्हणजे‌ ‌जुन्या‌ ‌चालीरीती,‌ ‌रूढी,‌ ‌परंपरा,‌ ‌समाजात‌‌ प्रचलित‌ ‌असलेल्या‌ ‌सामाजिक‌ ‌समस्या‌ ‌यांचा‌ ‌नाश‌ ‌करून‌ ‌नवीन‌ ‌मूल्यांवर‌ ‌आधारित‌ ‌समाजाची‌ ‌स्थापना‌ ‌करणे‌ ‌होय.‌ ‌अशा‌ ‌या‌ ‌नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेले‌ ‌लोक‌ ‌इतरांहून‌ ‌वेगळेच‌ ‌असतात.‌ ‌ते‌ ‌आपल्या‌ ‌ध्यासाने‌ ‌भारावलेले‌ ‌असतात.‌ ‌नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌साकार‌ ‌करण्यासाठी‌ ‌ते‌ ‌समाजात‌ ‌क्रांती‌ ‌घडवून‌ ‌आणतात.‌ ‌आपल्या‌ ‌ज्वलंत‌ ‌विचारांनी‌ ‌व‌ ‌कृतीतून‌ ‌ते‌ ‌समाजापुढे‌ ‌एक‌ ‌आदर्श‌ ‌निर्माण‌ ‌करतात.‌ ‌नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेली‌ ‌माणसे‌ ‌ध्येयवेडी‌ ‌असतात.‌ ‌नेल्सन‌ ‌मंडेला‌ ‌यांनीसुद्धा‌ ‌प्रस्थापित‌ ‌समाजरचनेविरोधात‌ ‌जो‌ ‌संघर्ष‌ ‌केला‌ ‌होता‌ ‌तो‌ ‌खरोखरच‌ ‌प्रशंसनीयच‌ ‌होता.‌ ‌स्वामी‌ ‌विवेकानंद,‌ ‌आगरकर,‌ ‌लोकमान्य‌ ‌टिळक‌ ‌यांनी‌ ‌सुद्धा‌ ‌नवनिर्मितीसाठी‌ ‌भगीरथ‌ ‌प्रयत्न‌ ‌केले‌ ‌होते;‌ ‌म्हणून‌ ‌या‌ ‌सर्वांना‌ ‌सर्वसामान्यांपेक्षा‌ ‌मानाचे‌ ‌व‌ ‌आदराचे‌ ‌स्थान‌ ‌आहे.‌‌

प्रश्न‌‌ 6.
दिलेल्या‌ ‌मुद्द्यांच्या‌ ‌आधारे‌ ‌कवितेसंबंधी‌ ‌पुढील‌ ‌कृती‌‌ सोडवा.‌ ‌
‌उत्तरः‌ ‌
1. कवी/‌ ‌कवयित्रीचे‌ ‌नाव‌ ‌-‌‌ प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌

2. ‌संदर्भ‌ ‌-‌‌
‘पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌‌ आहे.‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌त्यांच्या‌ ‌’भुलाई’‌ ‌या‌ ‌कवितासंग्रहातील‌ ‌आहे.‌ ‌

3‌. ‌प्रस्तावना‌ ‌-‌‌
‘पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌नवनिर्माणाचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌सुरेख‌ ‌वर्णन‌ ‌कवयित्रीने‌ ‌केले‌ ‌आहे.‌ ‌वाङमयप्रकारसामाजिक‌ ‌कविता‌ ‌कवितेचा‌ ‌विषयनवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌वर्णन‌ ‌करणारी‌‌
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌सामाजिक‌ ‌भान‌ ‌असलेली‌ ‌कविता‌ ‌आहे.‌

4. वाङमयप्रकार‌‌-
सामाजिक‌ ‌कविता‌

5. ‌कवितेचा‌ ‌विषय‌‌-
नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌वर्णन‌ ‌करणारी‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌सामाजिक‌ ‌भान‌ ‌असलेली‌ ‌कविता‌ ‌आहे.‌‌

6. कवितेतील‌ ‌आवडलेली‌ ‌ओळ‌‌
मातीत‌ ‌माती‌ ‌
व्हावी‌ ‌एक‌ ‌…‌
‌पुसून‌ ‌टाकीत‌‌
भेदाभेद…‌ ‌

7.‌ ‌मध्यवर्ती‌ ‌कल्पना‌ ‌-‌‌
समाजातील‌ ‌जुन्या‌ ‌रूढी,‌ ‌रीतिरिवाज,‌ ‌परंपरा,‌ ‌भेदाभेद‌ ‌नष्ट‌ ‌करून‌ ‌नवनिर्माणाचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌‌ सुरेख‌ ‌वर्णन‌ ‌’पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते..‌ ‌

8. कवितेतून‌ ‌मिळणारा‌ ‌संदेश‌‌ –
समाजातील‌ ‌सर्व‌ ‌प्रकारचा‌ ‌भेदाभेद,‌ ‌रूढी,‌ ‌रीतीरिवाज,‌ ‌परंपरा‌ ‌इथल्या‌ ‌तरुणांनी‌ ‌नष्ट‌ ‌कराव्यात.‌ ‌तसेच‌ ‌नवीन,‌ ‌पुरोगामी‌ ‌विचारांचा‌ ‌नवा‌ ‌एकसंघ‌ ‌समाज‌ ‌निर्माण‌ ‌करण्याचा‌ ‌प्रत्येकाने‌‌ ध्यास‌ ‌घ्यावा.‌ ‌हा‌ ‌संदेश‌ ‌’पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌या‌ ‌कवितेतून‌ ‌मिळतो.‌ ‌

9. कविता‌ ‌आवडण्याची‌ ‌वा‌ ‌न‌ ‌आवडण्याची‌ ‌कारणे-
‘पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌मला‌ ‌खूप‌ ‌आवडली‌ ‌आहे.‌ ‌त्याचे‌ ‌महत्त्वाचे‌ ‌कारण‌ ‌म्हणजे‌ ‌नवनिर्माणाचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌वर्णन‌ ‌करण्यासाठी‌ ‌कवयित्रीने‌ ‌निसर्गातील‌ ‌विविध‌ ‌प्रतिकांचा‌ ‌अतिशय‌ ‌सुरेख‌ ‌वापर‌ ‌केलेला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌प्रतिकांमुळे‌ ‌कविता‌ ‌जिवंत‌ ‌असल्याप्रमाणे‌ ‌भास‌ ‌होतो.‌‌

10. ‌भाषिक‌ ‌वैशिष्ट्ये‌‌-
‘पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌प्रमाण‌ ‌मराठी‌ ‌भाषेचा‌ ‌वापर‌ ‌केलेला‌ ‌आहे.‌ ‌प्रत्येक‌ ‌ओळीमध्ये‌ ‌केवळ‌ ‌दोनच‌ ‌शब्दांचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌वेगळा‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌निसर्गप्रतिकांचा‌ ‌योग्य‌ ‌वापर‌ ‌करीत‌ ‌अर्थाचे‌ ‌सौंदर्य‌ ‌वाढवलेले‌ ‌आहे.‌‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा

‌खालील‌ ‌काव्यपंक्तींचे‌ ‌रसग्रहण‌ ‌करा.‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1.
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌चमकावी‌ ‌वीज‌‌
उतरावी‌ ‌खाली‌ ‌भिनावी‌ ‌रक्तात‌
‌पेटावे‌ ‌स्नायू‌ ‌करीत‌ ‌पुकार‌‌
पुन्हा‌ ‌एकवार‌ ‌
उत्तरः‌
‌’पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌नवनिर्माणाचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌सुरेख‌ ‌वर्णन‌ ‌कवयित्रीने‌ ‌केलेले‌ ‌आहे.‌‌

निसर्गातील‌ ‌विविध‌ ‌प्रतीकांचा‌ ‌वापर‌ ‌करीत‌ ‌कवयित्री‌ ‌नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌छान‌ ‌वर्णन‌ ‌करतात.‌ ‌त्या‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌वीज‌ ‌चमकून‌ ‌खाली‌ ‌उतरून‌ ‌यावी.‌ ‌त्या‌ ‌विजेचे‌ ‌तेज,‌ ‌तिची‌ ‌प्रखरता‌ ‌माणसांच्या‌ ‌रक्तात‌ ‌भिनावी.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌माणसांमध्ये‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌उत्साह‌ ‌भरून‌ ‌जावा.‌ ‌त्यांचे‌ ‌स्नायू‌ ‌पेटून‌ ‌उठावेत‌ ‌म्हणजेच‌ ‌समाजातील‌ ‌जुन्या,‌ ‌अनिष्ट‌ ‌चालीरिती,‌ ‌रूढी,‌ ‌परंपरा,‌ ‌अन्याय,‌ ‌अत्याचार‌ ‌याविरुद्ध‌ ‌त्यांनी‌ ‌पेटून‌ ‌उठावे‌ ‌आणि‌ ‌ते‌ ‌सारे‌ ‌नष्ट‌ ‌करून‌ ‌त्यातून‌ ‌समाजाला‌ ‌प्रगतीपथावर‌ ‌घेऊन‌ ‌जाणारे‌ ‌नवीन‌ ‌विचार‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावेत.‌‌

या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌प्रमाण‌ ‌मराठी‌ ‌भाषेचा‌ ‌वापर‌ ‌केलेला‌ ‌आहे.‌ ‌प्रत्येक‌ ‌ओळीमध्ये‌ ‌केवळ‌ ‌दोनच‌ ‌शब्दांचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌वेगळा‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌निसर्गप्रतिकांचा‌ ‌योग्य‌ ‌वापर‌ ‌करीत‌ ‌अर्थाचे‌ ‌सौंदर्य‌ ‌वाढवलेले‌ ‌आहे.‌

प्रश्न‌ ‌2.
‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घालीत‌ ‌पिंगा‌‌ पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌व्हाव्यात‌ ‌बेभान‌ ‌कोसळाव्या‌ ‌खाली‌ ‌मातीत‌ ‌माती‌ ‌व्हावी‌ ‌एक…‌ ‌पुसून‌ ‌टाकीत‌ ‌भेदाभेद…‌‌ पुन्हा‌ ‌एकवेळ…‌ ‌
उत्तर‌:‌
‌’पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌नवनिर्माणाचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌सुरेख‌ ‌वर्णन‌ ‌कवयित्रीने‌ ‌केलेले‌ ‌आहे.‌‌

‌नवनिर्मितीच्या‌ ‌विचारांनी‌ ‌प्रेरित‌ ‌झालेल्या‌ ‌मनाचे‌ ‌वर्णन‌ ‌करताना‌ ‌कवयित्री‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌पावसाच्याव्हावी.‌ ‌याचाच‌ ‌अर्थ‌ ‌या‌ ‌मातीतील‌ ‌म्हणजेच‌ ‌समाजातील‌ ‌सगळा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌मिटून‌ ‌जावा,‌ ‌संपून‌ ‌जावा,‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌समाजात‌ ‌असलेला‌ ‌गरीब-श्रीमंत,‌ ‌उच्च-नीच,‌ ‌जात-धर्म,‌ ‌स्त्री-पुरुष‌ ‌असा‌ ‌विविध‌ ‌प्रकारचा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌नष्ट‌ ‌होऊन‌ ‌भेदभावविरहित‌ ‌नव्या‌ ‌समाजाची‌ ‌निर्मिती‌ ‌व्हावी,‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌‌

या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌प्रमाण‌ ‌मराठी‌ ‌भाषेचा‌ ‌वापर‌ ‌केलेला‌ ‌आहे.‌ ‌प्रत्येक‌ ‌ओळीमध्ये‌ ‌केवळ‌ ‌दोनच‌ ‌शब्दांचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌वेगळा‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌निसर्गप्रतिकांचा‌ ‌योग्य‌ ‌वापर‌ ‌करीत‌ ‌अर्थाचे‌ ‌सौंदर्य‌ ‌वाढवलेले‌ ‌आहे.‌

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प्रश्न‌ ‌3.
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घुमावा‌ ‌वारा‌‌
युवक‌ ‌इथला‌ ‌भारला‌ ‌जावा‌ ‌
भुलावी‌ ‌तहान‌ ‌विसरावी‌ ‌भूक‌ ‌
नवनिर्माणाची‌ ‌लागावी‌ ‌चाहूल‌ ‌
उजळावी‌ ‌भूमी…‌ ‌दिगंतात…‌‌
पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌
उत्तरः‌
‌‘पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌नवनिर्माणाचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌सुरेख‌ ‌वर्णन‌ ‌कवयित्रीने‌ ‌केलेले‌ ‌आहे.‌‌

नवनिर्मितीचे‌ ‌विचार‌ ‌प्रखरतेने‌ ‌मांडताना‌ ‌कवयित्री‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌नव्या‌ ‌सुधारणांचा‌ ‌वारा‌ ‌आपल्या‌ ‌समाजात‌ ‌घुमत‌ ‌यावा.‌ ‌या‌ ‌वाऱ्याने‌ ‌इथला‌ ‌प्रत्येक‌ ‌युवक‌ ‌भारून‌ ‌जावा.‌ ‌इथल्या‌ ‌तरुणाने‌ ‌मंत्रमुग्ध‌ ‌होऊन,‌ ‌तहानभूक‌ ‌विसरून‌ ‌नवनवीन‌ ‌गोष्टी‌ ‌निर्माण‌ ‌करण्याची‌ ‌आस‌ ‌धरावी.‌ ‌नवनिर्माणाची‌ ‌चाहूल‌ ‌त्याला‌ ‌लागावी.‌ ‌नवीन‌ ‌विचारांचा‌ ‌नवा‌ ‌समाज‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावा.‌ ‌नव्या‌ ‌विचारांनी,‌ ‌नव्या‌ ‌कर्तृत्वाने‌ ‌आपली‌ ‌सारी‌ ‌भूमी‌ ‌उजळून‌ ‌निघावी,‌ ‌म्हणजेच‌ ‌आपली‌ ‌भारतभूमी‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌प्रखर‌ ‌तेजाने‌ ‌तळपावी,‌ ‌तिची‌ ‌कीर्ती‌ ‌सगळ्या‌ ‌जगभर‌ ‌पसरावी,‌ ‌असेच‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.
‌‌
या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवयित्री‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌प्रमाण‌ ‌मराठी‌ ‌भाषेचा‌ ‌वापर‌ ‌केलेला‌ ‌आहे.‌ ‌प्रत्येक‌ ‌ओळीमध्ये‌ ‌केवळ‌ ‌दोनच‌ ‌शब्दांचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌वेगळा‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌निसर्गप्रतिकांचा‌ ‌योग्य‌ ‌वापर‌ ‌करीत‌ ‌अर्थाचे‌ ‌सौंदर्य‌ ‌वाढवलेले‌ ‌आहे.‌‌

पुन्हा एकदा Summary in Marathi

कवयित्रीचा‌ ‌परिचय:

नाव‌‌:‌ ‌प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌
जन्म‌ ‌:‌ ‌(1953)‌‌
:‌ ‌ग्रामीण‌ ‌कथाकार,‌ ‌कवयित्री,‌ ‌’हजारी‌ ‌बेलपान’,‌ ‌’अकसिदीचे‌ ‌दाने’,‌ ‌’सुगरनचा‌ ‌खोपा’,‌ ‌’जावयाचं‌ ‌पोर’‌ ‌इत्यादी‌ ‌कथासंग्रह;‌ ‌’भुलाई’‌ ‌हा‌ ‌कवितासंग्रह;‌ ‌‘बुढाई’‌ ‌ही‌ ‌कादंबरी‌ ‌प्रसिद्ध.‌ ‌अस्सल‌ ‌वैदर्भी‌ ‌बोलीचा‌ ‌प्रभावी‌ ‌वापर‌ ‌हे‌ ‌त्यांच्या‌ ‌लेखनाचे‌ ‌खास‌ ‌वैशिष्ट्य‌ ‌आहे.‌‌

प्रस्तावना‌‌:

‘पुन्हा‌ ‌एकदा’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवयित्री‌ ‌’प्रतिमा‌ ‌इंगोले‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌नवनिर्माणाचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌सुरेख‌ ‌वर्णन‌ ‌केलेले‌ ‌आहे.‌‌

The‌ ‌poem‌ ‌’Punha‌ ‌ekda’‌ ‌is‌ ‌written‌ ‌by‌ ‌poetess‌ ‌Pratima‌ ‌Ingole.‌ ‌In‌ ‌this‌ ‌poem‌ ‌mind’s‌ ‌resolution‌ ‌of‌ ‌new‌ ‌generates‌ ‌has‌ ‌been‌ ‌depicted‌ ‌nicely.‌ ‌The‌ ‌Poetess‌ ‌very‌ ‌aptly‌ ‌depicts‌ ‌the‌ ‌urge‌ ‌of‌ ‌a‌ ‌progressive‌ ‌and‌ ‌creative‌ ‌mind‌ ‌towards‌ ‌the‌ ‌betterment‌ ‌of‌ ‌society‌ ‌once‌ ‌again.‌‌

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भावार्थ‌‌:

पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌……….‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकवार‌
निसर्गातील‌ ‌विविध‌ ‌प्रतिकांचा‌ ‌वापर‌ ‌करीत‌ ‌कवयित्री‌ ‌नवनिर्मितीचा‌ ‌ध्यास‌ ‌घेतलेल्या‌ ‌मनाच्या‌ ‌भावस्थितीचे‌ ‌छान‌ ‌वर्णन‌ ‌करतात.‌ ‌त्या‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌वीज‌ ‌चमकून‌ ‌खाली‌ ‌उतरून‌ ‌यावी.‌ ‌त्या‌ ‌वीजेचे‌ ‌तेज,‌ ‌तिची‌ ‌प्रखरता‌ ‌माणसांच्या‌ ‌रक्तात‌ ‌भिनावी.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌माणसांमध्ये‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌उत्साह‌ ‌भरून‌ ‌जावा.‌ ‌त्यांचे‌ ‌स्नायू‌ ‌पेटून‌ ‌उठावेत‌ ‌म्हणजेच‌ ‌समाजातील‌ ‌जुन्या,‌ ‌अनिष्ट‌ ‌चालीरिती,‌ ‌रूढी,‌ ‌परंपरा,‌ ‌अन्याय,‌ ‌अत्याचार‌ ‌याविरुद्ध‌ ‌त्यांनी‌ ‌पेटून‌ ‌उठावे‌ ‌आणि‌ ‌ते‌ ‌सारे‌ ‌नष्ट‌ ‌करून‌ ‌त्यातून‌ ‌समाजाला‌ ‌प्रगतीपथावर‌ ‌घेऊन‌ ‌जाणारे‌ ‌नवीन‌ ‌विचार‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावेत.‌‌

पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घालीत‌ ‌……भेदाभेद…‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकवेळ…‌‌
नवनिर्मितीच्या‌ ‌विचारांनी‌ ‌प्रेरित‌ ‌झालेल्या‌ ‌मनाचे‌ ‌वर्णन‌ ‌करताना‌ ‌कवयित्री‌ ‌पुढे‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌पावसाच्या‌ ‌जोरदार‌ ‌सरी‌ ‌पिंगा‌ ‌घालीत‌ ‌म्हणजे‌ ‌स्वत:भोवती‌ ‌गोल‌ ‌गोल‌ ‌फिरत,‌ ‌बेभान‌ ‌होऊन‌‌ जमिनीवर‌ ‌बरसाव्यात.‌ ‌या‌ ‌बेभान‌ ‌सरींमुळे‌ ‌मातीत‌ ‌माती‌ ‌मिसळून‌ ‌जावी.‌ ‌ती‌ ‌एकजीव‌ ‌व्हावी.‌ ‌याचाच‌ ‌अर्थ‌ ‌या‌ ‌मातीतील‌ ‌म्हणजेच‌ ‌समाजातील‌ ‌सगळा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌मिटून‌ ‌जावा,‌ ‌संपून‌ ‌जावा,‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌समाजात‌ ‌असलेला‌ ‌गरीब-श्रीमंत,‌ ‌उच्च-नीच,‌ ‌जात-धर्म,‌ ‌स्त्री-पुरुष‌ ‌असा‌ ‌विविध‌ ‌प्रकारचा‌ ‌भेदाभेद‌ ‌नष्ट‌ ‌होऊन‌ ‌भेदभावविरहित‌ ‌नव्या‌ ‌समाजाची‌ ‌निर्मिती‌ ‌व्हावी,‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌‌

पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌घुमावा‌ ‌…..‌ ‌दिगंतात…‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा…‌‌
नवनिर्मितीचे‌ ‌विचार‌ ‌प्रखरतेने‌ ‌मांडताना‌ ‌कवयित्री‌ ‌पुढे‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌नव्या‌ ‌सुधारणांचा‌ ‌वारा‌ ‌आपल्या‌ ‌समाजात‌ ‌घुमत‌ ‌यावा.‌ ‌या‌ ‌वाऱ्याने‌ ‌इथला‌ ‌प्रत्येक‌ ‌युवक‌ ‌भारून‌ ‌जावा.‌ ‌इथल्या‌ ‌तरुणाने‌ ‌मंत्रमुग्ध‌ ‌होऊन,‌ ‌तहानभूक‌ ‌विसरून‌ ‌नवनवीन‌ ‌गोष्टी‌ ‌निर्माण‌ ‌करण्याची‌ ‌आस‌ ‌धरावी.‌ ‌नवनिर्माणाची‌ ‌चाहूल‌ ‌त्याला‌ ‌लागावी.‌ ‌नवीन‌ ‌विचारांचा‌ ‌नवा‌ ‌समाज‌ ‌निर्माण‌ ‌व्हावा.‌ ‌नव्या‌ ‌विचारांनी,‌ ‌नव्या‌ ‌कर्तृत्वाने‌ ‌आपली‌ ‌सारी‌ ‌भूमी‌ ‌उजळून‌ ‌निघावी.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌आपली‌ ‌भारतभूमी‌ ‌पुन्हा‌ ‌एकदा‌ ‌प्रखर‌ ‌तेजाने‌ ‌तळपावी,‌ ‌तिची‌ ‌कीर्ती‌ ‌सगळ्या‌ ‌जगभर‌ ‌पसरावी,‌ ‌असेच‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌‌

शब्दार्थ‌‌:

  1. एकदा‌ ‌-‌ ‌एकवार‌ ‌(once)‌ ‌
  2. चमकणे‌ ‌-‌ ‌चकाकणे‌ ‌(to‌ ‌brighten,‌ ‌to‌ ‌glitter)‌
  3. ‌रक्त‌ ‌-‌ ‌रूधिर‌ ‌(blood)‌‌
  4. स्नायू‌‌ -‌ ‌(a‌ ‌muscle)‌ ‌
  5. पुकार‌ ‌-‌ ‌हाक‌ ‌
  6. पिंगा‌ ‌- लहान‌ ‌मुलींचा‌ ‌एक‌ ‌खेळ‌
  7. ‌पाऊस‌ -‌ ‌पर्जन्य‌ ‌(rain)‌
  8. ‌कोसळाव्या‌ ‌-‌ ‌पडाव्यात‌ ‌(should‌ ‌fall)‌
  9. ‌घुमावा‌ ‌-‌ ‌(should‌ ‌reverberate)‌
  10. ‌बेभान‌ ‌-‌ ‌अनियंत्रित,‌ ‌अनावर‌ ‌(beyond‌ ‌control)‌‌
  11. भेदाभेद‌ ‌-‌ ‌(discrimination)‌ ‌
  12. ‌युवक‌ ‌-‌ ‌तरुण‌ ‌पुरुष‌ ‌(a‌ ‌young‌ ‌man)‌
  13. ‌नवनिर्माण‌ ‌-‌ ‌नवीन‌ ‌निर्मिती‌ ‌(to‌ ‌create‌ ‌something‌ ‌new)‌‌
  14. भूमी‌‌ ‌-‌ ‌जमीन‌ ‌(land)‌ ‌
  15. चाहूल‌ ‌-‌ ‌कानोसा,‌ ‌सूचना‌ ‌(hint,‌ ‌an‌ ‌inkling)‌ ‌
  16. दिगंत‌ ‌-‌ ‌आसमंत‌ ‌(sky)‌‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 12 पुन्हा एकदा

वाक्प्रचार‌‌:

1. ‌बेभान‌ ‌होणे‌ ‌-‌ ‌भान‌ ‌विसरणे.‌
2. ‌भारले‌ ‌जाणे‌‌ -‌ ‌मंत्रमुग्ध‌ ‌होणे.

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भाषाभ्यास:

1. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।

प्रश्न अ.
सुदासः कः आसीत् ?
उत्तरम्‌ :‌
सुदास: उद्यानपाल: आसीत्।

प्रश्न आ.
पद्यं कदा व्यकसत्?
उत्तरम्‌ :‌
पद्यं शिशिर-ऋतौ व्यकसत्।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न इ.
पद्यं कीदृशम्?
उत्तरम्‌ :‌
पद्मं व्योम्नि बालसूर्यबिम्बम् इव आसीत्।

प्रश्न ई.
पद्यं विक्रेतुं सुदासः कुत्र स्थितः?
उत्तरम्‌ :‌
पा विक्रेतुं सुदास: राजसद्मनः पुरतः स्थितः।

प्रश्न उ.
श्रेष्ठी कमलार्थ कियत् मूल्यं दातुम् इच्छति?
उत्तरम्‌ :‌
श्रेष्ठी कमलार्थ दश सुवर्णनाणकानि दातुम् इच्छति।

प्रश्न ऊ.
महात्मा कुत्र उपविष्टः आसीत् ?
उत्तरम्‌ :‌
उद्याने वटवृक्षस्य अधस्तात् एकस्मिन् अश्मखण्डे महात्मा उपविष्टः आसीत्।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

2. माध्यमभाषया उत्तरत ।

प्रश्न अ.
सुदासः किमर्थं कमल विक्रेतुं न इच्छति?
उत्तरम्‌ :‌
‘अमूल्यं कमलम्’ ही कथा बौद्ध कथासाहित्यातून घेतलेली आहे. भगवान बुद्धांच्या अलौकिक शिकवणीचे या कथांमधून दर्शन घडते. कथेचे शीर्षक सदाचार आणि सत्संगतीचे महात्म्य योग्यप्रकारे सूचित करते. त्यातून मिळणारे समाधान व मनःशांती ही संपत्ती आणि भौतिक सुखांपेक्षा श्रेष्ठ तसेच मौल्यवान असते. ‘अमूल्यं कमलम्’ सुदास नावाचा एक माळी होता. एकदा त्याच्या तलावात हिवाळा असून सुद्धा एक सुंदर कमळ उमलले.

त्याने विचार केला की, ‘हा तर परमेश्वराचा महिमा आहे की, कडाक्याच्या थंडीत मला इतक्या सुंदर फुलाचा लाभ झाला.’ त्या ऋतूत कमळाचे फूल अभावाने फुलत असल्यामुळे त्याला वाटले, ते विकून आपल्याला चांगली किंमत मिळेल, तेव्हा ते फूल विकण्यासाठी तो राजवाड्यासमोर उभा राहिला.

एक श्रीमंत व्यापारी तिथे आला आणि भगवान सुगताच्या पूजेसाठी ते कमळ विकत घेण्याची इच्छा त्याने प्रकट केली. सुदास एक सुवर्णमुद्रा घेऊन ते फूल विकण्यास तयार झाला. तेवढ्यात दुसरा एक श्रीमंत व्यापारी, जो भगवान सुगतांच्या दर्शनासाठी चालला होता, तिथे उपस्थित झाला. तो त्या कमळासाठी दहा सुवर्णमुद्रा द्यायला तयार झाला. त्यावर पहिला व्यापारी शंभर सुवर्णमुद्रा देऊ लागला.

दोन्ही व्यापाऱ्यांमधील चढाओढ पाहून सुदासाने विचार केला, ‘हे दोघे ज्या व्यक्तीसाठी एवढ्या चढत्या दराने कमळ विकत घेऊ इच्छितात, तर ती व्यक्ती निश्चितच थोर असेल. तेच मला कमळाचे सर्वात जास्त मूल्य देतील.’ अशा विचाराने सुदासाने जाहीर केले की, तो कमळ विकू इच्छित नव्हता.

is a storyextracted from Buddhist legends that highlights the divine teachings of lord Buddha. The title rightly suggests that righteousness and a good company leading to contentment and peace of mind, is superior and priceless compared to money and worldly pleasures.

सुदास was a gardener. Once a beautiful lotus bloomed in his lake, in spite of being winter season. He thought, “It is greatness of the god that I am blessed to have the beautiful flower even during severe cold.” As lotuses were rare in that season, he thought he would earn good amount by selling it.

So he stood in front of the royal palace to sell the flower. A rich merchant came there and wished to buy that flower for worshipping lord सुगत. सुदास agreed to sell it for one gold coin. At the same time, another rich merchant, who was going to see lord arrived there and asked for the lotus. He was ready to pay ten gold coins for the same flower. Over that the first merchant raised the value to 100 gold coins.

Hearing the arguments between the two merchants, are thought, If these two are willing to buy the lotus for a person at such high value, then that person must be really very great. He would rather give me the highest price. Thus, he declared that he did not wish to sell the lotus.

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न आ.
सुदासः सुगतचरणाभ्यां कमलं किमर्थं समर्पितवान् ?
उत्तरम्‌ :‌
‘अमूल्यं कमलम्’ ही कथा बौद्ध कथासाहित्यातून घेतलेली आहे. भगवान बुद्धांच्या अलौकिक शिकवणीचे या कथांमधून दर्शन घडते. कथेचे शीर्षक सदाचार आणि सत्संगतीचे महात्म्य योग्यप्रकारे सूचित करते. त्यातून मिळणारे समाधान व मनःशांती ही संपत्ती आणि भौतिक सुखांपेक्षा श्रेष्ठ तसेच मौल्यवान असते.

सुदासाने ठरवले की ते कमळ व्यापाऱ्यांना विकायचे नाही. त्याने विचार केला की, ज्याच्यासाठी सर्वाधिक मूल्य देऊन दोघे व्यापारी कमळ विकत घेऊ इच्छित होते, ती व्यक्ती सर्वात जास्त किंमत देईल. त्यामुळे जिथे भगवान बुद्ध राहत होते त्या उद्यानात सुदास गेला, भगवान वटवृक्षाखाली एका दगडावर बसलेले होते.

त्यांच्या चेहऱ्यावर विलक्षण तेज होते. केवळ सुगतांकडे बघता क्षणी सुदासाचे मन भक्तिरसाने भरुन गेले. त्याने स्वत:ला भगवानांच्या चरणी वाहून घेतले. कमळासाठी जे सर्वोच्च मूल्य घेण्याच्या उद्देशाने तो आला होता, ते कमळ त्याने निरिच्छवृत्तीने भगवानांच्या चरणी अर्पण केले.

भगवानांच्या केवळ दर्शनाने सुदास प्रचंड प्रभावित झाला होता. त्याच्या सगळ्या इच्छा-आकांक्षा संपुष्टात आल्या होत्या. त्यामुळे त्याने ते कमळ भक्तिपूर्ण मनाने भगवानांना अर्पण केले.

‘अमूल्यं कमलम्’ is a story extracted from Buddhist legends that highlights the divine teachings of lord Buddha. The title rightly suggests that righteousness and a good company leading to contentment and peace of mind, is superior and priceless compared to money and worldly pleasures.

सुदास decided not to sell the lotus to the merchants. Because he thought, for whom these two were willing to buy the lotus at highest rates, he would pay more than them. So सुदास reached the garden where lord बुद्ध was staying.

He was seated on a piece of rock below a banyan tree. His face was adorned with great lustre. He had great aura. Just by looking at him, सुदास’s mind was filled with devotion. He surrendered himself at the feet of lords and forgetting about the highest value for the lotus, he offered it at the feet of the lord.

Just by the sight of the lord, सुदास was highly influenced. He had no more desires now. So he offered the lotus to the lord with heartfelt devotion.

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3. क: कं वदति?

प्रश्न अ.
‘भद्र, भगवान् सुगतः सम्प्रत्येतस्मिन्नगरे वसति ।’
उत्तरम्‌ :‌
सार्थवाहः सुदासं वदति।

प्रश्न आ.
‘अहं दश सुवर्णनाणकानि यच्छामि ।’
उत्तरम्‌ :‌
श्रेष्ठी सुदासं वदति।

प्रश्न इ.
‘एष महाभागः एकं सुवर्णनाणकम् एतस्यार्थे दातुमिच्छति ।’
उत्तरम्‌ :‌
सुदासः श्रेष्ठिनं वदति।

प्रश्न ई.
‘वत्स, किमिच्छसि ?’
उत्तरम्‌ :‌
भगवान् गौतमबुद्धः सुदासं वदति।

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प्रश्न उ.
‘नमो भगवते ।’
उत्तरम्‌ :‌
सुदास: भगवन्तं गौतमबुद्ध वदति।

4. प्रश्ननिर्माणं कुरुत।

प्रश्न अ.
सुगत एवाधिकतम मूल्यं मह्यं दद्यात् ।
उत्तरम्‌ :‌
सुगत एवाधिकतम मूल्यं कस्मै दद्यात्?

प्रश्न आ.
भगवत: वदनं धाम्ना राजते स्म ।
उत्तरम्‌ :‌
भगवत: वदनं केन राजते स्म?

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5. सन्धिविग्रहं कुरुत ।

प्रश्न अ.
कश्चिदुद्यानपालः
उत्तरम्‌ :‌
कश्चिदुद्यानपालः – कश्चित् + उद्यानपालः।

प्रश्न आ.
चरणयोरय॑म्
उत्तरम्‌ :‌
चरणयोरय॑म् – चरणयोः + अर्घ्यम्।

प्रश्न इ.
सोऽवदत्
उत्तरम्‌ :‌
सोऽवदत् – स: + अवदत्।

प्रश्न ई.
इत्यब्रवीत् ।
उत्तरम्‌ :‌
इत्यब्रवीत् भगवान् – इति + अब्रवीत् + भगवान् ।

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6. समानार्थकशब्दान् लिखत ।

प्रश्न 1.
समानार्थकशब्दान् लिखत ।
तडागः, नीरजम्, सार्थवाहः, अर्णवः, धनवान् ।
उत्तरम्‌ :‌

  • तडागः – पद्माकरः, कासारः, सरः, सरसी, सरोवरः।
  • नौरजम् – पद्मम, सरसिजम, कमलम्, सहस्रपत्रम्, शतपत्रम्, कुशेशयम्।
  • सार्थवाहः – वणिक्, श्रेष्ठी।
  • अर्णवः – सागरः, रत्नाकरः, समुद्रः।
  • धनवान् – धनाढ्य, श्रीमान्, धनिकः, सधनः।

7. विरुद्धार्थकशब्दान् लिखत ।

प्रश्न 1.
विरुद्धार्थकशब्दान् लिखत ।
विपुलम्, बहुमूल्यम्, क्रेतुम् ।।
उत्तरम्‌ :‌

  • विपुलम् × अल्पम्।
  • बहुमूल्यम् × अल्पमूल्यम्।
  • क्रेतुम् × विक्रेतुम्।

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8. मेलनं कुरुत।

प्रश्न 1.
मेलनं कुरुत।
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम् 1
उत्तरम्‌ :‌

विशेषणम्विशेष्यम्
विपुलम्धनम्
श्रीमान्सार्थवाहः
अनल्पेनधाम्ना
निरिच्छ:सुदासः
धनवान्श्रेष्ठी
अधिकतमम्मूल्यम्
प्रसादवर्षिभ्याम्लोचनाभ्याम्
हस्तस्थम्नीरजम्

9. अमरकोषात् शब्दं प्रयुज्य वाक्यं पुनर्लिखत ।

प्रश्न अ.
नूनं स: सुगतः एव अधिकतम मूल्यं दद्यात् ।
उत्तरम्‌ :‌
नूनं स: बुद्धः / सर्वज्ञः / धर्मराजः / तथागत: एव अधिकतम मूल्यं दद्यात्।

प्रश्न आ.
तडागे शिशिर-ऋतौ एकं पद्यं व्यकसत् ।
उत्तरम्‌ :‌
तडागे शिशिर-ऋतौ एकं सहस्रपत्रं / कमलं / शतपत्रं / कुशेशयं व्यकसत्।

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प्रश्न इ.
विपुलं धनं प्राप्नुयाम् ।
उत्तरम्‌ :‌
विपुलं द्रव्यं । वित्तं / स्थापतेयं / रिक्थं / ऋक्थं / वसुः प्राप्नुयाम्।

10. सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।

प्रश्न अ.
तयोः विवादं श्रुत्वा सुदासो व्यमृशत् । (पूर्वकालवाचक-त्वान्त-अव्ययं निष्कासयत।)
उत्तरम्‌ :‌
तयोः विवादम् अशृणोत् सुदासो व्यमृशत् च।

प्रश्न आ.
त्वं किम् इच्छसि ? (त्वम्’ इत्यस्य स्थाने ‘भवान्’ इति योजयत ।)
उत्तरम्‌ :‌
भवान् किम् इच्छति?

प्रश्न इ.
मे आत्मा कृतार्थतां लभताम् । (लङ्लकारे वाक्यं परिवर्तयत ।)
उत्तरम्‌ :‌
लोट्लकारः

प्रश्न ई.
शिशिर-ऋतौ पद्यं व्यकसत् । (बहुवचने लिखत।)
उत्तरम्‌ :‌
शिशिर-ऋतौ पद्यानि व्यकसन्।

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प्रश्न उ.
सुदासः सुगतचरणाभ्यां कमलं समर्पितवान् । (वाच्यपरिवर्तनं कुरुत ।)
उत्तरम्‌ :‌
सुदासेन सुगतचरणाभ्यां कमलं समर्पितम्।

प्रश्न ऊ.
अहं विपुलं धनं प्राप्नुयाम् । (लकारं लिखत ।)
उत्तरम्‌ :‌
विधिलिङ्लकार:

Sanskrit Amod Class 10 Textbook Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम् Additional Important Questions and Answers

अवबोधनम् ।

(क) उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

प्रश्न 1.
सुदास: राजसद्यनः पुरतः स्थितः यतः ”
(अ) सः सरसिजं विक्रेतुम् इच्छति स्म।
(ब) सः राजानं द्रष्टुम् इच्छति स्म।
उत्तरम् :
(अ) सः सरसिजं विक्रेतुम् इच्छति स्म।

प्रश्न 2.
सार्थवाहः सुदासाय शतसुवर्णनाणकानि दातुम् उद्युक्तः यतः
(अ) स सुदासस्य साहाय्य कर्तुम् इच्छति स्म।
(ब) सः सुदासात् कमलं क्रेतुम् इच्छति स्म।
उत्तरम् :
(ब) सः सुदासात् कमल क्रेतुम् इच्छति स्म।

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प्रश्न 3.
सुदासः नीरजं सुगतचरणाभ्यां समर्पितवान् यत:
(अ) सुगतः सुदासाय अधिकं धनं यच्छति।
(ब) सुदासस्य मनसि भक्तिरस: अजायत।
उत्तरम् :
(ब) सुदासस्य मनसि भक्तिरसः अजायत।

प्रश्न 4.
सुदासेन कमलार्थ किमपि मूल्यं न स्वीकृतम् यतः
(अ) भगवतः चरणकमलस्पर्शेण एव तस्य आत्मा कृतार्थतां लभताम्।
(ब) श्रेष्ठी कमलार्थ बहुमूल्यम् अयच्छत्।
उत्तरम् :
(अ) भगवत: चरणकमलस्पर्शेण एव तस्य आत्मा कृतार्थतां लभताम्।

(ख) उचित पर्यायं चित्वा वाक्यं पुनलिखत।

प्रश्न 1.

  1. आसीत् ……….. नाम कश्चिदुद्यानपाल:। (सुदासः / सुगत:)
  2. शिशिर-प्रती एक …………. व्यकसत्। (पद्यम्/जपाकुसुमम्)
  3. अहो महिमा …………..  (परमात्मनः / मानवस्य)
  4. स: तद् विक्रेतुं ………. पुरतः स्थितः। (देवालयस्य/राजसद्मनः)
  5. पूजार्थमिदं कमलम् ………… (विक्रीणे / अभ्यर्थये)
  6. अहं दश …………. यच्छामि। (रूप्यकाणि / सुवर्णनाणकानि)

उत्तरम् :

  1. सुदासः
  2. पढा
  3. परमात्मनः
  4. राजसदानः
  5. अभ्यर्थये
  6. सुवर्णनाणकानि

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प्रश्न 2.
1. महात्मा वटवृक्षस्य अवस्तात् समुपविष्टः आसीत्। (अश्मखण्डे/मृगाजिने)
2. सः हस्तस्थं भगवतः चरणयो: अयम् अकरोत्। (जपाकुसुमं/नीरज)
उत्तरम् :
1. अश्मखण्डे
2. नीरज

(ग) ककं वदति?

प्रश्न 1.
एकेन सुवर्णनाणकेन।
उत्तरम् :
सुदासः सार्थवाह वदति।

प्रश्न 2.
अहं शतं सुवर्णनाणकानि प्रयच्छामि।
उत्तरम् :
सार्थवाह: सुदासं वदति।

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प्रश्न 3.
नैतद् भो विक्रेतुमिच्छामि।
उत्तरम् :
सुदास : सार्थवाहश्रेष्ठिनौ वदति।

प्रश्न 4.
केवलं भगवत: चरणकमलस्पर्शेण आत्मा मे कृतार्थता लभताम्।
उत्तरम् :
सुदास: भगवन्तं गौतमबुद्ध वदति।

प्रश्न 5.
तथास्तु।
उत्तरम् :
भगवान् गौतमबुद्धः सुदासं वदति।

(घ) पूर्णवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
सुदास: किमर्थ राजसद्मनः पुरतः स्थितः?
उत्तरम् :
सुदासः पद्यं विक्रेतुं राजसद्मनः पुरतः स्थितः।

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प्रश्न 2.
एषः गद्यांश: कस्मात् पाठात् उद्धृतः?
उत्तरम् :
एषः गद्यांश: ‘अमूल्यं कमलम्’ इति पाठात् उद्धृतः।

प्रश्न 3.
सुदासः कुत्र प्राप्तः?
उत्तरम् :
यत्र भगवत: सुगतस्य निवास: तदुद्यानं सुदासः प्राप्तः।

प्रश्न 4.
भगवतः वदनं केन राजते स्म?
उत्तरम् :
भगवतः वदनम् अनल्पेन धाम्ना राजते स्म।

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प्रश्न 5.
सुदासः केन कृतार्थतां लभताम्?
उत्तरम् :
सुदासः केवलं भगवतः चरणकमलस्पर्शेण कृतार्थतां लभताम्।

प्रश्न 6.
भगवतः सुगतस्य अन्यत् नाम किम्?
उत्तरम् :
भगवतः सुगतस्य अन्यत् नाम भगवान् गौतमबुद्धः आसीत्।

(च) वाक्यं पुनर्लिखित्वा सत्यम् / असत्यम् इति लिखत।

प्रश्न 1.

  1. सुदास: मालाकार: आसीत्।
  2. कमलस्य विकासेन तडाग: विभूषितः ।
  3. पद्मं हेमन्त-ऋतौ व्यकसत्।
  4. पद्यं विक्रेतुं स: देवालयस्य पुरतः स्थितः ।
  5. श्रेष्ठी कमलार्थं शतं सुवर्णनाणकानि दातुम् इच्छति।

उत्तरम् :

  1. सत्यम्।
  2. सत्यम्।
  3. असत्यम्।
  4. असत्यम्।
  5. असत्यम्।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न 2.

  1. भगवतः सुगतस्य निवास: देवालये आसीत्।
  2. उद्याने आम्रवृक्षस्य अधस्तात् महात्मा उपविष्टः आसीत्।
  3. सुदासः हस्तस्थं सरसिज सुगतस्य चरणयोरय॑म् अकरोत्।
  4. सुगतः सुदासाय कमलार्थम् अधिकमूल्यं यच्छति।

उत्तरम् :

  1. असत्यम्।
  2. असत्यम्।
  3. सत्यम्।
  4. असत्यम्।

शब्दज्ञानम् :

(क) सन्धिविग्रहः।

  1. सुदासो नाम – सुदास: + नाम।
  2. सत्यपि – सति + अपि।
  3. शिशिरऋतावेकम् – शिशिरऋतौ + एकम्।
  4. व्योम्नीव – व्योनि+इव।
  5. सोऽचिन्तयत् – स: + अचिन्तयत्।
  6. यदेतादृशे – यत् + एतादृशे।
  7. काले तिशीते – काले + अतिशीते।
  8. विभूषितो में – विभूषितः + मे।
  9. तडाग एतस्य – तडाग: + एतस्य।
  10. विक्रीयाहम् – विक्रीय + अहम्।
  11. स तद् – स: + तद्।
  12. तेनैव – तेन + एव।
  13. सम्प्रत्येतस्मिन्नगरे – सम्प्रति + एतस्मिन् + नगरे।
  14. पूजार्थमिदम् – पूजार्थम् + इदम्।
  15. कमलमभ्यर्थये – कमलम् + अभ्यर्थये।
  16. तत्कियता – तत् + कियता।
  17. उद्यानपालोऽब्रवीत् – उद्यानपाल: + अब्रवीत्।
  18. स सार्थवाह: – सः + सार्थवाहः।
  19. यावत्तत् – यावत् + तत्।
  20. क्रेतुमिच्छति – क्रेतुम् + इच्छति।
  21. तावदेवापरो धनवान् – तावत् + एव + अपरः + धनवान्।
  22. उद्यानपालोऽबूत . उद्यानपाल: + अबूत।
  23. एव महाभाग एकम् – एष: + महाभागः + एकम्।
  24. एतस्यार्थे – एतस्य + अर्थे ।
  25. दातुमिच्छति – दातुम् + इच्छति।
  26. सार्थवाहोऽभणत् . सार्थवाहः + अभणत्।
  27. तयोर्विवादम् – तयोः + विवादम्।
  28. सुदासो व्यमृशत् – सुदास: + व्यमृशत्।
  29. कमलमेतत् – कमलम् + एतत्।
  30. क्रेतुमिच्छतः – केतुम् + इच्छतः।
  31. स सुगत एवाधिकतमम् – सः + सुगतः + एव + अधिकतमम्।
  32. स उद्यानपालस्तावभाषत – सः + उद्यानपाल: + वौ + अभाषत ।
  33. नैतद् – 1 + एतद्।
  34. भो विक्रेतुमिच्छामि – भो: + विक्रेतुम् + इच्छामि।
  35. सुदासस्तदुद्यानम् – सुदास: + तत् + उद्यानम्।
  36. वटवृक्षस्याधस्तादेकस्मिन्न – वटवृक्षस्य + अधस्तात् + श्मखण्डे एकस्मिन् + अश्मखण्डे।
  37. समुपविष्ट आसीत्स महात्मा – समुपविष्टः + आसीत् + सः+ महात्मा।
  38. भगवतो वदनम् – भगवतः + वदनम्।
  39. तदालोकयतः – तत् + आलोकयतः।
  40. भक्तिरसार्णव उदतिष्ठत् – भक्तिरसार्णवः+ उदतिष्ठत् ।
  41. स हस्तस्थम् – सः + हस्तस्थम्।
  42. नमो भगवते नमः + भगवते।
  43. स्मयमानमुखपद्मो भगवान् – स्मयमानमुखपा : + भगवान्।
  44. किमिच्छसि – किम् + इच्छसि।
  45. किमन्यत् – किम् + अन्यत्।
  46. तथास्तु – तथा + अस्तु।
  47. यत्तस्य – यत् + तस्य।
  48. दर्शनमात्रेणैव – दर्शनमात्रेण + एव।
  49. बहुमूल्यमपेक्षमाणः – बहुमूल्यम् + अपेक्षमाणः।
  50. सुदासस्तद्विस्मृत्य – सुदासः + तत् + विस्मृत्य।
  51. तत्कमलम् – तत् + कमलम्।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

(ख) त्वान्त-ल्यबन्त-तुमन्त-अव्ययानि।

1.

त्वान्न अव्यय धातु + त्वा / ध्या / ट्वा / वा / इत्वा अयित्वाल्यबन्त अव्यय उपसर्ग + धातु + य / त्यतुमन्त अव्यय धातु + तुम् / धुम् / दुम् / दुम् इतुम् / अयितुम्
श्रुत्वासशिन्त्यविक्रेतुम, क्रेतुम् दातुम्

2.

त्वान्न अव्यय धातु + त्वा / ध्या / ट्वा / वा / इत्वा अयित्वातुमन्त अव्यय धातु + तुम् / धुम् / दुम् / दुम् इतुम् / अयितुम्
कृत्वाविस्मृत्य

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

(ग) विभक्त्यन्तरूपाणि।

1.

  • द्वितीया – एतत्, सरसिजम्, विपुलम्, धनम्, इदम, कमलम्, नीरजमूल्यम्, पृच्छन्तम्, तम्, श्रेष्ठिनम्, एकम, सुवर्णनाणकम्, सुवर्णनाणकानि, विवादम्, अधिकतमम्, मूल्यम्, तौ।
  • तृतीया – विकासेन, तेन, अध्वना, कियता, मूल्येन, एकेन, सुवर्णनाणकेन।
  • चतुर्थी – महाम्, मे।
  • षष्ठी – एतस्य, सरसिजस्य, परमात्मनः, राजसद्मनः, महात्मनः, तस्य, तयोः, यस्य।
  • सप्तमी – तडागे, सति, शिशिरऋतौ, व्योम्नि, एतादृशे, काले, अतिशीते, एतस्मिन्, नगरे।
  • सम्बोधनम् – भद्र।

2.

  • द्वितीया – तत्, उद्यानम्, हस्तस्थम्, नीरजम, तम्, कृतार्थताम्, वादिनम्, सुदासम्, कमलम्।
  • तृतीया – अनल्पेन, धाम्ना, प्रसादवर्षिभ्याम, लोचनाभ्याम, चरणकमलस्पर्शेण, दर्शनमात्रेण।
  • चतुर्थी – सुगतचरणाभ्याम्, भगवते।
  • षष्ठी – भगवतः, सुगतस्य, वटवृक्षस्य, तस्य, आलोकयतः, सुदासस्य, में।
  • सप्तमी – एकस्मिन, अश्मखण्डे, चित्ते, चरणयोः, उक्तवति, सुगते।
  • सम्बोधनम् – वत्स, भगवन्।

(घ) विशेषण – विशेष्य – सम्बन्धः ।

विशेषणम्विशेष्यम्
1. अतिशीतेकाले
2. स्मयमानमुखपद्यःभगवान्
3. वादिनम्सुदासम्

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

(च) लकारं लिखत।

प्रश्न 1.

  1. आसीत् सुदास: नाम कश्चिदुद्यानपालः।
  2. तस्य पूजार्थमिदं कमलम् अभ्यर्थये।
  3. तत्कियता मूल्येन ददासि।
  4. उद्यानपाल: अब्रवीत्।
  5. तं श्रेष्ठिनम् उद्यानपाल: अबूत।
  6. एतौ कमलमेतत् क्रेतुम् इच्छतः।
  7. स सुगत एवाधिकतम मूल्यं दद्यात्।

उत्तरम् :

  1. लङ्लकार;
  2. लट्लकार:
  3. लट्लकारः
  4. लङ्लकारः
  5. लङ्लकार:
  6. लट्लकार:
  7. विधिलिङ्लकार:

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न 2.
1. ‘सुदासस्य चित्ते भक्तिरसार्णवः उदतिष्ठत्।
2. ‘तथास्तु’ इति अब्रवीत् भगवान् सुगतः।
उत्तरम् :
1. लङ्लकारः
2. ललकार:

(छ) प्रश्ननिर्माणं कुरुत।

प्रश्न 1.
तस्य तडागे शिशिर-ऋतौ पद्मं व्यकसत्।
उत्तरम् :
तस्य तडागे कदा पर्दा व्यकसत्?

प्रश्न 2.
स: कमल विक्रेतुं राजसानः पुरत: स्थितः।
उत्तरम् :
स: कमलं विक्रेतुं कुत्र स्थित:?

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न 3.
श्रेष्ठी दश सुवर्णनाणकानि दातुमिच्छति।
उत्तरम् :
कः दश सुवर्णनाणकानि दातुमिच्छति?

प्रश्न 4.
सुदासः उद्यानं प्राप्तः।
उत्तरम् :
कः उद्यानं प्राप्तः?

प्रश्न 5.
वटवृक्षस्य अधस्तात् अश्मखण्डे महात्मा उपविष्टः आसीत्।
उत्तरम् :
वटवृक्षस्य अधस्तात् अश्मखण्डे कः उपविष्टः आसीत्?

प्रश्न 6.
सुदासः भगवत: चरणयोः नीरजम् अयं कृतवान्।
उत्तरम् :
सुदासः भगवतः चरणयोः किम् अध्यं कृतवान् ?

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न 7.
‘तथास्तु’ इति अब्रवीत् भगवान् सुगतः।
उत्तरम् :
‘तथास्तु’ इति क: अब्रवीत्?

पृथक्करणम्

(क) क्रमेण योजयत।

प्रश्न 1.

  1. श्रेष्ठिनः सार्थवाहस्य च विवादः ।
  2. शिशिर-ऋतौ पद्मस्य विकासः।
  3. सुदास: विक्रयणार्थ राजसद्मनः पुरतः स्थितः।
  4. सुदासस्य धनप्राप्ते: इच्छा।

उत्तरम् :

  1. शिशिर-ऋतौ पद्यस्य विकासः ।
  2. सुदासस्य धनप्राप्ते: इच्छा।
  3. सुदासः विक्रयणार्थ राजसद्मनः पुरतः स्थितः।
  4. श्रेष्ठिन: सार्थवाहस्य च विवादः।

प्रश्न 2.

  1. सुदासस्य धनप्राप्ते: इच्छा।
  2. सार्थवाहस्य कमलक्रयणस्य इच्छा।
  3. सार्थवाहः शतं सुवर्णनाणकानि दातुं सिद्धः।
  4. श्रेष्ठी दश सुवर्णनाणकानि दातुमिच्छति।

उत्तरम् :

  1. सुदासस्य धनप्राप्ते: इच्छा।
  2. सार्थवाहस्य कमलक्रयणस्य इच्छा।
  3. श्रेष्ठी दश सुवर्णनाणकानि दातुमिच्छति।
  4. सार्थवाहः शतं सुवर्णनाणकानि दातुं सिद्धः ।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न 3.

  1. सुगतचरणाभ्यां कमलस्य समर्पणम्।
  2. सुदासस्य सुगतदर्शनम्।
  3. सुगतस्य आशीर्वादप्रदानम्।
  4. सुगतदर्शनात् बहुमूल्यस्य अपेक्षायाः विस्मरणम्।

उत्तरम् :

  1. सुदासस्य सुगतदर्शनम्।
  2. सुगतदर्शनात् बहुमूल्यस्य अपेक्षायाः विस्मरणम्।
  3. सुगतचरणाभ्यां कमलस्य समर्पणम्।
  4. सुगतस्य आशीर्वादप्रदानम्। स्थानाधारेण शब्दपेटिका पूरयत। (वटवृक्षः नगरम्, अश्मखण्डः, उद्यानम्)

(ख) स्थानाधारेण शब्दपेटिका पूरयत।
(वटवृक्ष: नगरम्, अश्मखण्डः, उद्यानम्)

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम् 2

(ख) तालिका पूरयत।

प्रश्न 1.
(मञ्जूषा – एकेन सुवर्णनाणकेन, अहं शतं सुवर्णनाणकानि प्रयच्छामि, नैतद् विक्रेतुमिच्छामि, तत् कियता मूल्येन ददासि?)
उत्तरम् :
वक्त्रा संवाद मेलयत।

सार्थवाहःउद्यानपाल:
1. अहं शतं सुवर्णनाणकानि प्रयच्छामि।1. एकेन सुवर्णनाणकेन।
2. तत् कियता मूल्येन ददासि?2. नैतद् विक्रेतुमिच्छामि।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

(ग) वक्त्रा संवादं मेलयत।

प्रश्न 1.
(मञ्जूषा – भगवन् किमन्यत्?, तथास्तु, नमो भगवते, वत्स, किमिच्छसि)

सुदासःसुगत:
नमो भगवते।तथास्तु।
भगवन् किमन्यत्?वत्स, किमिच्छसि।

भाषाभ्यासः

(क) समानार्थकशब्दाः।

  1. उद्यानपाल: – मालाकारः।
  2. व्योम्नि – आकाशे, गगने, नभसि, अन्तरिक्षे, अनन्ते, खे।
  3. धनम् – द्रव्यम्, वित्तम्, स्थापतेयम्, रिक्थम्, ऋक्थम्, वसुः, अर्थम्।
  4. अध्वना – मार्गेण, पथिना।
  5. सुगतः – सर्वज्ञः, बुद्धः, धर्मराजः, तथागतः, गौतमः ।

(ख) विरुद्धार्थकशब्दान् लिखत।

1. पुरतः × पृष्ठतः।

(ग) सूचमनुसारं कृती: कुरुत।

(आ) धातुसाधित – अव्ययं निष्कासयत।

प्रश्न 1.
सः सुगतस्य चरणयोरय॑म् कृत्वा प्राणमत्।
उत्तरम् :
स: सुगतस्यं चरणयोरय॑म् अकरोत् प्राणमत् च।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

प्रश्न 2.
सुदासः तत् विस्मृत्य तत्कमलं समर्पितवान्।
उत्तरम् :
सुदासः तत् व्यस्मरत् तत्कमलं समर्पितवान् च।

(इ) स्म निष्कासयत ।

प्रश्न 1.
तस्य वदनम् अनल्पेन धाम्ना राजते स्म।
उत्तरम् :
तस्य वदनम् अनल्पेन धाम्ना अराजत।

(उ) वचनं परिवर्तयत।

प्रश्न 1.
एतौ कमलमेतत् क्रेतुम् इच्छतः । (एकवचने लिखत।)
उत्तरम् :
एष: कमलमेतत् केतुम् इच्छति ।

(क) लकार परिवर्तयत।

प्रश्न 1.
शिशिर-ऋतौ पचं व्यकसत्। (लट्लकारे परिवर्तयत।)
उत्तरम् :
शिशिर-ऋतौ पा विकसति।

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प्रश्न 2.
सुदासस्य चित्ते भक्तिरसार्णवः उदतिष्ठत्। (विधिलिङ्लकारे परिवर्तयत।)
उत्तरम् :
सुदासस्य चित्ते भक्तिरसाणव: उत्तिष्ठेत्।

(घ) वाक्यं शुद्धं कुरुत।

प्रश्न 1.
स: राजसाना पुरत: स्थितः।
उत्तरम् :
स: राजसद्मनः पुरतः स्थितः।

प्रश्न 2.
अनल्या धाम्ना तस्य वदनं राजते।
उत्तरम् :
अनल्पेन धाम्ना तस्य वदनं राजते।

प्रश्न 3.
अहं दश सुवर्णनाणकानि यच्छामः ।
उत्तरम् :
वयं दश सुवर्णनाणकानि यच्छामः।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

समासाः

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम् 4

अमूल्यं कमलम् Summary in Marathi and English

प्रस्तावना  :

भारत हा अनेक तत्त्वचिंतकांचा देश आहे. भगवान गौतम बुद्ध हे त्याच महान व्यक्तिमत्त्वांपैकी एक होते. भगवान बुद्ध हे सत्य, प्रेम, ज्ञान व शांततेचा संदेश जगभरात पसरवणाऱ्या बौद्ध धर्माचे प्रवर्तक होते. भगवान बुद्धांविषयीच्या अनेक कथा प्रसिद्ध आहेत, ज्यात ते आपल्या शिष्यांना समाधानी आणि शांतीपूर्ण जीवनाचे धडे देतात.

‘अमूल्यं कमलम्’ ही कथा बौद्ध कथासाहित्यातून घेतलेली आहे. भगवान बुद्धांच्या अलौकिक शिकवणीचे या कथांमधून दर्शन घडते. कथेचे शीर्षक सदाचार आणि सत्संगतीचे महात्म्य योग्यप्रकारे सूचित करते. त्यातून मिळणारे समाधान व मन:शांती ही संपत्ती आणि भौतिक सुखांपेक्षा श्रेष्ठ तसेच मौल्यवान असते.

India is the country of philosophical thinkers. Lord Gautam Buddha uns one of those great personalities. Lord Buddha uns the founder of Buddhism which Spreads the message of truth, love, enlightenment and peace on the earth.

Many legends of Lord Buddha are popular in which he preaches and enlightens his disciples about content and peaceful life. ‘अमूल्यं कमलम्’ is a story extracted from Buddhist legends that highlights the divine teachings of lord Buddha. The title rightly suggests that, righteousness and a good company leading to contentment and peace of mind, is superior and priceless compared to money and worldly pleasures.

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

परिच्छेदः 1

आसीत् सुदासो ……………….. विक्रेतुमिच्छामि इति।

अनुवादः

सुदास नावाचा कोणी एक माळी होता. एकदा शिशिरऋतू (हिवाळा) असूनसुद्धा आकाशात (शोभून दिसणाऱ्या) नुकत्याच उगवलेल्या सूर्यबिंबासारखे (तेजस्वी) कमळ मराठी त्याच्या सरोवरात उमलले. त्याने विचार केला, “परमात्म्याचा महिमा थोर (आहे), की एवढ्या कडाक्याच्या थंडीतसुद्धा या कमळाच्या उमलण्यामुळे माझे सरोवर सुशोभित झाले आहे. हे कमळ विकून मी पुष्कळ पैसे कमवेन”. असा विचार करून तो ते (कमळ) विकण्यासाठी राजवाड्यासमोर उभा राहिला. काही वेळानंतर, कोणी एक श्रीमंत व्यापारी त्याच मार्गान (दिशेने) आला.

तो म्हणाला, “सध्या भगवान सुगत याच शहरात राहत आहेत.” त्या महात्म्याच्या पूजेसाठी या कमळाची(मी) याचना (इच्छा) करतो. ते किती रूपयांत (मला) देशील? माळी म्हणाला, “एक सुवर्णमुद्रा (घेईन).” तेव्हा तो व्यापारी कमळ विकत घेण्याची इच्छा (व्यक्त) करत असताना दुसरा एक धनाढ्य व्यापारी सुगतांच्या दर्शनासाठी जात असताना तेथे हजर झाला. कमळाची किंमत विचारणाऱ्या त्या व्यापाऱ्याला माळी म्हणाला “हे महाशय या (कमळा) साठी एक सुवर्णमुद्रा देऊ इच्छितात.”

व्यापारी म्हणाला, “मी दहा सुवर्णमुद्रा देईन.”(पहिला) व्यापारी म्हणाला, “मी शंभर सुवर्णमुद्रा देईन.” त्या दोघांमधील विवाद ऐकून सुदासाने विचार केला. “ज्याच्यासाठी हे दोघे हे कमळ विकत घेऊ इच्छितात, तो सुगतच मला याहून अधिक मूल्य देईल.”
तेव्हा तो माळी त्या दोघांना म्हणाला, “महाशय, मी हे (कमळ) विकू इच्छित नाही.”

There was a certain gardener named सुदास, In his pond, in the winter season, there bloomed a lotus, which looked like the rising sun, in the sky. He thought, “O, the greatness of the Supreme Soul! In this severe cold, my pond is adorned by the blooming of such a lotus. By selling this lotus, I shall obtain a lot of wealth.” Thinking so, in order to sell it, he stood in front of the royal palace.

After a while, a certain rich merchant came by that very road. He spoke, “O noble man, the Lord y resides in this city now. I request this lotus for the worship of that great soul. At what price will you give it (to me)?” The gardener stated, “One gold coin.” Then, no sooner did that merchant wish to buy the lotus, than another wealthy tradesman / merchant, going to see yer, also came there.

The gardener said to the tradesman, who was asking for the price of the lotus, “This eminent person wishes to give one gold coin for this.” The tradesman replied, “l shall give ten gold coins.” The merchant spoke, “I will give a hundred gold coins.” Listening to their argument, yere deliberated, “The one, for whom these two wish to buy this lotus, that सुगत alone will give me a higher price.”

Thus, he told both of them, “Sirs, I do not wish to sell (this lotus).”

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 4 अमूल्यं कमलम्

परिच्छेदः 2

अथ प्राप्तः …………………. भगवान् गौतमबुद्धः।

अनुवादः

आता सुदास, भगवान सुगत ज्या उद्यानात राहत होते, तेथे पोहोचला. तेथे वटवृक्षाखाली एका खडकावर ते महात्मा बसलेले होते. त्या दैवी पुरुषाचा चेहरा अमाप तेजाने झळकत होता. त्यांना पाहताच सुदासाच्या मनात भक्तिरसाचा सागर उफाळून आला.

हातातील कमळ भगवान सुगतांच्या पायावर अर्घ्य म्हणून समर्पित करुन, “भगवंतांना वंदन असो” असे म्हणत (त्याने) नम्रपणे अभिवादन केले. करुणाई डोळ्यांनी त्याच्याकडे पाहत कमळासारखे मुख असलेले भगवान सस्मित म्हणाले, “बाळा, तुझी काय इच्छा आहे?”

सुगतांचे हे शब्द ऐकताच आता निरिच्छ झालेला सुदास म्हणाला, “भगवन, अजून काय (असणार)? आपल्या चरणकमलांच्या केवळ स्पर्शाने माझ्या आत्म्याला कृतार्थता लाभो.” असे म्हणणाऱ्या सुदासाला ‘तसेच होवो’ असे भगवान सुगत म्हणाले.

काय तो सुगतांचा प्रभाव! त्यांच्या केवळ दर्शनाने कमळासाठी मोठ्या किमतीची अपेक्षा करणाऱ्या सुदासाने ते विसरून ते कमळ सुगतांच्या चरणावर वाहिले. हे सुगत म्हणजेच भगवान गौतम बुद्ध.

Now, सुदास reached that garden where Lord सुगत lived. There, under the banyan tree, that great soul was seated, on a rock. That divine one’s face shone with great lustre. As soon as he saw him, an ocean of devotion arose in सुदास’s heart.

Offering the lotus in his hand at the feet of Lord सुगत as homage, saying “Salutations to the Lord”, he bowed down with humility. Looking at him with eyes showering kindness (serenity), the lotus-faced Lord smilingly said, “Child, what do you wish?”.

At these words of सुगत, सुदास who was now desireless replied, “O Lord what else? By the mere touch of your feet, may my soul attain fulfilment.” To सुदास who spoke thus, the Lord सुगत uttered, “May it be so.” Othe effect of सुगत, by only the sight of whom, सुदास, having forgotten that he expected a huge price for the lotus, dedicated that lotus at the feet of सुगत. This सुगत is none other than Lord गौतम बुद्ध.

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शब्दार्थाः :

  1. उद्यानपाल: – gardener – माळी
  2. विवादः – argument – वाद/भांडण
  3. सार्थवाह:/श्रेष्ठी – merchant/trader – व्यापारी
  4. महिमा – greatness – महात्म्य, मोठेपणा
  5. अध्वना – by the road – रस्त्याने
  6. परमात्मनः – of the supreme soul – परमात्म्याचे
  7. राजसद्मनः – of the royal palace – राजवाड्याच्या
  8. अतिशीते – in extreme cold – कडाक्याच्या थंडीत
  9. तडागे – in the lake – सरोवरामध्ये
  10. शिशिर ऋती – in winter season – हिवाळ्यात
  11. व्योम्नि – in the sky – आकाशात
  12. अभ्यर्थये – I request – मी विनंती करतो
  13. पद्यं व्यकसत् – a lotus bloomed – कमळ उमलले
  14. व्यमृशत् – thought – विचार केला
  15. दद्यात् – would give – देतील
  16. क्रेतुम् – to buy – विकत घेण्यासाठी
  17. विक्रेतुम् – to sell – विकण्यासाठी
  18. सत्यपि- in spite of being – असताना सुद्धा
  19. प्राप्तः सुदासः – सुदास reached – सुदास पोहोचला
  20. मुखपद – lotus-like face – मुखकमल
  21. भक्तिरसार्णवः – an ocean of devotion – भक्तिचा सागर
  22. निरिच्छ: – desireless – नि:स्पृह/निःस्वार्थ
  23. अपेक्षमाणः – expected अपेक्षा करणारा
  24. स्मयमानः – smiling – हसरा
  25. निरूपयन् – looking बघत असता
  26. समर्पितवान् – dedicated – अर्पण केले
  27. एवं वादिनम् – who spoke thus – असे बोलणाऱ्या
  28. धाम्ना – with lustre – तेजाने
  29. प्रसादवर्षिभ्याम् – showering kindness – करूणेचा वर्षाव करणाऱ्या
  30. आलोकयत: – while seeing – बघत असताना
  31. अश्मखण्डे – on a rock – खडकावर
  32. उदतिष्ठत् – arose – उत्पन्न झाला
  33. सविनयम् – bowed down with – विनम्र अभिवादन केले
  34. प्राणमत् – humility
  35. कृतार्थतां लभताम् – attain fulfilment – कृतार्थता लाभो
  36. अयं कृत्वा – offering as homage – अर्घ्य वाहून
  37. अवस्तात् – under/ below – खाली

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 13 तिफन Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन(कविता)

Marathi Aksharbharati Std 9 Digest Chapter 13 तिफन Textbook Questions and Answers‌

‌1. खालील‌ ‌अर्थाच्या‌ ‌शब्दसमुहाला‌ ‌कवितेतील‌ ‌योग्य‌ ‌शब्द‌‌ दया.‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1. ‌
खालील‌ ‌अर्थाच्या‌ ‌शब्दसमुहाला‌ ‌कवितेतील‌ ‌योग्य‌ ‌शब्द‌‌ दया.‌ ‌

  1. ‌पेरणीसाठी‌ ‌लागणारे‌ ‌बियाणे‌ ‌…….‌………… ‌
  2. ‌शेतकरी‌ ‌पेरणीसाठी‌ ‌वापरतो‌ ‌ते‌ ‌अवजार‌ ‌…………………
  3. पाराबती‌ ‌करते‌ ‌त्या‌ ‌दोन‌ ‌कृती‌ ‌……………, …………………..

उत्तर:

  1. ‌बजवाई‌
  2. ‌तिफण‌‌
  3. पोटाला‌ ‌वटी‌ ‌बांधणे,‌ ‌झोळी‌ ‌काठीला‌ ‌टांगणे‌ ‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

2.‌ ‌खालील‌ ‌ओळींतील‌ ‌अधोरेखित‌ ‌संकल्पना‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1. ‌‌
‌काकरात‌ ‌बिजवाई‌ ‌जस‌ ‌हासरं‌ ‌चांदन.‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
ज्याप्रमाणे‌ ‌आकाशात‌ ‌चांदणं‌ ‌चमकत‌ ‌असतं,‌ ‌त्याचप्रमाणे‌‌ शेतकऱ्याला‌ ‌शेतात‌ ‌पेरलेले‌ ‌बियाणे‌ ‌चमकत‌ ‌आहे,‌ ‌हसत‌ ‌आहे‌‌ असे‌ ‌वाटते.‌

प्रश्न‌ ‌2. ‌‌
काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते.‌ ‌
उत्तरः‌
‌शेतकरी‌ ‌भर‌ ‌दिवसा‌ ‌(शेतात)‌ ‌स्वप्न‌ ‌पाहत‌ ‌आहे.‌ ‌शेतकऱ्याची‌‌ काळी‌ ‌कसदार‌ ‌सुपीक‌ ‌जमीन‌ ‌आहे.‌ ‌त्या‌ ‌जमिनीत‌ ‌हिरवंगार‌ ‌शेत‌‌ पिकवून‌ ‌खूप‌ ‌धान्य‌ ‌मिळवयाचं‌ ‌त्याचं‌ ‌स्वप्न‌ ‌आहे.‌ ‌

3. या‌ ‌कवितेत‌ ‌आलेले‌ ‌वहाडी‌ ‌बोलीतील‌ ‌शब्द‌ ‌शोधा‌ ‌व‌ ‌त्यांना‌ ‌प्रमाणभाषेतील‌ ‌शब्द‌ ‌लिहा.‌‌

प्रश्न‌ 1.‌ ‌
या‌ ‌कवितेत‌ ‌आलेले‌ ‌वहाडी‌ ‌बोलीतील‌ ‌शब्द‌ ‌शोधा‌ ‌व‌ ‌त्यांना‌ ‌प्रमाणभाषेतील‌ ‌शब्द‌ ‌लिहा.‌‌
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन 1
उत्तरः‌

व-हाडी‌ ‌शब्द‌‌प्रमाण‌ ‌भाषेत‌‌
1. काया‌‌काळ्या‌‌
2. पानी‌‌पाणी‌‌
3. ईज‌‌वीज‌‌
4. झोयी‌‌झोळी‌ ‌
5. वटीओटी‌‌
6. पाराबती‌‌पार्वती‌‌‌‌
7. काटीला‌ ‌काठीला‌
8. लळते‌‌‌रडते‌‌
9. जीवाले‌‌जीवाला‌‌
10. सांजीले‌‌संध्याकाळी‌‌
11. सपन‌‌स्वप्न‌‌
12. डोया‌‌डोळा‌‌‌‌
13. रगत‌‌रक्त‌‌
14. वाटुली‌‌वाट‌‌
15. हिर्व‌‌हिरवं‌‌
16. ढेकूल‌‌ढेकळ‌‌
17. पायाले‌‌पायाला‌‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

4. कवितेच्या‌ ‌आधारे‌ ‌खालील‌ ‌तक्ता‌ ‌पूर्ण‌ ‌करा.‌

प्रश्न‌ 1.‌
‌कवितेच्या‌ ‌आधारे‌ ‌खालील‌ ‌तक्ता‌ ‌पूर्ण‌ ‌करा.‌
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन 2
उत्तरः‌

कवितेचा  ‌विषय‌कवितेची‌ ‌ ‌भाषा‌कवितेतील पात्र‌कवितेतील ‌तुम्हांला‌ ‌सर्वांत‌ आवडलेले‌ प्रतिक‌‌कवितेतील‌‌ ‌नैसर्गिक‌‌ ‌घटना‌‌
शेतातील‌ पेरणी‌‌व-हाडी‌‌शेतकरी‌ ‌व‌ ‌त्याची‌ ‌पत्नी‌‌काटा‌ ‌(अतिशय‌‌‌ ‌कष्ट)‌‌विजा‌ चमकतात.‌‌ ढगांचा‌ ‌गडगडाट‌ ‌होतो.‌ ‌ढग‌ ‌बरसतात.‌‌

5.‌ ‌अभिव्यक्ती‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1.‌
‘काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपान‌ ‌पाहेते’‌ ‌या‌ ‌ओळीतील‌‌ भावार्थ‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌
उत्तर:‌
‌कृती‌ ‌3:‌ ‌काव्यसौंदर्य,‌ ‌प्रश्न‌ ‌(1)‌ ‌मधील‌ ‌(vi)‌ ‌चे‌ ‌उत्तर‌ ‌पाहा.‌ ‌

प्रश्न‌ ‌2.‌
‘काटा‌ ‌पायात‌ ‌रुतते‌ ‌लाल‌ ‌रगत‌ ‌सांडते‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌फुलते’‌ ‌या‌‌ ओळीचा‌ ‌संदर्भ‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
कृती‌ ‌3‌ ‌:‌ ‌काव्यसौंदर्य,‌ ‌प्रश्न‌ ‌(1)‌ ‌मधील‌ ‌(v)‌ ‌चे‌ ‌उत्तर‌ ‌पाहा

भाषाभ्यास‌:

प्रश्न‌ ‌1.‌
‌खालील‌ ‌वाक्ये‌ ‌वाचा.‌
‌1. ‌मी‌ ‌शाळा‌ ‌जातो.‌ ‌
2.‌ ‌मी‌ ‌शाळेत‌ ‌जातो.‌ ‌

ही‌ ‌दोन‌ ‌वाक्ये‌ ‌तुम्ही‌ ‌वाचलीत.‌ ‌यांपैकी‌ ‌पहिले‌ ‌वाक्य‌ ‌चुकीचे‌ ‌आहे‌ ‌आणि‌ ‌ दुसरे‌ ‌वाक्य‌ ‌बरोबर‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌दोन्ही‌ ‌वाक्यांमध्ये‌ ‌काय‌ ‌फरक‌ ‌आहे?‌ ‌पहिल्या‌ ‌वाक्यात‌ ‌’शाळा’‌ हा‌ ‌शब्द‌ ‌आहे.‌ ‌दुसऱ्या‌ ‌वाक्यात‌ ‌’शाळा’‌ ‌या‌ ‌शब्दाला‌ ‌’-त’‌ ‌हा‌ ‌प्रत्यय‌ ‌लागला‌ ‌आहे.‌

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प्रश्न‌ 2.‌ ‌ ‌
खालील‌ ‌वाक्ये‌ ‌वाचा.‌ ‌
1. ‌राम‌ ‌मित्राशी‌ ‌बोलतो.‌
2.‌ ‌रेश्मा‌ ‌पालीला‌ ‌घाबरते.‌ ‌
3. ‌कल्पना‌ ‌दुकानात‌ ‌जाते.‌

या‌ ‌वाक्यांमध्ये,‌ ‌मित्र,‌ ‌पाल,‌ ‌दुकान‌ ‌या‌ ‌नामांना‌ ‌अनुक्रमे‌ ‌-शी,‌ ‌-ला,‌ ‌-त‌ ‌हे‌ ‌प्रत्यय‌ ‌जोडलेले‌ ‌आहेत.‌ ‌ प्रत्यय‌ ‌लागण्यापूर्वी‌ ‌या‌ ‌शब्दांमध्ये‌ ‌काही‌ ‌बदल‌ ‌झाले‌ ‌आहेत.‌ ‌उदा.,‌ ‌मित्र~मित्रा-,‌ ‌पाल~पाली-,‌ ‌दुकान~दुकाना-‌ ‌शब्दाला‌ ‌प्रत्यय‌ ‌लागण्यापूर्वी‌ ‌होणाऱ्या‌ ‌या‌ ‌बदलाला‌ ‌शब्दाचे‌ ‌सामान्यरूप‌ ‌ म्हणतात.‌ ‌शब्दाच्या‌ ‌मूळ‌ ‌रूपाला‌ ‌सरळरूप‌ ‌म्हणतात.‌ ‌उदा.,‌ ‌’दुकान’‌ ‌हे‌ ‌सरळरूप‌ ‌आणि‌ ‌ दकाना-‌ ‌हे‌ ‌सामान्यरूप.‌ ‌

नामांना‌ ‌किंवा‌ ‌सर्वनामांना‌ ‌लागणारे‌ ‌प्रत्यय‌ ‌अनेक‌ ‌प्रकारचे‌ ‌असतात.‌ ‌-ला,-त,-ने,-शी,-चा,-ची,-चे‌ ‌इत्यादी.‌ ‌नामांना‌ ‌व‌ ‌सर्वनामांना‌ ‌प्रत्ययांबरोबरच‌ ‌शब्दयोगी‌ ‌अव्यये‌ ‌जोडली‌ ‌जातात.‌ ‌तेव्हासुद्धा‌ ‌सामान्यरूप‌ ‌होते.‌ ‌

Marathi Akshar Bharati Class 9 Textbook Solutions Chapter 13 तिफन Additional Important Questions and Answers

पुढील‌ ‌पक्ष्याच्या‌ ‌आधारे‌ ‌दिलेल्या‌ ‌सूचनेनुसार‌ ‌कृती‌ ‌करा:‌

‌कृती‌ ‌1 ‌:‌ ‌आकलन‌ ‌कृती‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1.‌
आकृतिबंध‌ ‌पूर्ण‌ ‌करा.
‌उत्तरः‌
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन 3
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन 4

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

प्रश्न‌ 2.‌
चौकटी‌ ‌पूर्ण‌ ‌करा.‌‌
‌उत्तरः‌
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन 5

प्रश्न‌ 3.‌
उत्तर‌ ‌लिहा.‌‌
‌उत्तरः‌
नंदी‌ ‌बैलांच्या‌ ‌जोडीला‌ ‌हाकणारा‌ ‌-‌ ‌[सदाशीव‌]

‌खालील‌ ‌प्रश्नांची‌ ‌उत्तरे‌ ‌एका‌ ‌वाक्यात‌ ‌लिहा.‌‌

प्रश्न‌ 1.‌
कोण‌ ‌रडत‌ ‌आहे?‌ ‌
उत्तरः‌
‌तानुलं‌ ‌रडत‌ ‌आहे.‌

प्रश्न‌ 2.‌
‌पाराबतीने‌ ‌पोटाला‌ ‌काय‌ ‌बांधले‌ ‌आहे?‌ ‌
उत्तर:‌
‌पाराबतीने‌ ‌पोटाला‌ ‌वटी‌ ‌बांधली‌ ‌आहे.‌

प्रश्न‌ 3.‌
शेतात‌ ‌पेरलेले‌ ‌धान्य‌ ‌कवीला‌ ‌कसे‌ ‌वाटत‌ ‌आहे?‌ ‌
उत्तरः‌
‌शेतात‌ ‌पेरलेले‌ ‌धान्य‌ ‌कवीला‌ ‌जणू‌ ‌हसरे‌ ‌चांदणे‌ ‌वाटत‌ ‌आहे.‌

प्रश्न‌ 4.‌
जीवाला‌ ‌कोणाची‌ ‌भूल‌ ‌पडत‌ ‌आहे?‌
‌उत्तरः‌ ‌
जीवाला‌ ‌मातीच्या‌ ‌कस्तुरीच्या‌ ‌वासाची‌ ‌भूल‌ ‌पडत‌ ‌आहे.‌ ‌

प्रश्न‌ 5.‌
भिजलेली‌ ‌ढेकळं‌ ‌पायाला‌ ‌कशाप्रमाणे‌ ‌भासतात?‌ ‌
उत्तरः‌
‌भिजलेली‌ ‌ढेकळं‌ ‌पायाला‌ ‌लोण्याप्रमाणे‌ ‌भासतात.‌ ‌.‌‌

प्रश्न‌ 6.‌
शेतकरी‌ ‌काळ्या‌ ‌ढेकळात‌ ‌काय‌ ‌पाहत‌ ‌आहे?‌ ‌
उत्तर:‌
‌शेतकरी‌ ‌काळ्या‌ ‌ढेकळात‌ ‌हिरवं‌ ‌सपन‌ ‌पाहत‌ ‌आहे.‌

प्रश्न‌ 7.‌
‌योग्य‌ ‌पर्याय‌ ‌शोधून‌ ‌रिकाम्या‌ ‌जागा‌ ‌भरा.‌

  1. नंदी‌ ‌बैलाच्या‌ ‌जोळीले‌ ‌…….”‌ ‌हकालते.‌‌ (महादेव,‌ ‌सदाशीव,‌ ‌शीव,‌ ‌शेतकरी)‌ ‌
  2. …………….‌ ‌काटीले‌ ‌टांगते‌ ‌त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते.‌‌ (मोळी,‌ ‌चोळी,‌ ‌झोयी,‌ ‌पताका)‌
  3. काया‌ ‌मातीत‌ ‌मातीत‌ ‌…………….’‌ ‌चालते.‌‌ (गोफन,‌ ‌रापन,‌ ‌चाखन,‌ ‌तिफन)‌ ‌
  4. सरीवरी‌ ‌सरी‌ ‌येती‌‌ ……………….. न्हातीधुती‌ ‌होते.‌‌ (माती,‌ ‌धरनी,‌ ‌काया,‌ ‌पृथ्वी)‌ ‌
  5. ‌मैना‌ ‌वाटुली‌ ‌पाहेते‌ ‌..‌…………..‌ ‌‌तिफन‌ ‌हानते.‌‌ (राघू,‌ ‌शूक,‌ ‌सदाशीव,‌ ‌पाराबती)‌
  6. ‌वला‌ ‌टाकती‌ ‌तिफन‌ ‌………………‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते.‌‌ (शितू,‌ ‌राघू,‌ ‌चंदू,‌ ‌मैना)‌ ‌
  7. ‌डोया‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते‌ ‌…..‌…………‌ ‌पायात‌ ‌रुतते.‌‌ (खिळा,‌ ‌मोळा,‌ ‌चूक,‌ ‌काटा)‌ ‌

उत्तर:‌

  1. सदाशीव‌
  2. ‌झोयी‌
  3. तिफन‌ ‌
  4. माती‌
  5. राघू‌‌
  6. शितू‌ ‌
  7. ‌काटा‌‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

कृती‌ ‌2:‌ ‌आकलन‌ ‌कृती‌ ‌

प्रश्न‌ 1.‌
‌समान‌ ‌अर्थाच्या‌ ‌काव्यपंक्ती‌ ‌शोधून‌ ‌लिहा.‌

  1. आकाशात‌ ‌विजा‌ ‌चमकत‌ ‌असतात.‌ ‌जणू‌ ‌त्यांचा‌ ‌थयथय‌‌ नाच‌ ‌चालू‌ ‌असतो.‌
  2. ‌काठीला‌ ‌टांगलेल्या‌ ‌झोळीत‌ ‌झोका‌ ‌घेणारे‌ ‌बाळ‌ ‌रडत‌ ‌आहे.‌
  3. ‌पावसाच्या‌ ‌सरीवर‌ ‌सरी‌ ‌कोसळत‌ ‌आहेत‌ ‌जणू‌ ‌या‌ ‌सरी‌ ‌मातीला‌‌ अंघोळ‌ ‌घालत‌ ‌आहेत.‌ ‌
  4. शेतकरी‌ ‌तिफन‌ ‌चालवत‌ ‌आहे.‌ ‌पाऊस‌ ‌बरसत‌ ‌आहे.‌‌
  5. शेतकरी‌ ‌तिफणीत‌ ‌बीज‌ ‌टाकत‌ ‌आहे.‌ ‌त्याचं‌ ‌लक्ष‌ ‌जमिनीवर‌‌ ढेकळं‌ ‌फोडत‌ ‌पुढे‌ ‌जाणाऱ्या‌ ‌वखरावर‌ ‌आहे.‌ ‌
  6. त्याचं‌ ‌हिरवं‌ ‌स्वप्न‌ ‌(धान्य‌ ‌पिकवण्याचं)‌ ‌खरं‌ ‌झालं‌ ‌आहे.‌ ‌

उत्तर:‌

  1. ईज‌ ‌नाचते‌ ‌थयथय.‌‌
  2. झोयी‌ ‌काटीले‌ ‌टांगते‌ ‌त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते.‌ ‌
  3. सरीवरी‌ ‌सरी‌ ‌येती‌ ‌माती‌ ‌न्हातीधुती‌ ‌होते.‌‌
  4. राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌
  5. ‌वला‌ ‌टाकती‌ ‌तिफन‌ ‌शितू‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते.‌‌
  6. ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌फुलते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌ ‌

जोड्या‌ ‌जुळवा.‌

प्रश्न‌ 1.

‘अ’‌ ‌गट‌ ‌‘ब’‌ ‌गट‌‌
‌1. काळ्या‌ ‌मातीत‌(अ)‌ ‌लळते‌
2. विजेचा‌(ब)‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवतात‌
‌3. ढग‌(क)‌ ‌थयथय‌ ‌नाच‌
4. तानुलं‌‌(ड)‌ ‌तिफन‌ ‌चालते‌‌

उत्तर:‌

‘अ’‌ ‌गट‌ ‌‘ब’‌ ‌गट‌‌
‌1. काळ्या‌ ‌मातीत‌(ड)‌ ‌तिफन‌ ‌चालते‌‌
2. विजेचा‌(क)‌ ‌थयथय‌ ‌नाच‌
‌3. ढग‌(ब)‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवतात‌
4. तानुलं‌‌(अ)‌ ‌लळते‌

प्रश्न‌ 2.

‘अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
1. काकरात‌‌‌(अ)‌ ‌न्हातीधुती‌
2. चांदनं‌‌(ब)‌ ‌गोंदन‌
3. लाळानौसाचं‌‌(क)‌ ‌हासरं‌
‌4. माती‌‌(ड)‌ ‌बिजवाई‌

उत्तर:‌

‘अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌
1. काकरात‌‌‌(ड)‌ ‌बिजवाई‌
2. चांदनं‌(क)‌ ‌हासरं‌
3. लाळानौसाचं‌‌(ब)‌ ‌गोंदन‌
‌4. माती‌‌(अ)‌ ‌न्हातीधुती‌

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प्रश्न‌ 3.

‌’अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌ ‌
‌1. शितू‌ ‌(अ)‌ ‌पायात‌ ‌रुतते‌‌
2. लोनी(ब)‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते‌
3. डोया‌‌(क)‌ ‌पायाला‌ ‌वाटते‌
4. काटा‌‌(ड)‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते‌‌

उत्तर:‌

‌’अ’‌ ‌गट‌‌‘ब’‌ ‌गट‌ ‌
‌1. शितू‌ ‌(ड)‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते‌‌
2. लोनी(क)‌ ‌पायाला‌ ‌वाटते‌
3. डोया‌‌(ब)‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते‌
4. काटा‌‌(अ)‌ ‌पायात‌ ‌रुतते‌‌

काव्यपंक्तींचा‌ ‌योग्य‌ ‌क्रम‌ ‌लावा.‌

प्रश्न‌ 1.
काव्यपंक्तींचा‌ ‌योग्य‌ ‌क्रम‌ ‌लावा.‌
उत्तर:‌

  1. ‌त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌‌
  2. ईज‌ ‌नाचते‌ ‌थयथय‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवते.‌
  3. वटी‌ ‌बांधून‌ ‌पोटाले‌ ‌पाराबती‌ ‌उनारते.‌ ‌
  4. काया‌ ‌मातीत‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालते‌ ‌तिफन‌ ‌चालते.‌
  5. ‌राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌ ‌
  6. ‌काकरात‌ ‌बिजवाई‌ ‌जसं‌ ‌हासरं‌ ‌चांदनं‌ ‌
  7. सरीवरी‌ ‌सरी‌ ‌येती‌ ‌माती‌ ‌न्हातीधुती‌ ‌होते.‌
  8. ‌मैना‌ ‌वाटुली‌ ‌पाहेते‌ ‌राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते.‌‌
  9. ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌फुलते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌ ‌
  10. वला‌ ‌टाकती‌ ‌तिफन‌ ‌शितू‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते.‌‌
  11. काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते.‌‌
  12. ‌पानी‌ ‌भिजलं‌ ‌ढेकूल‌ ‌लोनी‌ ‌पायाले‌ ‌पाटते.‌

‌उत्तर:‌

  1. ‌‌काया‌ ‌मातीत‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालते‌ ‌तिफन‌ ‌चालते.‌‌
  2. ईज‌ ‌नाचते‌ ‌थयथय‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवते.‌ ‌
  3. ‌वटी‌ ‌बांधून‌ ‌पोटाले‌ ‌पाराबती‌ ‌उनारते.‌
  4. ‌‌त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌ ‌
  5. काकरात‌ ‌बिजवाई‌ ‌जसं‌ ‌हासरं‌ ‌चांदनं‌ ‌
  6. सरीवरी‌ ‌सरी‌ ‌येती‌ ‌माती‌ ‌न्हातीधुती‌ ‌होते.‌
  7. मैना‌ ‌वाटुली‌ ‌पाहेते‌ ‌राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते.‌
  8. राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌
  9. ‌वला‌ ‌टाकती‌ ‌तिफन‌ ‌शितू‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते.‌
  10. ‌पानी‌ ‌भिजलं‌ ‌ढेकूल‌ ‌लोनी‌ ‌पायाले‌ ‌वाटते.‌ ‌
  11. ‌काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते.‌‌
  12. हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌फुलते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते.‌

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काव्यपंक्तीवरून‌ ‌शब्दांचा‌ ‌योग्य‌ ‌क्रम‌ ‌लावा.‌‌

प्रश्न‌ 1.
काव्यपंक्तीवरून‌ ‌शब्दांचा‌ ‌योग्य‌ ‌क्रम‌ ‌लावा.‌‌

  1. बरसते,‌ ‌टांगते,‌ ‌हकालते,‌ ‌उनारते
  2. ढोल,‌ ‌तानुलं,‌ ‌पाराबती,‌ ‌सदाशीव‌‌
  3. बरसते,‌ ‌गोंदन,‌ ‌पाहेते,‌ ‌चांदनं‌ ‌
  4. राघू,‌ ‌मैना,‌ ‌माती,‌ ‌कस्तुरीचा‌ ‌
  5. तिफन,‌ ‌ढग,‌ ‌काटा,‌ ‌डोया‌ ‌
  6. वखर,‌ ‌वला,‌ ‌लोनी,‌ ‌हिर्व‌

उत्तर:‌

  1. हकालते,‌ ‌उनारते,‌ ‌टांगते,‌ ‌बरसते‌‌
  2. ढोल,‌ ‌सदाशीव,‌ ‌पाराबती,‌ ‌तानुलं‌ ‌
  3. चांदनं,‌ ‌गोंदन,‌ ‌पाहेते,‌ ‌बरसते‌ ‌
  4. ‌माती,‌ ‌कस्तुरीचा,‌ ‌मैना,‌ ‌राघू‌
  5. तिफन,‌ ‌डोया,‌ ‌काटा,‌ ‌ढग‌‌
  6. वला,‌ ‌वखर,‌ ‌लोनी,‌ ‌हिर्व‌

प्रश्न‌ ‌तयार‌ ‌करा.‌ ‌

प्रश्न‌ 1.
‌झोयी‌ ‌काटीले‌ ‌टांगते.‌ ‌
उत्तरः‌
‌काटीला‌ ‌काय‌ ‌टांगते?‌

प्रश्न‌ 2.
काया‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालते.‌
‌उत्तरः‌
‌काया‌ ‌मातीत‌ ‌काय‌ ‌चालते?‌

प्रश्न‌ 3.
‌तिचा‌ ‌कस्तुरीचा‌ ‌वास‌ ‌भूल‌ ‌जीवाले‌ ‌पाळते.‌ ‌
उत्तर:‌
‌कोणता‌ ‌वास‌ ‌जिवाला‌ ‌भूल‌ ‌पाडत‌ ‌आहे?‌ ‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

प्रश्न‌ 4.
धरतीच्या‌ ‌आंगोपांगी‌ ‌लाळानौसाचं‌ ‌गोंदनं‌ ‌
उत्तरः‌
‌कोणाच्या‌ ‌आंगोपांगी‌ ‌लाळानौसाचं‌ ‌गोंदनं‌ ‌आहे?‌‌

प्रश्न‌ 5.
वला‌ ‌टाकती‌ ‌तिफन‌ ‌शितू‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते.‌
‌उत्तरः‌
‌शितू‌ ‌काय‌ ‌पाहत‌ ‌आहे?‌ ‌

कृती‌ ‌3‌:‌ ‌काव्यसौंदर्य‌

खालील‌ ‌काव्यपंक्तीतील‌ ‌आशयसौंदर्य‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌

प्रश्न‌ 1.
‌काया‌ ‌मातीत‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालते‌ ‌तिफन‌ ‌चालते‌‌ ईज‌ ‌नाचते‌ ‌थयथय‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवते‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
शेतकऱ्याच्या‌ ‌कष्टकरी‌ ‌जीवनाचे‌ ‌व‌ ‌निसर्गाचे‌ ‌नितांत‌‌ सुंदर‌ ‌व‌ ‌जिवंत‌ ‌चित्र‌ ‌कवी‌ ‌आपल्या‌ ‌डोळ्यांसमोर‌ ‌उभे‌ ‌करतात.‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌संपूर्ण‌ ‌जीवन‌ ‌हे‌ ‌शेतीवर‌ ‌आणि‌ ‌पर्यायाने‌ ‌पावसावर‌ ‌अवलंबून‌ ‌असते.‌‌ शेतीची‌ ‌नांगरणी‌ ‌आटोपून‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाल्याने‌ ‌शेतकरी‌ ‌धान्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌शेतात‌ ‌बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌तिफन‌ ‌चालवून‌ ‌पेरणी‌ ‌चालू‌ ‌असते.‌ ‌आकाशात‌ ‌विजा‌ ‌चमकत‌ ‌असतात.‌ ‌जणू‌ ‌त्यांचा‌ ‌थयथय‌ ‌नाच‌ ‌चालू‌ ‌आहे‌ ‌असे‌ ‌वाटते.‌ ‌ढगांचा‌ ‌होणारा‌‌ गडगडाट‌ ‌ऐकून‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवत‌ ‌आहेत,‌ ‌असे‌ ‌कवीला‌ ‌वाटते.‌ ‌

प्रश्न‌ 2.‌ ‌
झोयी‌ ‌काटीले‌ ‌टांगते‌ ‌त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते.‌‌ त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते‌ ‌
उत्तरः‌
‌पार्वतीने‌ ‌(शेतकऱ्याच्या‌ ‌पत्नीने)‌ ‌आपले‌ ‌रडणारे‌ ‌छोटे‌ ‌बाळ‌‌ झोळीत‌ ‌ठेवले‌ ‌आहे.‌ ‌ती‌ ‌झोळी‌ ‌तिने‌ ‌काठीला‌ ‌टांगून‌ ‌ठेवली‌ ‌आहे.‌ ‌झोळीत‌ ‌झोका‌ ‌घेणारे‌ ‌बाळ‌ ‌रडत‌ ‌आहे.‌ ‌आकाशात‌ ‌ढग‌ ‌बरसू‌ ‌लागले‌ ‌आहे.‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाला‌ ‌आहे.‌ ‌शेतकरी‌ ‌शेतीच्या‌‌ कामात‌ ‌मग्न‌ ‌झाला‌ ‌आहे.‌

प्रश्न‌ 3.‌ ‌
काकरात‌ ‌बिजवाई‌ ‌जसं‌ ‌हासरं‌ ‌चांदनं‌ ‌
उत्तरः‌
‌काळ्या‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालवून‌ ‌शेतकरी‌ ‌धान्य‌ ‌पेरतो.‌ ‌हे‌‌ पेरलेले‌ ‌धान्य‌ ‌म्हणजे‌ ‌जणू‌ ‌काही‌ ‌हसरं‌ ‌चांदणं‌ ‌आहे.‌ ‌शिवारात‌ ‌पेरलेले‌ ‌बियाणं‌ ‌हे‌ ‌आकाशात‌ ‌चमकणाऱ्या‌ ‌चांदण्यासारखं‌ ‌भासत‌‌ आहे‌ ‌असे‌ ‌कवीला‌ ‌वाटते.‌

प्रश्न‌ 4.‌ ‌
‌सरीवरी‌ ‌सरी‌ ‌येती‌ ‌माती‌ ‌न्हातीधुती‌ ‌होते.‌ ‌
उत्तरः‌
‌पावसाची‌ ‌सुरुवात‌ ‌झाली‌ ‌आहे,‌ ‌त्यामुळे‌ ‌पावसाच्या‌ ‌पडणाऱ्या‌‌ सरी‌ ‌जमिनीवर‌ ‌बरसत‌ ‌आहेत.‌ ‌धरणी‌ ‌ओली‌ ‌चिंब‌ ‌झाली‌ ‌आहे.‌ ‌भिजून‌ ‌गेली‌ ‌आहे.‌ ‌जणू‌ ‌या‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरी‌ ‌मातीला‌ ‌न्हाऊ‌ ‌घालत‌‌ आहेत,‌ ‌असे‌ ‌कवीला‌ ‌वाटते.‌

प्रश्न‌ 5.‌ ‌
‌काटा‌ ‌पायात‌ ‌रूतते‌ ‌लाल‌ ‌रगत‌ ‌सांडते‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌फुलते.‌
‌उत्तरः‌
‌आपल्या‌ ‌कष्टाने,‌ ‌मेहनतीने‌ ‌हे‌ ‌शेत‌ ‌हिरवेगार‌ ‌होऊन‌ ‌उठेल,‌‌ शेतात‌ ‌धान्य‌ ‌डोलू‌ ‌लागेल‌ ‌असे‌ ‌स्वप्न‌ ‌डोळ्यांनी‌ ‌पाहत‌ ‌असताना‌ ‌किंवा‌ ‌मनात‌ ‌तसा‌ ‌विचार‌ ‌चालू‌ ‌असताना‌ ‌अचानक‌ ‌शेतकऱ्याच्या‌ ‌पायात‌ ‌काटा‌ ‌टोचतो.‌ ‌काटा‌ ‌टोचल्यामुळे‌ ‌पायातून‌ ‌लाल‌ ‌रक्त‌ ‌येऊ‌ ‌लागते;‌ ‌पण‌ ‌शेतकऱ्याला‌ ‌ती‌ ‌वेदना‌ ‌जाणवत‌ ‌नाही.‌ ‌कारण‌‌ त्याच्या‌ ‌कष्टातून,‌ ‌श्रमातून‌ ‌हिरव्यागार‌ ‌शेताचे‌ ‌स्वप्न‌ ‌सत्यात‌‌ उतरेल‌ ‌असा‌ ‌त्याला‌ ‌विश्वास‌ ‌वाटतो.‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

प्रश्न‌ 6.‌ ‌
‌काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपान‌ ‌पाहेते.‌ ‌
उत्तरः‌
‌पाऊस‌ ‌आल्यामुळे‌ ‌तिफन‌ ‌धरली‌ ‌जाते‌ ‌आणि‌ ‌बियाणाची‌‌ पेरणी‌ ‌होते.‌ ‌मातीच्या‌ ‌काळ्या‌ ‌ढेकळात‌ ‌चालताना‌ ‌ती‌ ‌ढेकळं‌ ‌पावसाने‌ ‌भिजली‌ ‌आहेत.‌ ‌त्यामुळे‌ ‌पायाला‌ ‌ती‌ ‌मऊ‌ ‌लोण्यासारखी‌ ‌जाणवतात.‌ ‌या‌ ‌ढेकळातून‌ ‌आता‌ ‌हिरवंगार‌ ‌पीक‌ ‌येईल‌ ‌असं‌ ‌स्वप्न‌ ‌शेतकरी‌ ‌पाहत‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌ओळीतून‌ ‌शेतकऱ्याचा‌ ‌आशावाद‌‌ दिसून‌ ‌येतो.‌

‌पुढील‌ ‌ओळींचा‌ ‌अर्थ‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌

प्रश्न‌ 1.‌ ‌
‌ईज‌ ‌नाचते‌ ‌थयथय‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवते.‌ ‌
उत्तरः‌
‌शेताची‌ ‌नांगरणी‌ ‌आटोपून‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाल्याने‌ ‌शेतकरी‌‌ धान्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌शेतात‌ ‌बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌तिफन‌ ‌चालवून‌ ‌पेरणी‌ ‌चालू‌ ‌असते.‌ ‌काळ्या‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालत‌ ‌असते.‌ ‌आकाशात‌ ‌विजा‌ ‌चमकत‌ ‌असतात‌ ‌जणू‌ ‌त्यांचा‌ ‌थयथय‌ ‌नाच‌ ‌चालू‌ ‌असतो.‌ ‌त्याचवेळी‌ ‌ढगांचा‌ ‌गडगडाट‌ ‌ऐकू‌ ‌येऊ‌ ‌लागतो‌‌ जणू‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवत‌ ‌आहेत‌ ‌असे‌ ‌वाटते.

प्रश्न‌ 2.‌ ‌
‌नंदी‌ ‌बैलाच्या‌ ‌जोळीले‌ ‌सदाशीव‌ ‌हकालते.
उत्तरः‌ ‌
पाऊस‌ ‌आल्यामुळे‌ ‌पेरणीसाठी‌ ‌सदाशीव‌ ‌म्हणजेच‌ ‌शेतकरी‌‌ यार‌ ‌झालेला‌ ‌आहे.‌ ‌तो‌ ‌आपल्या‌ ‌शेतामध्ये‌ ‌स्वत:‌ ‌नंदीबैलाच्या‌‌ जोडीला‌ ‌तिफन‌ ‌चालवत‌ ‌आहे.‌ ‌

प्रश्न‌ 3.‌ ‌‌
धरतीच्या‌ ‌आंगोपांगी‌ ‌लाळानौसाचं‌ ‌गोंदनं‌ ‌
उत्तरः‌
‌पेरलेले‌ ‌धान्य‌ ‌जणू‌ ‌हसणारं‌ ‌चांदणं‌ ‌वाटत‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌पेरलेले‌‌ ते‌ ‌धान्य‌ ‌पाहून‌ ‌असे‌ ‌वाटते,‌ ‌जणू‌ ‌धरतीच्या‌ ‌अंगावर‌ ‌लाडाने,‌‌ कौतुकाने‌ ‌नवसाचे‌ ‌छान‌ ‌गोंदण‌ ‌केलेले‌ ‌आहे.‌ ‌

प्रश्न‌ 4.‌ ‌‌
मैना‌ ‌वाटुली‌ ‌पाहेते‌ ‌राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते‌ ‌
उत्तरः‌
‌शेतकऱ्याची‌ ‌बायको‌ ‌संध्याकाळच्या‌ ‌वेळी‌ ‌घरी‌ ‌आपल्या‌‌ राघूची‌ ‌म्हणजेच‌ ‌शेतकऱ्याची‌ ‌मनापासून‌ ‌वाट‌ ‌पाहते‌ ‌आहे.‌ ‌ती‌ ‌घरी‌ ‌वाट‌ ‌पाहते‌ ‌पण‌ ‌इकडे‌ ‌शेतात‌ ‌हा‌ ‌शेतकरी‌ ‌तिफन‌ ‌चालवत‌‌ आहे.‌ ‌पाऊस‌ ‌बरसत‌ ‌आहे.‌ ‌

प्रश्न‌ 5.‌ ‌‌
बैल,‌ ‌काळी‌ ‌माती,‌ ‌तिफन‌ ‌आणि‌ ‌शेत‌ ‌यांमध्येच‌ ‌शेतकरी‌‌ राजाचा‌ ‌संसार‌ ‌गुरफटलेला‌ ‌असतो.‌ ‌तुमचे‌ ‌विचार‌ ‌लिहा.‌ ‌
उत्तरः‌
शेतकरी‌ ‌म्हटला‌ ‌म्हणजे‌ ‌शेत‌ ‌हे‌ ‌आलेच.‌ ‌शेत‌ ‌आले‌ ‌की,‌‌ माती,‌ ‌बैल‌ ‌व‌ ‌तिफन‌ ‌असे‌ ‌सर्व‌ ‌काही‌ ‌आले.‌ ‌शेतकरी‌ ‌राजाचे‌ ‌विश्व‌ ‌यांतच‌ ‌गुरफटलेले‌ ‌असते.‌ ‌दिवसभर‌ ‌बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌शेत‌ ‌नांगरताना‌ ‌त्याचे‌ ‌अनवाणी‌ ‌पाय‌ ‌काळ्या‌ ‌मातीला‌ ‌स्पर्श‌ ‌करीत‌ ‌असतात.‌ ‌तिफन‌ ‌हातात‌ ‌घेऊन‌ ‌शेत‌ ‌नांगरताना‌ ‌त्याला‌‌ सुखाची‌ ‌अनुभूती‌ ‌येत‌ ‌असते.‌ ‌पेरणी,‌ ‌नागरणी,‌ ‌कापणी,‌ ‌मळणी‌ ‌यांशिवाय‌ ‌दुसरे‌ ‌काहीही‌ ‌त्यास‌ ‌सुचत‌ ‌नसते.‌ ‌म्हणून‌ ‌शेतकरी‌ ‌राजाचा‌ ‌संसार‌ ‌हा‌ ‌बैल,‌ ‌काळी‌ ‌माती,‌ ‌तिफन‌ ‌आणि‌ ‌शेत‌ ‌यांमध्ये‌ ‌गुरफटलेला‌ ‌असतो.‌ ‌

प्रश्न‌ 6.‌ ‌‌
पावसाच्या‌ ‌दिवसातील‌ ‌मातीच्या‌ ‌सुगंधाचा‌ ‌तुम्ही‌ ‌जरूर‌ ‌आस्वाद‌ ‌घेतला‌ ‌असेल.‌ ‌त्यावेळी‌ ‌तुम्हांला‌ ‌झालेल्या‌‌ आनंदाचे‌ ‌वर्णन‌ ‌करा.‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
पाऊस‌ ‌पडण्याअगोदर‌ ‌माती‌ ‌उन्हात‌ ‌तापून‌ ‌गरम‌ ‌झालेली‌‌ असते.‌ ‌तिच्यातून‌ ‌गरम‌ ‌वाफा‌ ‌निघत‌ ‌असतात.‌ ‌पण‌ ‌जेव्हा‌ ‌पावसाला‌ ‌सुरुवात‌ ‌होते‌ ‌आणि‌ ‌तप्त‌ ‌धरती‌ ‌पावसात‌ ‌न्हाऊन‌ ‌निघते,‌ ‌तेव्हा‌ ‌मातीतून‌ ‌निघणारा‌ ‌सुगंध‌ ‌आपणास‌ ‌मोहून‌ ‌टाकतो‌ ‌व‌ ‌तो‌ ‌कस्तुरीच्या‌ ‌सुगंधाप्रमाणे‌ ‌सारा‌ ‌आसमंत‌ ‌दरवळून‌ ‌टाकतो.‌ ‌जणू‌ ‌धरणी‌ ‌मातेने‌ ‌त्यात‌ ‌स्नानच‌ ‌केलेले‌ ‌असते.‌ ‌मी‌ ‌प्रत्येक‌ ‌वर्षी‌ ‌पावसात‌ ‌न्हाऊन‌ ‌निघालेल्या‌ ‌मातीच्या‌ ‌सुगंधाचा‌ ‌आस्वाद‌ ‌घेतलेला‌ ‌आहे.‌ ‌त्या‌ ‌प्रत्येक‌ ‌वेळी‌ ‌माझे‌ ‌मन‌ ‌प्रसन्न‌ ‌व‌ ‌टवटवीत‌ ‌झालेले‌ ‌आहे.‌‌ माझ्या‌ ‌मनात‌ ‌एक‌ ‌प्रकारचा‌ ‌जोश‌ ‌व‌ ‌उत्साह‌ ‌निर्माण‌ ‌झालेला‌ ‌आहे.‌‌ ‌

प्रश्न‌ 7.‌ ‌‌‌
‌शेतकरीच‌ ‌नसता‌ ‌तर‌ ‌हिरवे‌ ‌सपन‌ ‌फुललेच‌ ‌नसते.‌ ‌या‌‌ विधानाचा‌ ‌तुम्हांला‌ ‌समजलेला‌ ‌अर्थ‌ ‌सांगा.‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
शेतकरीच‌ ‌नसता‌ ‌तर‌ ‌हिरवे‌ ‌सपन‌ ‌फुललेच‌ ‌नसते.‌ ‌हिरवे‌‌ सपन‌ ‌म्हणजे‌ ‌शेतात‌ ‌बहरून‌ ‌आलेले‌ ‌पीक.‌ ‌जर‌ ‌शेतकरी‌ ‌नसता‌ ‌तर‌ ‌शेती‌ ‌कोणीच‌ ‌करू‌ ‌शकले‌ ‌नसते.‌ ‌मग‌ ‌पेरणी,‌ ‌नागरणी,‌ ‌कापणी‌ ‌व‌ ‌मळणी‌ ‌या‌ ‌प्रक्रिया‌ ‌कोणालाही‌ ‌पूर्ण‌ ‌करता‌ ‌आल्याच‌ ‌नसत्या.‌ ‌देशातील‌ ‌लोकांना‌ ‌अन्नधान्य‌ ‌खाण्यास‌ ‌मिळालेच‌ ‌नसते.‌ ‌त्यामुळे‌ ‌लोकांची‌ ‌अन्नान्न‌ ‌दशा‌ ‌झाली‌ ‌असती.‌ ‌संपूर्ण‌ ‌मानव‌ ‌जीवनच‌ ‌संपुष्टात‌ ‌आले‌ ‌असते.‌ ‌खरेच‌ ‌शेतकऱ्याशिवाय‌ ‌मानवी‌ ‌जीवनाची‌ ‌कल्पनाच‌ ‌करता‌ ‌आली‌ ‌नसती.‌‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

प्रश्न‌ 8.‌ ‌‌‌
‌दिलेल्या‌ ‌मुद्द्यांच्या‌ ‌आधारे‌ ‌कवितेसंबंधी‌ ‌पुढील‌ ‌कृती‌‌ सोडवा.‌
उत्तरः‌
1. ‌कवी‌ ‌/‌ ‌कवयित्रीचे‌ ‌नाव‌ ‌-‌‌
विठ्ठल‌ ‌वाघ‌ ‌

2. ‌संदर्भ‌ ‌-‌‌
‘तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌ही‌‌ कविता‌ ‌त्यांच्या‌ ‌काळ्या‌ ‌मातीत‌ ‌मातीत’‌ ‌या‌ ‌कवितासंग्रहातील‌ ‌आहे.‌ ‌

3.‌ ‌प्रस्तावना‌ ‌-‌‌
‘तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांची‌ ‌होणारी शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌‌ कवीने‌ ‌केले‌ ‌आहे.‌ ‌

4. वाङ्मयप्रकार‌‌ –
‘तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌एक‌ ‌‘लोकगीत’‌ ‌आहे.‌

5. ‌कवितेचा‌ ‌विषय‌‌ –
शेतकरी,‌ ‌कष्टकरी‌ ‌लोकजीवनाचे‌ ‌चित्रण‌ ‌करणारी‌ ‌’तिफन’‌ ‌ही‌‌ एक‌ ‌ग्रामीण‌ ‌कविता‌ ‌आहे.‌

6. कवितेतील‌ ‌आवडलेली‌ ‌ओळ‌‌ –
सरीवर‌ ‌सरी‌ ‌येती‌ ‌माती‌ ‌न्हातीधुती‌ ‌होते‌‌
तिचा‌ ‌कस्तुरीचा‌ ‌वास‌ ‌भूल‌ ‌जीवाले‌ ‌पाळते‌

7.‌ ‌मध्यवर्ती‌ ‌कल्पना‌ ‌-‌‌
पडणाऱ्या‌ ‌पावसावर,‌ ‌शेतीवर‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌सारे‌ ‌जीवन‌ ‌अवलंबून‌ ‌असते.‌ ‌पाऊस‌ ‌आल्यावर‌ ‌त्याची‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामाची‌ ‌धांदल‌ ‌सुरू‌ ‌होते.‌ ‌पेरणी,‌ ‌बैलांविषयीचे‌ ‌प्रेम,‌ ‌पावसाच्या‌ ‌दिवसांतील‌ ‌मातीचा‌ ‌सुगंध,‌ ‌शेतकऱ्यांचे‌ ‌स्वप्न,‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्र‌ ‌’तिफन’‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌ ‌

8. कवितेतून‌ ‌मिळणारा‌ ‌संदेश‌‌ –
शेतकरी‌ ‌खूप‌ ‌कष्टाने‌ ‌शेतात‌ ‌धान्य‌ ‌पिकवत‌ ‌असतो.‌ ‌आपल्या‌ ‌अनेक‌ ‌सुखाचा,‌ ‌आनंदाचा‌ ‌तो‌ ‌त्याग‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌प्रसंगी‌ ‌रडणाऱ्या‌ ‌मुलांकडे‌ ‌दुर्लक्ष‌ ‌करून,‌ ‌आपल्या‌ ‌जखमांना‌ ‌विसरून‌ ‌तो‌ ‌शेतीची‌ ‌कामे‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌खूप‌ ‌यातना,‌ ‌त्रास‌ ‌सोसून‌ ‌आपल्या‌ ‌ताटात‌ ‌भाजी-भाकरीची‌ ‌सोय‌ ‌करणाऱ्या‌ ‌शेतकऱ्यांचा‌ ‌आपण‌ ‌आदर‌ ‌केला‌ ‌पाहिजे.‌ ‌तो‌ ‌मातीत‌ ‌कष्ट‌ ‌करतो‌ ‌म्हणून‌ ‌आपण‌ ‌पोटभर‌ ‌जेऊ‌ ‌शकतो,‌ ‌हे‌ ‌आपण‌ ‌कधीही‌ ‌विसरू‌ ‌नये.‌ ‌हा‌ ‌संदेश‌ ‌‘तिफन’‌ ‌या‌ ‌कवितेतून‌ ‌आपणास‌ ‌मिळतो.‌ ‌

9. कविता‌ ‌आवडण्याची‌ ‌वा‌ ‌न‌ ‌आवडण्याची‌ ‌कारणे‌‌ –
“तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌मला‌ ‌खूप‌ ‌आवडली‌ ‌आहे.‌ ‌त्याचे‌ ‌कारण‌ ‌म्हणजे‌ ‌हे‌ ‌एक‌ ‌लोकगीत‌ ‌आहे.‌ ‌छान‌ ‌चालीवर‌ ‌आपण‌ ‌ते‌ ‌गाऊ‌ ‌शकतो.‌ ‌शिवाय‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌वाचत‌ ‌असताना‌ ‌शेतकऱ्याचे‌‌ आयुष्य‌ ‌आपल्या‌ ‌डोळ्यांसमोर‌ ‌उभे‌ ‌राहते.‌

10. ‌भाषिक‌ ‌वैशिष्ट्ये‌‌ –
‘तिफन’‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌वहाडी‌ ‌बोलीचा‌ ‌छान‌ ‌वापर‌ ‌केला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌यमक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌इथे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌शैली‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

खालील‌ ‌काव्यपंक्तींचे‌ ‌रसग्रहण‌ ‌करा.सोडवा.‌ ‌

प्रश्न‌ ‌1.‌ ‌
काया‌ ‌मातीत‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालते‌‌
ईज‌ ‌नाचते‌ ‌थयथय‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवते‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
‘तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांना‌ ‌होणारा‌ ‌आनंद‌ ‌शिवाय‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

शेतकऱ्याच्या‌ ‌कष्टकरी‌ ‌जीवनाचे‌ ‌व‌ ‌निसर्गाचे‌ ‌नितांत‌ ‌सुंदर‌ ‌व‌ ‌जिवंत‌ ‌चित्र‌ ‌कवी‌ ‌आपल्या‌ ‌डोळ्यांसमोर‌ ‌उभे‌ ‌करतात.‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌संपूर्ण‌ ‌जीवन‌ ‌हे‌ ‌शेतीवर‌ ‌आणि‌ ‌पर्यायाने‌ ‌पावसावर‌ ‌अवलंबून‌ ‌असते.‌ ‌त्यामुळे‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाला‌ ‌की‌ ‌त्याच्या‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामाची‌ ‌लगबग‌ ‌सुरू‌ ‌होते.‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाल्याने‌ ‌शेताची‌ ‌नांगरणी‌ ‌आटोपून‌ ‌शेतकरी‌ ‌धान्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌शेतात‌ ‌बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌तिफन‌ ‌चालवून‌ ‌पेरणी‌ ‌चालू‌ ‌असते.‌ ‌काळया‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालत‌ ‌असते.‌ ‌आकाशात‌ ‌विजा‌ ‌चमकत‌ ‌असतात‌ ‌जणू‌ ‌त्यांचा‌ ‌थयथय‌ ‌नाच‌ ‌चालू‌ ‌असतो.‌ ‌त्याचवेळी‌ ‌ढगांचा‌ ‌गडगडाट‌ ‌ऐकू‌ ‌येऊ‌ ‌लागतो.‌ ‌जणू‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवत‌ ‌आहेत‌ ‌असे‌ ‌वाटते.‌‌

या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌व-हाडी‌ ‌बोलीचा‌ ‌छान‌ ‌वापर‌ ‌केला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌यमक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌इथे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌शैली‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌ ‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

प्रश्न‌ 2.‌ ‌
नंदी‌ ‌बैलाच्या‌ ‌जोळीले‌ ‌सदाशीव‌ ‌हकालते‌‌
वटी‌ ‌बांधून‌ ‌पोटाले‌ ‌पाराबती‌ ‌उनारते‌ ‌
वटी‌ ‌पोटाले‌ ‌बांधते‌ ‌झोयी‌ ‌काटीले‌ ‌टांगते‌
‌झोयी‌ ‌काटीले‌ ‌टांगते‌ ‌त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते‌‌
त्यात‌ ‌तानुलं‌ ‌लळते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
‘तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांना‌ ‌होणारा‌ ‌आनंद‌ ‌शिवाय‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

पाऊस‌ ‌आल्यामुळे‌ ‌पेरणीसाठी‌ ‌सदाशीव‌ ‌हा‌ ‌शेतकरी‌ ‌तयार‌ ‌झालेला‌ ‌आहे.‌ ‌तो‌ ‌आपल्या‌ ‌शेतामध्ये‌ ‌नंदीबैलाच्या‌ ‌जोडीला‌ ‌तिफन‌या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌वहाडी‌ ‌बोलीचा‌ ‌छान‌ ‌वापर‌ ‌केला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌यमक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌इथे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌शैली‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌ ‌

प्रश्न‌ 3.‌ ‌
काकरात‌ ‌बिजवाई‌ ‌जसं‌ ‌हासरं‌ ‌चांदनं‌‌
घरतीच्या‌ ‌अंगोपांगी‌ ‌लाळानौसाचं‌ ‌गोंदन‌ ‌
उत्तरः‌ ‌
‘तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांना‌ ‌होणारा‌ ‌आनंद‌ ‌शिवाय‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाल्यामुळे‌ ‌सदाशीव‌ ‌शेतकऱ्याने‌ ‌शेतात‌ ‌नंदीबैलाच्या‌ ‌साथीने‌ ‌तिफन‌ ‌जोडून‌ ‌पेरणीला‌ ‌सुरुवात‌ ‌केली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌पेरणीच्या‌ ‌कामात‌ ‌त्याची‌ ‌पत्नी‌ ‌पार्वती‌ ‌त्याला‌ ‌साथ‌ ‌देत‌ ‌आहे.‌ ‌त्यांनी‌ ‌शेतात‌ ‌पेरलेले‌ ‌धान्य‌ ‌जणू‌ ‌हसणारं‌ ‌चांदणं‌ ‌वाटत‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌पेरलेले‌ ‌ते‌ ‌धान्य‌ ‌पाहून‌ ‌असे‌ ‌वाटते‌ ‌जणू‌ ‌धरतीच्या‌ ‌अंगावर‌ ‌लाडाने,‌ ‌कौतुकाने‌ ‌नवसाचे‌ ‌छान‌ ‌गोंदण‌ ‌केलेले‌ ‌आहे.‌‌

‌या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌वहाडी‌ ‌बोलीचा‌ ‌छान‌ ‌वापर‌ ‌केला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌यमक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌इथे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌शैली‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

प्रश्न‌ 4.‌ ‌
सरीवरी‌ ‌सरी‌ ‌येती‌ ‌माती‌ ‌न्हातीधुती‌ ‌होते‌‌
तिचा‌ ‌कस्तुरीचा‌ ‌वास‌ ‌भूल‌ ‌जीवाले‌ ‌पाळते‌ ‌
भूल‌ ‌जीवाले‌ ‌पाळते‌ ‌वाट‌ ‌सांजीले‌ ‌पाहेते‌ ‌
मैना‌ ‌वाटुली‌ ‌पाहेते‌ ‌राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते‌‌
राघू‌ ‌तिफन‌ ‌हानते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते‌ ‌
उत्तरः‌
‌’तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांना‌ ‌होणारा‌ ‌आनंद‌ ‌शिवाय‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

पावसाला‌ ‌चांगली‌ ‌सुरुवात‌ ‌झाली‌ ‌आहे.‌ ‌सर्वत्र‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरीवर‌ ‌सरी‌ ‌कोसळत‌ ‌आहेत.‌ ‌जणू‌ ‌या‌ ‌सरी‌ ‌मातीला‌ ‌न्हाऊ‌ ‌घालत‌ ‌आहेत.‌ ‌या‌ ‌बरसणाऱ्या‌ ‌सरींमुळे‌ ‌माती‌ ‌चिंब‌ ‌भिजून‌ ‌गेली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌मातीचा‌ ‌कस्तुरीसारखा‌ ‌सुगंध‌ ‌सर्वत्र‌ ‌पसरलेला‌ ‌आहे.‌ ‌हा‌ ‌सुगंध‌ ‌जीवाला‌ ‌भूल‌ ‌पाडत‌ ‌आहे,‌ ‌मन‌ ‌मोहीत‌ ‌करत‌ ‌आहे.‌ ‌इकडे‌ ‌भिजलेल्या‌ ‌मातीचा‌ ‌सुगंध‌ ‌मनाला‌ ‌धुंद‌ ‌करत‌ ‌आहे‌ ‌तर‌ ‌तिकडे‌ ‌संध्याकाळच्या‌ ‌वेळी‌ ‌मैना‌ ‌म्हणजेच‌ ‌शेतकऱ्याची‌ ‌बायको‌ ‌घरी‌ ‌आपल्या‌ ‌राघूची‌ ‌म्हणजेच‌ ‌शेतकऱ्याची‌ ‌मनापासून‌ ‌वाट‌ ‌पाहते‌ ‌आहे.‌ ‌ती‌ ‌घरी‌ ‌वाट‌ ‌पाहते‌ ‌पण‌ ‌इकडे‌ ‌शेतात‌ ‌हा‌ ‌शेतकरी‌ ‌तिफन‌ ‌चालवत‌ ‌आहे‌ ‌आणि‌ ‌आकाशातून‌ ‌छान‌ ‌पाऊस‌ ‌बरसत‌ ‌आहे.‌‌

या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌व-हाडी‌ ‌बोलीचा‌ ‌छान‌ ‌वापर‌ ‌केला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌यमक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌इथे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌शैली‌ ‌दिसून‌ ‌येते.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

प्रश्न‌ 5.‌ ‌
वला‌ ‌टाकती‌ ‌तिफन‌ ‌शितू‌ ‌वखर‌ ‌पाहेते‌‌
पानी‌ ‌भिजलं‌ ‌ढेकूल‌ ‌लोनी‌ ‌पायाले‌ ‌वाटते‌‌
काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते‌ ‌
उत्तर:‌
‌’तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌‘विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांना‌ ‌होणारा‌ ‌आनंद‌ ‌शिवाय‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

शेतीची‌ ‌नांगरणी‌ ‌करून‌ ‌शेतकरी‌ ‌शेतात‌ ‌धान्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌आहे.‌ ‌बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌तिफन‌ ‌चालवून‌ ‌पेरणी‌ ‌सुरू‌ ‌आहे.‌ ‌तिफनीतून‌ ‌धान्य‌ ‌जमिनीमध्ये‌ ‌पेरले‌ ‌जाते.‌ ‌त्यानंतर‌ ‌नांगरणी‌ ‌केल्यामुळे‌ ‌मातीची‌ ‌छोटी-मोठी‌ ‌ढेकळं‌ ‌जी‌ ‌जमिनीतून‌ ‌वर‌ ‌आलेली‌ ‌असतात‌ ‌ती‌ ‌फोडून‌ ‌त्याची‌ ‌माती‌ ‌या‌ ‌पेरलेल्या‌ ‌धान्यावर‌ ‌हळूच‌ ‌सारली‌ ‌जाते,‌ ‌त्याला‌ ‌वखरणी‌ ‌म्हणतात.‌ ‌पेरणी‌ ‌करणाऱ्या‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌तिकडेही‌ ‌लक्ष‌ ‌आहे.‌ ‌पडणाऱ्या‌ ‌पावसामुळे‌ ‌माती‌ ‌भिजलेली‌ ‌आहे.‌ ‌पाण्याने‌ ‌भरलेली‌ ‌ही‌ ‌मातीची‌ ‌ढेकळं‌ ‌पायाला‌ ‌लोण्याप्रमाणे‌ ‌वाटतात.‌ ‌या‌ ‌मातीच्या‌ ‌काळ्या‌ ‌ढेकळातच‌ ‌शेतकरी‌ ‌उदयाच्या‌ ‌नव्या‌ ‌हिरव्यागार‌ ‌पिकाचं‌ ‌हिरवं‌ ‌स्वप्न‌ ‌पाहू‌ ‌लागतो.‌‌

या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌वहाडी‌ ‌बोलीचा‌ ‌छान‌ ‌वापर‌ ‌केला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌यमक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌इथे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌शैली‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌

‌प्रश्न‌ 6.‌ ‌
काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते‌‌
डोया‌ ‌सपन‌ ‌पाहेते‌ ‌काटा‌ ‌पायात‌ ‌रुतते‌ ‌
काटा‌ ‌पायात‌ ‌रुतते‌ ‌लाल‌ ‌रगत‌ ‌सांडते‌ ‌हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌फुलते‌‌
हिर्व‌ ‌सपन‌ ‌फुलते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते‌ ‌
उत्तर:‌
‌’तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांना‌ ‌होणारा‌ ‌आनंद‌ ‌शिवाय‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.

बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌शेतीची‌ ‌नांगरणी‌ ‌आटोपून‌ ‌शेतकरी‌ ‌धान्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌पेरणी‌ ‌करून‌ ‌झाल्यावर‌ ‌मातीच्या‌ ‌काळ्या‌ ‌ढेकळातच‌ ‌शेतकरी‌ ‌उदयाच्या‌ ‌नव्या‌ ‌हिरव्यागार‌ ‌पिकाचं‌ ‌हिरवं‌ ‌स्वप्न‌ ‌पाहू‌ ‌लागतो.‌ ‌आपल्या‌ ‌कष्टाने,‌ ‌मेहनतीने‌ ‌हे‌ ‌शेत‌ ‌हिरवेगार‌ ‌होऊन‌ ‌उठेल,‌ ‌शेतात‌ ‌धान्य‌ ‌डोलू‌ ‌लागेल‌ ‌असे‌ ‌स्वप्न‌ ‌डोळ्यांनी‌ ‌पाहत‌ ‌असताना‌ ‌किंवा‌ ‌मनात‌ ‌तसा‌ ‌विचार‌ ‌चालू‌ ‌असताना‌ ‌अचानक‌ ‌त्याच्या‌ ‌पायात‌ ‌काटा‌ ‌टोचतो.‌ ‌काटा‌ ‌टोचल्यामुळे‌ ‌पायातून‌ ‌लाल‌ ‌रक्त‌ ‌येऊ‌ ‌लागते.‌ ‌पण‌ ‌शेतकऱ्याला‌ ‌ती‌ ‌वेदना‌ ‌जाणवत‌‌ नाही.‌ ‌कारण‌ ‌त्याच्या‌ ‌कष्टातून,‌ ‌श्रमातून‌ ‌त्याच्या‌ ‌हिरव्यागार‌ ‌शेताचे‌ ‌स्वप्न‌ ‌सत्यात‌ ‌उतरेल‌ ‌असा‌ ‌त्याला‌ ‌विश्वास‌ ‌वाटतो.‌ ‌पाऊस‌ ‌पडतो,‌ ‌ढग‌ ‌बरसू‌ ‌लागतात‌ ‌आणि‌ ‌त्या‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌हिरवे‌ ‌स्वप्न‌ ‌खरे‌ ‌होऊ‌ ‌लागते.‌‌

या‌ ‌काव्यपंक्तीमध्ये‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌वहाडी‌ ‌बोलीचा‌ ‌छान‌ ‌वापर‌ ‌केला‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌कवितेमध्ये‌ ‌यमक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌वापर‌ ‌करून‌ ‌छान‌ ‌परिणाम‌ ‌साधला‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌इथे‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌शैली‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

पाठाखालील‌ ‌स्वाध्याय‌‌:

‌अभिव्यक्ती‌:

प्रश्न‌ ‌1.‌
‘काया‌ ‌ढेकलात‌ ‌डोया‌ ‌हिर्व‌ ‌सपान‌ ‌पाहेते’‌ ‌या‌ ‌ओळीतील‌‌ भावार्थ‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करा.‌ ‌
उत्तर:‌
‌कृती‌ ‌3:‌ ‌काव्यसौंदर्य,‌ ‌प्रश्न‌ ‌(1)‌ ‌मधील‌ ‌(vi)‌ ‌चे‌ ‌उत्तर‌ ‌पाहा.‌ ‌

तिफन Summary in Marathi

कवीचा‌ ‌परिचय‌:

नाव‌‌: विठ्ठल‌ ‌वाघ‌
जन्म‌‌:‌ ‌1945
‌सुप्रसिदध‌ ‌कवी‌ ‌व‌ ‌लेखक.‌ ‌’काळ्या‌ ‌मातीत‌ ‌मातीत’,‌ ‌’पंढरीच्या‌ ‌वाटेवर’,‌ ‌’कपाशीची‌ ‌चंद्रफुले’,‌ ‌’पाऊसपाणी’‌ ‌हे‌ ‌कवितासंग्रह;‌ ‌’अंधारयात्रा’‌ ‌हे‌ ‌नाटक;‌ ‌’डेबू’‌ ‌ही‌ ‌कादंबरी;‌ ‌’वहाड‌ ‌बोली‌ ‌आणि‌ ‌इतिहास’,‌ ‌’वहाडी‌ ‌म्हणी’‌ ‌इत्यादी‌ ‌पुस्तके‌ ‌प्रसिद्ध.‌‌

प्रस्तावना‌‌:

‘तिफन’‌ ‌ही‌ ‌कविता‌ ‌कवी‌ ‌’विठ्ठल‌ ‌वाघ’‌ ‌यांनी‌ ‌लिहिली‌ ‌आहे.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌आगमनाने‌ ‌शेतकऱ्यांना‌ ‌होणारा‌ ‌आनंद‌ ‌शिवाय‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामांची‌ ‌लगबग‌ ‌याचे‌ ‌सुंदर‌ ‌चित्रदर्शी‌ ‌वर्णन‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌दिसून‌ ‌येते.‌‌

Poet‌ ‌Vitthal‌ ‌Wagh‌ ‌has‌ ‌written‌ ‌the‌ ‌poem‌ ‌’Tiphan’.‌ ‌This‌ ‌poem‌ ‌describes‌ ‌a‌ ‌picture‌ ‌of‌ ‌rural‌ ‌area‌ ‌at‌ ‌the‌ ‌onset‌ ‌of‌ ‌the‌ ‌monsoons.‌ ‌A‌ ‌farmer’s‌ ‌joy‌ ‌knows‌ ‌no‌ ‌bounds‌ ‌as‌ ‌the‌ ‌monsoon‌ ‌showers‌ ‌drench‌ ‌his‌ ‌farm‌ ‌thoroughly.‌ ‌The‌ ‌poem‌ ‌depicts‌ ‌the‌ ‌various‌ ‌activities‌ ‌of‌ ‌the‌ ‌farmer‌ ‌and‌ ‌that‌ ‌of‌ ‌his‌ ‌wife‌ ‌in‌ ‌sowing‌ ‌seeds‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌farm.‌ ‌The‌ ‌rain‌ ‌showers‌ ‌kindle‌ ‌the‌ ‌hope‌ ‌of‌ ‌an‌ ‌abundant‌ ‌green‌ ‌crop‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌farmer’s‌ ‌mind.‌‌

भावार्थ‌‌:

काया‌ ‌मातीत‌ ‌……‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवते‌ ‌
शेतकऱ्याच्या‌ ‌कष्टकरी‌ ‌जीवनाचे‌ ‌व‌ ‌निसर्गाचे‌ ‌नितांत‌ ‌सुंदर‌ ‌व‌ ‌जिवंत‌ ‌चित्र‌ ‌कवी‌ ‌आपल्या‌ ‌डोळ्यांसमोर‌ ‌उभे‌ ‌करतात.‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌संपूर्ण‌ ‌जीवन‌ ‌हे‌ ‌शेतीवर‌ ‌आणि‌ ‌पर्यायाने‌ ‌पावसावर‌ ‌अवलंबून‌ ‌असते.‌ ‌त्यामुळे‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाला‌ ‌की‌ ‌त्याच्या‌ ‌शेतीच्या‌ ‌कामाची‌ ‌लगबग‌ ‌सुरू‌ ‌होते.‌

शेताची‌ ‌नांगरणी‌ ‌आटोपून‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाल्याने‌ ‌शेतकरीधान्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌शेतात‌ ‌बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌तिफन‌ ‌चालवून‌ ‌पेरणी‌ ‌चालू‌ ‌असते.‌ ‌काळ्या‌ ‌मातीत‌ ‌तिफन‌ ‌चालत‌ ‌असते.‌ ‌आकाशात‌ ‌विजा‌ ‌चमकत‌ ‌असतात‌ ‌जणू‌ ‌त्यांचा‌ ‌थयथय‌ ‌नाच‌ ‌चालू‌ ‌असतो.‌ ‌त्याचवेळी‌ ‌ढगांचा‌ ‌गडगडाट‌ ‌ऐकू‌ ‌येऊ‌ ‌लागतो‌ ‌जणू‌ ‌ढग‌ ‌ढोल‌ ‌वाजवत‌ ‌आहेत‌ ‌असे‌ ‌वाटते.‌‌

नंदी‌ ‌बैलाच्या‌ ‌…..‌ ‌ढग‌ ‌बरसते‌
]पाऊस‌ ‌आल्यामुळे‌ ‌पेरणीसाठी‌ ‌सदाशीव‌ ‌म्हणजेच‌ ‌शेतकरी‌ ‌तयार‌ ‌झालेला‌ ‌आहे.‌ ‌तो‌ ‌आपल्या‌ ‌शेतामध्ये‌ ‌नंदीबैलाच्या‌ ‌जोडीला‌ ‌तिफन‌ ‌बांधून‌ ‌हाकारत‌ ‌आहे.‌ ‌त्यावेळी‌ ‌सदाशीवची‌ ‌पत्नी‌ ‌पार्वती‌ ‌आपल्या‌ ‌पोटाला‌ ‌पदराची‌ ‌ओटी‌ ‌बांधून‌ ‌त्यात‌ ‌बियाणे‌ ‌घेऊन‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌आहे.‌‌
आपले‌ ‌रडणारे‌ ‌छोटे‌ ‌बाळ‌ ‌पार्वतीने‌ ‌झोळीत‌ ‌ठेवले‌ ‌आहे.‌ ‌ती‌ ‌झोळी‌ ‌तिने‌ ‌काठीला‌ ‌टांगून‌ ‌ठेवली‌ ‌आहे.‌ ‌झोळीत‌ ‌झोका‌ ‌घेणारे‌ ‌बाळ‌ ‌रडत‌ ‌आहे‌ ‌आणि‌ ‌आकाशातून‌ ‌ढग‌ ‌बरसू‌ ‌लागले‌ ‌आहेत.‌ ‌पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाला‌ ‌आहे.‌‌

काकरात‌ ‌बिजवाई‌ ‌……‌ ‌हानते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते‌ ‌
पाऊस‌ ‌सुरू‌ ‌झाल्यामुळे‌ ‌सदाशीव‌ ‌शेतकऱ्याने‌ ‌शेतात‌ ‌नंदीबैलाच्या‌ ‌साथीने‌ ‌तिफन‌ ‌जोडून‌ ‌पेरणीला‌ ‌सुरुवात‌ ‌केली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌पेरणीच्या‌ ‌कामात‌ ‌त्याची‌ ‌पत्नी‌ ‌पार्वती‌ ‌त्याला‌ ‌साथ‌ ‌देत‌ ‌आहे.‌ ‌त्यांनी‌ ‌शेतात‌ ‌पेरलेले‌ ‌धान्य‌ ‌जणू‌ ‌हसणारं‌ ‌चांदणं‌ ‌वाटत‌ ‌आहे.‌ ‌शिवाय‌ ‌पेरलेले‌ ‌ते‌ ‌धान्य‌ ‌पाहून‌ ‌असे‌ ‌वाटते‌ ‌जणू‌ ‌धरतीच्या‌ ‌अंगावर‌ ‌लाडाने,‌ ‌कौतुकाने‌ ‌नवसाचे‌ ‌छान‌ ‌गोंदण‌ ‌केलेले‌ ‌आहे.‌‌

पुढे‌ ‌कवी‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌आता‌ ‌पावसाला‌ ‌चांगली‌ ‌सुरुवात‌ ‌झाली‌ ‌आहे.‌ ‌सर्वत्र‌ ‌पावसाच्या‌ ‌सरीवर‌ ‌सरी‌ ‌कोसळत‌ ‌आहेत.‌ ‌जणू‌ ‌या‌ ‌सरी‌ ‌मातीला‌ ‌न्हाऊ‌ ‌घालत‌ ‌आहेत.‌ ‌या‌ ‌बरसणाऱ्या‌ ‌सरींमुळे‌ ‌माती‌ ‌चिंब‌ ‌भिजून‌ ‌गेली‌ ‌आहे.‌ ‌या‌ ‌मातीचा‌ ‌कस्तुरीसारखा‌ ‌सुगंध‌ ‌सर्वत्र‌ ‌पसरलेला‌ ‌आहे.‌ ‌हा‌ ‌सुगंध‌ ‌जीवाला‌ ‌भूल‌ ‌पाडत‌ ‌आहे,‌ ‌मन‌ ‌मोहीत‌ ‌करत‌ ‌आहे.‌‌

इकडे‌ ‌भिजलेल्या‌ ‌मातीचा‌ ‌सुगंध‌ ‌मनाला‌ ‌धुंद‌ ‌करत‌ ‌आहे‌ ‌तर‌ ‌तिकडे‌ ‌संध्याकाळच्या‌ ‌वेळी‌ ‌मैना‌ ‌म्हणजेच‌ ‌शेतकऱ्याची‌ ‌बायको‌ ‌घरी‌ ‌आपल्या‌ ‌राघूची‌ ‌म्हणजेच‌ ‌शेतकऱ्याची‌ ‌मनापासून‌ ‌वाट‌ ‌पाहते‌ ‌आहे.‌ ‌ती‌‌ घरी‌ ‌वाट‌ ‌पाहते‌ ‌पण‌ ‌इकडे‌ ‌शेतात‌ ‌हा‌ ‌शेतकरी‌ ‌तिफन‌ ‌चालवत‌ ‌आहे.‌ ‌पाऊस‌ ‌बरसत‌ ‌आहे.‌‌

वला‌ ‌टाकती‌ ‌तिफन‌ ‌…..‌ ‌फुलते‌ ‌ढग‌ ‌बरसते‌
‌शेतीची‌ ‌नांगरणी‌ ‌करून‌ ‌शेतकरी‌ ‌शेतात‌ ‌धान्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌करत‌ ‌आहे.‌ ‌बैलांच्या‌ ‌मदतीने‌ ‌तिफन‌ ‌चालवून‌ ‌पेरणी‌ ‌सुरू‌ ‌आहे.‌ ‌तिफनीतून‌ ‌धान्य‌ ‌जमिनीमध्ये‌ ‌पेरले‌ ‌जाते.‌ ‌त्यानंतर‌ ‌नांगरणी‌ ‌केल्यामुळे‌ ‌मातीची‌ ‌छोटी-मोठी‌ ‌ढेकळं‌ ‌जी‌ ‌जमिनीतून‌ ‌वर‌ ‌आलेली‌ ‌असतात‌ ‌ती‌ ‌फोडून‌ ‌त्याची‌ ‌माती‌ ‌या‌ ‌पेरलेल्या‌ ‌धान्यावर‌ ‌हळूच‌ ‌सारली‌ ‌जाते,‌ ‌त्याला‌ ‌वखरणी‌ ‌म्हणतात.‌ ‌पेरणी‌ ‌करणाऱ्या‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌तिकडेही‌ ‌लक्ष‌ ‌आहे.‌ ‌पडणाऱ्या‌ ‌पावसामुळे‌ ‌माती‌ ‌भिजलेली‌ ‌आहे.‌ ‌पाण्याने‌ ‌भरलेली‌ ‌ही‌‌ मातीची‌ ‌ढेकळं‌ ‌पायाला‌ ‌लोण्याप्रमाणे‌ ‌वाटतात.‌ ‌या‌ ‌मातीच्या‌ ‌काळ्या‌ ‌ढेकळातच‌ ‌शेतकरी‌ ‌उदयाच्या‌ ‌नव्या‌ ‌हिरव्यागार‌ ‌पिकाचं‌ ‌हिरवं‌ ‌स्वप्न‌ ‌पाहू‌ ‌लागतो.‌

आपल्या‌ ‌कष्टाने,‌ ‌मेहनतीने‌ ‌हे‌ ‌शेत‌ ‌हिरवेगार‌ ‌होऊन‌ ‌उठेल,‌ ‌शेतात‌ ‌धान्य‌ ‌डोलू‌ ‌लागेल‌ ‌असे‌ ‌स्वप्न‌ ‌डोळ्यांनी‌ ‌पाहत‌ ‌असताना‌ ‌किंवा‌ ‌मनात‌ ‌तसा‌ ‌विचार‌ ‌चालू‌ ‌असताना‌ ‌अचानक‌ ‌शेतकऱ्याच्या‌ ‌पायात‌ ‌काटा‌ ‌टोचतो.‌ ‌काटा‌ ‌टोचल्यामुळे‌ ‌पायातून‌ ‌लाल‌ ‌रक्त‌ ‌येऊ‌ ‌लागते.‌ ‌पण‌ ‌शेतकऱ्याला‌ ‌ती‌ ‌वेदना‌ ‌जाणवत‌ ‌नाही.‌ ‌कारण‌ ‌त्याच्या‌ ‌कष्टातून,‌ ‌श्रमातून‌ ‌त्याच्या‌ ‌हिरव्यागार‌ ‌शेताचे‌ ‌स्वप्न‌ ‌सत्यात‌ ‌उतरेल‌ ‌असा‌ ‌त्याला‌ ‌विश्वास‌ ‌वाटतो.‌ ‌पाऊस‌ ‌पडतो,‌ ‌ढग‌ ‌बरसू‌ ‌लागतात‌ ‌आणि‌ ‌त्या‌ ‌शेतकऱ्याचे‌ ‌हिरवे‌ ‌स्वप्न‌ ‌खरे‌ ‌होऊ‌ ‌लागते.‌‌

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 13 तिफन

शब्दार्थ‌‌:

  1. काया‌ ‌-‌ ‌काळ्या‌ ‌(black)‌
  2. ‌पानी‌ ‌-‌ ‌पाणी‌ ‌
  3. ईज‌ ‌-‌ ‌वीज‌ ‌(lightning)‌ ‌
  4. जोळीले‌ ‌-‌ ‌जोडीने‌ ‌(together,‌ ‌with)‌‌
  5. वटी‌ ‌-‌ ‌ओटी‌‌ ‌
  6. पोटाले‌ ‌-‌ ‌पोटाला‌ ‌
  7. पाराबती‌ ‌-‌ ‌पार्वती‌
  8. ‌काटीले‌ ‌-‌ ‌काठीला‌ ‌
  9. लळते‌ ‌-‌ ‌रडते‌ ‌(is‌ ‌crying)‌ ‌
  10. वाटुली‌ ‌पाहेते‌ ‌-‌ ‌वाट‌ ‌पाहते‌ ‌(is‌ ‌waiting)‌ ‌
  11. झोयी‌ ‌-‌ ‌झोळी‌ ‌(traditional‌ ‌cradle)‌ ‌
  12. तानुलं‌ ‌-‌ ‌तान्हुलं,‌ ‌छोटे‌ ‌बाळ‌ ‌
  13. लोनी‌ ‌- लोणी‌ ‌(butter)‌ ‌
  14. बिजवाई‌ ‌-‌ ‌बियाणं‌‌
  15. चांदनं‌ ‌-‌ ‌चांदणं‌ ‌(moon‌ ‌light)‌ ‌
  16. लाळानौसाचं‌ ‌-‌ ‌लाडा‌ ‌नवसाचं‌ ‌
  17. जीवाले‌ ‌-‌ ‌जीवाला‌ ‌(here-mind)‌ ‌
  18. डोया‌ ‌-‌ ‌डोळा‌ ‌(eye)‌ ‌
  19. तिफन‌ ‌-‌ ‌धान्य‌ ‌पेरणीसाठीचे‌ ‌तीन‌ ‌नळकांड्या‌ ‌असलेले‌‌ शेतीचे‌ ‌अवजार‌
  20. ‌नौसाचं‌ ‌-‌ ‌नवसाचं‌ ‌
  21. रगत‌ ‌-‌ ‌रक्त‌ ‌(blood)‌
  22. ‌सपन‌ ‌-‌ ‌स्वप्न‌ ‌(dream)‌ ‌
  23. सांजीले‌ ‌-‌ ‌सायंकाळी‌ ‌(evening)‌ ‌
  24. हानते‌ ‌-‌ ‌हाकतो‌ ‌(moving‌ ‌forward)
  25. हिर्व‌‌ -‌ ‌हिरवं‌ ‌(green)‌ ‌
  26. काकरात‌ ‌-‌ ‌शेतात‌ ‌
  27. कस्तुरी‌ ‌-‌ ‌कस्तुरीमृगाच्या‌ ‌नाभीत‌ ‌उत्पन्न‌ ‌होणारे‌ ‌एक‌ ‌सुगंधी‌‌ द्रव्य‌ ‌(an‌ ‌aromatic‌ ‌substance)

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Sanskrit Solutions Amod Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

Sanskrit Amod Std 10 Digest Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः Textbook Questions and Answers

भाषाभ्यासः

1. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।

प्रश्न अ.
चारणा: किमर्थम् उत्सुका: ?
‌उत्तरम्‌ :
‌चारणा:‌ ‌पृथुनृपस्य‌ ‌स्तुति‌ ‌गातुम्‌ ‌उत्सुकाः‌ ‌।‌

प्रश्न आ.
भ्रमणसमये पृथुराजेन किं दृष्टम् ?
‌उत्तरम्‌ :
भ्रमणसमये‌ ‌पृथुराजेन‌ ‌दृष्टं‌ ‌यत्‌ ‌प्रजा:‌ ‌अतीव‌ ‌कृशाः‌ ‌अशक्ता:‌‌ च।‌ ‌ता:‌ ‌पशुवत्‌ ‌जीवन्ति।‌ ‌निकृष्टान्नं‌ ‌खादन्ति।‌ ‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

प्रश्न इ.
वसुन्धरायाः उदरे किं वर्तते?
‌उत्तरम्‌ :
वसुन्धरायाः‌ ‌उदरे‌ ‌धनधान्यादि‌ ‌सर्व‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌वर्तते।‌

प्रश्न ई.
स्त्रीरूपं धृत्वा पृथुनृपस्य पुरतः का प्रकटिता अभवत् ?
उत्तरम्‌ ‌:
स्त्रीरूपं‌ ‌धृत्वा‌ ‌पृथुनृपस्य‌ ‌पुरतः‌ ‌भूमिः‌ ‌प्रकटिता‌ ‌अभवत्।‌

प्रश्न उ.
पृथुवैन्यः कृषिकार्यार्थं जलस्य व्यवस्थापनं कथम् अकरोत् ?
उत्तरम्‌ ‌:
‌पृथुवैन्यस्य‌ ‌नि:स्पृहताम्‌ ‌अजानन्‌ ‌स्तुतिगायकाः‌ ‌प्रसन्नाः‌‌ अभवन्‌ ‌च।‌

2. माध्यमभाषया उत्तरत।

प्रश्न अ.
भूमाता पृथुवैन्यं किम् उपादिशत् ?
उत्तरम्‌ ‌:
‌आद्यकृषक:‌ ‌पृथुवैन्यः‌ ‌हा‌ ‌पाठ‌ ‌म्हणजे‌ ‌पृथु‌ ‌राजाच्या‌‌ कृषिविषयक‌ ‌कार्याचा‌ ‌प्रारंभ‌ ‌व‌ ‌त्याचा‌ ‌विकास‌ ‌याचा‌ ‌इतिहास‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करणारी‌ ‌आख्यायिका‌ ‌आहे.‌‌

एकदा‌ ‌पृथु‌ ‌राजा‌ ‌त्याच्या‌ ‌राज्यात‌ ‌फिरत‌ ‌असताना‌ ‌त्याने‌ ‌प्रजेला‌ ‌दयनीय‌ ‌अवस्थेत‌ ‌पाहिले.‌ ‌त्याच्या‌ ‌राज्यातील‌ ‌लोक‌ ‌हलक्या‌ ‌प्रतीच्या‌ ‌अन्नामुळे‌ ‌क्षीण,‌ ‌अशक्त‌ ‌झाले‌ ‌होते.‌ ‌हे‌ ‌पाहून‌ ‌राजाचे‌ ‌मन‌ ‌द्रवले‌ ‌व‌ ‌तो‌ ‌चिंताग्रस्त‌ ‌झाला.‌‌

पुरोहितांच्या‌ ‌सांगण्यानुसार‌ ‌त्याने‌ ‌पृथ्वीमधून‌ ‌धन-धान्य‌ ‌बाहेर‌ ‌काढण्याकरिता‌ ‌धनुष्य‌ ‌सज्ज‌ ‌केले.‌ ‌तेव्हा‌ ‌पृथ्वीने‌ ‌स्वी-रूप‌ ‌धारण‌ ‌केले‌ ‌व‌ ‌राजाला‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌करण्याचा‌ ‌आदेश‌ ‌दिला.‌‌ भूमातेने‌ ‌नांगर,‌ ‌कुदळ,‌ ‌फावडे,‌ ‌कोयता‌ ‌या‌ ‌उपकरणांच्या‌ ‌साहाय्याने‌ ‌राजाला‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌करण्यास‌ ‌सांगितले.‌ ‌भूमातेने‌ ‌राजाला‌ ‌त्याच्या‌ ‌अन्यायी‌ ‌वडिलांचा‌ ‌संदर्भ‌ ‌दिला‌ ‌तसेच‌ ‌त्यावेळी‌ ‌राजाच्या‌ ‌सदाचरणाचे‌ ‌कौतुक‌ ‌केले‌ ‌आणि‌ ‌राजाच्या‌ ‌कृषिकार्यावर‌ ‌तिची‌ ‌कृपा‌ ‌होईल,‌ ‌असे‌ ‌आश्वासन‌ ‌दिले.‌

‌आद्यकृषक:‌ ‌पृथुवैन्यः‌ ‌is‌ ‌the‌ ‌legend‌ ‌that‌‌ reveals‌ ‌the‌ ‌history‌ ‌of‌ ‌Pruthu’s‌ ‌initiation‌ ‌of‌ ‌agricultural‌ ‌work‌ ‌and‌ ‌civilization‌‌ Once,‌ ‌king‌ ‌was‌ ‌wandering‌ ‌in‌ ‌his‌ ‌kingdom.‌ ‌He‌ ‌saw‌ ‌the‌ ‌pitiable‌ ‌condition‌ ‌of‌ ‌his‌ ‌subjects.‌ ‌His‌ ‌subjects‌ ‌were‌ ‌thin‌ ‌and‌ ‌weak‌ ‌due‌ ‌to‌ ‌low-quality‌ ‌food.‌ ‌The‌ ‌king’s‌ ‌heart‌ ‌melted‌ ‌with‌ ‌compassion‌ ‌and‌ ‌mind‌ ‌was‌ ‌filled‌ ‌with‌ ‌worry.‌‌

On‌ ‌the‌ ‌advice‌ ‌of‌ ‌a‌ ‌priest,‌ ‌he‌ ‌set‌ ‌the‌ ‌bow.‌ ‌When‌ ‌he‌ ‌was‌ ‌about‌ ‌to‌ ‌take‌ ‌out‌ ‌wealth‌ ‌and‌ ‌grains‌ ‌from‌ ‌the‌ ‌earth,‌ ‌the‌ ‌earth‌ ‌disguised‌ ‌as‌ ‌a‌ ‌woman‌ ‌and‌ ‌advised‌ ‌him‌ ‌to‌ ‌do‌ ‌agricultural‌ ‌work.‌‌

The‌ ‌earth‌ ‌advised‌ ‌the‌ ‌king‌ ‌to‌ ‌work‌ ‌with‌ ‌the‌ ‌help‌ ‌of‌ ‌hoe,‌ ‌plough,‌ ‌spade,‌ ‌sickles‌ ‌along‌ ‌with‌ ‌his‌ ‌subjects.‌ ‌She‌ ‌reminded‌ ‌the‌ ‌king‌ ‌of‌ ‌his‌ ‌father‌ ‌who‌ ‌was‌ ‌the‌ ‌corrupt‌ ‌king.‌ ‌She‌ ‌praised‌ ‌the‌ ‌king’s‌ ‌righteous‌ ‌behaviour‌ ‌and‌ ‌assured‌ ‌him‌ ‌with‌ ‌her‌ ‌favour‌ ‌in‌ ‌agricultural‌ ‌work.‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

प्रश्न आ.
धरित्र्याः उपदेशं मनसि निधाय पृथुवैन्यः किं किम् अकरोत् ?
उत्तरम्‌ ‌:
आद्यकृषकः‌ ‌पृथुवैन्यः‌ ‌हा‌ ‌पाठ‌ ‌म्हणजे‌ ‌पृथु‌ ‌राजाच्या‌ ‌कृषिविषयक‌ ‌कार्याचा‌ ‌प्रारंभ‌ ‌व‌ ‌त्याचा‌ ‌विकास‌ ‌याचा‌ ‌इतिहास‌ ‌स्पष्ट‌ ‌करणारी‌ ‌आख्यायिका‌ ‌आहे.‌‌

राजाने‌ ‌नदीचा‌ ‌मार्ग‌ ‌अडविला‌ ‌व‌ ‌ते‌ ‌पाणी‌ ‌कृषिकार्यासाठी‌ ‌उपयोगात‌ ‌आणले.‌ ‌पावसाच्या‌ ‌पाण्याचा‌ ‌संचय‌ ‌करून‌ ‌पाण्याचे‌ ‌व्यवस्थापन‌ ‌केले.‌ ‌जमिनीला‌ ‌सुपीक‌ ‌करण्यासाठी‌ ‌राजाने‌ ‌विशेष‌ ‌प्रयत्न‌ ‌केले.‌ ‌नंतर‌ ‌लोकांनी‌ ‌धान्याच्या‌ ‌बिया‌ ‌पेरल्या.‌ ‌राजाने‌ ‌सुद्धा‌ ‌विविध‌ ‌प्रकारची‌ ‌बी-बियाणे‌ ‌गोळा‌ ‌करून,‌ ‌त्याचे‌ ‌संस्करण‌ ‌केले‌ ‌व‌ ‌प्रयत्नपूर्वक‌ ‌त्याची‌ ‌पेरणी‌ ‌केली.‌ ‌पाऊस‌ ‌झाल्यानंतर‌ ‌धान्यांत‌ ‌अंकुर‌ ‌फुटला.‌ ‌राजाच्या‌ ‌परिश्रमामुळे‌ ‌धान्यलाभ‌ ‌झाला‌ ‌व‌ ‌सगळी‌ ‌प्रजा‌ ‌अतिशय‌ ‌आनंदित‌ ‌झाली.‌‌

आद्यकृषक:‌ ‌पृथुवैन्य:‌ ‌is‌ ‌the‌ ‌legend‌ ‌that‌ ‌reveals‌ ‌the‌ ‌history‌ ‌of‌ ‌Pruthu’s‌ ‌initiation‌ ‌of‌ ‌agricultural‌ ‌work‌ ‌and‌ ‌civilization.‌‌
The‌ ‌king‌ ‌obstructed‌ ‌the‌ ‌river’s‌ ‌path‌ ‌for‌ ‌agricultural‌ ‌work.‌ ‌He‌ ‌stored‌ ‌the‌ ‌rain‌ ‌water‌ ‌and‌ ‌did‌ ‌the‌ ‌water-management.‌ ‌He‌ ‌took‌ ‌special‌ ‌efforts‌ ‌to‌ ‌make‌ ‌the‌ ‌land‌ ‌fertile.‌ ‌Afterwards,‌ ‌people‌ ‌sowed‌ ‌the‌ ‌seeds‌ ‌of‌ ‌grains.‌ ‌The‌ ‌king‌ ‌gathered‌ ‌varied‌ ‌seeds,‌ ‌refined‌ ‌it‌ ‌and‌ ‌sowed‌ ‌with‌ ‌efforts.‌ ‌After‌ ‌the‌ ‌rains,‌ ‌the‌ ‌sprouts‌ ‌were‌ ‌germinated‌ ‌and‌ ‌all‌ ‌subjects‌ ‌became‌ ‌happy‌ ‌by‌ ‌the‌ ‌gain‌ ‌of‌ ‌grains.‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

3. जालरेखाचित्रं पूरयत ।

प्रश्न अ.
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 1
उत्तरम्‌ ‌:
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 5

प्रश्न आ.
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 2
उत्तरम्‌ ‌:
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 6

प्रश्न इ.
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 3
उत्तरम्‌ ‌:
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 7

 

4. पाठ्यांशं पठित्वा प्रवाहिजालं पूरयत ।

प्रश्न 1.
पाठ्यांशं पठित्वा प्रवाहिजालं पूरयत ।
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 4
उत्तरम्‌ ‌:
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 8

5. प्रश्ननिर्माणं कुरुत ।

‌प्रश्न अ.
‌प्रयागक्षेत्रे‌ ‌पृथुराजस्य‌ ‌राजधानी‌ ‌आसीत्।‌ ‌
उत्तरम्‌ :
‌कुत्र‌ ‌पृथुराजस्य‌ ‌राजधानी‌ ‌आसीत्?‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

‌प्रश्न आ.‌ ‌
प्रजा:‌ ‌पशुवत्‌ ‌जीवन्ति।‌
‌उत्तरम्‌ :
‌प्रजाः‌ ‌कथं‌ ‌जीवन्ति?‌

प्रश्न इ. ‌
धनधान्यादि‌ ‌सर्व‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌वसुन्धरावा:‌ ‌उदर‌ ‌एव‌ ‌वर्तते।‌
‌उत्तरम्‌ :
‌धनधान्यादि‌ ‌सर्व‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌कस्याः‌ ‌उदर‌ ‌एव‌ ‌वर्तते?‌‌

प्रश्न ई.
पर्जन्यानन्तरं बीजेभ्यः अङ्कुराः उद्भूताः।
‌उत्तरम्‌ :
पर्जन्यानन्तरं‌ ‌केभ्यः‌ ‌अङकुराः‌ ‌उद्भूता:?‌‌

6. सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।

प्रश्न अ.
पृथुवैन्यस्य नि:स्पृहतां ज्ञात्वा स्तुतिगायकाः प्रसन्नाः अभवन्। (पूर्वकालवाचक-त्वान्त-अव्ययं निष्कासयत ।)
उत्तरम्‌ ‌:
पृथुवैन्यस्य नि:स्पृहताम् भवान अजानन् स्तुतिगयकाः प्रसन्नाः अभवान् च ।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

प्रश्न आ.
त्वं प्रयत्नेन कृषिकार्यं करोषि । (‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)
उत्तरम्‌ ‌:
भवान्‌ प्रयत्नेन कृषिकार्यं करोति ।

प्रश्न इ.
‌त्वं‌ ‌धनुः‌ ‌त्यज।‌
‌उत्तरम्‌ :
‌भवान्‌ ‌धनुः‌ ‌त्यजतु।‌

प्रश्न ई.
भूमातुः उपदेशं मनसि निधाय पृथुवैन्यः कृषिकार्यम् अकरोत् । (‘भूमातुः’ स्थाने ‘भूमि’ शब्दस्य योग्य रूपं लिखत ।)
‌उत्तरम्‌ :
‌भूम्या:‌ ‌भूमेः‌ ‌उपदेशं‌ ‌मनसि‌ ‌निधाय‌ ‌पृथुवैन्यः‌ ‌कृषिकार्यम्‌‌ अकरोत्।

प्रश्न उ.
प्रजाजनैः सह कृषिकार्यं कुरु । (लकारं लिखत) ।
‌उत्तरम्‌ :

  1. ‌लङ्लकार:‌
  2. लट्लकार:‌ ‌
  3. ‌लृट्लकार:‌‌
  4. ‌लोट्लकार:‌‌

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7. मेलनं कुरुत ।

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः 9
‌उत्तरम्‌ :

विशेषणम्विशेष्यम्
कृशाःप्रजाः
उर्वराभूमिः
आनन्दिताःप्रजाजना:
दःशासकःवेनः
प्रजाहितदक्षःपृथुः

8. समानार्थकशब्दं लिखत । वृक्षः, भूमिः, राजा, धनुः, नदी ।

प्रश्न 1.
समानार्थकशब्दं लिखत । वृक्षः, भूमिः, राजा, धनुः, नदी ।
उत्तरम्‌ ‌:

  1. वृक्षः – तरुः,‌ ‌महीरुहः,‌ ‌पादपः,‌ ‌द्रुमः‌ ‌।‌ ‌
  2. ‌भूमिः‌ – ‌पृथिवी,‌ ‌पृथ्वी,‌ ‌धरा,‌ ‌वसुन्धरा,‌ ‌अवनी,‌ ‌मही,‌‌ मेदिनी,‌ ‌क्षमा,‌ ‌गोत्रा,‌ ‌कुः।‌
  3. राजा : – भूपालः,‌ ‌महीपतिः,‌ ‌नरेशः,‌ ‌नृपः,‌ ‌भूपः।‌ ‌
  4. ‌धनुः‌ ‌-‌ ‌त्रिणता,‌ ‌चापः,‌ ‌शरासनः,‌ ‌कोदण्डः।‌
  5. नदी -‌ ‌तटिनी,‌ ‌निम्नगा,‌ ‌आपगा,‌ ‌सरित्।‌

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9. विरुद्धार्थकशब्दं लिखत । स्तुतिः, सद्गुणाः, प्रसन्नाः, अशक्ताः, पुरतः, कृशाः ।

प्रश्न 1.
विरुद्धार्थकशब्दं लिखत । स्तुतिः, सद्गुणाः, प्रसन्नाः, अशक्ताः, पुरतः, कृशाः ।
उत्तरम्‌ ‌:

  1. ‌स्तुतिः‌ ‌×‌ ‌निन्दा
  2. ‌सद्गुणाः‌ ×‌ ‌दुर्गुणाः‌ ‌
  3. ‌प्रसन्नाः‌ ‌×‌ ‌खिन्नाः,‌ ‌दुःखिताः,‌ ‌विषण्णाः‌
  4. ‌अशक्ता:‌ ‌×‌ ‌सशक्ताः‌
  5. पुरतः × ‌पश्चात्,‌ ‌पृष्ठतः
  6. कृशाः‌ ‌×‌ ‌पीवराः‌

10. कः कं वदति ?

प्रश्न अ.
तिष्ठन्तु चारणाः ।
उत्तरम्‌ ‌:
पृथुवैन्यः‌ ‌चारणान्‌ ‌वदति।‌

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प्रश्न आ.
तत्प्राप्तुं यतस्व ।
उत्तरम्‌ ‌:
‌पुरोहितः‌ ‌पृथुवैन्यं‌ ‌वदति‌ ‌।‌

प्रश्न इ.
तव पिता दुःशासकः।
उत्तरम्‌ ‌:
(for‌ ‌all‌ ‌sentences)‌ ‌भूमिः‌ ‌पथुवैन्यं‌ ‌वदति।‌ ‌

प्रश्न ई.
अत: धनुः त्यज ।
उत्तरम्‌ ‌:
(for‌ ‌all‌ ‌sentences)‌ ‌भूमिः‌ ‌पथुवैन्यं‌ ‌वदति।‌ ‌

11. सन्धिविग्रहं कुरुत ।

प्रश्न अ.
उदर एव
उत्तरम्‌ ‌:
उदर‌ ‌एव‌ ‌-‌ ‌उदरे‌ ‌+‌ ‌एव।‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

प्रश्न आ.
पशुवज्जीवन्ति
उत्तरम्‌ ‌:
‌पशुवज्जीवन्ति‌ ‌-‌ ‌पशुवत्‌ ‌+‌ ‌जीवन्ति‌ ‌।‌

प्रश्न इ.
अशक्ताश्च
उत्तरम्‌ ‌:
‌अशक्ताश्च‌ ‌-‌ ‌अशक्ता‌ ‌:‌ ‌+‌ ‌च।‌

प्रश्न ई.
पुरोहितोऽवदत् ।
उत्तरम्‌ ‌:
पुरोहितोऽवदत्‌ ‌-‌ ‌पुरोहितः‌ ‌+‌ ‌अवदत्।‌‌

12. अमरकोषात् शब्दं प्रयुज्य वाक्यं पुनर्लिखत ।

प्रश्न अ.
भूमिः स्त्रीरूपं धृत्वा प्रकटिता ।
उत्तरम्‌ ‌:
‌गोत्रा‌ ‌/‌ ‌कु:‌ ‌।‌ ‌पृथिवी‌ ‌/‌ ‌पृथ्वी‌ ‌/‌ ‌क्ष्मा‌ ‌/‌ ‌अवनिः‌ ‌/‌ ‌मेदिनी‌ ‌/‌ ‌मही‌ ‌स्त्रीरूपं‌ ‌धृत्वा‌ ‌प्रकटिता।‌ ‌

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प्रश्न आ.
भूपालः पृथुवैन्य: नाम धरायाः प्रथम: अभिषिक्तः सम्राट् ।
उत्तरम्‌ ‌:
‌राट्‌ ‌/‌ ‌पार्थिवः‌ ‌/‌ ‌क्षमाभृत्‌ ‌/‌ ‌नृपः‌ ‌/‌ ‌भूपः‌ ‌/‌ ‌महीक्षित्‌ ‌पृथुवैन्य:‌ ‌नाम‌ ‌धरायाः‌ ‌प्रथमः‌ ‌अभिषिक्तः‌ ‌सम्राट्।‌‌

Sanskrit Amod Class 10 Textbook Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः Additional Important Questions and Answers

अवबोधनम्‌ :

(क) उचितं‌ ‌कारणं‌ ‌चित्वा‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनर्लिखत।‌ ‌

प्रश्न 1.
स्तुतिगायकाः‌ ‌प्रसन्नाः‌ ‌अभवन्‌ ‌यतः‌ ‌
(अ)‌ ‌पाठकाः‌ ‌राज्ञः‌ ‌प्रशंसाम्‌ ‌अकुर्वन्‌ ‌।‌‌
(ब)‌ ‌स्तुतिपाठकाः‌ ‌राज्ञः‌ ‌निःस्पृहताम्‌ ‌अजानन्।‌
‌उत्तरम्‌ ‌
(ब)‌ ‌स्तुतिपाठका:‌ ‌राज्ञः‌ ‌नि:स्पृहताम्‌ ‌अजानन्।‌

प्रश्न 2.‌
‌प्रजाः‌ ‌अतीव‌ ‌कृशाः‌ ‌अशक्ता:‌ ‌च‌ ‌यतः‌‌
(अ)‌ ‌ताः‌ ‌पशुवज्जीवन्ति‌ ‌निकृष्टानं‌ ‌खादन्ति‌ ‌च।‌‌
(ब)‌ ‌ता:‌ ‌मिष्टान्नं‌ ‌खादन्ति।‌
‌उत्तरम्‌
‌(अ)‌ ‌ता:‌ ‌पशुवज्जीवन्ति‌ ‌निकष्टानं‌ ‌खादन्ति‌ ‌च।‌ ‌

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प्रश्न 3.
पृथुवैन्यः‌ ‌स्वप्रजाः‌ ‌दृष्ट्वा‌ ‌चिन्ताकुल:‌ ‌जात:‌ ‌यतः‌‌
(अ)‌ ‌तस्य‌ ‌प्रजाजनाः‌ ‌परस्परं‌ ‌वादविवादं‌ ‌कुर्वन्ति।‌‌
(ब)‌ ‌तस्य‌ ‌प्रजाजना:‌ ‌पशुवत्‌ ‌जीवन्ति।‌ ‌
उत्तरम्‌
‌(ब)‌ ‌तस्य‌ ‌प्रजाजनाः‌ ‌पशुवत्‌ ‌जीवन्ति‌ ‌।‌‌

(ख)‌ ‌उचितं‌ ‌पर्यायं‌ ‌चित्वा‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनर्लिखत।‌ ‌

1. ‌प्रजा:‌ ‌अतीव‌ ‌……………. आसन्।‌ ‌(कृशाः‌ ‌/‌ ‌सुदृवाः)‌ ‌
2.‌ ‌सर्व‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌………….‌ ‌उदरे‌ ‌एव‌ ‌वर्तते।‌ ‌(धरायाः‌ ‌/‌ ‌सूर्यस्य‌)
‌उत्तरम्‌ :
‌1.‌ कशाः‌
‌2.‌ ‌धराया:‌

(ग)‌ ‌कः‌ ‌कं‌ ‌वदति‌ ‌।‌

‌प्रश्न 1.
स्तवनं‌ ‌तु‌ ‌ईश्वरस्यैव‌ ‌भवेत्।‌
उत्तरम्‌ :
पृथुवैन्यः‌ ‌चारणा‌‌ बदति।‌

‌(घ)‌ ‌पूर्णवाक्येन‌ ‌उत्तरत।‌

प्रश्न 1.
‌कः‌ ‌धरायां‌ ‌प्रथम:‌ ‌अभिषिक्तः‌ ‌सम्राट्?‌
‌उत्तरम्‌
‌भूपालः‌ ‌पृथुवैन्य:‌ ‌धरायां‌ ‌प्रथम:‌ ‌अभिषिक्तः‌ ‌सम्राट्।‌‌

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प्रश्न 2.‌
‌पृथुनृपस्य‌ ‌राजधानी‌ ‌कुत्र‌ ‌आसीत्?‌ ‌
उत्तरम्‌ :
पृथुनृपस्य‌ ‌राजधानी‌ ‌प्रयागक्षेत्रे‌ ‌आसीत्।‌

प्रश्न 3.
के‌ ‌पृथुनृपस्य‌ ‌स्तुति‌ ‌गातुमुत्सुकाः?‌ ‌
उत्तरम्‌ ‌:
चारणाः‌ ‌पृथुनृपस्य‌ ‌स्तुतिं‌ ‌गातुमुत्सुकाः।‌

प्रश्न 4. ‌
‌स्तुतिगायकाः‌ ‌किं‌ ‌ज्ञात्वा‌ ‌प्रसन्नाः‌ ‌अभवन्?‌ ‌/‌ ‌स्तुतिगायका:‌‌ किमर्थ‌ ‌प्रसन्नाः‌ ‌अभवन्?‌ ‌
उत्तरम्‌ ‌
स्तुतिगायका:‌ ‌पृथुनृपस्य‌ ‌नि:स्पृहतां‌ ‌ज्ञात्वा‌ ‌प्रसन्नाः‌ ‌अभवन्।‌

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प्रश्न 5.
पृथुः‌ ‌चारणान्‌ ‌किम्‌ ‌आज्ञापयत्?‌
‌उत्तरम्‌ ‌
पृथुः‌ ‌चारणान्‌ ‌स्थातुम्‌ ‌आज्ञापयत्‌ ‌अकथयत्‌ ‌च‌ ‌यावत्‌ ‌पृथो:‌‌ सद्गुणा:‌ ‌न‌ ‌प्रकटीभवन्ति‌ ‌तावत्‌ ‌सः‌ ‌न‌ ‌स्तोतव्यः‌ ।‌ ‌
स्तवनं‌‌ तु‌ ‌ईश्वरस्य‌ ‌एव‌ ‌भवेत्।‌ ‌

प्रश्न 6.
‌राजा‌ ‌किमर्थ‌ ‌चिन्ताकुलः‌ ‌जातः?‌ ‌
उत्तरम्‌ :
‌प्रजावा:‌ ‌दैन्यावस्थां‌ ‌दृष्ट्वा‌ ‌राजा‌ ‌चिन्ताकुलः‌ ‌जातः‌ ‌।‌

प्रश्न 7.
‌चिन्ताकुलं‌ ‌राजानं‌ ‌पुरोहितः‌ ‌किम्‌ ‌अवदत्‌ ‌?‌
‌उत्तरम्‌
‌चिन्ताकुलं‌ ‌राजानं‌ ‌पुरोहितः‌ ‌अवदत,‌ ‌”हे‌ ‌राजन्,‌ ‌धनधान्यादि‌‌ सर्व‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌वस्तुत:‌ ‌वसुन्धराया:‌ ‌उदरे‌ ‌एवं‌ ‌वर्तते‌ ‌।‌ ‌तत्प्राप्तुं‌‌

प्रश्न 8.
‌‌एषः‌ ‌गद्यांश:‌ ‌कस्मात्‌ ‌पाठात्‌ ‌उद्धृतः?‌
उत्तरम्‌
‌एषः‌ ‌गद्यांश:‌ ‌आद्यकृषक:‌ ‌पृथुवैन्यः‌ ‌पाठात्‌ ‌उद्धृतः।‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

‌(च)‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनर्लिखित्वा‌ ‌सत्यम्‌ ‌/‌ ‌असत्यम्‌ ‌इति‌ ‌लिखत।‌‌

प्रश्न 1.

  1. पृथुवैन्यः‌ ‌नाम‌ ‌धरायाम्‌ ‌आदिम:‌ ‌सम्राट्।‌ ‌
  2. ‌स्तवनं‌ ‌तु‌ ‌मानवस्यैव‌ ‌भवेत्।‌ ‌
  3. स्तुतिगायकाः‌ ‌पृथुनृपस्य‌ ‌नि:स्पृहतां‌ ‌ज्ञात्वा‌ ‌विषण्णा:‌ ‌अभवन्।‌‌
  4. पृथुराजेन‌ ‌दृष्टं‌ ‌यत्‌ ‌प्रजाः‌ ‌अतीव‌ ‌सशक्ताः‌ ‌।‌‌
  5. प्रजा:‌ ‌पशुवत्‌ ‌जीवन्ति।‌
  6. धनधान्यादि‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌वसुन्धराया:‌ ‌जठरे‌ ‌एव‌ ‌वर्तते।‌ ‌

उत्तरम्‌ ‌:

  1. सत्यम्।‌ ‌
  2. ‌असत्यम्।‌
  3. ‌असत्यम्।‌
  4. ‌असत्यम्।‌‌
  5. ‌सत्यम्।‌ ‌
  6. ‌सत्यम्।‌‌

शब्दज्ञानम्‌ ‌

(क)‌ ‌सन्धिविग्रहः।‌

  1. ‌गातुमुत्सुकाः‌ ‌-‌ ‌गातुम्‌ ‌+‌ ‌उत्सुकाः‌ ‌।‌
  2. ‌तावदहम्‌ ‌-‌ ‌तावत्‌ ‌+‌ ‌अहम्।‌
  3. ‌ईश्वरस्यैव‌ ‌.‌ ‌ईश्वरस्य‌ ‌+‌ ‌एव‌ ‌।‌
  4. ‌तत्प्राप्तुम्‌ ‌-‌ ‌तत्‌ ‌+‌ ‌प्राप्तुम्।‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

‌(ख)‌ ‌विशेषण‌ ‌-‌ ‌विशेष्य‌ ‌-‌ ‌सम्बन्धः।‌‌

विशेषणम्‌विशेष्यम्‌
1.‌ प्रथमः‌‌सम्राट‌
2. ‌अभिषिक्तः‌समाट्‌
3. प्रसन्नाः‌‌स्तुतिगायकाः‌‌
4. प्रजाः‌‌कृशाः‌
5. प्रजाः‌‌अशक्ताः‌‌
6. राजा‌‌चिन्ताकुल:‌

‌(ग)‌ ‌चान्त-ल्यबन्त-तुमन्त-अव्ययानि।‌

‌त्वान्त‌ ‌अव्यय‌‌ धातु‌ ‌+‌ ‌त्वा / ध्या / टवा / ‌ढवा ‌/ इत्वा / अयित्वातुमन्त‌ ‌अव्यय‌ ‌‌ ‌धातु‌ ‌+‌ ‌तुम् / धुम् / टुम् / ढुम् / ‌ ‌ ‌इतुम् / अयितुम्‌‌
दृष्ट्वा,‌ ‌ज्ञात्वागातुम,‌ ‌प्राप्तुम्‌

विभक्त्यन्तरूपाणि।‌

  • ‌प्रथमा‌ ‌-‌ ‌भूपालः,‌ ‌सम्राट्,‌ ‌राजधानी,‌ ‌चारणाः,‌ ‌अहम्,‌‌ ‌गायकाः,‌ ‌प्रजाः,‌ ‌ताः,‌ ‌राजा,‌ ‌पुरोहितः।‌
  • ‌द्वितीया‌ ‌-‌ ‌अन्नम्,‌ ‌सर्वम्।‌ ‌
  • तृतीया‌ ‌-‌ ‌तेन।‌ ‌
  • षष्ठी‌ ‌-‌ ‌नृपस्य,‌ ‌मम,‌ ‌ईश्वरस्य,‌ ‌वसुन्धरायाः।‌ ‌
  • सप्तमी‌ ‌-‌ ‌धरायाम,‌ ‌क्षेत्रे,‌ ‌राज्याभिषेकसमये,‌ ‌स्वराज्ये।‌
  • ‌सम्बोधन‌ ‌-‌ ‌हे‌ ‌राजन्।‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

(च) लकारं‌ ‌लिखत।‌

प्रश्न 1.

  1. पृथुराजः‌ ‌स्वराज्ये‌ ‌भ्रमणम्‌ ‌अकरोत्।‌ ‌
  2. ‌ता:‌ ‌मजा:‌ ‌पशुवत्‌ ‌जीवन्ति‌ ‌।‌
  3. तत्‌ ‌प्राप्तुं‌ ‌यतस्व।‌
  4. ‌तिष्ठन्तु‌ ‌चारणाः।‌ ‌

उत्तरम्‌ ‌:

  1. ‌लङ्लकारः‌
  2. ‌लट्लकारः‌
  3. लोट्लकार:‌‌
  4. लोट्लकारः

पृथक्करणम्‌ ‌:

प्रश्न 1.

  1. ‌भ्रमणसमये‌ ‌तेन‌ ‌दृष्टं‌ ‌यत्‌ ‌प्रजा:‌ ‌अतीव‌ ‌कृशाः‌ ‌अशक्ता:‌ ‌च।‌
  2. ‌पुरोहितेन‌ ‌उपायः‌ ‌कथितः।‌ ‌
  3. ‌तत्‌ ‌दृष्ट्वा‌ ‌राजा‌ ‌चिन्ताकुलः‌ ‌जातः।‌
  4. ‌एकदा‌ ‌पृथुराज:‌ ‌स्वराज्ये‌ ‌भ्रमणम्‌ ‌अकरोत्।‌ ‌

उत्तरम्‌ ‌:

  1. ‌एकदा‌ ‌पृथुराजः‌ ‌स्वराज्ये‌ ‌भ्रमणम्‌ ‌अकरोत्।‌‌
  2. ‌भ्रमणसमये‌ ‌तेन‌ ‌दृष्टं‌ ‌यत्‌ ‌प्रजा:‌ ‌अतीव‌ ‌कृशा:‌ ‌अशक्ता:‌ ‌च।‌‌
  3. ‌तत्‌ ‌दृष्ट्वा‌ ‌राजा‌ ‌चिन्ताकुलः‌ ‌जातः‌ ‌।‌
  4. ‌पुरोहितेन‌ ‌उपाय:‌ ‌कथितः।‌‌

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भाषाभ्यासः

(क)‌ ‌समानार्थकशब्दाः‌‌ :

  1. ‌सम्राट्‌ ‌.‌ ‌अधिराजः,‌ ‌राजेन्द्रः,‌ ‌सार्वभौमः।‌‌
  2. चारणा:‌ ‌-‌ ‌स्तुतिपाठकाः।‌
  3. ‌स्तुतिः‌ ‌-‌ ‌स्तवनम्,‌ ‌प्रशंसा।‌
  4. ‌ईश्वरः‌ ‌-‌ ‌देवः,‌ ‌भगवान्,‌ ‌सुरः।‌ ‌
  5. प्रसन्नाः‌ ‌-‌ ‌सन्तुष्टाः,‌ ‌आनन्दिताः।‌‌
  6. भ्रमणम्‌ ‌-‌ ‌अटनम्।‌ ‌
  7. ‌कृश:‌ ‌-‌ ‌क्षीणः।‌ ‌
  8. ‌अशक्तः‌ ‌-‌ ‌दुर्बलः।‌
  9. ‌दृष्ट्वा‌ ‌-‌ ‌अवलोक्य,‌ ‌विलोक्य,‌ ‌वीक्ष्य।‌
  10. ‌चिन्ताकुलः‌ ‌-‌ ‌चिन्ताग्रस्त:,‌ ‌चिन्तितः,‌ ‌चिन्ताक्रान्तः।‌

(ख)‌ ‌विरुद्धार्थकशब्दाः‌

‌उत्सुकाः‌ ×‌ ‌अनुत्सुकाः।‌

अवबोधनम्।‌‌

(क)‌ ‌उचितं‌ ‌कारणं‌ ‌चित्वा‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनर्लिखत।‌ ‌

प्रश्न 1.
‌भूम्या‌ ‌धनधान्यपुष्यफलानि‌ ‌स्व-उदरे‌ ‌निहितानि‌ ‌यतः‌‌
(अ)‌ ‌वेनभूपः‌ ‌दुःशासकः‌ ‌आसीत्।‌‌
(ब)‌ ‌भूमि:‌ ‌स्वभावेन‌ ‌कृपणा‌ ‌आसीत्।‌
‌उत्तरम्‌
‌(अ)‌ ‌वेनभूप:‌ ‌दुःशासकः‌ ‌आसीत्।‌ ‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

प्रश्न 2.
पृथुभूपेन‌ ‌स्वधनुः‌ ‌सज्जीकृतं‌ ‌यतः‌‌
(अ)‌ ‌सः‌ ‌शनुं‌ ‌हन्तुम्‌ ‌इच्छति‌ ‌स्म।‌
(ब)‌ ‌सः‌ ‌धनधान्यादि‌ ‌सर्व‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌वसुन्धरायाः‌ ‌प्राप्तुम्‌‌ इच्छति‌ ‌स्म।‌ ‌
उत्तरम्‌
‌(ब)‌ ‌सः‌ ‌धनधान्यादि‌ ‌सर्व‌ ‌वस्तुजातं‌ ‌वसुन्धरायाः‌ ‌प्राप्तुम्‌‌ इच्छति‌ ‌स्म।‌

‌(ख)‌ ‌उचितं‌ ‌पर्यायं‌ ‌चित्वा‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनर्लिखत।‌

प्रश्न 1.
1. ‌पथभूपेन‌ ‌…………… ‌सज्जीकृतम्‌ ‌।‌ ‌(धनुः‌ ‌/‌ ‌कुद्दालकम्)‌
‌2.‌ ‌दुःशासक:‌ ‌नृपः‌ ‌………… ‌।‌ ‌(वेनराजः‌ ‌/‌ ‌पृथुवैन्य:)‌
‌उत्तरम्‌
1. ‌धनुः‌ ‌
2.‌ ‌वेनराज:‌

(घ)‌ ‌पूर्णवाक्येन‌ ‌उत्तरत।‌ ‌

प्रश्न 1.‌
केन‌ ‌धनुः‌ ‌सज्जीकृतम्‌ ‌?‌
‌उत्तरम्‌
‌पृथभूपेन‌ ‌धनुः‌ ‌सज्जीकृतम्।‌

प्रश्न 2.‌ ‌
कया‌ ‌धनधान्यपुष्पफलानि‌ ‌उदरे‌ ‌निहितानि?‌
‌उत्तरम्‌
‌भूम्या‌ ‌धनधान्यपुष्पफलानि‌ ‌उदरे‌ ‌निहितानि।‌

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प्रश्न 3.
‌कः‌ ‌दुःशासकः?‌ ‌
उत्तरम्‌
‌पृथुराजस्य‌ ‌पिता‌ ‌बेनराज‌ ‌:‌ ‌दुःशासकः‌ ‌।‌ ‌

प्रश्न 4.
भूमिः‌ ‌राजानं‌ ‌कृषिकार्यस्य‌ ‌कानि‌ ‌साधनानि‌ ‌उक्तवती?‌
‌उत्तरम्‌
‌भूमिः‌ ‌राजानं‌ ‌खनित्राणि,‌ ‌हलाः,‌ ‌कुहालकानि,‌ ‌लवित्राणि‌ ‌च‌‌ एतानि‌ ‌साधनानि‌ ‌उक्तवती।‌

‌(च)‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनलिखित्वा‌ ‌सत्यम्‌ ‌असत्यम्‌ ‌इति‌ ‌लिखत।‌

प्रश्न 1.

  1. ‌भूमिः‌ ‌नररूपम्‌ ‌अधारयत्।‌ ‌
  2. ‌वेनराजः‌ ‌दुःशासकः‌ ‌आसीत्।‌ ‌
  3. ‌वेनराजः‌ ‌राजधर्मस्य‌ ‌उल्लङ्घनम्‌ ‌अकरोत्।‌ ‌
  4. ‌पृथुः‌ ‌प्रजाहितदक्षः‌ ‌नृपः‌ ‌।‌

‌उत्तरम्‌

  1. ‌असत्यम्।‌
  2. ‌सत्यम्।‌
  3. ‌सत्यम्।‌
  4. ‌सत्यम्।‌‌

शब्दज्ञानम्‌ ‌:

(क)‌ ‌सन्धिविग्रहः‌‌

नाकरोत्‌ ‌-‌ ‌न‌ ‌+‌ ‌अकरोत्।‌ ‌

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(ख)‌ ‌विशेषण‌ ‌-‌ ‌विशेष्य‌ ‌-‌ ‌सम्बन्धः।‌‌

विशेषणम्‌विशेष्यम्‌
1. दुःशासकः‌वेनराज:‌
2. प्रजाहितदक्षः‌‌नृपः,‌ ‌पृथुः‌
3. प्रसन्ना‌‌भूमिः‌

‌(ग)‌ ‌त्वान्त-ल्यबन्त-तुमन्त-अव्ययानि।‌‌

त्वान्त‌ ‌अव्यय‌ ‌धातु‌ ‌+‌ ‌त्वा/ध्या/ट्वा/वा/इत्वा/अयित्वा
धृत्वा,‌ ‌गृहीत्वा‌

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(घ)‌ ‌विभक्त्यन्तरूपाणि।‌‌

  • प्रथमा‌ ‌-‌ ‌भूमिः,‌ ‌पिता,‌ ‌नृपः,‌ ‌अहम्।‌
  • द्वितीया‌ ‌-‌ ‌धनुः,‌ ‌फलानि,‌ ‌खनित्राणि,‌ ‌हलान्,‌ ‌कुद्दालकानि,‌‌
  • लवित्राणि।‌ ‌तृतीया‌ ‌-‌ ‌भूपेन,‌ ‌मया,‌ ‌प्रयत्नेन,‌ ‌प्रजाजनैः।‌ ‌
  • पशमी‌ ‌-‌ ‌भयात्।‌
  • ‌षष्ठी‌ ‌-‌ ‌तस्य,‌ ‌राजधर्मस्य।‌
  • ‌सप्तमी‌ ‌-‌ ‌हस्ते।‌

(च) ‌लकारं‌ ‌लिखत।‌‌

  1. भूमि:‌ ‌तस्य‌ ‌पुरत:‌ ‌प्रकटिता‌ ‌अभवत्।‌ ‌
  2. ‌यदि‌ ‌त्वं‌ ‌प्रयत्नेन‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌करोथि।‌ ‌
  3. ‌तर्हि‌ ‌अहं‌ ‌प्रसन्ना‌ ‌भविष्यामि‌ ‌।‌‌
  4. प्रजाजनैः‌ ‌सह‌ ‌कृषिकार्यं‌ ‌कुरु।‌ ‌

‌उत्तरम्‌ :

  1. ‌लङ्लकार:‌
  2. ‌लट्लकार:‌ ‌
  3. ‌लृट्लकार:‌‌
  4. ‌लोट्लकार:‌‌

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‌क्रमेण‌ ‌योजयत।

प्रश्न 1.

  1. ‌पुरोहितस्य‌ ‌उपदेशकथनम्।‌ ‌
  2. ‌पृथुभूपस्य‌ ‌धनुः‌ ‌सज्जीकरणम्।‌‌
  3. भूमेः‌ ‌कृषिकार्यस्य‌ ‌उपदेशनम्।‌‌
  4. भूमेः‌ ‌स्वीरूपं‌ ‌धृत्वा‌ ‌प्रकटनम्।‌

उत्तरम्‌ :

  1. पुरोहितस्य‌ ‌उपदेशकथनम्।‌‌
  2. ‌पृथुभूपस्य‌ ‌धनुः‌ ‌सज्जीकरणम्।‌
  3. ‌भूमेः‌ ‌स्त्रीरूपं‌ ‌धृत्वा‌ ‌प्रकटनम्।‌ ‌
  4. ‌भूमेः‌ ‌कृषिकार्यस्य‌ ‌उपदेशनम्।‌‌

भाषाभ्यास:

‌(क)‌ ‌समानार्थकशब्दाः‌ ‌

  1. मेदिनी,‌ ‌क्षमा,‌ ‌गोत्रा,‌ ‌कुः।‌ ‌स्त्री‌ ‌-‌ ‌नारी,‌ ‌वनिता,‌ ‌महिला,‌ ‌योषित्।‌‌
  2. पिता‌ ‌-‌ ‌जनकः,‌ ‌तातः,‌ ‌जन्मदाता।‌ ‌
  3. ‌चोरः‌ ‌-‌ ‌चौरः,‌ ‌स्तेन:,‌ ‌तस्करः,‌ ‌पाटच्चर:,‌ ‌लुण्ठकः।‌
  4. ‌धनम्‌ ‌-‌ ‌वित्तम्,‌ ‌द्रव्यम्,‌ ‌सम्पत्तिः।‌‌
  5. धान्यम्‌ ‌-‌ ‌सस्यम्।‌‌
  6. पुष्पम्‌ ‌-‌ ‌शिरीषम्,‌ ‌सुमनम्,‌ ‌सुमम्,‌ ‌कुसुमम्।‌ ‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

‌(ग)‌ ‌त्वं’‌ ‌इति‌ ‌स्थाने‌ ‌’भवान्’‌ ‌योजयत‌ ‌।‌ ‌

प्रश्न 1.
‌त्वं‌ ‌तु‌ ‌प्रजाहितदक्ष:‌ ‌नृपः‌ ‌असि।
‌उत्तरम्‌ :
भवान् तु ‌प्रजाहितदक्ष: नृपः‌ अस्थि

प्रश्न 2.
‌त्वं‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌कुरु।‌
‌उत्तरम्‌ ‌:
भवान्‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌करोतु।‌ ‌

(घ)‌ ‌लृट्‌ ‌स्थाने‌ ‌लिङ्‌ ‌प्रयोगं‌ ‌कुरुत।‌

प्रश्न 1.
‌अहं‌ ‌प्रसन्ना‌ ‌भविष्यामि।‌ ‌
उत्तरम्‌
‌अहं‌ ‌प्रसन्ना‌ ‌भवेयम्।‌‌

‌अवबोधनम्‌ :

(क)‌ ‌उचितं‌ ‌कारणं‌ ‌चित्वा‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनर्लिखत‌ ‌।‌‌
पृथुभूपस्य‌ ‌प्रजाजना:‌ ‌सन्तुष्टाः‌ ‌अभवन्‌ ‌यतः‌ …………..
‌(अ)‌ ‌ते‌ ‌प्रभूतं‌ ‌धान्यम्‌ ‌अलभन्त।‌‌
(ब)‌ ‌ते‌ ‌प्रभूतं‌ ‌सुवर्णम्‌ ‌अलभन्त।‌
‌उत्तरम्‌ :
‌(अ)‌ ‌ते‌ ‌प्रभूतं‌ ‌धान्यम्‌ ‌अलभन्त।‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

‌(ख)‌ ‌उचितं‌ ‌पर्यायं‌ ‌चित्वा‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनर्लिखत‌ ‌।‌

प्रश्न 1.
1. ………….‌ ‌बीजेभ्यः‌ ‌अङ्कुराः‌ ‌उद्भूताः।‌‌ (पर्जन्यानन्तरं‌ ‌/‌ ‌शीतकालानन्तरं)‌ ‌
2. ……………‌ ‌प्रजाजनाः‌ ‌सन्तुष्टा‌ ‌:‌ ‌अभवन्।‌‌ (धनलाभेन‌ ‌/‌ ‌धान्यलाभेन)‌ ‌
उत्तरम्‌ ‌
1. ‌पर्जन्यानन्तरं‌ ‌
2.‌ ‌धान्यलाभेन‌

‌(ग)‌ ‌वाक्यं‌ ‌पुनलिखित्वा‌ ‌सत्यम्‌ ‌/‌ ‌असत्यम्‌ ‌इति‌ ‌लिखत।‌‌

प्रश्न 1.

  1. पृथुवैन्यः‌ ‌भूमिम्‌ ‌अनुर्वराम्‌ ‌अकरोत्।‌ ‌
  2. ‌पृथुवैन्यः‌ ‌उद्यमेन‌ ‌बीजाना‌ ‌सङ्कलनम्‌ ‌अकरोत्।‌‌
  3. ‌पर्जन्यानन्तरम्‌ ‌अकुरेभ्य:‌ ‌बीजानि‌ ‌उद्भूतानि।‌
  4. ‌प्रजाजनाः‌ ‌विषण्णाः‌ ‌अभवन्।‌

उत्तरम्‌ :‌

  1. ‌असत्यम्।‌ ‌
  2. ‌सत्यम्।‌ ‌
  3. ‌असत्यम्।‌
  4. असत्यम्।‌

‌(घ)‌ ‌पूर्णवाक्येन‌ उत्तरत।‌

प्रश्न 1.
‌जना:‌ ‌कुत्र‌ ‌धान्यबीजानि‌ ‌अवपन्?‌ ‌
उत्तरम्‌ ‌:
‌जना:‌ ‌क्षेत्रे‌ ‌धान्यबीजानि‌ ‌अवपन्।‌ ‌

प्रश्न 2.
कदा‌ ‌बीजेभ्य:‌ ‌अकुराः‌ ‌उद्भूताः?‌ ‌
उत्तरम्‌
‌पर्जन्यानन्तरं‌ ‌बीजेभ्यः‌ ‌अङ्कुरा:‌ ‌उद्भूताः।‌ ‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

प्रश्न 3.
पृथुवैन्यः‌ ‌कृषिकार्यार्थ‌ ‌जलस्य‌ ‌व्यवस्थापन‌ ‌कथम्‌ ‌अकरोत्?‌
‌उत्तरम्‌
‌पृथुवैन्यः‌ ‌वृष्टिजलसायं‌ ‌कृत्वा‌ ‌जलव्यवस्थापनम्‌ ‌अकरोत्।‌ ‌

प्रश्न 4.
प्रजाजना:‌ ‌केन/कथं‌ ‌सन्तुष्टाः‌ ‌अभवन्‌ ‌?‌ ‌
उत्तरम्‌ ‌
धान्यलाभेन‌ ‌प्रजाजनाः‌ ‌सन्तुष्टाः‌ ‌अभवन्।‌‌

शब्दज्ञानम्‌ ‌-‌

‌(क)‌ ‌सन्धिविग्रहः‌‌

स‌ ‌नैकेभ्यः‌ ‌-‌ ‌स:‌ ‌+‌ ‌नैकेभ्यः।‌‌

(ख)‌ ‌विशेषण‌ ‌-‌ ‌विशेष्य‌ ‌-‌ ‌सम्बन्धः‌ ‌।‌‌

विशेषणम्‌विशेष्याम
1. उर्वरतमाम्/उर्वरा‌भूमिम्‌‌/भूमि
2. ‌नैकेभ्यः‌‌वृक्षाभ्यां
3. विविधप्रकारकाणाम्‌बीजानाम्‌‌
4. ‌सन्तुष्टा:/आनन्दिताः‌‌प्रजाजना:
5. कल्याणकारी‌नृपः‌
6. ‌अग्रणी:‌‌नृपः‌
7. जनसेवाव्रतीनृपः‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

(ग)‌‌ त्वान्त-ल्यबन्त-तुमन्त-अव्ययानि।‌‌

त्वान्त‌ ‌अव्यय‌ धातु‌ ‌+‌ ‌त्वा / ध्या / टवा / ढवा / इत्वा अयित्वा‌‌‌ल्यबन्त‌ ‌अव्यय‌ ‌‌ ‌उपसर्ग‌ ‌+‌ ‌धातु +‌ ‌य / त्य‌ ‌तुमन्त‌ ‌अव्यय‌ ‌धातु‌ ‌+‌ ‌तुम् / धुम्‌ ‌टुम् / दुम्‌ ‌इतुम् /‌‌ अयितुम्‌
कृत्वा‌‌निधाय,‌ ‌अवरुध्य‌‌कर्तुम्‌‌

(घ) विभक्त्यन्तरूपाणि।‌ ‌

  1. ‌तृतीया‌ ‌-‌ ‌परिश्रमेण,‌ ‌धान्यलाभेन।‌
  2. ‌पञ्चमी‌ ‌-‌ ‌बीजेभ्य:‌ ‌वृक्षेभ्यः।‌
  3. षष्ठी‌ ‌-‌ ‌भूमातुः,‌ ‌नदीनाम,‌ ‌जलस्य,‌ ‌बीजानाम्।‌
  4. ‌सप्तमी‌ ‌-‌ ‌मनसि,‌ ‌तस्मिन,‌ ‌क्षेत्रे,‌ ‌प्रशासने,‌ ‌पृथिव्याम्।‌

‌(च)‌ ‌लकारं‌ ‌लिखत।‌‌

प्रश्न 1.
1. जना:‌ ‌धान्यबीजानि‌ ‌अवपन्।‌
‌2.‌ ‌पृथुवैन्यः‌ ‌भूमिम्‌ ‌उर्वरतमां‌ ‌कर्तुं‌ ‌प्रायतत।‌ ‌
उत्तरम्‌ ‌:
1. ‌ लङ्लकार:‌
‌2.‌ ‌लङ्लकार:‌ ‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

भाषाभ्यास:‌‌

(क)‌ ‌समानार्थकशब्दाः‌

  1. मनसि‌ ‌-‌‌ अन्त:करणे,‌ ‌चेतसि,‌ ‌चित्ते,मानसे।‌‌
  2. निधाय‌ ‌-‌ ‌हित्वा।‌‌
  3. ‌मार्गः‌ ‌-‌ ‌पन्थाः,‌ ‌सरणिः‌ ‌।‌‌
  4. जलम्‌ -‌ ‌तोयम्,‌ ‌नीरम्,‌ ‌अम्बु,‌ ‌उदकम्,‌ ‌वारि।‌
  5. ‌सञ्चयम्‌ ‌-‌ ‌सङ्कलनम्।‌ ‌बीजानि‌ ‌-‌ ‌सस्यानि।‌‌
  6. ‌कल्याणकारी‌ ‌-‌ ‌हितकारी।‌

‌(ख)‌ ‌विरुद्धार्थकशब्दाः‌

  1. उपयोग:‌ ×‌ ‌निरुपयोगः‌ ‌।‌ ‌
  2. ‌उर्वरा‌ ×‌ ‌अनुर्वरा/वन्ध्या‌ ‌।‌
  3. ‌लाभ:‌ ×‌ ‌हानिः‌ ‌।‌‌

लेखनकौशलम्‌ ‌

उपपद‌ ‌-‌ ‌विभक्तिः‌ ‌-‌ ‌अव्ययानां‌ ‌धातूनां‌ ‌च‌ ‌उपयोगः‌‌

क्र.‌ धातुः /‌ ‌अव्ययम्‌
1. पुरतः‌ ‌-‌ ‌in‌ ‌front‌ ‌of
2. ‌सह -‌ ‌with‌‌

विभक्तिः‌ ‌उदाहरणम्‌‌

षष्ठी – भूमिः‌ ‌स्त्रीरूपं‌ ‌धृत्वा‌ ‌तस्य‌ ‌पुरत:‌ ‌प्रकटिता‌ ‌अभवत्।‌
‌तृतीया‌ – ‌प्रजाजनैः‌ ‌सह‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌कुरु।‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

समासा:‌‌

समस्तपदम्‌‌अर्थ:‌‌समासविग्रहः‌समासनाम‌‌
प्रयागक्षेत्रम्‌‌place‌ ‌named‌ ‌प्रयाग‌‌प्रयागं‌ ‌नाम‌ ‌/‌ ‌इति‌ ‌क्षेत्रम्।‌‌कर्मधारय‌ ‌समास‌
‌विविधबीजानि‌various‌ ‌seeds‌‌विविधानि‌ ‌बीजानि।‌‌कर्मधारय‌ ‌समास‌
धनधान्यपुष्पफलानि‌wealth,‌ ‌grains,‌ ‌flowers‌ ‌and‌ ‌fruits‌‌धनानि‌ ‌च‌ ‌धान्यानि‌ ‌च‌ ‌पुष्पाणि‌ ‌च‌ ‌फलानि‌ ‌च।‌‌इतरेतर‌ ‌द्वन्द्व‌ ‌समास‌
चिन्ताकुल:‌‌perturbed‌ ‌with‌ ‌worry‌‌चिन्तया‌ ‌आकुलः।‌‌तृतीया‌ ‌तत्पुरुष‌ ‌समास‌
चोरलुण्ठकभयम्‌‌‌fear‌ ‌from‌ ‌thieves‌ ‌and‌ ‌robbers‌‌चोरलुण्ठकाभ्यां/चोरलुण्ठकेभ्यः‌ ‌भयम्।‌‌पञ्चमी‌ ‌तत्पुरुष‌ ‌समास‌‌
जलव्यवस्थापनम्‌management‌ ‌of‌ ‌water‌‌जलस्य‌ ‌व्यवस्थापनम्।‌षष्ठी‌ ‌तत्पुरुष‌ ‌समास‌
प्रजाहितदक्षः‌‌alert‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌subjects’‌ ‌welfare‌‌प्रजाहिते‌ ‌दक्षः।‌‌सप्तमी‌ ‌तत्पुरुष‌ ‌समास‌
‌कल्याणकारी‌‌‌does‌ ‌welfare‌‌‌कल्याणं‌ ‌करोति‌ ‌इति।‌‌‌उपपद‌ ‌तत्पुरुष‌ ‌समास‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

आधकृषकः पृयुवैयः Summary in Marathi ‌and English

‌प्रस्तावना :

  1. ‌भारत‌ ‌हा‌ ‌कृषिप्रधान‌ ‌देश‌ ‌आहे.‌ ‌देशाच्या‌ ‌समग्र‌ ‌सामाजिक‌‌ व‌ ‌आर्थिक‌ ‌उभारणीमध्ये‌ ‌कृषी‌ ‌(शेती)‌ ‌महत्त्वाची‌ ‌भूमिका‌ ‌बजावते.‌
  2. ‌वेन‌ ‌राजाचा‌ ‌पुत्र,‌ ‌पृथुवैन्य/पृथु‌ ‌राजाने‌ ‌शेतीविषयक‌ ‌कार्याचे‌ ‌संशोधन‌ ‌केले;‌ ‌त्याचा‌ ‌प्रारंभ‌ ‌करून‌ ‌विकास‌ ‌केला.‌‌
  3. ‌पृथु‌ ‌राजाच्या‌ ‌कार्यस्मरणार्थ‌ ‌वसुंधरेस‌ ‌पृथ्वी‌ ‌असे‌ ‌संबोधले‌ ‌जाते.‌
  4. ‌प्रस्तुत‌ ‌भाग,‌ ‌म्हणजे‌ ‌पृथु‌ ‌राजाने‌ ‌केलेल्या‌ ‌कृषिविषयक‌ ‌कार्याचा‌ ‌प्रारंभ‌ ‌तसेच‌ ‌कृषी‌ ‌संस्कृती‌ ‌याचे‌ ‌विवरण‌ ‌करणारी‌ ‌आख्यायिका‌ ‌आहे.‌‌

Introduction‌‌ ‌:

  1. ‌India‌‌ ‌is‌ ‌an‌ ‌agriculture-based‌ ‌country.‌ ‌Agriculture‌ ‌plays‌ ‌a‌ ‌significant‌ ‌role‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌socio-economic‌ ‌fabric‌ ‌of‌ ‌the‌ ‌country.
  2. Agricultural‌ ‌work‌ ‌was‌ ‌invented,‌ ‌initialised‌ ‌and‌ ‌developed‌ ‌by‌ ‌the‌ ‌king‌ ‌Pruthuminya‌ ‌who‌ ‌was‌ ‌the‌ ‌son‌ ‌of‌ ‌Vena.‌ ‌
  3. Pruthu‌ ‌(T)‌ ‌is‌ ‌considered‌ ‌to‌ ‌be‌ ‌the‌ ‌first‌ ‌consecrated‌ ‌king‌ ‌of‌ ‌the‌ ‌earth.‌ ‌The‌ ‌earth‌ ‌is‌ ‌known‌ ‌as‌ ‌Prithvi,‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌memory‌ ‌of‌ ‌Pruthu’s‌ ‌work.‌‌
  4. The‌ ‌given‌ ‌extract‌ ‌is‌ ‌the‌ ‌legend‌ ‌that‌ ‌reveals‌ ‌the‌ ‌history‌ ‌of‌ ‌Pruthu’s‌ ‌initiation‌ ‌of‌ ‌agricultural‌ ‌work‌ ‌and‌ ‌civilization.‌‌

परिच्छेदः‌‌ 1.

भूपाल:‌‌ ……..‌‌ यतस्त।‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

अनुवादः

‌राजा‌ ‌पृथुवैन्य‌ ‌म्हणजे‌ ‌पृथ्वीवरील‌ ‌सर्वप्रथम‌ ‌अभिषिक्त‌ ‌सम्राट‌ ‌(होय.)‌‌ प्रयागक्षेत्रात‌ ‌पृथु‌ ‌राजाची‌ ‌राजधानी‌ ‌होती.‌ राज्याभिषेकासमयी,‌ ‌भाट‌ ‌(स्तुतिपाठक)‌ ‌पृथु‌ ‌राजाची‌ ‌स्तुती‌ ‌गाण्यास‌ ‌उत्सुक‌ ‌होते.‌ नंतर,‌ ‌पृथु‌ ‌राजाने‌ ‌आदेश‌ ‌दिला,‌ ‌”कृपया‌ ‌भाटांनी‌ ‌थांबावे!‌ ‌जोपर्यंत‌ ‌माझ्यातील‌ ‌सद्गुणांचे‌ ‌दर्शन‌ ‌होत‌ ‌नाही,‌ ‌तोपर्यंत‌ ‌माझी‌ ‌स्तुती‌ ‌केली‌ ‌जाऊ‌ ‌नये.‌ ‌ईश्वराचेच‌ ‌स्तवन‌ ‌व्हावे.”‌ ‌पृथु‌ ‌राजाची‌ ‌अशी‌ ‌नि:स्पृह‌ ‌(नि:स्वार्थी)‌ ‌वृत्ती‌ ‌जाणून‌ ‌स्तुतिपाठक‌ ‌संतुष्ट‌ ‌झाले.‌ ‌एकदा‌ ‌पृथु‌ ‌राजा‌

‌त्याच्या‌ ‌राज्यात‌ ‌भ्रमण‌ ‌करत‌ ‌होता.‌ ‌त्याने‌ ‌फिरताना‌ ‌पाहिले‌ ‌की,‌ ‌त्याची‌ ‌प्रजा‌ ‌क्षीण‌ ‌(बारीक)‌ ‌व‌ ‌अशक्त‌ ‌झाली‌ ‌आहे.‌‌ ते‌ ‌प्रजाजन‌ ‌प्राण्याप्रमाणे‌ ‌आयुष्य‌ ‌जगत‌ ‌होते.‌ ‌(ते)‌ ‌हलक्या‌ ‌दर्जाचे/कमी‌ ‌प्रतीचे‌ ‌अन्न‌ ‌खात‌ ‌होते.‌ ‌ते‌ ‌पाहून‌ ‌राजा‌ ‌चिंताग्रस्त‌ ‌झाला.‌ ‌तेव्हा‌  ‌पुरोहित‌ ‌(उपाध्याय)‌ ‌म्हणाले,‌ ‌”हे‌ ‌राजा,‌ ‌खरेतर‌ ‌धन‌ ‌(समृद्धी),‌ ‌धान्य‌ ‌इत्यादी‌ ‌सर्व‌ ‌वस्तू‌ ‌धरणीच्या‌ ‌पोटातच‌ ‌असतात.‌ ‌(वास‌ ‌करतात.)‌‌ (कृपया)‌ ‌त्या‌ ‌प्राप्त‌ ‌करण्यासाठी‌ ‌तू‌ ‌प्रयत्न‌ ‌कर.”‌‌

The‌ ‌king‌ ‌named‌ ‌पृदुवैन्य‌ ‌was‌ ‌the‌ ‌first‌ ‌coronated‌ ‌(enthroned)‌ ‌emperor‌ ‌on‌ ‌the‌ ‌earth.‌  ‌The‌ ‌King‌ ‌पृथु’s‌ ‌capital‌ ‌was‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌region‌ ‌of‌ ‌प्रयाग.‌ ‌

The‌ ‌bards‌ ‌were‌ ‌eager‌ ‌to‌ ‌praise‌ ‌king‌ पृथु‌ ‌at‌ ‌the‌ ‌time‌ ‌of‌ ‌coronation.‌ ‌ Then‌ ‌पृथु‌ ‌ordered,‌ ‌”May‌ ‌the‌ ‌bards‌ ‌stop‌ ‌(praising‌ ‌me)!‌ ‌As‌ ‌long‌ ‌as‌ ‌my‌ ‌virtues‌ ‌are‌ ‌not‌ ‌manifested‌ ‌(don’t‌ ‌appear)‌ ‌till‌ ‌then‌ ‌I‌ ‌am‌ ‌not‌ ‌worthy‌ ‌of‌ ‌praise‌ ‌(appreciation).‌ ‌The‌ ‌Almighty‌ ‌is‌ ‌praiseworthy‌ ‌alone.”‌

Having‌ ‌realized‌ ‌such‌ ‌desirelessness‌ ‌of‌ ‌king‌ ‌”‌ ‌the‌ ‌bards‌ ‌were‌ ‌pleased. ‌Once,‌ ‌king‌ ‌पृथु‌ ‌was‌ ‌wandering‌ ‌in‌ ‌his‌ ‌kingdom.‌ ‌While‌ ‌wandering,‌ ‌he‌ ‌saw‌ ‌that‌ ‌his‌ ‌subjects‌ ‌are‌ ‌very‌ ‌thin‌ ‌and‌ ‌weak.‌ ‌

Those‌ ‌people‌ ‌were‌ ‌living‌ ‌like‌ ‌animals.‌ ‌They‌ ‌were‌ ‌eating‌ ‌low-quality‌ ‌food.‌ ‌Seeing‌ ‌that‌ ‌the‌ ‌king‌ ‌got‌ ‌perturbed‌ ‌(disturbed).‌ ‌Then‌ ‌the‌ ‌priest‌ ‌said,‌ ‌”O‌ ‌king,‌ ‌in‌ ‌fact‌ ‌all‌ ‌the‌ ‌things‌ ‌like‌ ‌wealth‌ ‌and‌ ‌grains‌ ‌are‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌belly‌ ‌of‌ ‌the‌ ‌earth‌ ‌itself‌ ‌(generated‌ ‌from‌ ‌the‌ ‌earth).‌ ‌ Please‌ ‌strive‌ ‌to‌ ‌obtain‌ ‌it.”‌‌

परिच्छेदः‌‌ 2.

‌तदा‌ ‌पृथुभूपेन‌ ‌………………….‌ ‌कुरु।‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

अनुवादः

मराठी‌ ‌त्यानंतर,‌ ‌त्याकरिता‌ ‌पृथुराजाने‌ ‌धनुष्य‌ ‌तयार‌ ‌ठेवले.‌ ‌मग‌ ‌पृथ्वी‌ ‌स्वीचे‌ ‌रूप‌ ‌धारण‌ ‌करून‌ ‌त्याच्यासमोर‌ ‌प्रकट‌ ‌झाली‌ ‌व‌ ‌म्हणाली,‌ ‌”हे‌ ‌राजा!‌ ‌जुलमी‌ ‌असणाऱ्या‌ ‌तुझ्या‌ ‌वडिलांनी,‌ ‌वेनराजाने‌ ‌राजधर्माचे‌ ‌पालन‌ ‌केले‌ ‌नाही.‌ ‌त्यानंतर,‌ ‌चोर-लुटारूंच्या‌ ‌भयामुळे‌ ‌मी,‌ ‌धन-धान्य-फुले-फळे‌ ‌माझ्या‌ ‌पोटात‌ ‌ठेवले.‌ ‌तू‌ ‌निश्चितच‌ ‌प्रजेच्या‌ ‌हिताविषयी‌ ‌सतर्क‌ ‌असणारा‌ ‌राजा‌ ‌आहेस,‌ ‌जर‌ ‌तू‌ ‌प्रयत्नपूर्वक‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌केलेस,‌ ‌तर‌ ‌मी‌ ‌प्रसत्र‌ ‌होईन.‌ ‌म्हणून‌ ‌धनुष्य‌ ‌सोडून‌ ‌दे.‌ ‌तुझ्या‌ ‌प्रजाजनांसमवेत‌ ‌फावडे,‌ ‌नांगर,‌ ‌कुदळ,‌ ‌विळे‌ ‌(हे‌ ‌सर्व)‌ ‌हातात‌ ‌घेऊन‌ ‌कृषिकार्य‌ ‌कर.”‌‌

English‌ ‌Then,‌ ‌king‌ ‌पृथु‌ ‌readied‌ ‌a‌ ‌bow‌ ‌for‌ ‌that.‌ ‌Having‌ ‌taken‌ ‌the‌ ‌form‌ ‌of‌ ‌a‌ ‌woman,‌ ‌the‌ ‌earth‌ ‌appeared‌ ‌in‌ ‌front‌ ‌of‌ ‌him‌ ‌and‌ ‌said,‌ ‌”O‌ ‌king‌ ‌your‌ ‌father,‌ ‌the‌ ‌bad‌ ‌ruler‌ ‌de‌ ‌did‌ ‌not‌ ‌perform‌ ‌duties‌ ‌of‌ ‌the‌ ‌king.‌ ‌Then,‌ ‌I‌ ‌placed‌ ‌wealth,‌ ‌grains,‌ ‌flowers,‌ ‌fruits‌ ‌in‌ ‌my‌ ‌belly‌ ‌due‌ ‌to‌ ‌fear‌ ‌of‌ ‌thieves‌ ‌and‌ ‌robbers.‌‌

But‌ ‌you‌ ‌are‌ ‌engaged‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌welfare‌ ‌of‌ ‌the‌ ‌subjects.‌ ‌If‌ ‌you‌ ‌strive‌ ‌in‌ ‌farming.‌ ‌I‌ ‌will‌ ‌be‌ ‌pleased.‌ ‌Hence,‌ ‌give‌ ‌up‌ ‌the‌ ‌bow.‌ ‌Start‌ ‌farming‌ ‌with‌ ‌the‌ ‌subjects‌ ‌by‌ ‌taking‌ ‌spades,‌ ‌ploughs,‌ ‌hoes,‌ ‌sickles‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌hand.”‌‌

परिच्छेदः‌‌ 3.

भूमातुः‌ ‌……………. अभवत्।‌‌

अनुवादः

मराठी‌ ‌धरणीमातेचा‌ ‌उपदेश‌ ‌लक्षात‌ ‌येऊन,‌ ‌पृथुवैन्य‌ ‌राजाने‌ ‌नद्यांचा‌ ‌मार्ग‌ ‌थांबवून‌ ‌पाण्याचा‌ ‌उपयोग‌ ‌कृषिकामासाठी‌ ‌केला.‌‌
(राजाने)‌ ‌पावसाच्या‌ ‌पाण्याचा‌ ‌साठा‌ ‌करून‌ ‌पाण्याचे‌ ‌व्यवस्थापन‌ ‌केले.‌ ‌(त्याने)‌ ‌जमीन‌ ‌अधिक‌ ‌सुपीक‌ ‌होण्यासाठी‌ ‌प्रयत्न‌ ‌केले.‌ ‌नंतर,‌ ‌लोकांनी‌ ‌त्या‌ ‌ठिकाणी‌ ‌(शेतात)‌ ‌धान्यबीजे‌ ‌पेरली.‌‌

त्याने‌ ‌अनेक‌ ‌वृक्षांपासून‌ ‌विविध‌ ‌प्रकारच्या‌ ‌बीजांचे‌ ‌परिश्रमपूर्वक‌ ‌संचय‌ ‌व‌ ‌निवड‌ ‌केली.‌ ‌(व)‌ ‌नंतर‌ ‌बीजांचे‌ ‌संस्करण‌ ‌करून‌ ‌पेरणी‌ ‌केली.‌ ‌पावसानंतर‌ ‌बीजांतून‌ ‌अंकुर‌ ‌फुटले.‌ ‌धान्याच्या‌ ‌प्राप्तीमुळे‌ ‌सर्व‌ ‌प्रजा‌ ‌आनंदित‌ ‌झाली.‌ ‌हा‌ ‌कल्याणकारी‌ ‌राजा‌ ‌पृथ्वीवर,‌ ‌प्रशासनात‌ ‌अग्रेसर‌ ‌व‌ ‌जनसेवाव्रती‌ ‌ठरला.‌‌

Keeping‌ ‌in‌ ‌mind‌ ‌the‌ ‌adviceof‌ ‌the‌ ‌mother‌ ‌earth,‌ ‌पृथुवैन्य‌ ‌used‌ ‌water‌ ‌for‌ ‌agricultural‌ ‌work‌ ‌by‌ ‌obstructing‌ ‌the‌‌ way‌ ‌of‌ ‌rivers.‌ ‌Having‌ ‌stored‌ ‌the‌ ‌rain-water,‌ ‌he‌ ‌did‌ ‌water-management.‌ ‌He‌ ‌strived‌ ‌to‌ ‌make‌ ‌the‌ ‌land‌ ‌most‌ ‌fertile.‌

‌After‌ ‌that,‌ ‌people‌ ‌sowed‌ ‌the‌ ‌seeds‌ ‌of‌ ‌grains‌ ‌in‌ ‌that‌ ‌field‌ ‌(farm).‌ ‌He‌ ‌collected‌ ‌and‌ ‌selected‌ ‌the‌ ‌various‌ ‌seeds‌ ‌from‌ ‌many‌ ‌trees‌ ‌with‌ ‌so‌ ‌much‌ ‌of‌ ‌effort.‌ ‌After‌ ‌that,‌ ‌having‌ ‌refined‌ ‌(polished)‌ ‌the‌ ‌seeds,‌ ‌he‌ ‌sowed.‌

‌After‌ ‌the‌ ‌rain,‌ ‌sprouts‌ ‌germinated‌ ‌from‌ ‌the‌ ‌seeds.‌ ‌After‌ ‌obtaining‌ ‌grains,‌ ‌all‌ ‌subjects‌ ‌were‌ ‌pleased‌ ‌(satisfied).‌ ‌This‌ ‌welfare-oriented‌ ‌king‌ ‌became‌ ‌the‌ ‌foremost‌ ‌in‌ ‌the‌ ‌administration‌ ‌on‌ ‌the‌ ‌earth‌ ‌and‌ ‌was‌ ‌committed‌ ‌(to‌ ‌the‌ ‌service‌ ‌of‌ ‌public.‌‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 1 आधकृषकः पृयुवैयः

शब्दार्थाः‌ 

  1. भूपाल:‌ ‌- king‌‌ – ‌राजा‌ ‌
  2. अभिषिक्तः‌ – coronated‌ – अभिषेक‌ ‌झालेला‌ ‌
  3. ‌स्तोतव्यः‌ – worthy‌ ‌to‌ ‌be‌ ‌praised‌ – स्तुती‌ ‌करण्यायोग्य‌
  4. ‌चिन्ताकुलः‌ – worried‌ – चिंताग्रस्त‌
  5. ‌पुरोहितः‌ – priest -‌ उपाध्याय‌
  6. ‌चारणा:‌ – bards – भाट‌ ‌(स्तुतिपाठक)‌
  7. ‌कृशाः‌ ‌- lean‌ – ‌बारीक‌
  8. अशक्ता:‌ – weak – ‌अशक्त‌
  9. ‌नि:स्पृहता‌ – ‌detachment‌ ‌- ‌निःस्पृहा,‌ निरिच्छा‌
  10. ‌भ्रमणम्‌ ‌- wandering – फिरणे‌
  11. वस्तुजातम्‌ – ‌things – सर्व‌ ‌वस्तू‌
  12. ‌निकृष्टान्नम्‌‌ – low-quality‌ ‌food‌‌ – ‌हलक्या‌ ‌दर्जाचे‌ ‌अन्न‌‌
  13. एतादृशीम्‌ – ‌such‌ – अशी
  14. ‌उदरे‌ – ‌in‌ ‌belly‌ – पोटात‌
  15. ‌धरायाम्‌ – on‌ ‌the‌ ‌earth – पृथ्वीवर‌ ‌
  16. ‌प्रकटीभवन्ति‌ – manifested‌ – प्रकट होतात
  17. ‌यतस्व‌‌ – take‌ ‌effort‌ – ‌‌प्रयत्न‌ ‌कर‌
  18. तिष्ठन्तु‌‌ – please‌ ‌wait‌ – ‌थांबावे‌
  19. आज्ञापयत्‌ – ordered‌ – आज्ञा‌ ‌केली‌
  20. दृष्ट्वा‌ ‌- having‌ ‌seen – पाहून‌
  21. प्राप्तुम्‌ – to‌ ‌obtain‌‌ – ‌मिळविण्यासाठी‌
  22. ‌पशुवत्‌ – like‌ ‌animals‌ – प्राण्याप्रमाणे‌
  23. ‌यावत्-तावत्‌ – ‌as‌ ‌long‌ ‌as-till‌ ‌then – ‌जोपर्यंत-तोपर्यंत‌
  24. ‌वस्तुतः – in‌ ‌fact – ‌मुळात,‌ ‌खरे‌ ‌पाहता‌‌
  25. दु:शासकः‌ – bad‌ ‌ruler – जुलमी‌ ‌राजा‌
  26. ‌प्रजाहितदक्षः‌‌ ‌- prompt‌ ‌towards subject’s‌ ‌welfare – प्रजाहितासाठी‌ ‌तयार‌ ‌/‌ ‌सतर्क‌
  27. हल:‌‌ – a‌ ‌plough‌ – ‌नांगर‌
  28. कुद्दालकम्‌ – hoe‌ – कुदळ‌
  29. धनु:‌ – bow‌ – धनुष्य‌
  30. सज्जीकृतम्‌ – set‌‌ – ‌तयार‌ ‌केले‌
  31. ‌भूमिः‌ – earth‌‌ – ‌पृथ्वी‌
  32. ‌प्रकटिता‌‌ – appeared‌‌ – ‌प्रकट‌ ‌झाली‌‌
  33. खनित्राणि‌ – ‌spades‌ – फावडे
  34. ‌लवित्राणि‌ ‌- sickles – विळे‌
  35. निहितानि‌ ‌-‌ placed/laid – ठेवलेले‌
  36. तदर्थम्‌ – for‌ ‌that – ‌त्यासाठी‌
  37. ‌धृत्वा‌ ‌- ‌taking/bearing‌ – ‌घेऊन/धारण‌ करून‌ ‌
  38. गृहीत्वा‌ – having‌ ‌taken – घेऊन‌‌
  39. ‌पुरत:‌ ‌- ‌in‌ ‌front‌ ‌of‌ – च्या‌ ‌पुढे‌
  40. चोरलुण्ठक – due‌ ‌to‌ ‌fear‌ ‌from – चोर,‌ ‌लुटारुच्या‌
  41. भयात्‌ – thief‌ ‌and‌ ‌robber – भीतीने‌
  42. ‌त्यज‌‌ – ‌leave – सोड
  43. अग्रणी:‌ ‌- foremost‌‌ – अग्रेसर‌
  44. जनसेवाव्रती‌‌ – committed‌ ‌to‌ ‌the service‌ ‌of‌ ‌public‌ – जनसेवेचे‌ ‌व्रत‌ ‌घेतलेला‌
  45. कल्याणकारी‌ – welfare-oriented – कल्याण‌ ‌करणारा‌
  46. ‌सन्तुष्टा:‌ ‌- ‌satisfied‌‌ – समाधानी
  47. धान्यबीजानि‌ – seeds‌ ‌of‌ ‌grains‌ – धान्याच्या‌ ‌बिया
  48. ‌सङ्कलनम्‌ ‌- collection‌‌ – साठा‌
  49. चयनम्‌ – selection‌‌ – निवड‌
  50. संस्करणम्‌‌ – having‌ ‌polished/refined – ‌शुद्धीकरण‌ ‌करून‌
  51. जलव्यवस्थापनम्‌ ‌- management‌ ‌of‌ ‌water‌ – ‌पाण्याचे‌ ‌व्यवस्थापन‌
  52. ‌उर्वरतमाम्‌ – ‌most‌ ‌fertile‌ – ‌अधिक‌ ‌सुपीक‌
  53. ‌जलसडयम्‌ ‌- accumulation‌ ‌of‌ ‌water‌ ‌- पाण्याचा‌ ‌साठा‌ ‌
  54. उपदेशम्‌ ‌- advice‌‌ – सल्ला‌ ‌
  55. अवपन्‌ ‌- sowed‌‌ – पेरली‌ ‌
  56. अवरुध्य‌ – ‌obstructing‌‌ – अडवून‌ ‌
  57. मनसि‌ ‌निधाय‌ – ‌having‌ ‌taken‌ ‌into‌ consideration ‌- लक्षात‌ ‌घेऊन‌‌
  58. अङकुराः‌ ‌‌उद्भूताः‌ ‌‌‌- were‌ ‌sprouted/‌germinated ‌- अंकुर‌ ‌फुटले‌

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Sanskrit Solutions Amod Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

Sanskrit Amod Std 10 Digest Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा Textbook Questions and Answers

अवबोधनम्‌ :

1. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।

प्रश्न अ.
अरण्ये कौ निवसतः स्म ?
उत्तरम्‌ :‌
अरण्ये मृग: काक:च निवसतः स्म।

प्रश्न आ.
काकः किम् उपादिशत् ?
‌उत्तरम्‌ :‌
काक: उपादिशत्, “अकस्मादागन्तुना सह मित्रता न युक्ता।”

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न इ.
मृगः प्रत्यहं क्षेत्रं गत्वा किम् अकरोत् ?
‌उत्तरम्‌ :‌
मृगः प्रत्यहं क्षेत्रं गत्वा सस्यम् अखादत् ।

प्रश्न ई.
क्षुद्रबुद्धिः कुत्र निभृतं स्थितः ?
‌उत्तरम्‌ :‌
क्षुद्रबुद्धिः समीपमेव वक्षस्य पृष्ठतः निभृतं स्थितः।

प्रश्न उ.
शृगालः केन हतः ?
‌उत्तरम्‌ :‌
क्षेत्रपतिना क्षिप्तेन लगुडेन शृगालः हतः।

2. कः कं वदति ?

प्रश्न अ.
‘वनेऽस्मिन् एकं सस्यपूर्ण क्षेत्रमस्ति ।’
‌उत्तरम्‌ :‌
जम्बूक; मृगं वदति।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न आ.
‘मित्र, छिन्धि तावन्मम बन्धनम् ।’
‌उत्तरम्‌ :‌
मृग: जम्बूकं वदति।

प्रश्न इ.
‘स वञ्चक: क्वास्ते ?’
‌उत्तरम्‌ :‌
काकः मृगं वदति।

3. प्रश्ननिर्माणं कुरुत ।

प्रश्न अ.
शृगालः मृगेण सह मित्रताम् ऐच्छत् ।
‌उत्तरम्‌ :‌
शृगाल: केन सह मित्रताम् ऐच्छत् ?

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न आ.
प्रदोषकाले मृगमन्विष्यन् काकः क्षेत्रे उपस्थितः।
‌उत्तरम्‌ :‌
कदा मृगमन्विष्यन् काकः क्षेत्रे उपस्थितः?

प्रश्न इ.
स: वृक्षस्य पृष्ठतः निभृतं स्थितः।
‌उत्तरम्‌ :‌
स: वृक्षस्य पृष्ठतः कथं स्थितः?

4. उत्तरपदं लिखत ।

प्रश्न 1.
अ. काकोऽवदत् = काकः + …………… ।
आ. मृगेणोक्तम् = मृगेण + …………… ।
इ. जम्बूकोऽयम् = जम्बूकः + ………….. ।
‌उत्तरम्‌ :‌
अ. काकोऽवदत् – काकः + अवदत्।
आ. मृगेणोक्तम् – मृगेण + उक्तम्।
इ. जम्बूकोऽयम् – जम्बूकः + अयम्।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

5. पूर्वपदं लिखत ।

प्रश्न 1.
अ. मृगोऽब्रवीत् = …………….. + अब्रवीत्
आ. वातेनोदरम् = …………… + उदरम्
इ. मृतोऽसि = ………………. + असि
‌उत्तरम्‌ :‌
अ. मृगोऽब्रवीत् – मृगः + अब्रवीत्।
आ. वातेनोदरम् – वातेन + उदरम्।
इ. मृतोऽसि – मृत: + असि।

6. सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।

ऊ. त्वं सत्वरं पलायिष्यसे । (‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)

प्रश्न अ.
मृगः प्रत्यहं तत्र गत्वा सस्यम् अखादत्। (त्वान्त-अव्ययं निष्कासयत ।)
उत्तरम् :
मृगः प्रत्यहं तत्र अगच्छत् सस्यम् अखादत् च।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न आ.
मित्र छिन्धि तावन्मम बन्धनम् । (लकारं लिखत ।)
उत्तरम् :
लोट्लकार:

प्रश्न इ.
वयम् आनन्देन एकत्र निवसामः । (लट्लकारस्थाने लङ्लकारं योजयत ।)
उत्तरम् :
वयम् आनन्देन एकत्र न्यवसाम।

प्रश्न ई.
त्वं पादान्स्तब्धीकृत्य तिष्ठ । (‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)
उत्तरम् :
भवान् पादान्स्तब्धीकृत्य तिष्ठतु ।

प्रश्न उ.
भवानपि अपरिचितः एव आसीत् । (‘भवान्’ स्थाने ‘त्वं’ योजयत ।)
उत्तरम् :
भवान् पादास्तब्धीकृत्य पलायिष्यते।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

7. स्तम्भमेलनं कुरुत।

प्रश्न 1.
स्तम्भमेलनं कुरुत।
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा 1
‌उत्तरम्‌ :‌

विशेषणम्विशेष्यम्
1. दृढःबन्धः
2. क्षिप्तेनलगुडेन
3. एकस्मिन्दिने
4. लगुडहस्तःक्षेत्रपतिः

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

8. जालरेखाचित्रं पूरयत ।

प्रश्न 1.
जालरेखाचित्रं पूरयत ।
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा 2
‌उत्तरम्‌ :‌
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा 5

9. तालिकां पूरयत ।

प्रश्न 1.
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा 3
(मञ्जूषा – त्रायस्व माम्, दर्शयामि त्वाम्, दृढोऽयं बन्धः, छिन्धि मम बन्धनम्)
‌उत्तरम्‌ :‌

जम्बूकःमृगः
दर्शयामि त्वाम्।त्रायस्व माम्।
दृढोऽयं बन्धःछिन्धि मम बन्धनम्

प्रश्न 2.
Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा 4
(मञ्जूषा – अलं विवादेन, कोऽयं द्वितीयः?, एवमस्तु, अस्मत्सख्यम् इच्छति ।)
‌उत्तरम्‌ :‌

मृगःकाकः
अलं विवादेन।कोऽयं द्वितीयः?
अस्मत्सख्यम् इच्छति।एवमस्तु।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

10. माध्यमभाषया उत्तरत ।

प्रश्न अ.
‘स नरः शत्रुनन्दनः’ इति वचनं कथायाः आधारेण स्पष्टीकुरुत ।
‌उत्तरम्‌ :‌
व्यसने मित्रपरीक्षा या कथेच्या संदर्भात ‘स: नरः शत्रुनन्दनः’ ही उक्ती आलेली दिसून येते. हितोपदेश या पुस्तकात मित्रलाभ 1.3. या प्रकरणात ही कथा आवळते. धूर्त कोल्हा हरिणाला त्याच्या शब्दांमध्ये फसवितो व त्याच्याशी मैत्री करतो. कोल्हा हरिणाला धान्यांनी भरलेले एक शेत दाखवितो.

साहजिकच हरिणाच्या मनात धान्याबद्दल हाव निर्माण होते. पण नंतर, शेताच्या मालकाने टाकलेल्या जाळ्यात हरिण अडकते. हरिणाने कोल्ह्याकडे मदत मागताच धूर्त कोल्हा जाळे घट्ट असल्याचे सांगतो. त्यामुळे तो तोडण्यास समर्थ नाही असे दर्शवितो.

हरिणाला कोल्ह्याचा धूर्तपणा हळूहळू लक्षात येतो. कावळ्याचे न ऐकल्याचा त्याला पश्चात्ताप होतो. जेव्हा कावळा हरिणाला शोधत शोधत हरिणाजवळ पोहोचतो, तेव्हा तो ‘स: नर: शत्रुनन्दनः’ हा श्लोक उद्धृत करतो. या श्लोकाचा अर्थ असा, की, “जो आपल्या मित्रांचा, हितचिंतकांचा सल्ला ऐकत नाही, तो संकटात सापडतो व त्याच्या शāना आनंदित करतो, त्यांचे शत्रुत्व ओढून घेतो.

हरिणाने अनोळखी प्राण्यांशी (कोल्ह्याशी) मैत्री न करण्याचा कावळ्याचा सल्ला ऐकला नाही व कोल्ह्याशी मैत्री केल्याने अखेर त्याला जाळ्यात अडकावे लागले. म्हणजे तो संकटात सापडला व हरिणाला शत्रुनन्दन हे विशेषण लागू पडले. ‘स: नरः शत्रुनन्दनः’ इति वचनं कथायाः आधारेण स्पष्टीकुरुत।

‘सः नरः शत्रुनन्दनः’ occurs in the context of the story व्यसने मित्रपरीक्षा. It is found in the chapter 1.3 of मित्रलाभ, in हितोपदेश. The crooked jackal trapped the deer in its words. It intentionally showed the deer a field full of grains. Due to greed for the grains, the deer got caught in the net set by the owner of the field. When the deer asked the jackal for his help, it cleverly answered, the net is tendon, so it can’t break it.

The deer understood the jackal’s plan. It repented for not listening to the crow’s advice. When crow came searching for him, It uttered the verse सुडदा …..स: नर:शत्रुनन्दन: which means, “The one who does not listen to the words of well-wishing friends, calamity becomes his neighbour and he pleases enemies.” The deer disregarded crow’s advice of not making friendship with strangers. It had friendship with a deceitful jackal and was finally trapped in the net. Seeing him caught in the net, the jackal became happy.

In this way, the deer proved himself as शत्रुनन्दन, the one whopleases enemies as the deer also pleased the mind of the crooked jackal.

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न आ.
काकेन क: उपायः उक्त : ?
‌उत्तरम्‌ :‌

व्यसने मित्रपरीक्षा या कथेच्या संदर्भात ‘स: नरः शत्रुनन्दनः’ ही उक्ती आलेली दिसून येते. हितोपदेश या पुस्तकात मित्रलाभ 1.3. या प्रकरणात ही कथा आढळते. शेताच्या मालकाने हरिणाला जाळ्यात अडकविले. कावळा हरिणाला शोधत तेथे आला. कावळ्याने विचारले असता हरिणाने सर्व हकीकत त्याला सांगितली. कोल्ह्याच्या धूर्तपणामुळे हरिण जाळ्यात अडकले होते.

कावळ्याने हरिणाला मेल्यासारखे दर्शविण्यास सांगितले, तसेच कावळ्याने हरिणाला पोट फुगवायला व पायही स्तब्ध ठेवण्यास सांगितले. कावळ्याच्या म्हणण्यानुसार वागल्यामुळे शेताच्या मालकाला हरिण मृत असल्याचा भास झाला. शेताचा मालक हरिणाजवळ आला व जाळे काढले. ठरल्याप्रमाणे कावळ्याने काव-काव असा आवाज केला. आवाज ऐकताच हरिण उठले व पटकन पळून गेले. कावळ्याने शोधलेल्या या उपायामुळे व त्याच्या चातुर्यामुळे हरिणाचे प्राण वाचले.

‘स: नरः शत्रुनन्दनः’ occurs in the context of the story व्यसने मित्रपरीक्षा. It is found in the chapter 1.3 of मित्रलाभ, in हितोपदेश. The deer was trapped in the net set by the owner of the field. The crow came in search of the deer. The crow saw the trapped deer. The deer narrated the account of a deceitful jackal.

The crow told the deer to pretend to be dead by blowing up its belly with air and told to keep legs stiff. The crow gave the deer an idea of running away. The deer followed likewise. The owner of the field thought the deer is certainly dead. So, he released the deer. At the same time, the crow made alarming sound and the deer ran away quickly. The crow’s wisdom and true friendship with the deer saved the deer’s life.

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

11. अमरकोषात् समानार्थकं शब्द योजयित्वा वाक्यं पुनर्लिखत ।

प्रश्न अ.
अरण्ये मृगः काकः च स्नेहेन निवसतः ।
‌उत्तरम्‌ :‌
अरण्ये कुरङ्गः / वातायुः / हरिणः / अजिनयोनिः काकः च सेहेन निवसतः।

प्रश्न आ.
जम्बूकः तेन सह मृगस्य निवासस्थानं गतः ।
‌उत्तरम्‌ :‌
शृगालः / वञ्चकः / क्रोष्टा / फेरुः / फेरव: तेन सह मृगस्य निवासस्थानं गतः ।

प्रश्न इ.
मृगमन्विष्यन् काक: तत्र उपस्थितः ।
‌उत्तरम्‌ :‌
मृगमन्विष्यन् करटः / अरिष्टः / बलिपुष्टः / सकृत्प्रज: तत्र उपस्थितः।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

12. विरुद्धार्थकशब्द लिखत ।
दृढः, मैत्री, बद्धः, प्रभूतम् ।

प्रश्न 1.
विरुद्धार्थकशब्द लिखत ।
दृढः, मैत्री, बद्धः, प्रभूतम् ।
‌उत्तरम्‌ :‌

  1. दृढः × शिथिलः।
  2. मैत्री × शत्रुत्वम्, वैरम्।
  3. बद्धः × मुक्तः ।
  4. प्रभूतम् × अल्पम, स्तोकम, स्वल्पम्, न्यूनम्।

उपक्रम :
1. पाठात् उपपदविभक्तियुक्तानि वाक्यानि चित्वा लिखत ।
2. पाठात् शतृरूपाणि चित्वा लिखत ।

Sanskrit Amod Class 10 Textbook Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा Additional Important Questions and Answers

अवबोधनम्।

(क) उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

प्रश्न 1.
शृगालः मृगेण सह सख्यम् इच्छति यतः
(अ) शृगाल: मृगमांसं खादितुम् इच्छति।
(ब) शृगालः मृगे स्निह्यति।
उत्तरम् :
(अ) शृगाल: मृगमांसं खादितुम् इच्छति।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

(ख) उचितं पर्यायं चित्वा वाक्यं लिखत।

प्रश्न 1.
शृगालः स्वार्थहतुना ………… सह मैत्रम् ऐच्छत्। (मृगेण / काकेन)
उत्तरम् :
शृगालः स्वार्थहतुना मगेण सह मैत्रम् ऐच्छत्।

(ग) पूर्णवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
क: चित्राङ्गम् अपश्यत्?
उत्तरम् :
गाल: चित्राङ्गम् अपश्यत्।

प्रश्न 2.
शृगालस्य नाम किम् आसीत्?
उत्तरम् :
शृगालस्य नाम क्षुद्रबुद्धिः आसीत्।

प्रश्न 3.
शृगालः किमर्थं मृगेण सह मित्रताम् ऐच्छत्?
उत्तरम् :
शृगालः स्वार्थहेतुं पूरयितुं मृगेण सह मित्रताम् ऐच्छत्।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न 4.
कदा क्षुद्रबुद्धिः निवासस्थानं गतः?
उत्तरम् :
अस्तङ्गते सवितरि क्षुद्रबुद्धिः निवासस्थानं गतः।

प्रश्न 5.
जम्बूकः किम् इच्छति?
उत्तरम् :
जम्बूक: मृगशृगालयोः सख्यम् इच्छति।

(घ) वाक्यं पुनर्लिखित्वा सत्यम्/असत्यम् इति लिखत।

प्रश्न 1.

  1. अरण्ये एकाक्ष: नाम मृगः चित्राङ्ग नाम काक: निवसतः स्म।
  2. शुदबुद्धिः उदिते सवितरि (सूर्योदये) निवासस्थानं गतः।
  3. अकस्मात् आगन्तुना सह मैत्री युक्ता।

उत्तरम् :

  1. असत्यम्।
  2. असत्यम्।
  3. असत्यम्।

(च) कः कं वदति।

प्रश्न 1.
“सखे चित्राङ्ग, कोऽयं द्वितीयः?”
उत्तरम् :
काक: मृगं वदति।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न 2.
“जम्बूकोऽयम्। अस्मत्सख्यम् इच्छति।”
उत्तरम् :
मृगः काकं वदति।

प्रश्न 3.
“अकस्मादागन्तुना सह मित्रता न युक्ता।”
उत्तरम् :
काक: मृगं वदति।

प्रश्न 4.
मृगस्य प्रथमदर्शने भवानपि अपरिचितः एव आसीत्।
उत्तरम् :
शृगालः काकं वदति।

प्रश्न 5.
यथायं मृगः मम बन्धुः तथा भवानपि।
उत्तरम् :
शृगालः काकं वदति।

प्रश्न 6.
अलं विवादेन।
उत्तरम् :
मृग: काकशृगालौ वदति।

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

प्रश्न 7.
वयं सर्वे आनन्देन एकत्र निवसामः ।
उत्तरम् :
मृगः काकशृगाली वदति।

प्रश्न 8.
एवमस्तु।
उत्तरम् :
काकः मृगशृगाली वदति।

शब्दज्ञानम्।

(क) सन्धिविग्रहं कुरूत।

  1. चित्राङ्गो नाम – चित्राङ्गः + नाम ।
  2. एकाक्षो नाम – एकाक्ष: + नाम।
  3. काकश्च – काकः + च।
  4. केनापि – केन+अपि।
  5. कोऽयम् – क + अयम्।
  6. अकस्मादागन्तुना – अकस्मात् + आगन्तुना।
  7. तदाकर्ण्य – तत् + आकर्य।
  8. भवानपि – भवान् + अपि।
  9. यथायम् – यथा + अयम्।
  10. काकेनोक्तम् – काकेन + उक्तम्।
  11. एवमस्तु – एवम् + अस्तु।

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(ख) विशेषण – विशेष्य – सम्बन्धः।

विशेषणम्विशेष्यम्
1. भ्रमन्चित्राङ्गः
2. अस्त गतेसवितर

(ग) त्वान्त-ल्यबन्त-तुमन्त-अव्ययानि।

त्वान्त अव्यय धातु + त्वा / ध्वा / ट्वा / ढ्वा / इत्वा / अयित्वाल्यबन्त अव्यय – उपसर्ग + धातु + य / त्य
आकर्यदृष्ट्वा

(घ) विभक्त्यन्तरूपाणि।

  • प्रथमा – मृगः, काकः, भ्रमन्, सः, अयम्, जम्बूकः, भवान्, बन्धुः, वयम्, सर्वे।
  • द्वितीया – सख्यम्, मित्रताम्।
  • तृतीया – स्नेहेन, केन, शृगालेन, हेतुना, मृगेण, आगन्तुना, विवादेन, आनन्देन, काकेन।
  • पञ्चमी – अस्मत्।
  • सप्तमी – वने, सवितरि, दर्शन।

(च) लकारं लिखत।

प्रश्न 1.
1. शृगालः मृगेण सह मित्रताम् ऐच्छत्।
2. जम्बूक: सकोपम् आह।
उत्तरम् :
1. लङ्लकारः
2. लङ्लकार:

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क्रमेण योजयत।

प्रश्न 1.

  1. मृगकाकयोः नेहेन निवासः।
  2. काकस्य उपदेशः।
  3. मृगकाकशृगालानाम् एकत्र निवासः।
  4. शुगालस्य मृगेण सह मित्रता।

उत्तरम् :

  1. मृगकाकयोः स्नेहेन निवासः।
  2. शृगालस्य मृगेण सह मित्रता।
  3. काकस्य उपदेशः।
  4. मृगकाकशृगालानाम् एका निवासः।

भाषाभ्यासः

(क) समानार्थकशब्दाः

  1. अरण्यम् – काननम्, वनम्, विपिनम्, अटवी।
  2. मृगः – हरिणः, कुरङ्गः, वातायुः, अजिनयोनिः ।
  3. काकः – वायसः, करटः, ध्वाक्षः, अरिष्टः, बलिपुष्टः, सकृत्प्रजः।
  4. शृगालः – जम्बूकः, वाकः, क्रोष्टा, फेरुः, फेरवः।

(क) उचितं कारणं चित्त्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

प्रश्न 1.
जम्बूक: मनसि आनन्दितः यतः
(अ) मृगः पाशे बद्धः।
(ब) जम्बूकस्य अन्येन सह मित्रता अभवत्।
उत्तरम् :
(अ) मृग: पाशे बद्धः।

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(ख) उचितं पर्यायं चित्त्वा वाक्यं लिखत।

प्रश्न 1.

  1. फलितं मे ……………..। (प्रयोजनम् / मनोरथम्)
  2. ………………. मम शरणम्। (शत्रवः / सुहद:)
  3. बने …………. क्षेत्रम् अस्ति। (सस्यविहीनं / सस्ययुक्त)

उत्तरम् :

  1. मनोरथम्
  2. सुहृदः
  3. सस्ययुक्तं

(ग) पूर्णवाक्येन लिखत।

प्रश्न 1.
केन मृगस्य कृते पाशः योजितः?
उत्तरम् :
क्षेत्रपतिना मृगस्य कृते पाश: योजितः।

प्रश्न 2.
मृगं पाशैर्बद्धं दृष्ट्वा क: मनसि आनन्दितः?
उत्तरम् :
मृगं पाशैर्वद्धं दृष्ट्वा जम्बूक: मनसि आनन्दितः।

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प्रश्न 3.
जम्बूक: मनसि किम् अचिन्तयत्?
उत्तरम् :
जम्बूक: मनसि अचिन्तयत्, ‘यत् फलितं मे मनोरथम्। इदानीं प्रभूतं भोजनं प्राप्स्यामि ।’

प्रश्न 4.
मृग: जम्बूकं दृष्ट्वा किम् अब्रवीत्?
उत्तरम् :
मृगः जम्बूकं दृष्ट्वा अब्रवीत्, “मित्र, छिन्धि तावन्मम बन्धनम्। त्रायस्व माम्।” इति ।

(घ) कः कं वदति।

प्रश्न 1.
दर्शयामि त्वाम्।
उत्तरम् :
जम्बूक: मृगं वदति।

प्रश्न 2.
दृढोऽयं बन्धः।
उत्तरम् :
जम्बूक: मृगं वदति।

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प्रश्न 3.
स्नायुनिर्मितान् पाशानेतान् कथं वा व्रतदिवसे स्मृशामि।
उत्तरम् :
जम्बूकः मृगं वदति।

(च) वाक्यं पुनलिखित्वा सत्यम् / असत्यम् इति लिखत।

प्रश्न 1.

  1. मृगः शृगालं सस्यपूर्ण क्षेत्रम् अदर्शयत्।
  2. मृगः प्रतिदिन क्षेत्रे सस्यम् अखादत्।
  3. जम्बूकः पाशैर्बद्धः।
  4. जम्बूक: मनसि खिन्नः जातः।
  5. जम्बूक: मृगं साहाय्यम् अकरोत्।
  6. जम्बूक: निभृतं स्थितः।

उत्तरम् :

  1. असत्यम्।
  2. सत्यम्।
  3. असत्यम्।
  4. असत्यम्।
  5. असत्यम्।
  6. सत्यम्।

शब्दज्ञानम् ।

(क) सन्धिविग्रहः।

  1. किञ्चित्कालानन्तरम् – किञ्चित् + कालानन्तरम् ।
  2. वनेऽस्मिन् – बने + अस्मिन्।
  3. क्षेत्रमस्ति – क्षेत्रम् + अस्ति ।
  4. तत्रागतः – तत्र + आगतः।
  5. पाशैर्बद्धः – पाशैः + बद्धः।
  6. मित्राण्येव – मित्राणि + एव।
  7. सोऽचिन्तयत् – स: + अचिन्तयत्।
  8. मृगस्तम् – मृगः + तम्।
  9. तावन्मम – तावत् + मम।
  10. जम्बूको दूरादेवावदत् – जम्बूक: + दुरात् + एव + अवदत्।
  11. दृढोऽयम् – दृढ : + अयम्।
  12. पाशानेतान् – पाशान् + एतान्।
  13. इत्युक्त्वा . इति + उक्त्वा ।
  14. समीपमेव – समीपम् + एव।

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(ख) विशेषाण – विशेष्य – सम्बन्धः।

विशेषणम्विशेष्यम्
1. सस्यपूर्णम्क्षेत्रम्
2. मगःबद्धः
3. प्रभूतमभोजनम्
4. स्नायुनिर्मितान्पाशान्

(ग) त्वान्त-ल्यबन्त-तुमन्त-अव्ययानि।

त्वान्त अव्यय धातु + त्वा/ध्वा/ट्वा/वा/इत्वा/अयित्वा
दृष्ट्वा, उक्त्वा

(घ) विभक्त्यन्तरूपाणि।

  • प्रथमा – शृगालः, पाशः, सः, जम्बूकः, अयम्, बन्धः, मिवाणि।
  • द्वितीया – मृगम्, क्षेत्रम्, एकम, त्वाम्, भोजनम्, तम्, माम, पाशान, एतान्।
  • तृतीया – क्षेत्रपतिना, पाशैः।
  • पशमी – दूरात्। षष्ठी – वृक्षस्य, मम।
  • सप्तमी – एकस्मिन्, दिने, मनसि, व्रतदिवसे।
  • सम्बोधन – मित्र।

(च) लकारं लिखत।

प्रश्न 1.
1. प्रभूतं भोजनं प्राप्स्यामि।
2. त्रायस्व माम्।
उत्तरम् :
1. लृट्लकार:
2. लोट्लकार:

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क्रमेण योजयत।

(क)

प्रश्न 1.

  1. क्षेत्रपतिना पाशयोजनम्।
  2. शृगालेन मृगाय सस्यपूर्णक्षेत्रस्य दर्शनम्।
  3. मृगस्य पाशबन्धनम्।
  4. मृगस्य प्रत्यहं क्षेत्रं गमनम्।

उत्तरम् :

  1. शृगालेन मृगाय सस्यपूर्णक्षेत्रस्य दर्शनम्।
  2. मृगस्य प्रत्यहं क्षेत्रं गमनम्।
  3. क्षेत्रपतिना पाशयोजनम्।
  4. मृगस्य पाशबन्धनम्।

(ख)

प्रश्न 1.

  1. मृगः पाशैर्बद्धः।
  2. मृगः सस्यम् अखादत्।
  3. जम्बूक; मनसि आनन्दितः।
  4. क्षेत्रपतिना पाश: योजितः।

उत्तरम् :

  1. मृगः सस्यम् अखादत्।
  2. क्षेत्रपतिना पाश: योजितः।
  3. मृगः पाशैर्बद्धः।
  4. जम्बूक: मनसि आनन्दितः ।

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भाषाभ्यासः

(क) समानार्थकशब्दाः

  1. कालः – समयम, वेला।
  2. प्रत्यहम् – प्रतिदिनम्।
  3. सस्यम् – धान्यम्।
  4. गत्वा उपगम्य।
  5. क्षेत्रपतिः – सस्यपालः।
  6. इदानीम् – सम्पति, साम्प्रतम्।
  7. मनसि – चित्ते, चेतसि, अन्त:करणे।
  8. आनन्दितः – प्रमुदितः, हर्षितः, प्रहृष्टः।
  9. मनोरथम् – मनोकामना, मनीषा, ईहा।
  10. प्रभूतम् – भूरि, विपुलम्, पुष्कलम्, प्रचुरम्।

(ख) विरुद्धार्थकशब्दाः

1. अनन्तरम् × पूर्वम्, प्राक्।

अवबोधनम् ।

(क) उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।

प्रश्न 1.
मृगः क्षेत्रपतिना बद्धः यतः ……….
(अ) मृगः क्षेत्रपतेः शत्रुः आसीत्।
(ब) मृगः सुहद्वाक्यस्य अनादरम् अकरोत्।
उत्तरम् :
(ब) मृगः सुहृद्वाक्यस्य अनादरम् अकरोत्।

प्रश्न 2.
शृगालः हत: यत:
(अ) क्षेत्रपतिना लगुडं क्षिप्तम्।
(ब) काकः शृगालम् अमारयत्।
उत्तरम् :
(अ) क्षेत्रपतिना लगुडं क्षिप्तम्।

प्रश्न 3.
क्षेत्रपतिः मृगं बन्धनात् व्यमुशत् यतः
(अ) सः ‘मृगः मृतः’ इति चिन्तितवान् ।
(ब) पाशबद्धं मृगं दृष्ट्वा तस्य हृदयं करुणया अद्रवत्।
उत्तरम् :
(अ) सः ‘मृगः मृतः’ इति चिन्तितवान्।

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(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरत।

प्रश्न 1.
क्षेत्रपतिः कदा हस्ते लगुडं धृत्वा आगच्छत् ?
उत्तरम् :
क्षेत्रपतिः प्रभाते हस्ते लगुडं धृत्वा आगच्छत्।

प्रश्न 2.
केन क्षेत्रपति: अवलोकित:?
उत्तरम् :
काकेन क्षेत्रपति: अवलोकितः।

प्रश्न 3.
क्षेत्रपतिना मृगं विलोक्य किम् उक्तम्?
उत्तरम् :
क्षेत्रपतिना मृगं विलोक्य उक्तं, “आ ! स्वयं मृतोऽसि।”

प्रश्न 4.
मृगः कदा पलायित:?
उत्तरम् :
काकशब्द श्रुत्वा मृग: पलायितः।

(ग) वाक्यं पुनलिखित्वा सत्यम् / असत्यम् इति लिखत।

प्रश्न 1.

  1. काकः सायङ्काले मृगमन्विष्यन् आगतः।
  2. मृगः मृतः आसीत्।
  3. मृगः मृतवत् संदर्शयत्।
  4. मृगः शनैः शनै: पलायितः।
  5. क्षेत्रपतिना क्षिप्तेन लगुडेन जम्बूक: हतः।
  6. क्षेत्रपति: मृगं बन्धनात् व्यमुञ्चत्।

उत्तरम् :

  1. सत्यम्।
  2. असत्यम्।
  3. सत्यम्।
  4. असत्यम्।
  5. सत्यम्।
  6. सत्यम्।

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(घ) कः कं वदति?

प्रश्न 1.
“सखे ! किमेतत् ?”
उत्तरम् :
काक: मृगं वदति।

प्रश्न 2.
सुहद्वाक्यस्य अनादरात् बद्धोऽहम्।
उत्तरम् :
मृग: काकं वदति।

प्रश्न 3.
मन्मांसार्थी तिष्ठति अत्रैव ।
उत्तरम् :
मृग: काकं वदति।

प्रश्न 4.
उपायस्तावत् चिन्तनीयः।
उत्तरम् :
काकः मृगं वदति।

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प्रश्न 5.
त्वमात्मानं मृतवत्संदर्शय।
उत्तरम् :
काकः मृगं वदति।

शब्दज्ञानम्

(क) सन्धिविग्रहः।

  1. मृगमन्विष्यन् – मृगम् + अन्विष्यन् ।
  2. काकस्तत्रोपस्थितः – काक: + तत्र + उपस्थितः।
  3. किमेतत् – किम् + एतत्।
  4. बद्धोऽहम् – बद्धः + अहम्।
  5. स्वास्ते – क्व + आस्ते।
  6. तिष्ठत्यत्रैव – तिष्ठति + अत्र + एव।
  7. उपायस्तावत् उपाय: + तावत्।
  8. क्षेत्रपतिलगुडहस्तः – क्षेत्रपतिः + लगुडहस्तः।
  9. काकेनावलोकितः – काकेन + अवलोकितः।
  10. तमालोक्य – तम् + आलोक्य।
  11. काकेनोक्तम् – काकेन + उक्तम्।
  12. त्वमात्मानम् – त्वम् + आत्मानम्।
  13. मृतवत्संदर्शय – मृतवत् + संदर्शय।
  14. पादास्तब्धीकृत्य – पादान् + स्तब्धीकृत्य ।
  15. यदाहम् – यदा + अहम्।
  16. त्वमुत्थाय – त्वम् + उत्थाय।
  17. मृगस्तथैव – मृग: + तथा + एव।
  18. उक्तञ्च – उक्त म् + च।
  19. तमुद्दिश्य – तम् + उहिश्य।
  20. शृगालस्तावद् हतः – शृगालः + तावत् + हतः।

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(ग) त्वान्त-ल्यबन्त-तुमन्त-अव्ययानि ।

त्वान्त अव्यय धातु + त्वा / ध्वा / ट्वा / ढ्वा / इत्वा / अयित्वाल्यबन्त अव्यय उपसर्ग + धातु + या / त्य
दृष्ट्वा, पूरयित्वा, श्रुत्वाआलोक्य, स्तब्धीकृत्य, उद्दिश्य, उत्थाय

(घ) विभक्त्यन्तरूपाणि ।

  • प्रथमा – काकः, सः,अहम, यः, नरः, वञ्चकः, क्षेत्रपतिः, आगच्छन्, त्वम्, मृगः, शृगालः।
  • द्वितीया – मृगम्, किम्, एतत्, तम्, आत्मानम्, उदरम्, पादान्, शब्दम्।
  • तृतीया – मृगेण, काकेन, वातेन, क्षेत्रपतिना, लगुडेन।
  • पञ्चमी – अनादरात्, बन्धनात्।
  • षष्ठी – वाक्यस्य, सुहृदाम, हितकामानाम, तस्य।
  • सप्तमी – प्रदोषकाले, प्रभाते।
  • सम्बोधन – सखे, मृग।

(च) लकारं लिखत।

प्रश्न 1.

  1. मृगं तथाविधं दृष्ट्वा स उवाच।
  2. स वशक: क्व आस्ते?
  3. त्वमात्मानं मृतवत्संदर्शय।
  4. सत्वरं पलायिष्यसे।
  5. सः मृगं बन्धनात् व्यमुञ्चत्।

उत्तरम् :

  1. लिट्लकारः
  2. लट्लकारः
  3. लोट्लकार:
  4. लट्लकारः
  5. लङ्लकार:

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क्रमेण योजयत।

(क)

प्रश्न 1.

  1. मृगः मृतवत् स्थितः ।
  2. शृगाल: लगुडेन हतः।
  3. काकेन क्षेत्रपति: अवलोकितः।
  4. काकेन शब्दः कृतः।

उत्तरम् :

  1. काकेन क्षेत्रपति: अवलोकितः।
  2. मृगः मृतवत् स्थितः।
  3. काकेन शब्दः कृतः।
  4. शृगाल: लगुडेन हतः।

भाषाभ्यासः

(क) समानार्थकशब्दाः

  1. प्रदोषकालः – सन्ध्याकालः।
  2. सुहृद् – सखा, मित्रम्।
  3. विपत् – आपत्तिः, सङ्कटम्।
  4. आलोक्य – अवलोक्य, विलोक्य, वीक्ष्य।
  5. वातेन – पवनेन, वायुना।
  6. सत्वरम् – शीघ्रम्, तूर्णम्, झटिति, आशु।

(ख) विरुद्धार्थकशब्दाः

  1. सुहद् × शत्रुः, अरिः, वैरी।
  2. अनादरात् × आदरात्।
  3. मृतः × जीवितः।
  4. सत्वरम् × शनैः शनैः।

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लेखनकौशलम्

समासाः

समस्तपदम्अर्थसमासविग्रहःसमासनाम
मृगशृगालोdeer and jackalमृगः च शृगाल: च।इतरेतर द्वन्द्व समास
प्रत्यहम्every dayअहनि अहनि।अव्ययीभाव समास
सकोपम्with angerकोपेन सह।अव्ययीभाव समास
अपरिचितःnot knownन परिचितः।नञ्तत्पुरुष समास
क्षेत्रपतिःowner of the field(s)क्षेत्रस्य / क्षेत्राणां पतिः।षष्ठी तत्पुरुष समास
क्षुदबुद्धिःhe who has mean intellectक्षुद्रा बुद्धिः यस्य सः।बहुव्रीहि समास
लगुडहस्तःhe who hasastick in the handलगुडं हस्ते यस्य सः।बहुव्रीहि समास

व्यसने मित्रपरीक्षा Summary in Marathi and English

Introduction:

हितोपदेश is an ancient Indian text in Sanskrit language consisting of fables of animals and human Characters. It incorporates maxims, wordly wisdoms and morals on political affairs in a simple and entertaining manner.

नारायण पंडित is considered to be the author of this book. His purpose behind composing हीतोपदेश is to give knowledge to be wise. This is done through moral stories in which birds, beasts and humans interact. हितोपदेश has four sections – मित्रलाभ, सुहृद्भेद, विग्रह, सन्धि.

The story of the lesson व्यसने मित्रपरीक्षा is found in the chapter 1.3 of “मित्रलाभ’. The repercussion of trusting strangers is well brought out through the story of deer, jackal and crow.

प्रस्तावना :

हितोपदेश हे प्राणी व मानवी पात्रांनी युक्त कथांचे भारतीय पुस्तक आहे. यात नीतिसूत्रे, उपदेशात्मक वचने, तसेच राजकीय संबंधावर आधारित मूल्ये यांचे सहज व रोचक पद्धतीने स्पष्टीकरण केलेले आहे. नारायण पंडित हा या ग्रंथाचा कर्ता मानला जातो. योग्य आचरण शिकवणे हा त्याचा यामागील हेतू आहे. पक्षी, प्राणी व मानव यांच्या परस्पर संभाषणातून हे त्याने व्यक्त केले आहे.

हितोपदेशाचे चार भाग आहेत.

  1. मित्रलाभ
  2. सुहृद्भेद
  3. विग्रह
  4. सन्धि

‘व्यसने मित्रपरीक्षा’ या पाठाचा कथाभाग ‘मित्रलाभ’ या भागातील 1.3 या प्रकरणात सापडतो. अनोळखी व्यक्तीवर विश्वास ठेवल्याचे दुष्परिणाम हरिण, कोल्हा व कावळ्याच्या गोष्टीद्वारे उत्तमरीत्या कथन केले आहेत.

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

परिच्छेदः, शब्दार्थाः, अनुवादः

परिच्छेदः 1

अस्ति कश्चित् ……………. एवमस्तु।.

अनुवादः

चंपक नावाचे एक जंगल होते. जंगलात चित्रांग नावाचे हरिण व एकाक्ष नावाचा कावळा प्रेमाने (एकत्र) राहत होते. एकदा चित्रांग वनात भटकत असताना कोण्या एका कोल्ह्याने त्याला पाहिले. क्षुद्रबुद्धी नावाच्या त्या कोल्ह्याची स्वार्थापोटी हरिणाबरोबर मैत्री करण्याची इच्छा होती. सूर्यास्त झाल्यावर, क्षुद्रबुद्धी हरिणाबरोबर हरिणाच्या घरी गेला.

हरिण व कोल्ह्याला पाहून कावळा म्हणाला, “अरे मित्रा चित्रांग! ह्य दुसरा कोण आहे ?” हरिण म्हणाले, “हा कोल्हा आहे. त्याला आपल्याबरोबर मैत्री करण्याची इच्छा आहे.” (त्यावर) कावळा म्हणाला “अचानक आलेल्या अपरिचितासोबत मैत्री योग्य नव्हे.” ते ऐकून कोल्हा रागाने म्हणाला, “हरिणाच्या प्रथमदर्शनी तू सुद्धा अनोळखी होतास. ज्याप्रमाणे हे हरिण माझ्या मित्रासमान आहे, त्याप्रमाणे तू आहेस.” हरिण म्हणाले, “(हा) वाद पुरे! आपण सर्व आनंदाने एकत्र राहूया.” कावळा म्हणाला, “असेच होवो.”

There was a certain forest named चंपक. A deer named चित्रांग and acrow named एकाक्ष used to live in the forest affectionately. Once, a certain jackal saw fait who was wandering in the forest. That jackal named yoga wished to befriend the deer with a selfish purpose.

At the time of sunset ya went to deer’s place with the deer. The crow said having seen the dear and the jackal, “Ofriend चित्रांग ! Who is this second (another) one?” The deer said, “This is a jackal. He wishes our friendship.”

(He wishes to befriend us.) The crow advised, “Friendship with a stranger, suddenly, is not appropriate.” Having heard it, the jackal angrily said, “At first sight you were stranger as well. Just as this deer is my friend so too are you.” The deer said, “Enough of this arguement. All of us will live together happily.” The crow said, “May it be so.”

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

परिच्छेदः 2.

किश्चित्कालानन्तरं ……………… स्थितः।

अनुवादः

मराठी थोड्या वेळानंतर, कोल्हा हरिणाला म्हणाला, ‘या अरण्यात धान्याने भरलेले एक शेत आहे. मी तुला दाखवतो.’ तसे केल्यावर, दररोज हरिण तेथे जाऊन धान्य खात असे. ते पाहून, एके दिवशी शेतमालकाने जाळे टाकले. तेथे आलेले हरिण जाळ्यामध्ये अडकले. त्याने विचार केला, “आता फक्त मित्रच माझा आसरा आहेत.” दूरवरून ते पाहणारा कोल्हा मनातून खूष झाला.

त्याने विचार केला, “माझे ईप्सित फळास आले. आता मला पुष्कळ खाद्य मिळेल.” ते पाहून हरिण म्हणाले, “अरे मित्रा, माझे हे बंध तोडून टाक. मला वाचव.” कोल्हा लांबूनच म्हणाला, “अरे मित्रा, हे बंध (फार) घट्ट आहेत, मी स्नायूंनी बनविलेल्या जाळ्याला उपवासाच्या दिवशी कसे तोंड लावू?” असे म्हणून तो जवळ असलेल्या झाडाच्या मागे स्थिर उभा राहिला.

After some time, the jackal said to the deer, “There is a field, full of grains in this forest. I(will) show (it) to you.’ Having done so, the deer ate the grain, going there everyday. Having seen this, one day a trap was set by the owner of the field. The dear, who had come (arrived) there, was trapped in the net.

He thought, “Now, my friends only are my resort.” The jackal, who was seeing it from a far was delighted in the mind. He thought, “My desire is fulfilled. Now I shall get plenty of food.” Having seen it, the deer said, “O friend, cut through my bonds. Please save me.” The jackal replied from a far “Ofriend, this bond is strong. How can I touch the net made of sinews on my fasting day?” Having said this, he stood steady behind the tree that was nearby.

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

परिच्छेदः 3.

प्रदोषकाले …………………हतः।

अनुवादः

तिन्हीसांजेच्या वेळी (सायंकाळी), हरिणाला शोधत कावळा तेथे हजर झाला. हरिणाला तशा प्रकारे पाहून तो म्हणाला, “अरे मित्रा ! हे काय?” हरिण म्हणाले, “मित्राच्या शब्दांची अवहेलना केल्यामुळे (शब्दांकडे दुर्लक्ष केल्यामुळे) मी अडकलो.

मराठी आणि म्हटलेले आहे – जो हितचिंतक मित्रांचे शब्द (सल्ला) ऐकत नाही, त्याच्याजवळ विपत्ती (निवास करते), अशी व्यक्ती शजूंना आनंदित करते.” (शत्रुत्व ओढवून घेते) कावळा म्हणाला, “तो (कपटी) फसविणारा कोठे आहे?” हरिण म्हणाले, “माझ्या मांसाच्या हावेने इथेच थांबला आहे.”

कावळा म्हणाला, ‘तर मग (यावर) उपाय शोधला पाहिजे.’ नंतर सकाळी, हातामध्ये काठी घेऊन येणाऱ्या शेतमालकाला कावळ्याने पाहिले. त्याला पाहून कावळा म्हणाला, “मित्रा हरिणा, तू स्वत:ला मेल्यासारखा दाखव.” (तुझे) पोट हवेने फुगवून पाय स्थिर ठेव.

जेव्हा मी आवाज करेन / ओरडेन, तेव्हा तू उठून पटकन पळ.” हरिण तसेच थांबले. शेतमालकाने हरिणाला पाहिले व म्हणाला, “बापरे ! तू तर मेलेला आहेस.” त्याने हरिणाला जाळ्यातून मुक्त केले. नंतर, कावळ्याचे ओरडणे ऐकल्यावर हरिण पटकन पळून गेले. शेताच्या मालकाने त्याला (हरिणाला) रोखून फेकलेल्या काठीने कोल्हा मारला गेला.

English At nightfall, the crow arrived there looking for the deer. Seeing the deer so (trapped) he said, “O friend! What is this?” The deer said, “I was caught (trapped) due to disregarding a friend’s words (advice).

and it is said The one who does not listen to words/advice of friends well-wishing, the calamity is placed close to him. That person is the delight of enemies. The crow said, “where is the deceiver ?” The deer said, “(He) is waiting here itself longing for my flesh.” The crow said, ‘We must think of a solution.’ Then in the morning, the crow saw the owner of the field coming with a stick in the hand.

Seeing him, the crow said, “O friend deer, pretend as if you are dead. Blow your belly with air, stiffen your legs and lie still. When I shall make a sound then, having stood up, you run away quickly The deer stayed accordingly. The owner of the field saw the deer and said, “Oh ! You are dead on your own.” He released the deer from the bonds.

Then, listening to the sound of the crow, the deer ran away quickly. Meanwhile, the stick which was thrown towards the deer by the owner of the field, killed the jackal.

Maharashtra Board Class 10 Sanskrit Amod Solutions Chapter 2 व्यसने मित्रपरीक्षा

शब्दार्थाः

  1. मृग – deer – हरिण
  2. काकः – crow – कावळा
  3. जम्बूकः – jackal – कोल्हा
  4. अवलोकितः – was seen – पाहिले
  5. अपरिचितः – stranger – अनोळखी
  6. कक्षित् – certain – कोणी एक
  7. भ्रमन् – roaming, wandering – भटकत असताना
  8. सख्यम् – friendship – मैत्री
  9. युक्ता – proper – योग्य
  10. शृगालेन – by jackal – कोल्ह्याने
  11. स्नेहेन – affectionately प्रेमाने
  12. स्वाहतुना – with selfish purpose – स्वार्थापोटी
  13. प्रथमदर्शने – at the first sight – प्रथमदर्शनी
  14. अस्तङ्गते – at the time of sunset – सूर्यास्त
  15. सवितरि – झाल्यावर
  16. निवसतः स्म – both used to live – दोघे राहत होते
  17. अबूत – said – म्हणाला
  18. अब्रवीत् – said – म्हणाला
  19. उक्तम् – said – म्हणाला
  20. आह – said – म्हणाला
  21. आकर्ण्य – having heard – ऐकून
  22. अकस्मात् – at once – अचानक
  23. सकोपम् – angrily – रागाने
  24. आगन्तुना सह – with a stranger – अनोळखी माणसासह
  25. दृढः – strong – घट्ट
  26. बन्धः – bond – बंध
  27. पाश: – noose – जाळे
  28. योजितः – arranged – व्यवस्था केली
  29. बद्धः – got stuck/caught – अडकले
  30. सस्यपूर्णम् – full of grains – धान्ययुक्त
  31. क्षेत्रम् – field – शेत
  32. शरणम् – resort – आश्रयस्थान, आसरा
  33. फलितम् – fulfilled – फळास आले
  34. मनोरथम् – desire – ईप्सित/इच्छा
  35. स्नायुनिर्मितान् – made of sinews – स्नायूंनी बनलेले
  36. क्षेत्रपतिना – by the field-owner – शेतमालकाने
  37. व्रतदिवसे – on the day of fast – उपवासादिवशी
  38. दर्शयामि – I show – मी दाखवतो
  39. प्रापयामि – I shall get – मला मिळेल
  40. छिन्धि – you break – तू तोड
  41. जायस्व – you save – तू वाचव
  42. प्रत्यहम् – every day – दररोज
  43. इदानीम् – now – आता
  44. प्रभूतम् – plenty of – भरपूर
  45. निभृतम् – still – निश्चल
  46. तथा कृते – having done so – तसे केल्यावर
  47. उपस्थितः – arrived – हजर झाला
  48. वञ्चक: – crooked / deceitful – फसविणारा
  49. लगुडहस्त: – stick in the hand – काठी हातात घेतलेला
  50. हतः – killed – मेलेला
  51. अन्विष्यन् – searching – शोधत
  52. विपत् – calamity – संकट
  53. सन्निहिता – placed close by – जवळ
  54. मृतवत् – like dead – मेल्यासारखा
  55. सुङद्वाक्यम् – friend’s speech – मित्राचे बोलणे
  56. वातेन – with air – हवेने
  57. क्षिप्तेन – thrown – फेकलेल्या
  58. अनादरात् – due to disrespecting – अवहेलना केल्यामुळे
  59. हितकामानाम् – of well-wishers – हितचिंतकांचे
  60. प्रदोषकाले – at the nightfall – तिन्हीसांजेला
  61. शृणोति – listens – ऐकतो
  62. पलायिष्यसे – you will run – पळशील
  63. व्यमुञ्चत् – released – मुक्त केले
  64. अब्रूत – said – म्हणाला
  65. संदर्शय – appear – दाखव
  66. उद्दिश्य – pointing – रोखून
  67. उत्थाय – having got up – उठून
  68. आलोक्य – seeing – पाहून
  69. स्तब्धीकृत्य – keeping still – स्थिर / स्तब्ध राहून
  70. क्व – where – कोठे
  71. उदरं पूरयित्वा – blowing the belly – पोट भरून
  72. मन्मांसार्थी – longing for my flesh – माझ्या मांसाच्या हावेने

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

Marathi Aksharbharati Std 9 Digest Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ Textbook Questions and Answers

स्वाध्याय :

1. योग्य पर्याय ओळखून वाक्य पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
लेखकांना शिरीषला कार्यक्रम दयायचा नव्हता, कारण …………….
(अ) तो नुकताच शिकायला आला होता.
(ब) त्याला वाक्य वाजवता येत नव्हते.
(क) नुकताच शिकायला आल्याने विद्यालयाचे नाव बदनाम होण्याची शक्यता होती.
(ड) तो कलेच्या प्रांतातला नवखा मुसाफिर होता.
उत्तर :
(क) नुकताच शिकायला आल्याने विद्यालयाचे नाव बदनाम होण्याची शक्यता होती.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 2.
लेखकांना आजपर्यंत बसला नव्हता तेवढा धक्का बसला, कारण ……………
(अ) बारा वर्षांचा मुलगा शांतपणे वाजवत होता.
(ब) ऐनवेळी कार्यक्रमाला हजर राहूनही शिरीष एवढे सुदंर वाजवत होता.
(क) शिरीषचा चेहरा पूर्वीच्या आत्मविश्वासाने न्हाऊन निघाला.
(ड) मात्रेचाही फरक न करता शिरीष गात होता.
उत्तर :
(ड) मात्रेचाही फरक न करता शिरीष गात होता.

2. आकृतिबंध पूर्ण करा. 

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 1
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 2

3. जोड्या जुळवा.

प्रश्न 1.
जोड्या जुळवा.
पुढील दोन चौकटीतील शब्दांचा सहसंबंध ओळखून जोड्या लावा. पाठातील असे शब्द शोधा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 3
उत्तरः

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. धीटभित्रा
2. हजर गैरहजरगैरहजर
3. सुंदरकुरूप
4. स्तुती निंदानिंदा

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

4. खालील परिणामांबाबतच्या घटना लिहा.

प्रश्न 1.
खालील परिणामांबाबतच्या घटना लिहा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 4
उत्तर :
i. लेखकाने सुमारे वीसएक मिनिटे पिलू रागातील एक गत वाजवून दाखवली.
ii. नानांना काहीच ऐकू येत नव्हते.

5. खालील वाक्यांत अधोरेखित शब्दांऐवजी पाठात आलेले योग्य वाक्प्रचार शोधून वाक्ये पुन्हा लिहा. 

प्रश्न 1.
खालील वाक्यांत अधोरेखित शब्दांऐवजी पाठात आलेले योग्य वाक्प्रचार शोधून वाक्ये पुन्हा लिहा.

  1. वर्गातील विदयार्थ्यांनी शिक्षकांचे शिकवणे लक्षपूर्वक ऐकले पाहिजे.
  2. आपल्या शाळेचे नाव वाईट होऊ नये, म्हणून प्रत्येक विदयार्थ्याने काळजी घ्यायला हवी.
  3. उत्तम वादनाने लेखकाचे शिरीषबाबतचे मत चांगले झाले.

उत्तर :

  1. वर्गातील विद्यार्थ्यांनी जिवाचे कान करून शिक्षकांचे शिकवणे ऐकले पाहिजे.
  2. आपल्या शाळेचे नाव खराब होऊ नये, म्हणून प्रत्येक विक्ष्यानि काळजी घ्यायला हवी.
  3. उत्तम वादनाने लेखकाचा शिरीषबाबतचा चांगला ग्रह झाला.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

6. खालील शब्द व त्यांचे अर्थ यांच्या जोड्या लावा. 

प्रश्न 1.
खालील शब्द व त्यांचे अर्थ यांच्या जोड्या लावा.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. कोलाहल(अ) प्रवासी
2. त-हेवाईक(आ) विचित्र
3. मुसाफिर(इ) प्रेरित
4. उदयुक्त(ई) गोंधळ

उत्तर :

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. कोलाहल(ई) गोंधळ
2. त-हेवाईक(आ) विचित्र
3. मुसाफिर(अ) प्रवासी
4. उदयुक्त(इ) प्रेरित

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

7. स्वमत :

प्रश्न अ.
शिरीषमधील तुम्हांला समजलेली गुणवैशिष्टचे सोदाहरण स्पष्ट करा.
उत्तर :
वडिलांच्या सुखासाठी धडपडणारा शिरीष हा दहा-बारा वर्षांचा मुलगा होता. वयाच्या मानाने परिस्थितीमुळे शिरीषला लवकरच शहाणपण आले होते. शिरीषच्या वडिलांचे संगीत कलेवर जिवापाड प्रेम होते. ते उत्कृष्ट गवई होते; परंतु एका अपघातामुळे ते पूर्ण बहिरे झाले. त्यांची संगीत सेवा अंतरली, याचे त्यांना दुःख झाले.

त्यामुळे वडिलांना सुख मिळावे याकरता शिरीषने संगीत कला शिकण्याचा निर्णय घेतला, शिरीषची आकलनशक्ती इतकी दांडगी होती की त्याने पहिल्या तीन महिन्यातच आपली प्रगती व कौशल्य दाखवून दिले. तो शिकवणीला न चुकता वेळेवर जात असे. यावरुन त्याचा नियमितपणा व वक्तशीरपणा दिसून येतो. त्याला आपल्या वडिलांविषयी आदर व प्रेम होते.

वडिलांच्या आजारपणाच्या काळात त्यांच्यासोबत राहून त्याने त्यांची सेवा केली. संगीतकलेची साधना केली. वडिलांच्या निधनानंतर ताबडतोब शिकवणीचे पैसे पाठवून दिले. या प्रसंगावरून त्याचा प्रामाणिकपणा दिसून येतो. वडील गेल्यावर तो फार दु:खी झाला. पण मन घट्ट करून तो परिस्थितीला सामोरा गेला.

लोकनिंदेकडे लक्ष न देता नानांना स्मरून अखंडपणे संगीताचा ध्यास घेतला, अहोरात्र सराव केला. यातून त्याची मेहनत व ध्येयपूर्तीची धडपड दिसून येते. कार्यक्रमाच्या दिवशी नवखा असूनही उत्तम वादन करून श्रोत्यांना व संगीत शिक्षकांना प्रभावित केले. यातून त्याचा आत्मविश्वास ब धीटपणा दिसून येतो. अशाप्रकारे, या पाठातून शिरीषचा ध्येयवेडेपणा, प्रामाणिकपणा, सातत्य, कष्ट, ध्यास व वडिलांच्या सौख्यासाठी केलेली धडपड ही गुणवैशिष्ट्ये प्रकर्षाने दिसून येतात.

प्रश्न आ.
शिरीषची भूमिका तुम्हाला कोणता संदेश देते, ते तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तर :
शिरीष हा दहा – बारा वर्षांचा मुलगा, त्याचे वडील एकेकाळी उत्कृष्ट गवई होते. पण एका जबर अपघातामुळे ते शिरीषने संगीत शिकून त्यात प्रावीण्य मिळवावे अशी त्यांची तीव्र इच्छा होती. वडिलांच्या सौख्यासाठी शिरीषने अखंडपणे संगीत कलेची साधना केली. वडिलांच्या निधनानंतरही लोकनिंदेची पर्वा न करता, त्या कठीण परिस्थितीतही त्याने आपले ध्येय गाठले. शिरीषच्या या खंबीर भूमिकेतून आपल्याला असा संदेश मिळतो की, आपणही आपल्या जीवनात कितीही मोठी संकटे आली तरी न डगमगता धैर्याने परिस्थितीशी सामना केला पाहिजे, कष्टाने सातत्याने आपल्या ध्येयाचा पाठपुरावा केला पाहिजे, ध्येयपूर्तीसाठी धडपड केली पाहिजे.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

8. अभिव्यक्ती: 

प्रश्न अ.
प्रस्तुत कथेचे संवादरूपाने लेखन करा.
उत्तर :
(शिरीष व त्याचे वडिल संगीत शिक्षकाच्या भेटीला जातात.)

  • शिरीष : नमस्कार ! मी शिरीष भागवत. मला गाण्याची फार आवड आहे. मला संगीत शिकायचे आहे.
  • संगीत शिक्षक : बरं, तुला गाण्याची फार आवड आहे तर!
  • शिरीष : माझ्यापेक्षा माझ्या वडिलांना, मी संगीत शिकलेले फार आवडेल. मी आपल्याकडे शिकायला येईन; पण माझ्याबरोबर रोज माझे वडील पण शिकवणी चालू असताना वर्गात बसतील. अशी माझी अट आहे.
  • संगीत शिक्षक : मान्य! तुझ्या अटी एकदम मान्य; पण तुला त्यासाठी महिना पन्नास रुपये फी दयावी लागेल!
  • शिरीष : कबूल! मी उद्यापासून शिकवणीला येतो. तीन महिने शिरीष नियमितपणे वडिलांसोबत शिकवणीला जातो. काही दिवसांनी शिरीषच्या वडिलांचे निधन होते. कार्यक्रमाच्या दिवशी शिरीष शिक्षकांना भेटायला जातो.)
  • शिरीष : माझ्या वडिलांचे निधन झाले, त्यामुळे मी शिकवणीला येऊ शकलो नाही, परंतु मला कार्यक्रमात सहभाग घेण्याची परवानगी दयावी, ही विनंती.
  • संगीत शिक्षक : शिरीष तुझी मन:स्थिती ठीक नाही. शिवाय गैरहजेरीमुळे तुझा सरावही नाही. त्यामुळे तुला परवानगी देता येणार नाही.
  • शिरीष : मला परवानगी दिली, तर माझी मन:स्थिती आपोआप सुधारेल, सर.
  • संगीत शिक्षक : ठीक आहे. दिली तुला परवानगी; पण नीट वाजव.
  • शिरीष : होय सर, धन्यवाद. (शिरीष उत्कृष्टपणे वादन करतो. श्रोते व शिक्षक सगळेच त्याचे वादन ऐकून प्रभावित होतात. कार्यक्रमाच्या शेवटी शिक्षक शिरीषला भेटतात व त्याचे कौतुक करतात.)
  • संगीत शिक्षक : अरे वा ! शिरीष. तू तर आज कमालच केली. अशा मन:स्थितीत तुला कसे शक्य झाले?
  • शिरीष : सर, माझे नाना मोठे गवई होते, परंतु एका अपघातामुळे ते ठार बहिरे झाले. त्यांच्या सुखासाठी मी ही धडपड करत होतो; पण ज्या दिवाशी नाना गेले त्या दिवशी मी संगीत बंद केले; पण दुसऱ्याच क्षणी मनात विचार आला की माझे नाना तेव्हा वादन ऐकूशकत नव्हते; पण आता माझ्याच शेजारी बसून नक्की ऐकत आहेत. या विचारा सरशी मी त्याच दिवासापासून व्हायोलिन वाजावाला सुरुवात केली. आज सकाळपासून कुठे बाहेर पडलो नाही. चोवीस तास एकच उदयोग, एकच ध्यास! त्याचा हा परिणाम.
  • संगीत शिक्षक : शाब्बास ! शिरीष तू फार मोठी कामगिरी केली. आज तुझे बाबा नाहीत. आज जर ते असते तर म्हणाले असते, ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ (शिक्षकांनी शिरीषच्या पाठीवर कौतुकाची थाप मारली, त्यावेळी शिरीषच्या डोळ्यांतून अश्रूओघळले.)

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

Marathi Akshar Bharati Class 9 Textbook Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ Additional Important Questions and Answers

पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार

कृती करा: कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 5

प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
उत्तर :
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Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 7

प्रश्न 3.
जोड्या जुळवा.

विशेषणबिशेष्य
1. तिसरी(अ) मुसाफिर
2. जाहीर(ब) घंटा
3. नवखा(क) कोलाहल
4. संमिश्र(ड) कार्यक्रम

उत्तर :

विशेषणबिशेष्य
1. तिसरी(ब) घंटा
2. जाहीर(ड) कार्यक्रम
3. नवखा(अ) मुसाफिर
4. संमिश्र(क) कोलाहल

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 4.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. कलेच्या प्रांतातील हा नवखा मुसाफिर आहे.
  2. म्हणूनच मी त्याला कार्यक्रम देण्याचे टाळत होता.
  3. मी गंभीर आवाजात बोलायला सुरुवात केली.
  4. मला या मुलाची अतिशय भीती वाटत होती.

उत्तर :

  1. मी गंभीर आवाजात बोलायला सुरुवात केली.
  2. कलेच्या प्रांतातील हा नवखा मुसाफिर आहे.
  3. मला या मुलाची अतिशय भीती वाटत होती.
  4. म्हणूनच मी त्याला कार्यक्रम देण्याचे टाळत होतो.

प्रश्न 5.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. लेखकाचा कोणता पहिलाच जाहीर कार्यक्रम आहे?
उत्तर :
लेखकाच्या वादनविदयालयाचा पहिलाच जाहीर कार्यक्रम आहे.

ii. बाहेरचा संमिश्र कोलाहल केव्हा बंद पडला?
उत्तर :
तिसरी घंटा घणघणली तेव्हा बाहेरचा संमिश्र कोलाहल बंद पडला.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 6.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
i. कलेच्या प्रांतातील हा नवखा ……….. आहे. (प्रवासी, मुसाफिर, यात्री, सहप्रवासी)
ii. आजच्या कार्यक्रमाची सुरुवात शिरीष भागवत यांच्या ………………. होईल. (तंतुवादनाने, तबलावादनाने, वीणावादवाने, फिड्लवादनाने)
उत्तर :
i. मुसाफिर
ii. फिड्लवादनाने

प्रश्न 7.
सहसंबंध लिहा.
स्त्री : पुरुष :: विद्यार्थिनी : …………
उत्तर :
विदयार्थी

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
कोण ते लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 8

प्रश्न 2.
कोष्टक पूर्ण करा
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 9

प्रश्न 3.
योग्य पर्याय निवडून विधान पूर्ण करा.
लेखकाला शिरीषला कार्यक्रम दयायचा नव्हता; कारण
(अ) तो नुकताच शिकायला आला होता.
(ब) त्याला वाक्य वाजवता येत नव्हते.
(क) नुकताच शिकायला आल्याने विद्यालयाचे नाव बदनाम होण्याची शक्यता होती.
(ड) तो कलेच्या प्रांतातला नवखा मुसाफिर होता.
उत्तर :
(क) नुकताच शिकायला आल्याने विद्यालयाचे नाव बदनाम होण्याची शक्यता होती.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 4.
चूक की बरोबर लिहा.
i. लेखकाला शिरीषला कार्यक्रम दयायचा होता,
ii. शिरीष हा अनुभवी वादक होता.
उत्तर :
i. चूक
ii. चूक

प्रश्न 5.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 10

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्ये लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
i. कलेच्या प्रांतातिल हा नवखा मुसाफीर आहे.
ii. मला या मूलाची अतिशय भिती वाटत होती.
उत्तर:
i. कलेच्या प्रांतातील हा नवखा मुसाफिर आहे.
ii. मला या मुलाची अतिशय भीती वाटत होती.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन सर्वनामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. मी
  2. मला
  3. माझ्या

प्रश्न 3.
उताऱ्यातील दोन विशेषणे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. अतिशय
  2. संमिश्र
  3. नवखा

प्रश्न 4.
लिंग बदला
i. स्त्री-
ii. विद्यार्थिनी –
उत्तर:
i. पुरुष
ii. विद्यार्थी

प्रश्न 5.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. शेवट × [ ]
  2. निंदा × [ ]
  3. दुःख × [ ]

उत्तर :

  1. सुरुवात
  2. कौतुक
  3. आनंद

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प्रश्न 6.
वाक्प्रचाराचा अर्थ लिहून वाक्यात उपयोग करा, स्थिर होणे
उत्तर :
स्थिर होणे – शांत होणे
वाक्य: मुख्याध्यापकाचा आवाज ऐकताच वर्गातील सर्व विद्यार्थी आपापल्या जागेवर स्थिर झाले.

प्रश्न 7.
खालील दिलेल्या वाक्यांचा काळ ओळखा.
i. मी त्याला कार्यक्रम देण्याचे टाळत होतो.
ii. कला सादर करताना मला अतिशय आनंद वाटत आहे.
उत्तर:
i. भूतकाळ
ii. वर्तमानकाळ

प्रश्न 8.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 11

कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
तुम्ही स्टेजवर एखादा कार्यक्रम जरूर सादर केलेला असाल त्यावेळी आलेल्या तुमच्या अनुभवांचे वर्णन करा.
उत्तर :
स्टेजवर एखादा कार्यक्रम सादर करणे म्हणजे आनंदाची एक पर्वणीच असते. मी अनेकदा स्टेजवर कार्यक्रमात सहभागी झालेलो आहे. एकदा मी शालेय नाटकस्पर्धेत भाग घेतला होता. त्या नाटकात मी नायकाची भूमिका वठवली होती. तो माझा स्टेजवरील पहिलाच अनुभव होता. त्यामुळे संवाद बोलताना व अभिनय करताना सुरुवातीला मला धास्तीच वाटत होती. मनावर एक प्रकारचे दडपण आलेले होते.

मनात अनेक वेळा शंका येत होती की जर एखादा संवाद चुकला तर संपूर्ण नाटकाचा बट्याबोळ होईल. पण प्रत्यक्षात जेव्हा मी स्टेजवर अभिनय व संवाद यांचा सुंदर समन्वय साधू लागलो, तेव्हा मात्र प्रेक्षकांनी टाळ्या वाजवून मला दाद दिली. मग मला हुरूप आला आणि मी माझी भूमिका चांगल्या प्रकारे वठवून सर्वांच्या स्तुतीस पात्र ठरलो. माझा आनंद गगनात मावेनासा झाला.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 12

प्रश्न 2.
जोड्या जुळवा.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. फूटलाईट(अ) प्रतिबिंबित
2. मन(ब) ध्यान
3. डोळे मिटून(क) झगझगीत प्रकाश
4. चेहऱ्यावरचा आत्मविश्वास(ड) चलबिचल

उत्तर :

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. फूटलाईट(क) झगझगीत प्रकाश
2. मन(ड) चलबिचल
3. डोळे मिटून(ब) ध्यान
4. चेहऱ्यावरचा आत्मविश्वास(अ) प्रतिबिंबित

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार घटनांचा क्रम लावा.

  1. फुटलाइटचा झगझगीत प्रकाश डोळयांवर पडताच शिरीषने डोळे मिटून घेतले.
  2. तंबोऱ्याचा धीरगंभीर आवाज घुमू लागला.
  3. चेहऱ्यावर धीटपणा व आत्मविश्वास पुरेपूर प्रतिबिंबित झाला.
  4. हलकेच त्याने ‘षड्ज’ लावला.

उत्तर :

  1. चेहऱ्यावर धीटपणा व आत्मविश्वास पुरेपूर प्रतिबिंबित झाला.
  2. फूटलाइटचा झगझगीत प्रकाश डोळ्यांवर पडताच शिरीषने डोळे मिटून घेतले.
  3. तंबोऱ्याचा धीरगंभीर आवाज घुमू लागला.
  4. हलकेच त्याने ‘षड्ज’ लावला

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. लेखक शिरीषबाबत काय ओळखून होता?
उत्तर :
शिरीषचे अवसान फार वेळ राहणार नाही, हे लेखक ओळखूनोता.

ii. शिक्षक या नात्याने लेखकाचे कोणते कर्तव्य होते?
उत्तर :
कार्यक्रमात शिरीषला सावरून धरणे हे शिक्षक या नात्याने लेखकाचे कर्तव्य होते.

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प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा,

  1. पडदा ……….. वर गेला. (पटकन, झटकन, झरझर, भरभर)
  2. तो …………. गेला आहे, हे मी ओळखले. (गडबडून, घाबरून, गोंधळून, विधरून)
  3. त्याचा चेहरा पूर्वीच्या ……….. न्हाऊन निघाला. (धीटपणाने, अभिमानाने, गनि, आत्मविश्वासाने)

उत्तर:

  1. झरझर
  2. गडबडून
  3. आत्मविश्वासाने

प्रश्न 6.
सहसंबंध लिहा.
तंबोऱ्याचा आवाज : धीरगंभीर :: मनाची अवस्था : ……
उत्तर :
चलबिचल

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कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधान पूर्ण करा.
फूटलाइटचा झगझगीत प्रकाश डोळ्यांवर पडताच …………
(अ) शिरीषने डोळे पटकन उघडले.
(ब) शिरीषने डोळे झपकन मिटून घेतले.
(क) शिरीषने डोळे मिटून घेतले.
(ड) शिरीषने डोळ्यांवर हात ठेवला.
उत्तर :
(क) शिरीषने डोळे मिटून घेतले.

प्रश्न 2.
कोण ते लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 13

प्रश्न 3.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 14

प्रश्न 4.
कोष्टक पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 15

प्रश्न 5.
चूक की बरोबर लिहा.
i. लेखकाने तंबोरेवाल्याला व तबलेवाल्याला खूण केली नाही.
ii. शिरीषने डोळे मिटून कुणाचे तरी ध्यान केल्यासारखे दिसले.
उत्तर :
i. चूक
ii. बरोबर

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कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
लेखननियमांनुसार वाक्ये शुद्ध करून लिहा.
i. शिरीषने डोळे मीटून कुणाचे तरि ध्यान केल्यासारखे दिसले.
ii. तंबोऱ्याचा धिरगंभीर आवाज घूमु लागला.
उत्तर :
i. शिरीषने डोळे मिटून कुणाचे तरी ध्यान केल्यासारखे दिसले.
ii. तंबोऱ्याचा धीरगंभीर आवाज घुमू लागला.

प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन नामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. चेहरा
  2. प्रकाश
  3. डोळे
  4. पडदा

प्रश्न 3.
वचन बदला.
i. डोळा – [ ]
i. सवयी – [ ]
उत्तर :
i. डोळे
ii. सवय

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प्रश्न 4.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
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कृती प्रश्न 4. स्वमत

प्रश्न 1.
कोणत्याही कलेसाठी धीटपणा व आत्मविश्वास आवश्यक असतो. यावर तुमचे मत लिहा.
उत्तर :
कोणतीही कला असो, ती शिकताना वा तिचे सादरीकरण करताना कलावंताजवळ धीटपणा व आत्मविश्वास असणे आवश्यक असते. खरे पाहता हे दोन्ही गुण कलेसाठी पूरक असतात. आत्मविश्वास ही यशाची पहिली पायरी असते, तर धीटपणा कला सादर करताना अप्रत्यक्षपणे अभिव्यक्त होत असतो. त्यामुळे कला शिकताना व ती सादर करताना व्यक्तीला कोणत्याही प्रकारची अडचण येत नाही. उलट व्यक्ती खंबीरपणे कला आत्मसात करू लागते, तसेच तिचे सादरीकरण ही तितक्याच तन्मयतेने करते. धीटपणा व आत्मविश्वास अंगी बाळगल्यामुळे व्यक्तीचे चित्त इतर घटकांकडे वळत नाही. कला सादर करते वेळी हजारो प्रेक्षकांपुढे ती सादर करताना व्यक्तीच्या मनाची चलबिचल होत नाही.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. लेखकाच्या शिकवणीची फी – [ ]
ii. सहा महिन्यापूर्वी विदयालयात आलेला विद्यार्थी – [ ]
उत्तर :
i. पन्नास रूपये
ii. शिरीष भागवत

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प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. टपणे त्याने विचारले, ‘आपणच का पी. जनार्दन ?’
  2. सुमारे सहा महिन्यांपूर्वी शिरीष माझ्या विद्यालयात आला.
  3. ‘त्यासाठी तुला महिना पन्नास रुपये फी क्यावी लागेल!’
  4. धीमेपणाने शिरीषने भूप रागातील गत वाजायला सुरुवात केली.

उत्तर :

  1. धीमेपणाने शिरीषने भूप रागातील गत वाजायला सुरुवात केली.
  2. सुमारे सहा महिन्यांपूर्वी शिरीष माझ्या विद्यालयात आला.
  3. धीटपणे त्याने विचारले, ‘आपणच का पी. जनार्दन?’
  4. ‘त्यासाठी तुला महिना पन्नास रुपये फी दयावी लागेल.’

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. शिरीषने धीमेपणाने कोणत्या रागातील गत वाजवायला सुरुवात केली?
उत्तर :
शिरीषने धीमेपणाने भूप रागातील गत वाजवायला सुरुवात केली.

ii. शिरीषला घरी कोणत्या नावाने बोलावले जायचे?
उत्तर :
शिरीषला घरी ‘श्री’ या नावाने बोलावले जायचे.

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प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा,
i. सुमारे ………………….. महिन्यांपूर्वी शिरीष विदयालयात आला. (सहा, सात, दहा, चार)
ii. ……………… शिरीषने भूप रागातील गत वाजवायला सुरुवात केली. (पटापट, हळूवारपणे, धीमेपणाने, धीम्यागतीने)
उत्तर :
i. सह्य
ii. धीमेपणाने

प्रश्न 6.
सहसंबंध लिहा.
कानांवर : विश्वास :: पंचेंद्रिये : ……………..
उत्तर :
दगा

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कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून खालील विधान पूर्ण करा.
तुझ्या अटी एकदम मान्य; …………….
(अ) पण त्यासाठी तुला महिना साठ रुपये फी दयावी लागेल!
(ब) पण त्यासाठी तुला महिना पन्नास रुपये फी क्यावी लागेल!
(क) पण त्यासाठी तुला शंभर रुपये फी दयावी लागेल!
पण त्यासाठी तुला सत्तर रुपये फी क्यावी लागेल!
उत्तर :
तुझ्या अटी एकदम मान्य; पण त्यासाठी तुला महिना पन्नास रुपये फी दयावी लागेल!

प्रश्न 2.
कोण ते लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 18

प्रश्न 3.
आकृतिबंध पूर्ण करा,
उत्तर :
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प्रश्न 4.
चूक की बरोबर लिहा.

  1. शिरीषला शिकविण्याची लेखकाची अजिबात इच्छा नव्हती.
  2. लेखकाला शिरीषचा राग आला.
  3. शिरीषने मल्हार रागातील गत वाजवायला सुरुवात केली.

उत्तर :

  1. चूक
  2. बरोबर
  3. चूक

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प्रश्न 5.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर :
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कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्ये लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
i. माझ्यापेक्षा माझ्या वडीलांना, मि शिकलेले फार आवडेल.
ii. पण त्यासाठी तुला महीना पन्नास रुपये फि द्यावी लागेल.
उत्तर :
i. माझ्यापेक्षा माझ्या वडिलांना, मी शिकलेले फार आवडेल.
ii. पण त्यासाठी तुला महिना पन्नास रुपये फी क्यावी लागेल.

प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन विशेषणे शोधून लिहा,
उत्तर :

  1. सुहास्य
  2. चमत्कारिक
  3. थोडासा

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प्रश्न 3.
लिंग बदला
i. आई – [ ]
ii. मुलगी – [ ]
उत्तर :
i. वडील
ii. मुलगा

प्रश्न 4.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. उठतील × – [ ]
  2. घेणे × – [ ]
  3. अमान्य × – [ ]
  4. बंद × – [ ]

उत्तर :

  1. बसतील
  2. देणे
  3. मान्य
  4. चालू

प्रश्न 5.
समानार्थी शब्द लिहा.
i. पिता – [ ]
ii. चेहरा – [ ]
उत्तर :
i. वडील
ii. मुद्रा

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प्रश्न 6.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहून वाक्यात उपयोग करा.
i. धक्का बसणे
ii. नवल वाटणे
iii. शंका वाटणे
उत्तर :
i. अर्थ : आघात होणे
वाक्य : मुलाच्या मृत्यूची बातमी ऐकताच आईवडिलांना जोरदार धक्का बसला.

ii. अर्थ : आश्चर्य वाटणे
वाक्य : पावसात पिसारा फुलवून नाचणारा मोर बघताना सर्वांना नवल वाटते.

iii. अर्थ : संशय वाटणे
वाक्य : रमेशच्या वागण्याची पोलिसांना शंका वाटू लागली.

प्रश्न 7.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
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कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
गाणे गाताना सूर महत्त्वाचे असतात. असे जे म्हटले जाते ते तुम्हास पटते का?
उत्तर :
गाणे गाताना सूर महत्त्वाचे असतात. गाणे गात असलेल्या व्यक्तीला सूरांचे भान ठेवावेच लागते. जर सूर तंतोतंत जुळले तरच व्यक्तीने गाणे चांगल्या प्रकारे सादर केले असे म्हटले जाते. समजा एखाद्या व्यक्तीने गाणे सादर करताना सुरांचा ताळमेळ राखला नाही म्हणजे सूर भटकले तर गाणे गात असलेल्या व्यक्तीचे गाणे चांगल्या प्रकारे सादर होऊच शकत नाही. असे गाणे मनाला भिडत नाही व हृदयात घर करू शकत नाही. चांगले गाणे म्हणजे सुरांचे ताळतंत्र लक्षात घेऊन गायलेल्या गाण्याची सर्व प्रेक्षक वर्ग दाद देतात. अशीच व्यक्ती एक उत्कृष्ट गायक म्हणून नावारूपाला येते. समाजात कलावंत म्हणून ओळखली जाते.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. नानांच्या चेहऱ्यावरील भाव – [ ]
ii. लेखकाने वाजवून दाखविलेली गत – [ ]
उत्तर :
i. तृप्तीच्या समाधानाचे
ii. पिलू रागातली

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प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. एक अक्षर न बोलता नाना खुर्चीवर बसले.
  2. हे माझे गुरुजी, नाना आणि हे माझे वडील!
  3. आमचे नमस्कार झाले.
  4. ‘वा उत्कृष्ट! त्याबद्दल प्रश्नच नाही शिरीषनेच मध्ये उत्तर दिले.

उत्तर :

  1. हे माझे गुरुजी, नाना आणि हे माझे वडील!
  2. आमचे नमस्कार झाले.
  3. एक अक्षर न बोलता नाना खुर्चीवर बसले.
  4. ‘वा उत्कृष्ट! त्याबद्दल प्रश्नच नाही’ शिरीषनेच मध्ये उत्तर दिले.

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. लेखकाला कशाचा राग आला?
उत्तर :
लेखकाला शिरीषच्या आगाऊ स्वभावाचा राग आला होता.

ii. शिरीष बरोबर कोण होते?
उत्तर :
शिरीष बरोबर नाना (वडील) होते.

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iii. लेखकाने कोणत्या रागातील गत वाजवून दाखवली?
उत्तर :
लेखकाने पिलू रागातील गत वाजवून दाखवली.

प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा,
i. दुसरे दिवशी तो अगदी ………….. आला. (वेळेव्याआधी, वेळेनंतर, वेळेवर, बऱ्याच वेळाने)
ii. एक अक्षर न बोलता नाना ………….. बसले.
(खुर्चीवर, टेबलावर, आरामखुर्चीवर, बिछान्यावर)
उत्तर :
i. वेळेवर
ii. खुर्चीवर

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधान पूर्ण करा.
लेखकाचा शिरीषबद्दलचा ग्रह चांगला झाला; कारण …………
(अ) शिरीषने स्वत:बरोबर वही वगैरे आणलेली लेखकाने पाहिली.
(ब) शिरीषने व्हायोलिन आणले होते.
(क) शिरीषने ढोलकी आणली होती.
(ङ) शिरीषने स्वत:बरोबर पेन आणला होता.
उत्तर :
(अ) शिरीषने स्वत:बरोबर वही वगैरे आणलेली लेखकाने पाहिली.

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प्रश्न 2.
कोण ते लिहा.
उत्तर :
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प्रश्न 3.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 24

प्रश्न 4.
कोष्टक पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 25

प्रश्न 5.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 6.
चूक की बरोबर लिहा.
एक अक्षर न बोलता नाना खुर्चीवरून उठले.
उत्तर :
चूक

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प्रश्न 7.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 26

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
लेखननियमांनुसार वाक्य शुद्ध करून लिहा.
शिरीष बरोबर एक वयसकर आणि भारदसत गृहस्थ होते.
उत्तर :
शिरीष बरोबर एक वयस्कर आणि भारदस्त गृहस्थ होते.

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प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन नामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. वडील
  2. शिरीष
  3. गुरुजी
  4. नाना
  5. खुर्ची
  6. व्हायोलिन
  7. विदयालय
  8. विदयार्थी
  9. पिता
  10. पुत्र

प्रश्न 3.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. शिकवणी – [ ]
  2. नियम – [ ]
  3. शिक्षक – [ ]
  4. संवेदना – [ ]
  5. म्हातारा – [ ]
  6. पद्धत – [ ]
  7. उद्देश – [ ]
  8. उत्तम – [ ]

उत्तर :

  1. अध्यापन
  2. अट
  3. गुरुजी
  4. जाणीव
  5. वयस्कर
  6. प्रथा
  7. हेतू
  8. उत्कृष्ट

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 4.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. तरुण × [ ]
  2. नाकबूल × [ ]
  3. आज × [ ]
  4. रात्र × [ ]

उत्तर :

  1. वयस्कर
  2. कबूल
  3. उदया
  4. दिवस

प्रश्न 5.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
विद्यालयातविद्यालया
चेहऱ्याकडेचेह-या
स्वभावाचास्वभावा

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 6.
खालील वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहा.
i. एक अक्षर न बोलणे
ii. प्रथा असणे
उत्तर :
i. एक अक्षर न बोलणे – गप्प बसून राहणे
ii. प्रथा असणे – पद्धत असणे

प्रश्न 7.
खालील दिलेल्या वाक्यांचा काळ ओळखा.
i. व्हायोलिन काढले व शिरीषच्या हातात दिले होते.
ii. शिरीष माझ्याकडे व नानांकडे आळी-पाळीने बघत आहे.
उत्तर :
i. भूतकाळ
ii. वर्तमानकाळ

प्रश्न 8.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 27

कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
एखाक्याचा स्वभाव आगाऊ असतो म्हणजे कसा? हे तुमच्या शब्दात सांगा.
उत्तर :
आगाऊ स्वभाव म्हणजे थोडासा उद्धट असा स्वभाव असलेली व्यक्ती स्वभावाने बिनधास्त असते. कधीही कोणाला न घाबरता प्रश्न विचारणे हा तिचा स्वभाव असतो. अशी व्यक्ती इतरांशी बोलताना स्पष्टपणे आपले विचार व्यक्त करते. आपल्या समोरील व्यक्ती आपल्यापेक्षा वयाने छोटी आहे की मोठी हे सुद्धा ती पाहत नाही व आपले मत त्यांच्यासमोर स्पष्टपणे व्यक्त करते. अशा व्यक्तींशी जर कोणी थोडा फार आवाज चढवून बोलले तर अशा स्वभावाच्या व्यक्तींना फारच राग येतो व मग आपल्याशी आवाज चढवून बोलत असलेल्या व्यक्तीचा पाणउतारा केल्याशिवाय ती गप्प राहूच शकत नाही.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 28

प्रश्न 2.
कोण ते लिहा.
i. भोचकपणे उत्तर देणारा .
ii. शिरीष बरोबर रोज यायचे
उत्तर :
i. शिरीष
ii. नाना (वडील)

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. त्याचा चेहरा काहीसा उतरला!
  2. ते कौतुकाच्या नजरेनेच त्याच्याकडे पाहत होते.
  3. शिरीषला अत्यानंद होईल अशी कल्पना होती.
  4. ‘माझ्यापेक्षा नानांना त्याचा आनंद जास्त होईल.’

उत्तर :

  1. ते कौतुकाच्या नजरेनेच त्याच्याकडे पाहत होते.
  2. शिरीषला अत्यानंद होईल अशी कल्पना होती.
  3. त्याचा चेहरा काहीसा उतरला!
  4. ‘माझ्यापेक्षा नानांना त्याचा आनंद जास्त होईल.’

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. नाना कोणाला दम भरतील असे लेखकाला वाटत होते?
उत्तर :
नाना शिरीषला दम भरतील असे लेखकाला वाटत होते.

ii. नाना शिरीषकडे कोणत्या नजरेने पाहत होते?
उत्तर :
नाना शिरीषकडे कौतुकाच्या नजरेने पाहत होते.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
i. नियमितपणे रोज ………….” जोडी येऊ लागली. (मातापित्याची, पितापुत्राची, काकापुतण्याची, दादामामाची)
ii. हां हां म्हणता “” “महिने निघून गेले! (चार, पाच, तीन, सहा)
उत्तर :
i. पितापुत्राची
ii. तीन

प्रश्न 6.
सहसंबंध लिहा.
आकलनशक्ती : दांडगी :: ठाशीव स्वरूपाचे : ………………..
उत्तर :
उत्तर

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा,
i. लेखकाच्या सर्व विदयार्थ्यांत त्याची ……………….
(अ) स्मरणशक्ती फारच दांडगी होती.
(ब) आकलनशक्ती फारच दांडगी होती,
(क) विचारशक्ती फारच दांडगी होती.
(ड) चिंतनशक्ती फारच दांडगी होती.
उत्तर :
(ब) आकलनशक्ती फारच दांडगी होती,

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

ii. लेखकाने आपल्या विद्यालयाच्या प्रथम कार्यक्रमात आपण ……..
(अ) अमेयला कार्यक्रम दयायचा असा निश्चय केला.
(ब) नानांना कार्यक्रम दयायचा असा निश्चय केला.
(क) शिरीषला कार्यक्रम व्यायचा असा निश्चय केला.
(ड) गुरुजींना कार्यक्रम दयायचा असा निश्चय केला.
उत्तर :
(क) शिरीषला कार्यक्रम व्यायचा असा निश्चय केला.

प्रश्न 2.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 29

प्रश्न 3.
चूक की बरोबर लिहा.

  1. गंभीर आवाजात ठाशीव स्वरूपाचे उत्तर आले.
  2. माझ्यापेक्षा नानांना त्याचे दु:ख जास्त होईल.
  3. लेखक नानांशी बोलत नसत.

उत्तर :

  1. बरोबर
  2. चूक
  3. बरोबर

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प्रश्न 4.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 30

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्ये लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा,
i. भोचकपणे शीरीषच पून: म्हणाला
ii. एक अक्षरहि न बोलता शांत बसुन राहात.
उत्तरः
i. भोचकपणे शिरीषच पुन्हा म्हणाला.
ii. एक अक्षरही न बोलता शांत बसून राहात.

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प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन विशेषणे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. अतिशय
  2. सर्व
  3. गंभीर
  4. प्रथम

प्रश्न 3.
अचूक शब्द लिहा.
i. निश्चय, निशचय, नीश्चय, निशय
ii. विदयालय, बीद्यालय, वीदय्यालय, विद्यालय
उत्तर :
i. निश्चय
ii. विद्यालय

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प्रश्न 4.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. प्रशंसा – [ ]
  2. नवल – [ ]
  3. सुधारणा – [ ]
  4. निर्धार – [ ]

उत्तर :

  1. कौतुक
  2. आश्चर्य
  3. प्रगती
  4. निश्चय

प्रश्न 5.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. निंदा × [ ]
  2. अधोगती × [ ]
  3. जड × [ ]
  4. अनियमित × [ ]

उत्तर :

  1. कौतुक
  2. प्रगती
  3. हलका
  4. नियमित

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प्रश्न 6.
उताऱ्यातील दोन अनेकवचनी शब्द शोधून लिहा.
उत्तर :
i. महिने
ii. विदयार्थी

प्रश्न 7.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
स्वरूपाचेस्वरूपा
कौतुकाच्याकौतुका
विद्यार्थ्यातविदयाथ्यो
आनंदाच्याआनंदा

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प्रश्न 8.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहा.

  1. दम भरणे
  2. अक्षरही न बोलणे
  3. निश्चय करणे
  4. अत्यानंद होणे

उत्तर :

  1. दम भरणे – ओरडणे
  2. अक्षरही न बोलणे – गप्प बसणे
  3. निश्चय करणे – ठरवणे
  4. अत्यानंद होणे – खूप आनंद होणे

प्रश्न 9.
खालील दिलेल्या वाक्यांचा काळ ओळखा.
i. मी पण त्यांच्याशी बोलत नसे.
ii. तुझा कार्यक्रम आहे.
उत्तर :
i. भूतकाळ
ii. वर्तमानकाळ

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प्रश्न 10.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
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कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
मुलांच्या कर्तृत्वाचे त्यांच्यापेक्षा त्यांच्या पालकांनाच अधिक कौतुक वाटते असे जे म्हटले जाते ते तुम्हास पटते का?
उत्तर :
मुलांच्या कर्तृत्वाचे त्यांच्यापेक्षा त्यांच्या पालकांनाच अधिक कौतुक वाटते असे जे म्हटले जाते ते मला शंभर टक्के पटते. प्रत्येक आई-वडील आपल्या मुलांना लहानाचे मोठे करतात त्यांना शिक्षण देतात. प्रत्येक आई-वडिलांचे स्वप्न असते की आपल्या लाडक्याने मोठे होऊन आपल्या घराचे, समाजाचे व देशाचे नाव मोठे करावे. जेव्हा मुले परीक्षेत प्रथम येतात.

डॉक्टर किंवा अभियंता होतात, तेव्हा त्यांच्या आई-बाबांना ब्रह्मानंद झाल्याशिवाय राहत नाही. मुलांपेक्षा त्यांनाच अधिक कौतुक वाटते. त्यांच्या मुलांनी आयुष्यात मिळविलेले यश हे त्यांनी आयुष्यभर कष्ट करून मिळविलेल्या तपाचे फळ असते. म्हणून मुलांच्या कर्तृत्वाचे त्यांच्यापेक्षा त्यांच्या पालकांनाच अधिक कौतुक वाटते, असे जे म्हटले जाते ते अगदी योग्यच आहे.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 32

प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. शिरीष न येण्याचे कारण – [ ]
ii. लेखक बेचैन झाला होता – [ ]
उत्तर :
i. नाना आजारी होते.
ii. शिरीषच्या आठवणीने

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. ‘नाना आजारी असल्यामुळे शिरीष येऊ शकणार नाही.’
  2. समारंभाचा दिवस उगवला.
  3. मी जरा स्वस्थ बसतो न बसतो तोच दारात शिरीष उभा!
  4. दुसऱ्या दिवशीसुद्धा शिरीष आला नाही.

उत्तर :

  1. दुसऱ्या दिवशीसुद्धा शिरीष आला नाही.
  2. ‘नाना आजारी असल्यामुळे शिरीष येऊ शकणार नाही.’
  3. समारंभाचा दिवस उगवला.
  4. मी जरा स्वस्थ बसतो न बसतो तोच दारात शिरीष उभा!

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. लेखकाच्या मनात वरचेवर कोणती शंका येत असे?
उत्तर :
नाना जवळ असताना शिरीष मोकळ्या मनाने व्हायोलिन वाजवत नसावा अशी शंका लेखकाच्या मनात वरचेवर येत असे.

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ii. शिरीषच्या आठवणीने कोण बेचैन झाले होते?
उत्तर :
शिरीषच्या आठवणीने लेखक बेचैन झाला होता.

प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
i. मी जरा स्वस्थ बसतो न बसतो तोच दारात ………………… उभा! (शिरीष, नाना, शिक्षक, गिरीष)
ii. ……….. गेले आणि प्रत्येक वेळी मिळणाऱ्या शिरीषच्या त-हेवाईक उत्तराचे आश्चर्य करीत मी बसलो.
(मातापिता, काकापुतण्या, पितापुत्र, काकाकाकी)
उत्तर :
i. शिरीष
ii. पितापुत्र

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधान पूर्ण करा.
या शिवाय आणखीन एक शंका लेखकाच्या मनात वरचेवर येत असे, ती म्हणजे …………..
(अ) लेखक असताना शिरीष मोकळ्या मनाने व्हायोलिन वाजवत नाही.
(ब) नाना जवळ असताना शिरीष मोकळ्या मनाने व्हायोलिन वाजवत नाही.
(क) नाना जवळ असताना शिरीष मोकळया मनाने गिटार वाजवत नाही.
(ड) नाना असताना शिरीष मोकळ्या मनाने पेटी वाजवत नाही.
उत्तर :
(ब) नाना जवळ असताना शिरीष मोकळ्या मनाने व्हायोलिन वाजवत नाही.

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प्रश्न 2.
कोण ते लिहा, – [ ]
i. आजारी होते – [ ]
ii. आठवणीने बेचैन होता
उत्तर :
i. नाना
ii. लेखक

प्रश्न 3.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 33

प्रश्न 4.
चूक की बरोबर लिहा.
i. त्याचा हा पहिला खाडा, नसेल एखादवेळेस जमले.’
ii. ‘नाना ठणठणीत असल्यामुळे शिरीष येऊ शकणार नाही.’
उत्तर :
i. बरोबर
ii. चूक

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कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्य लेखननियमानुसार शुद्ध करून लिहा.
त्याचे नाव पण काढायचे नाही, असे ठरवुन मि बाकीचे विद्यार्थी तयार केले.
उत्तर :
त्याचे नाव पण काढायचे नाही, असे ठरवून मी बाकीचे विद्यार्थी तयार केले.

प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन नामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. पिता
  2. पुत्र
  3. शिरीष
  4. नाना
  5. मनुष्य
  6. फी
  7. पैसे
  8. कार्यक्रम
  9. सकाळ
  10. दार

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प्रश्न 3.
उताऱ्यातील दोन विशेषण शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. 0त-हेवाईक
  2. मोकळ्या
  3. पहिला

प्रश्न 4.
अचूक शब्द लिहा.
i. बेचैन, बैचन, बैचेन, बेचन
ii. व्हायोलिन, व्हायलिन, व्ायलीन, व्होयालीन
उत्तर :
i. बेचैन
ii. व्हायोलिन

प्रश्न 5.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. पिता – [ ]
  2. पुत्र – [ ]
  3. खाडा – [ ]
  4. रहस्य – [ ]
  5. शंका – [ ]
  6. दिवस – [ ]

उत्तर :

  1. वडील
  2. मुलगा
  3. गैरहजेरी
  4. गुपित
  5. संशय
  6. दिन

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प्रश्न 6.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. रात्र × [ ]
  2. चूक × [ ]
  3. अवेळी × [ ]
  4. प्रश्न × [ ]
  5. जवळ × [ ]
  6. मावळला × [ ]
  7. अस्वस्थ × [ ]

उत्तर :

  1. दिवस
  2. बरोबर
  3. वेळी
  4. उत्तर
  5. दूर
  6. उगवला
  7. स्वस्थ

प्रश्न 7.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
प्रश्नाचेप्रश्ना
थोड्याशाथोड्या

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प्रश्न 8.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहून वाक्यात उपयोग करा.
i. आश्चर्यचकित होणे
ii. बेचैन होणे
उत्तर :
i. अर्थ : नवल वाटणे
वाक्य : सर्कसमध्ये प्राण्यांचे खेळ पाहून मुले आश्चर्यचकित झाली.

ii. अर्थ : अस्वस्थ होणे
वाक्य : आई घरात न दिसल्याने भूषण बेचैन झाला होता.

प्रश्न 9.
खालील दिलेल्या वाक्यांचा काळ ओळखा.
i. त्याचा ा पहिला खाडा होता.
ii. मी उगाचच बेचैन झालो आहे.
उत्तर :
i. भूतकाळ
ii. वर्तमानकाळ

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प्रश्न 10.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 34

कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
ऐन कार्यक्रमाच्या दिवशी तुमच्याबरोबर कार्यक्रमात भाग घेतलेला तुमचा मित्र गैरहजर राहिल्यास तुमची मन:स्थिती कशी होईल?
उत्तर :
समजा मी एखादया संगीत नाटकात भाग घेतलेला आहे व माझ्याबरोबर माझ्या मित्रानेही त्यात भाग घेतलेला आहे. गेल्या महिनाभर आम्ही त्यासाठी पूर्वतयारी केलेली आहे. ऐन नाटकाच्या दिवशी कही कारणास्तव तो नाटकाला हजर राहू शकणार नाही हे समजताच माझी तारांबळ उडेल. नाटक सादर कसे करायचे तसेच गैरहजर राहिलेल्या मित्राचे संवाद अगदी ऐन वेळी कोण पाठ करणार? असे अनेक प्रश्न मनात निर्माण होतील. कार्यक्रम सूचीतून नाटक रद्द करण्याशिवाय दुसरा मार्गच राहणार नाही. गेल्या महिनाभर वेळ काढून केलेल्या तयारीला काहीच अर्थ उरणार नाही. त्यामुळे मन खिन्न व उदास होईल.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 35

प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. शिरीष जन्मात हात लावणार नव्हता.
ii. लेखकांनी कार्यक्रमाची परवानगी दिली.
उत्तर :
i. व्हायोलिनला
ii. शिरीषला

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. ‘माझे नाना…नाना…माझे नाना कायमचे गेले हो सर!’
  2. मी ताडकन उभा राहिलो व त्याच्याजवळ गेलो.
  3. सर, माझी एवढी एकच विनंती मान्य करा.
  4. ‘तर माझी मनःस्थिती आपोआपच सुधारेल!’

उत्तर :

  1. मी ताडकन उभा राहिलो व त्याच्याजवळ गेलो.
  2. ‘माझे नाना…नाना…माझे नाना कायमचे गेले हो सर!’
  3. सर, माझी एवढी एकच विनंती मान्य करा.
  4. ‘तर माझी मन:स्थिती आपोआपच सुधारेल!’

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. लेखकाने कोणाचे सांत्वन केले?
उत्तर :
लेखकाने शिरीषचे सांत्वन केले.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

ii. अगितक होऊन शिरीष कोणाला विनंती करत होता?
उत्तर :
अगतिक होऊन शिरीष लेखकाला विनंती करत होता,

iii. शिरीषला कार्यक्रम देण्यास लेखक नकार का देत होता?
उत्तर :
शिरीषला कार्यक्रम देण्यास लेखक नकार देत होता कारण; तो दोन महिने गैरहजर होता.

प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
i. अरे, तुझा ………. तरी काय? (नाव, गाव, पत्ता, धंदा)
ii. नंतर जन्मात हात लावणार नाही ……….! (व्हायोलिनला, गिटारला, विण्याला, तबल्याला)
उत्तर :
i. पत्ता
ii. व्हायोलिनला

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प्रश्न 6.
सहसंबंध लिहा.
विनंती : लेखकाला :: आगतिक ……………….
उत्तर :
शिरीष

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा. ………………..
i. ‘इकडची दुनिया तिकडेच झाली आहे सर.
(अ) यापुढे मी दिसणार नाही!
(ब) यापुढे मी एकटाच दिसेन !
(क) यापुढे मी आणि नाना येईन!
(ड) यापुढे मी कधीच बोलणार नाही!
उत्तर :
(ब) यापुढे मी एकटाच दिसेन !

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

ii. आजच्या या पहिल्या कार्यक्रमावरच आपल्या ……………..
(अ) विद्यालयाची इभ्रत अवलंबून आहे.
(ब) विद्यालयाची शान अवलंबून आहे.
(क) विद्यालयाची पत अवलंबून आहे.
(ड) विदयालयाचे नाव अवलंबून आहे.
उत्तर :
(अ) विद्यालयाची इभ्रत अवलंबून आहे.

प्रश्न 2.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 36

प्रश्न 3.
सत्य वा असत्य ते लिहा.

  1. ‘मला परवानगी दिलीत, तर माझी मनःस्थिती आपोआपच सुधारेल!’
  2. गिरीष, मी तुझ्या भावना ओळखतो’
  3. ‘आज आपल्या विद्यालयाचा कार्यक्रम ना?’

उत्तर :

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य

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प्रश्न 4.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 37

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्ये लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
i. ‘इकडची दुनीया तीकडे होईल ना?’
ii. ‘तू पूढे जन्मभर वाजव पण आज वाजवु नको.’
उत्तर :
i. ‘इकडची दुनिया तिकडे होईल ना?’
ii. ‘तू पुढे जन्मभर वाजव पण आज वाजवू नको.’

प्रश्न 2.
अचूक शब्द लिहा.
i. इभरत, इभत, इभ्रत, इर्भत
ii. दुःखित, दुखित, दूःखित दुःखीत
उत्तर :
i. इभ्रत
i. दुःखित

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प्रश्न 3.
समानार्थी शब्द लिहा.
i. निर्धार – [ ]
ii. सौम्य – [ ]
उत्तर :
i. निश्चय
ii. शांत

प्रश्न 4.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. दूर × [ ]
  2. इकडे × [ ]
  3. हजर × [ ]
  4. चूक × [ ]
  5. सुरुवात × [ ]
  6. आनंदी × [ ]

उत्तर :

  1. जवळ
  2. तिकडे
  3. गैरहजर
  4. बरोबर
  5. शेवट
  6. दु:खी

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प्रश्न 5.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दप्रत्ययविभक्ती
विदयालयाचाचाषष्ठी
आवाजातसप्तमी
व्हायोलिनलालाद्वितीया

प्रश्न 6.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
सांत्वनानंतरसांत्वना
विद्यालयाचाविदयालया
आवाजातआवाजा
कार्यक्रमावरकार्यक्रमा

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 7.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहा.
i. इभ्रत राखणे
ii. आगतिक होणे
उत्तर :
i. इभ्रत राखणे – इज्जत राखणे / प्रतिष्ठा राखणे
ii. अगतिक होणे – अधीर होणे

प्रश्न 8.
खालील दिलेल्या वाक्यांचा काळ ओळखा,
i. तुझी मन:स्थिती पण आज बरोबर नाही.
आज आपला नाईलाज आहे.
उत्तर :
i. वर्तमानकाळ
ii. वर्तमानकाळ

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 9.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 38

कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
तुम्ही शिरीषच्या जागी असता तर तुम्ही काय केले असते ते थोडक्यात सांगा.
उत्तर :
मी जर शिरीषच्या जागी असतो तर कार्यक्रमाला गेलो असतो. शिक्षकांना विनंती करून कार्यक्रमात वाजविण्याची परवानगी मिळवली असती. स्वत:चे दुःख विसरून संगीतक्षेत्रात स्वत:ला झोकून दिले असतेवदिवस-रात्र मेहनतकरूनआपल्या पालकांचे स्वप्न पूर्ण केले असते. एकाग्रता व जिद्द यांची सांगड घालून यशाची उंचच उंच भरारी मारली असती. संगीत शिकत असताना येत असलेल्या सर्व संघर्षांचा सामना केला असता; पण काहीही झाले असते तरी संगीत शिकण्याचे थांबविले नसते.

पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 39

प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. संगीतसेवा अंतरली याचाच धक्का बसला – [ ]
ii. एकेकाळी उत्कृष्ट गवई होते – [ ]
उत्तर :
i. नानांना
ii. शिरीषचे नाना

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 3.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
i. माझे नाना एकेकाळी ………………. गवई होते. (उत्कृष्ट, चांगले, मध्यम, दर्जाचे)
ii. ………. कडकडाटाने मी भानावर आलो. (वाक्यांच्या, टाळ्यांच्या, आवाजाच्या, किंचाळीच्या)
उत्तर :
i. उत्कृष्ट
ii. टाळ्यांच्या

प्रश्न 4.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. डोळे पुशीत शिरीष म्हणाला, ‘सर, काय ही भलतीच शंका!’
  2. शेवटी त्यांनी मला काही तरी वादय शिकण्यासाठी उद्युक्त केले.
  3. त्याप्रमाणे मी परवानगी दिली आणि शिरीष वाजवू लागला.
  4. नवीनच शिकायला लागलेला मुलगा इतके उत्कृष्ट वाजवतो.

उत्तर :

  1. त्याप्रमाणे मी परवानगी दिली आणि शिरीष वाजवू लागला.
  2. नवीनच शिकायला लागलेला मुलगा इतके उत्कृष्ट वाजवतो.
  3. डोळे पुशीत शिरीष म्हणाला, ‘सर, काय ही भलतीच शंका!’
  4. शेवटी त्यांनी मला काही तरी वादव शिकण्यासाठी उद्युक्त केले.

प्रश्न 5.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. शिरीषने लेखकाला काय पाठवली?
उत्तर :
शिरीषने लेखकाला फी व चिठ्ठी पाठवली.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

ii. शिरीष कार्यक्रमात कोणते वाक्य वाजवत होता.
उत्तर :
शिरीष कार्यक्रमात व्हायोलिन हे वाक्य वाजवत होता.

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा.
i. ज्या दिवशी मी तुमच्याकडे फी व
(अ) चिठ्ठी पाठवली.
(ब) संदेश पाठवला.
(क) वही पाठवली.
(ड) पेन पाठवला.
उत्तर :
(अ) चिठ्ठी पाठवली.

ii. डोळे पुशीत शिरीष म्हणाला.
(अ) सर, काय हे भलतच सांगताय!
(ब) सर, काय हे भलतच म्हणताय!
(क) सर, काय ही भलतीच शंका!
(ड) सर, काय ही भलतीच निंदा!
उत्तर :
(क) सर, काय ही भलतीच शंका!

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 2.
आकृतिबंध पूर्ण करा,
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 40

प्रश्न 3.
सत्य वा असत्य ते लिहा.

  1. लेखकाने परवानगी दिली आणि शिरीष वाजवू लागला.
  2. माझे नाना उत्कृष्ट खेळाडू होते.
  3. नानांनी शिरीषला वाक्य शिकण्यासाठी उद्युक्त केले.

उत्तर :

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य

प्रश्न 4.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर :
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कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्ये लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
i. ओठांच्या हालचालिंवरून त्यांना काहि काही शब्द समजत.
ii. ज्या दिवशी मि तुमच्याकडे फी व चीट्ठी पाठवली, त्याच रात्री नाना वारले.
उत्तर :
i. ओठांच्या हालचालींवरून त्यांना काही काही शब्द समजत,
ii. ज्या दिवशी मी तुमच्याकडे फी व चिठ्ठी पाठवली, त्याच रात्री नाना वारले.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन सर्वनामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. मी
  2. मला
  3. त्याने
  4. तू
  5. त्यांना
  6. ते
  7. माझे

प्रश्न 3.
उताऱ्यातील दोन नामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. शिरीष
  2. पाय
  3. फी
  4. चिट्ठी
  5. व्हायोलिन
  6. गवई
  7. हात

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 4.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. लोक – [ ]
  2. पाय – [ ]
  3. शंका – [ ]
  4. डोळे – [ ]
  5. हात – [ ]
  6. अंतरली – [ ]
  7. वारंवार – [ ]
  8. कौशल्य – [ ]

उत्तर :

  1. जनता
  2. पद
  3. संशय
  4. नयन
  5. कर
  6. दुरावली
  7. पुन्हापुन्हा
  8. कसब

प्रश्न 5.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. शंका × [ ]
  2. दिवस × [ ]
  3. सोई × [ ]
  4. अंतरली × [ ]

उत्तर :

  1. कुशंका
  2. रात्र
  3. गैरसोई
  4. मिळाली

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प्रश्न 6.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
पायांवरपायां
माझ्याकडेमाझ्या
वादकाप्रमाणेवादका
टाळ्यांच्याटाळयां

प्रश्न 7.
उताऱ्यातील दोन अनेकवचनी शब्द शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. विदयार्थी
  2. लोक
  3. टाळया
  4. डोळे

प्रश्न 8.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहा.

  1. परवानगी देणे
  2. भानावर येणे
  3. उदयुक्त करणे

उत्तर :

  1. होकार देणे / अनुमती देणे
  2. शुद्धीवर येणे
  3. प्रोत्साहन देणे, प्रेरित करणे,

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 9.
काळ बदला, (भविष्यकाळ करा)
शिरीष आत आला व त्याने माझ्या पायांवर डोके ठेवले.
उत्तर :
शिरीष आत येईल व तो माझ्या पायांवर डोके ठेवेल.

प्रश्न 10.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 42

कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
नवीन तंत्रज्ञानाशी मानवाची लगेचच मैत्री होत नाही, असे तुम्हांस वाटते का ? स्पष्ट करा.
उत्तर :
तंत्रज्ञान हे नेहमीच बदलत असते. त्यात प्रगती होत असते. नवीन तंत्रज्ञान मानवासाठी एक चमत्कार असते. त्याच्याशी जवळीक साधण्यासाठी मनुष्याला थोडाफार वेळ लागतो. त्याची रीत वा पद्धत, तंत्र समजून घेण्यासाठी मानवाला थोडा उशीर लागतो. ज्याप्रमाणे देशात सर्वप्रथम रेल्वे सुरू झाली तेव्हा लोकांच्या मानसिकतेत बदल व्हायला व तिचा वापर करण्यास फार वेळ लागला होता. त्याप्रमाणे आता एवढा वेळ लागत नाही. वा त्याचे आश्चर्य वाटत नाही; पण तरीही नवीन तंत्रज्ञान म्हटले की ते शिकण्यास वा जाणून घेण्यास घोडा फार वेळ लागतोच.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 43

प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. शिरीषला खेद वाटायचा – [ ]
ii. लोकांच्या निदेकडे लक्ष न देता शिरीष – [ ]
उत्तर :
i. नानांना ऐकायला येत नव्हतं.
ii. व्हायोलिन वाजवू लागला.

प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.

  1. शिरीषला नानांसमोर मोकळेपणा वाटत नव्हता.
  2. ‘बेटा वाजव, मी ऐकतो आहे.’
  3. शिरीष गप्प बसला आणि मी बोलू शकत नव्हतो.
  4. नाना रोज शिरीषबरोबर येत होते.

उत्तर :

  1. नाना रोज शिरीषबरोबर येत होते.
  2. शिरीषला नानांसमोर मोकळेपणा वाटत नव्हता.
  3. बेटा वाजव, मी ऐकतो आहे.’
  4. शिरीष गप्प बसला आणि मी बोलू शकत नव्हतो.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. शिरीष किती तास सराव करत होता?
उत्तर :
शिरीष 24 तास सराव करत होता.

ii. ताना व सूर कोण सांगत आहेत, असा भास शिरीषला व्हायचा.
उत्तर :
ताना व सूर नाना सांगत आहेत, असा भास शिरीषला व्हायचा.

iii. शिरीषने डोळे मिटून घेताच नाना काय म्हणाले?
उत्तर :
‘बेटा वाजव, मी ऐकतो आहे!’ असे नाना म्हणाले.

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प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
i. डोळ्यांसमोर …………. नव्हते, ………….. नव्हते, कोणी नव्हते. (प्रेक्षक/थिएटर, लोक/प्रेक्षक, जनता/ प्रेक्षक, थिएटर/प्रेक्षक)
ii. …………… गप्प बसला आणि मी काहीच बोलू शकत नव्हतो. (शिरीष, नाना, लेखक, रमेश)
उत्तर :
i. प्रेक्षक/थिएटर
ii. शिरीष

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा,
i. चोवीस तास एकच उदयोग, ……………..
(अ) एकच चिंता!
(ब) एकच ध्यास!
(क) एकच विचार!
(ड) एकच शिक्षा!
उत्तर :
(ब) एकच ध्यास!

ii. ज्या दिवशी नाना गेले त्याच दिवशी मी ठरवले, की ………
(अ) संगीत बंद !
(ब) वाक्ष्य बंद !
(क) व्हायोलिन बंद !
(ड) पेटी बंद !
उत्तर :
(अ) संगीत बंद !

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प्रश्न 2.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 44

प्रश्न 3.
सत्य वा असत्य ते लिहा.
i. आज कार्यक्रमाच्या सुरुवातीला, एवढे लोक पाहून, शिरीष गडबडून गेला होता.
ii. बारा तास एकच उदयोग, एकच ध्यास!
उत्तर :
i. सत्य
ii. असत्य

प्रश्न 4.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 45

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्य लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
या वीचारासरशी, लोकांच्या नींदेकडे लक्ष न देता मी त्याच दिवसापासून व्हायोलिन वाजवायला सुरुवात केली.
उत्तर :
या विचारासरशी, लोकांच्या निदेकडे लक्ष न देता मी त्याच दिवसापासून व्हायोलिन वाजवायला सुरुवात केली.

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प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन नामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. संगीत
  2. नाना
  3. व्हायोलिन
  4. प्रेक्षक
  5. थिएटर
  6. बेटा
  7. आवाज

प्रश्न 3.
उताऱ्यातील दोन सर्वनामे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. त्यांना
  2. ते
  3. मला
  4. मी

प्रश्न 4.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. पुष्कळ – [ ]
  2. सुधारणा – [ ]
  3. सराव – [ ]
  4. दुःख – [ ]

उत्तर :

  1. अमाप
  2. प्रगती
  3. रियाज
  4. खेद

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प्रश्न 5.
विरूद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. शेवट – [ ]
  2. आनंद – [ ]
  3. अधोगती – [ ]

उत्तर :

  1. सुरुवात
  2. खेद
  3. प्रगती

प्रश्न 6.
उताऱ्यातील दोन अनेकवचनी शब्द शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. विदयार्थी
  2. लोक
  3. टाळया
  4. डोळे

प्रश्न 7.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
विचारासरशीविचारा
शास्त्रासाठीशास्त्रा
निंदेकडेनिंदे
तारांवरूनतारां

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प्रश्न 8.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहा.

  1. धडपड करणे
  2. खेद करणे
  3. निंदा करणे

उत्तर :

  1. खूप मेहनत करणे
  2. दु:ख करणे
  3. वाईट बोलणे

प्रश्न 9.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ 46

कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
संगीतशास्त्राची प्रेरणा ज्यास मिळते त्याचे भाग्य मुखासमाधानात न्हाऊन निघते, या कश्चनावर तुमचे विचार स्पष्ट करा.
उत्तर :
संगीतशास्त्र ही जीवनोपयोगी कला आहे. सूर ताल व लय यांचा मिलाप त्यात आहे. संगीतशास्त्र शिकणे हे कोणाचेही काम नाही. ही शिकण्याची संधी व भाग्य त्यालाच मिळते, ज्यास दैवी ईश्वरीय शक्तीचे वरदान लाभलेले आहे. लता मंगेशकर, आशा भोसले, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, शान, भीमसेन जोशी अशा अनेक दिग्गजांनी संगीतशास्त्रात नाव कमावलेले आहे. त्यांनादेखील संगीतशास्त्राची प्रेरणा त्यांच्या गुरूपासून लाभलेली आहे. त्यांच्या गुरूंची त्यांच्यावर असलेली कृपा हीच त्यांना मिळालेली प्रेरणा होय. त्यामुळेच त्यांचे आयुष्य सुखासमाधानात न्हाऊन निघालेले आहे.

‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ Summary in Marathi

लेखकाचा परिचय :

नाव : वसंत पुरुषोत्तम काळे
कालावधी : 1932-2001
कथालेखक, निबंधकार, नाटककार, कादंबरीकार, ‘लोंबकळणारी माणसं’, ‘पण माझ्या हातांनी’, ‘पेन सलामत तो’, ‘ब्रम्हदेवाचा काळ’, ‘गुलमोहर’, ‘कर्मचारी’, ‘का रे भुललासी’, ‘ऐक सखे’, ‘वन फॉर द रोड’, ‘मायाबाजार’, ‘स्वर, ‘संवादिनी’, ‘वलय’ इत्यादी कथासंग्रहः ‘ही वाट एकटीची’, ‘पार्टनर’ इत्यादी कादंबरीलेखन प्रसिद्ध, आकर्षक कथानके, ओघवती निवेदनशैली आणि चटपटीत संवाद यांमुळे त्यांच्या कथा वाचकप्रिय आहेत.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

प्रस्तावना :

‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’ ही कथा लेखक व.पु.काळे यांनी लिहिली आहे. या कथेत संगीत कलेवर जिवापाड प्रेम करणारे वडील व अपघातामुळे संगीतसेवेपासून अंतरलेल्या वडिलांच्या सौख्यासाठी धडपडणारा मुलगा यांचे भावस्पर्शी वर्णन लेखकांनी केले आहे.

‘Beta, mi aikto ahe!’ This story is written by writer V. P. Kale. In this story, we can witness a father who loves music more than his life and a son who struggles for happiness of father who has lost music because of an accident.

शब्दार्थ :

  1. अपघात – दुर्घटना, (an accident)
  2. सौख्य – संतोष, सुखासमाधानाची स्थिती (happiness)
  3. कोलाहल. – गोंगाट, गोंधळ (an uproar, noise)
  4. स्थिर – स्तब्ध, शांत (stable, steady)
  5. खात्री – भरवसा (trust, certainty)
  6. वादन – वाक्य वाजवण्याची कृती सादर – एखाक्यासमोर ठेवणे (to render)
  7. आस्वाद – (येथे अर्थ) आनंद (relish)
  8. धीटपणा – साहस (boldness, daring, courage)
  9. नवखा – नवीन (new)
  10. प्रतिबिंब – पडछाया (reflection)
  11. मुसाफिर – प्रवासी (traveller)
  12. अवसान – हिंमत, धमक (guts, courage)
  13. श्रोतृवृंद – ऐकण्यासाठी जमलेल्या लोकांचा समूह (audience)
  14. झरझर – घाईघाईने (quickly)
  15. झगझगीत – चकाकणारे (glittering, sparkling)
  16. सबंध – संपूर्ण (entire, whole)
  17. चलबिचल – अस्वस्थता (hesitation)
  18. तंबोरा – एक तंतुवादय (astring instrument)
  19. धीरगंभीर – शांतपणे (serious)
  20. ध्यान – चिंतन, मनन (meditation, attention)
  21. षड्ज – संगीतातील सप्तस्वरांपैकी पहिला स्वर (सा) (the Ist note of the gamut)
  22. धीमेपणाने – हळुवारपणे (slowly)
  23. पंचेद्रिये – ज्ञानप्राप्तीची पाच इंद्रिये (the five sense organs)
  24. दगा . विश्वासघात (betrayal)
  25. सुहास्य – चांगले हास्य (a beautiful smile)
  26. मुख – चेहरा (face)
  27. वयस्कर – प्रौढ (elderly)
  28. ग्रह – समजूत, कल्पना (a prejudice)
  29. प्राथमिक – सुरुवातीचा, प्रारंभिक (elementary, primary)
  30. प्रथा – रूडी, (general practice, custom)
  31. नेटाने – जोर लावून, कष्टपूर्वक, प्रयत्नपूर्वक (with tremendous efforts)
  32. आळीपाळीने – आलटून-पालटून, क्रमबदलून (alternately, by turns)
  33. आगाऊ – उद्धट (rude)
  34. आकलन शक्ती – बोधशक्ती (grasping power)
  35. अत्यानंद – परमानंद, अतिशय आनंद (rapture, great joy and delight)
  36. सांत्वन – दिलासा (consolation)
  37. सौम्य – हळूवार, शांत (gentle, soft)
  38. इभ्रत – पत, लौकिक (prestige)
  39. आगतिक – असहाय्य, निराधार (helpless)
  40. भानावर – शुद्धीवर (conscious)
  41. गवई – गायक, गाणारा (asinger)
  42. जबर – मोठे (huge)
  43. बहिरे – ज्याला ऐकू येत नाही असा (deaf)
  44. गैरसोय – अडचण (inconvenience)
  45. अंतरणे – गमावणे, मुकणे (to lose)
  46. उयुक्त – प्रेरित, तयार, सज्ज, प्रोत्साहित (ready)
  47. धडपड – खटपट,खटाटोप, (struggle)
  48. अमाप – खूप, पुष्कळ (a lot of, immeasurable)
  49. वारंवार – पुन्हा पुन्हा, सतत (again, repeatedly)
  50. खेद – दुःख, शोक (regret, remorse)
  51. कौशल्य – कुशलता, कसब (skill)
  52. मोकळेपणा – विनासंकोच वागणूक (freely, without any hesitation)
  53. ध्यास उत्कट इच्छा, (yearning. longing)
  54. भास – समज, कल्पना, ग्रह, भ्रम (illusion, impression)
  55. तान – सूर (tune)
  56. ठेका – एक मंद गतीचा ताल (rhythm)

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 3 ‘बेटा, मी ऐकतो आहे!’

टिपा :

1. फिड्लवादय – एक प्रकारचे तंतुवादच जे व्हायोलिन या नावानेही ओळखले जाते.
2. फूटलाईट – रंगमंच आणि कलाकारांना प्रकाशित करणारा, रंगभूमीच्या पुढे असलेला प्रकाश.

वाक्प्रचार :

  1. कोलाहल बंद पडणे – शांतता पसरणे
  2. आस्वाद घेणे _ – आनंद घेणे
  3. कौतुक करणे – प्रशंसा करणे
  4. नाव खराब करणे – वाईट कृत्य करणे
  5. प्रतिबिंबित होणे – स्पष्ट दिसणे, पडछाया उमटणे
  6. अवसान न राहणे – हिम्मत हारणे
  7. धीर सुटणे – हार मानणे
  8. खूण करणे – इशारा करणे
  9. चलबिचल होणे – अस्वस्थ होणे
  10. कानावर विश्वास न बसणे – एखादी गोष्ट सत्य न वाटणे
  11. शंका चाटून जाणे – संशय निर्माण करणे
  12. प्रथा असणे – रीत असणे
  13. जिवाचे कान करणे – एखादी गोष्ट लक्षपूर्वक ऐकणे
  14. दम भरणे – रागावणे
  15. आश्चर्यचकित होणे – नवल वाटणे
  16. भानावर येणे – शुद्धीवर येणे
  17. उदयुक्त करणे – प्रेरित करणे, प्रोत्साहन देणे, एखादी गोष्ट करण्यासाठी तयार करणे.
  18. सराव करणे – अभ्यास करणे
  19. ध्यास लागणे – इच्छा होणे, व्यसन लागणे
  20. भास होणे – प्रतीत होणे, जाणवणे

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही

Marathi Aksharbharati Std 9 Digest Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही Textbook Questions and Answers

1. कारणे लिहा.

प्रश्न (अ)
कवयित्रीच्या मते दाही दिशांना रंग उधळले, कारण …………………..
उत्तरः
कवयित्रीच्या मते दाही दिशांना रंग उधळले, कारण वसंत ऋतूच्या स्वागतासाठी.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही

प्रश्न (आ)
जगातील सर्व फूले मनात झुरू लागली कारण ………………………..
उत्तरः
जगातील सर्व फूले मनात झुरू लागली कारण पळसफुले मातीच्या अंकावरती फुलून आली.

(आ) खालील आकृतिबंध पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
खालील आकृतिबंध पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही 1
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही 2

(इ) पृथ्वीचे रूप खालील बाबतींत स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
पृथ्वीचे रूप खालील बाबतींत स्पष्ट करा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही 3
उत्तरः
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही 4

2. सृष्टीतील खालील घटक वसंतऋतूच्या आगमनाने कसे सजले, ते स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
सृष्टीतील खालील घटक वसंतऋतूच्या आगमनाने कसे सजले, ते स्पष्ट करा.
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उत्तरः

घटकत्यांचे सजणे
1. लिंबोणीगर्द पोपटी रंगाची वस्त्रे घालून सजली आहे.
2. नागफणीजर्द तांबडी कर्णफुले घालून नागफणी सजली आहे.
3. घाणेरीदुरंगी चुनरीत सजली आहे.
4. पळसफुलेमातीच्या अंकावरती बहरून आली आहेत.

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3. खालील शब्दांसाठी कवितेत आलेले समान अर्थाचे शब्द शोधा.

प्रश्न 1.
खालील शब्दांसाठी कवितेत आलेले समान अर्थाचे शब्द शोधा.
उत्तरः

  1. भेटवस्तू – [नजराणा]
  2. सजली – [नटुनी]
  3. अरुंद रस्ता – [पाणंद]
  4. अंक – [चिन्ह]

4. भावार्थाधारित.

प्रश्न 1.
‘सांबर लाल कळ्यांनी लखडून उभे स्वागता पाणंदीवरी’ या ओळीचा संदर्भ स्पष्ट करा.
उत्तरः
वरील काव्यपंक्ती ‘उजाड उघडे माळरानही’ या कवितेतील आहे. या कवितेच्या कवयित्री ‘ललिता गादगे’ आहेत. यांनी या ठिकाणी वसंतऋतूच्या आगमनामुळे सृष्टीच्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

प्रश्न 2.
‘उजाड उघडे माळरानही गाऊ लागले वसंतगान’ या ओळीतील तुम्हांला कळलेले अर्थसौंदर्य स्पष्ट करा.
उत्तरः
वसंतऋतूच्या आगमनाने सृष्टीतील प्रत्येक गोष्टीला अतिशय आनंद झाला आहे. वसंतऋतूच्या आगमनाने उजाड उघडे माळरानही रंगबिरंगी फुलांनी, पानांनी बहरून आलेले आहेत. जणू काही ते माळरानही अतिशय आनंदाने वसंतऋतूचे गीत आनंदाने गात आहे.

5. अभिव्यक्ती:

प्रश्न (अ)
वसंतऋतूच्या आगमनाने सृष्टीत होणारे बदल तुमच्या निरीक्षणाने लिहा.
उत्तरः
‘कृती: 3 काव्यसौंदर्य’ मधील प्र. (3) चे उत्तर पहा.

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प्रश्न (आ)
सृष्टीचे सौंदर्य कायम राहण्यासाठी तुम्हांला सुचतील असे उपाय लिहा.
उत्तरः
‘कृती : 3 काव्यसौंदर्य’ मधील प्र. (4) चे उत्तर पहा.

Marathi Akshar Bharati Class 9 Textbook Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही Additional Important Questions and Answers

पुढील पदयाच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1: आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तरः

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2. जोड्या जुळवा.

प्रश्न 1.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. रंग उधळले(अ) सृष्टी
2. बेरड कोरड(ब) लिंबोणी
3. गर्द पोपटी(क) कर्णफुले
4. जर्द तांबडी(ड) दिशा-दिशांन

उत्तरः

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. रंग उधळले(ड) दिशा-दिशांन
2. बेरड कोरड(अ) सृष्टी
3. गर्द पोपटी(ब) लिंबोणी
4. जर्द तांबडी(क) कर्णफुले

प्रश्न 2.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. लुसलुस पाने अंगोपांगी(अ) पिंपळ पाने
2. दुरंगी चुनरीत उभी(ब) सांबर वृक्ष
3. मऊ मुलायम मोरपिसारी(क) घाणेरी
4. लाल कळ्यांनी लखडून उभे(ड) वड वृक्ष

उत्तर:

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. रंग उधळले(ड) दिशा-दिशांन
2. बेरड कोरड(क) कर्णफुले
3. गर्द पोपटी(अ) सृष्टी
4. जर्द तांबडी(ब) लिंबोणी

3. खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.

प्रश्न 1.
दिशा-दिशांना रंग का उधळले आहेत?
उत्तरः
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी दिशा दिशांना रंग उधळले आहेत.

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प्रश्न 2.
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी कोण नजराणा घेऊन आली आहे?
उत्तरः
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी बेरड, कोरड सृष्टी नजराणा घेऊन आली आहे.

प्रश्न 3.
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी लिंबोणी कशी आली आहे?
उत्तर:
गर्द पोपटी रंगाची वस्त्रे परिधान करून, मुरडत लिंबोणी आली आहे.

प्रश्न 4.
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी नागफणी कशी सजली आहे?
उत्तरः
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी जर्द तांबडी कर्णफुले घालून नागफणी सजली आहे.

प्रश्न 5.
लुसलुस पाने अंगावरती घेऊन कोण झुलत आहे?
उत्तर:
लुसलुस पाने अंगावरती घेऊन वड झुलत आहे.

प्रश्न 6.
दुरंगी चुनरीत कोण नटुन थटुन आली आहे?
उत्तरः
दुरंगी चुनरीत घाणेरी नटुन थटुन आली आहे.

प्रश्न 7.
पिंपळाची पाने कशी आहेत?
उत्तरः
पिंपळाची पाने मऊ मुलायम मोरपिसासारखी आहेत.

प्रश्न 8.
पाणंदीवर कोण उभा आहे?
उत्तर:
सांबर वृक्ष पाणंदीवर उभा आहे.

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प्रश्न 9.
लाल कळ्यांनी लखडून कोण आहे?
उत्तर:
लाल कळ्यांनी लखडून सांबर वृक्ष आहे.

प्रश्न 10.
मातीच्या अंकावरती कोण बहरून आले आहेत?
उत्तरः
मातीच्या अंकावरती पळसफुले बहरून आली आहेत.

प्रश्न 11.
पळसफुलांना पाहून कोण झुरत आहेत?
उत्तरः
पळसफुलांना पाहून जगातील सारी कुसुमे झुरत आहेत.

प्रश्न 12.
आंब्याच्या मोहरातून काय आली आहे?
उत्तरः
आंब्याच्या मोहरातून कोकिळेची सुरेल तान आली आहे.

प्रश्न 13.
उजाड उघडे माळरान काय करत आहे?
उत्तरः
उजाड उघडे माळरान वसंतगान गाऊ लागले आहे.

प्रश्न 14.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.

  1. बेरड कोरड इथली …………….. घेऊन आली ती नजराणा. (दृष्टी, सृष्टी, कष्टी, मस्ती)
  2. गर्द ……………. लेऊन वसने मुरडत आली लिंबोणी. (पिवळी, लाल, तांबडी, पोपटी)
  3. जर्द तांबडी कर्णफुलेही घालून सजली ……………….. (नागफणी, लिंबोणी, घाणेरी, पिंपळ)
  4. स्वागत करण्या …………… ऋतूचे रंग उधळले दिशादिशांना. (शिशिर, श्रावण, वसंत, ग्रीष्म)
  5. ………….. पाने अंगोपांगी झुले वड हा दंग होऊनी. (मळमळ, झळझळ, लुसलुस, मुरडत)
  6. दुरंगी …………. उभी ही घाणेरी ही नटुनी थटुनी. (कळ्यांनी, मोरपिसारी, मुलायम, चुनरीत)
  7. सळसळ झळझळ …………….. पाने मऊ मुलायम मोरपिसापरी. (वड, पिंपळ, आंबा, पळस)
  8. सांबर …………….. कळ्यांनी लखडून उभे स्वागता पाणंदीवरी. (पोपटी, तांबडा, लाल, हिरवी)
  9. आंब्याच्या मोहरातून आली ………….. सुरेल तान. (पोपटाची, चिमणीची, कोकिळेची, कावळ्याची)
  10. ……….. सारी या जगातली पाहून त्यांना मनात झुरती. (सुरेल, स्वागता, सजली, कुसुमे)

उत्तर:

  1. सृष्टी
  2. पोपटी
  3. नागफणी
  4. वसंत
  5. लुसलुस
  6. चुनरीत
  7. पिंपळ
  8. लाल
  9. कोकिळेची
  10. कुसुमे

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कृती 2: आकलन कृती

प्रश्न 1.
सहसंबंध शोधा.

  1. गर्द : पोपटी : : जर्द : ………….
  2. लुसलुस : पाने : : दुरंगी : ………………
  3. आंबा : मोहर : : कोकिळा : …………….

उत्तर:

  1. तांबडी
  2. चुनरी
  3. तान

प्रश्न 2.
समान अर्थाच्या काव्यपंक्ती शोधून लिहा.

  1. वसंतात रंगाची उधळण झालेली असते.
  2. वसंतात लिंबोणी नटल्याप्रमाणे भासते.
  3. वडाचे झाड वसंतऋतूत आनंदाने डुलत आहे.
  4. सांबर वृक्ष लाल कळ्यांनी बहरून वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी उभे आहेत.
  5. पळसाची फुले पाहून इतर फुले झुरतात.
  6. माळरानही वसंतऋतूचे गीत गात आहे.

उत्तर:

  1. स्वागत करण्या वसंत ऋतूचे रंग उधळले दिशा-दिशांना.
  2. गर्द पोपटी लेऊन वसने मुरडत आली लिंबोणी.
  3. लुसलुस पाने अंगोपांगी झुले वड हा दंग होऊनी.
  4. सांबर लाल कळ्यांनी लखडून उभे स्वागता पाणंदीवरी
  5. कुसुमे सारी या जगातली पाहून त्यांना मनात झुरती.
  6. उजाड उघडे माळरानही गाऊ लागले वसंतगान.

3. योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
सळसळ झळझळ पिंपळ पाने ……………………
(अ) दुरंगी चुनरीत उभी ही
(ब) उभे स्वागता पाणंदीवरीत
(क) मऊ मुलायम मोरपिसापरी
(ड) लुसलुस पाने अंगोपांगी
उत्तर:
सळसळ झळझळ पिंपळ पाने मऊ मुलायम मोरपिसापरी.

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प्रश्न 2.
सांबर लाल कळयांनी लखडून
(अ) लुसलुस पाने अंगोपांगी
(ब) सळसळ झळझळ पिंपळ पाने
(क) झुले वड हा दंग होऊनी
(ड) उभे स्वागता पाणंदीवरी
उत्तर:
सांबर लाल कळयांनी लखडून उभे स्वागता पाणंदीवरी.

4. काव्यपंक्तींचा योग्य क्रम लावा.

प्रश्न 1.
(अ) बेरड कोरड इथली सृष्टी
(ब) रंग उधळले दिशा-दिशांना
(क) स्वागत करण्या वसंत ऋतूचे
(ड) घेऊन आली ती नजराणा
उत्तरः
(अ) स्वागत करण्या वसंत ऋतूचे.
(ब) रंग उधळले दिशा-दिशांना
(क) बेरड कोरड इथली सृष्टी
(ड) घेऊन आली ती नजराणा

प्रश्न 2.
(अ) घालून सजली नागफणी
(ब) मुरडत आली लिंबोणी
(क) जर्द तांबडी कर्णफुलेही
(ड) गर्द पोपटी लेऊन वसने
उत्तरः
(अ) गर्द पोपटी लेऊन वसने
(ब) मुरडत आली लिंबोणी
(क) जर्द तांबडी कर्णफुलेही
(ड) घालून सजली नागफणी

प्रश्न 3.
(अ) झुले वड हा दंग होऊनी,
(ब) घाणेरी ही नटुनी थटुनी
(क) लुसलुस पाने अंगोपांगी
(ड) दुरंगी चुनरीत उभी ही
उत्तरः
(अ) लुसलुस पाने अंगोपांगी,
(ब) झुले वड हा दंग होऊनी,
(क) दुरंगी चुनरीत उभी ही
(ड) घाणेरी ही नटुनी थटुनी

प्रश्न 4.
(अ) मऊ मुलायम मोरपिसापरी,
(ब) सळसळ झळझळ पिंपळ पाने
(क) उभे स्वागता पाणंदीवरी
(ड) सांबर लाल कळयांनी लखडून
उत्तरः
(अ) सळसळ झळझळ पिंपळ पाने,
(ब) मऊ मुलायम मोरपिसापरी,
(क) सांबर लाल कळयांनी लखडून
(ड) उभे स्वागता पाणंदीवरी

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प्रश्न 5.
(अ) कुसुमे सारी या जगातली
(ब) पळसफुले ही बहरून आली
(क) पाहून त्यांना मनात झुरती
(ड) या मातीच्या अंकावरती
उत्तर:
(अ) पळसफुले ही बहरून आली,
(ब) या मातीच्या अंकावरती,
(क) कुसुमे सारी या जगातली
(ड) पाहून त्यांना मनात झुरती

प्रश्न 6.
कोण ते लिहा.
उत्तर:
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प्रश्न 7.
काव्यपंक्तीवरून शब्दांचा योग्य क्रम लावा.

  1. नजराणा, बेरड, वसंत, उधळले
  2. तांबडी, लिंबोणी, नागफणी, पोपटी
  3. घाणेरी, वड, दुरंगी, पाने
  4. सांबर, पिंपळ, मोरपिसापरी, पाणंदीवरी
  5. कुसुमे, झुरती, मातीच्या, पळसफुले
  6. माळरानही, वसंतगान, मोहरातून, कोकिळेची

उत्तर:

  1. वसंत, उधळले, बेरड, नजराणा
  2. पोपटी, लिंबोणी, तांबडी, नागफणी
  3. पाने, वड, दुरंगी, घाणेरी
  4. पिंपळ, मोरपिसापरी, सांबर, पाणंदीवरी
  5. पळसफुले, मातीच्या, कुसुमे, झुरती
  6. मोहरातून, कोकिळेची, माळरानही, वसंतगान

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प्रश्न 8.
चूक की बरोबर लिहा.

  1. जर्द तांबडी कर्णफुले घालून लिंबोणी सजली आहे.
  2. गर्द पोपटी वसने घालून सृष्टी आली आहे.
  3. नागफणी बेरड कोरडी झाली आहे.
  4. लुसलुस पाने अंगोपांगी घेऊन वड दंग झाले आहे.
  5. सांबर दुरंगी चुनरीत पाणंदीवर उभे आहे.

उत्तर:

  1. चूक
  2. चूक
  3. चूक
  4. बरोबर
  5. चूक

कृती 3: काव्यसौंदर्य

1. खालील काव्यपंक्तीतील आशयसौंदर्य स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
स्वागत करण्या वसंत ऋतूचे
रंग उधळले दिशा-दिशांना
उत्तरः
वसंतऋतूच्या आगमनाच्या स्वागताचे वर्णन करताना कवयित्री सांगतात, वसंत ऋतूमध्ये वेगवेगळ्या रंगानी पाने, फुले, निसर्ग सारी सृष्टी सजलेली आहे. विविध रंगाच्या फुलांनी निसर्ग बहरलेला आहे. यामुळे आजूबाजूचे पशु-पक्षी सुद्धा आनंदित झाले आहेत. जणू काही वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी हे होत आहे. सर्व दिशा वेगवेगळ्या रंगानी उजळून निघाल्या आहेत.

प्रश्न 2.
गर्द पोपटी लेऊन वसने
मुरडत आली लिंबोणी
उत्तरः
वसंतऋतूत सर्व परिसर नटलेला सजलेला आहे. नानाविध रंगांनी निसर्गाचे रूप मनमोहक झालेले आहे. या वसंतऋतूत झाडांना नवी पालवी फुटते. त्या हिरव्या पालवीला बघून असे वाटते की, गर्द पोपटी म्हणजे हिरव्या रंगाची वस्त्रे परिधान करून लिंबोणी लचकत, मुरडत आली आहे.

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2. पुढील ओळींचा अर्थसौंदर्य स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
स्वागत करण्या वसंत ऋतूचे, रंग उधळले दिशा-दिशांना.
उत्तरः
वसंतऋतूच्या आगमनाच्या स्वागताचे वर्णन करताना कवयित्री सांगतात, वसंत ऋतूमध्ये वेगवेगळ्या रंगाची पाने, फुले फुलतात. सारा निसर्ग, सारी सृष्टी वेगवेगळ्या रंगांनी सजलेली आहे. जणू काही वसंत ऋतूच्या स्वागतासाठी हे होत आहे. रंग उधळल्यामुळे दिशा उजळून निघाल्या आहेत.

प्रश्न 2.
जर्द तांबडी कर्णफुलेही घालून सजली नागफणी.
उत्तरः
गर्द तांबड्या रंगाची कर्णफुले घालून नागफणीची झाडे वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी सजली आहेत. वसंतऋतूच्या आगमनाने साऱ्या सृष्टीत आनंद पसरलेला आहे.

प्रश्न 3.
दुरंगी चुनरीत उभी ही घाणेरी ही नटुनी थटुनी
उत्तरः
घाणेरी सुद्धा दोन रंगाची ओढणी आपल्या अंगाखांदयावर परिधान करून वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी नटून थटून उभी आहे.

प्रश्न 4.
सळसळ झळझळ पिंपळ पाने मऊ मुलायम मोरपिसारी,
उत्तरः
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी पिंपळ मोरपिसाप्रमाणे मऊ व मुलायम पाने आपल्या अंगावर घेऊन सळसळ करत उभा आहे.

प्रश्न 5.
पळसफुले ही बहरून आली या मातीच्या अंकावरती
उत्तरः
पळसाच्या फुलांना बहर आला आहे. या बहरलेल्या फुलांनी वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी आपला सडाच या मातीवर पसरलेला आहे. ती अतिशय आनंदाने या मातीवर पसरलेली, सुखावलेली आपल्याला पाहायला मिळतात.

प्रश्न 6.
आंब्याच्या मोहरातून आली कोकिळेची सुरेल तान.
उत्तरः
वसंतऋतूत सृष्टीत अनेक बदल घडतात. वसंतऋतूत आंब्याच्या झाडाला मोहर येतो.अशा या आनंददायी वातावरणात आंब्याच्या झाडावर बसून कोकिळा सुरेल तान घेत असते.

प्रश्न 7.
वसंतऋतूच्या आगमनाने सृष्टीत होणारे बदल तुमच्या निरीक्षणाने लिहा.
उत्तरः
वसंतऋतू हा भारतातील सर्व ऋतूचा राजा मानला जातो. म्हणूनच त्याला ‘ऋतुराज’ देखील म्हणतात. वसंतऋतूच्या आगमनाने सृष्टीत बदल होतात. ती निसर्गसौंदर्याने न्हाऊन निघते. जणू वसंतऋतूचे स्वागत करण्यासाठी ती बहरते. झाडांना नवी पालवी येते. पाने फुले बहरतात. लिंबोणी, अबोली, जाई, जुई, केवडा, रातराणी, चंपा, चमेली अशी विविध फुले फुलतात. त्यांचा सुगंध जणू वसंतऋतूचे स्वागत करण्यासाठी सज्ज होतो. वसंतऋतूचे आगमन होणार म्हणून पक्षीही खुश होतात.

वसंतऋतूचे स्वागत पक्षीही करतात. त्यांचे कलरव कानी पडतात. कोकिळा कुहू कुहू करून आपले गाणे सुरू करते. जणू ती वसंतऋतू आल्याची ग्वाही देते. वसंतऋतूत संपूर्ण सजीव सृष्टीत एक नवीन उत्साह व आनंद आपल्याला पहायला मिळतो.

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प्रश्न 8.
मानवी जीवनात वसंतऋतूला एक आगळेवेगळे स्थान दिले गेलेले आहे. या विधानावर चर्चा करा.
उत्तरः
वसंतऋतू सृष्टीच्या बहराचा ऋतू आहे. या ऋतूत सृष्टी नटते म्हणून मानवप्राणी वसंतपंचमी साजरी करतो. या ऋतूच्या निमित्ताने नृत्य व संगीताचे कार्यक्रम आयोजित केले जातात. भारताच्या विविध राज्यात हा उत्सव वेगवेगळ्या प्रकारे साजरा केला जातो. दक्षिण भारतीय व उत्तर भारतीय हा सण मोठ्या उत्साहात साजरा करतात. राजस्थानी लोक या उत्सवाच्या निमित्ताने सूर्याची पूजा करून त्याच्या रथाची मिरवणूक काढतात. भारताच्या काही राज्यात लोक रंगीबेरंगी वस्त्रे परिधान करून विविध रंग व गुलाल उडवून हा उत्सव मोठ्या उत्साहाने साजरा करतात.

प्रश्न 9.
सृष्टीचे सौंदर्य कायम राहण्यासाठी तुम्हाला सुचतील असे उपाय लिहा.
उत्तरः
सृष्टीचे सौंदर्य कायम राहण्यासाठी मी माझ्या परीने सर्व प्रयत्न करेन. झाडे लावून त्यांचे संवर्धन करेन. इतरांना देखील झाडे लावण्यास प्रेरित करेन. पशु-पाखरे, नदी, तलाव हे देखील सृष्टीचेच अंश आहेत. या सर्वाचे रक्षण करण्याची जबाबदारी मी स्वीकारेन, वनसंवर्धनसाठी समाजात जागरूकता निर्माण करेन. सृष्टी ईश्वराचे दुसरे रूप आहे ही भावना मनी बाळगून तिचे पूजन करेन, प्रदूषण कमी करण्याचा प्रयत्न करेन. ‘झाडे । लावा व झाडे जगवा’ या मंत्राचे सर्वांना पालन करण्यास सांगेन. जमीन, पाणी, हवा, वनस्पती आणि ऊर्जा यांचा अवास्तव वापर टाळण्याचा प्रयत्न करीन. सृष्टीचा समतोल राखण्यासाठी मी प्रयत्न करेन.

प्रश्न 2. दिलेल्या मुद्द्यांच्या आधारे कवितेसंबंधी पुढील कृती सोडवा.

प्रश्न 1.
कवी / कवयित्रीचे नाव –
उत्तरः
ललिता गादगे.

प्रश्न 2.
संदर्भ –
उत्तरः
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ‘ललिता गादगे’ यांनी लिहिली आहे.

प्रश्न 3.
प्रस्तावना –
उत्तरः
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ‘ललिता गादगे’ यांनी लिहिली आहे. या कवितेमध्ये वसंतऋतूच्या आगमनामुळे सृष्टीच्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

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प्रश्न 4.
वाङमयप्रकार –
उत्तरः
निसर्ग कविता

प्रश्न 5.
कवितेचा विषय
उत्तरः
निसर्गातील बदलांचे मनमोहक वर्णन करणारी ‘उजाड उघडे माळरानही’ ही एक निसर्ग कविता आहे.

प्रश्न 6.
कवितेतील आवडलेली ओळ –
उत्तरः
पळसफुले ही बहरून आली
या मातीच्या अंकावरती

प्रश्न 7.
मध्यवर्ती कल्पना –
उत्तरः
वसंतऋतू हिवाळ्यानंतर सुरू होतो. या ऋतूत निसर्ग हिरवागार दिसतो. कारण वसंतऋतूमध्ये झाडांना नवीन पालवी फुटलेली असते. सारा आसमंत विविध रंगात आणि विविध गंधातही न्हाऊन जातो. सर्व झाडेवेली हिरवीगार व टवटवीत दिसू लागतात. नवचैतन्याने सळसळू लागतात. सारी सृष्टी आनंदित होते. कवयित्रीने अशा सुंदर बदलांचे वर्णन ‘उजाड उघडे माळरानही’ या कवितेत केलेले दिसून येते.

प्रश्न 8.
कवितेतून मिळणारा संदेश-
उत्तरः
हिरवीगार झाडे, झुळझुळ वाहणारे झरे, खळाळणाऱ्या सरिता, उंचच उंच पर्वत या साऱ्यांनी तयार झालेली सृष्टी खूपच सुंदर आहे. ही सृष्टी माणसाला भरभरून देत असते. माणूस मात्र स्वत:च्या स्वार्थासाठी या सुंदर सृष्टीचा नाश करतो. त्यामुळे निसर्गाचा समतोल बिघडला आहे. या सुंदर व मनमोहक निसर्गाचे संगोपन करून निर्सगाचा समतोल साधला पाहिजे. निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे जाणीवपूर्वक स्वागत करा. असा संदेश उजाड उघडे माळरानही या कवितेतून मिळतो.

प्रश्न 9.
कविता आवडण्याची वा न आवडण्याची कारणे –
उत्तरः
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता मला खूप आवडली आहे. उजाड झालेले, मोकळे असलेले माळरान वसंतऋतूच्या आगमनाबरोबर चैतन्याने भरून येते. झाडांना नवीन पालवी फुटते. सारा निसर्ग हिरव्या रंगात न्हाऊन जातो. रानफुले लेऊन, हिरव्या वाटा सजून जातात. कोकीळेचा सुमधूर आवाज सारे वातावरण बेधुंद करणारे असते. या साऱ्या सौंदर्यांचे सुरेख वर्णन आपल्याला या कवितेत वाचायला मिळते, म्हणून ही कविता मनापासून आवडली.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही

प्रश्न 10.
भाषिक वैशिष्ट्ये
‘उजाड उघडे माळरानही’ या कवितेमध्ये कवयित्री ललिता गादगे यांनी प्रमाण मराठी भाषेचा वापर केलेला आहे.

प्रश्न 3. खालील काव्यपंक्तींचे रसग्रहण करा.

प्रश्न 1.
स्वागत करण्या वसंत ऋतूचे रंग उधळले दिशा-दिशांना, बेरड कोरड इथली सृष्टी घेऊन आली ती नजराणा।।
उत्तरेः
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ललिता गादगे यांनी लिहिली आहे. या कवितेत कवयित्रीने वसंतऋतूच्या आगमनामुळे झालेल्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

वसंत ऋतूच्या आगमानाच्या स्वागताचे वर्णन करताना कवयित्री सांगतात, वसंत ऋतूमध्ये वेगवेगळ्या रंगाची पाने, फुले फुलतात. सारा निसर्ग, सारी सृष्टी वेगवेगळ्या रंगांनी सजलेली असते. जणू काही वसंत ऋतूच्या स्वागतासाठी हे होत असते. सर्व दिशा वेगवेगळ्या रंगानी उजळून निघालेल्या असतात. शिशिर ऋतूमध्ये सारी सृष्टी कोरडी, रुक्ष झालेली असते. अशी ही कोरडी, रुक्ष झालेली सृष्टी असा वेगवेगळ्या रंगाचा नजराणा वसंत ऋतूसाठी घेऊन आली आहे असे वाटते.

या काव्यपंक्तींमध्ये कवयित्री ललिता गादगे यांनी प्रमाण मराठी भाषेचा वापर केलेला आहे. त्याचबरोबर यमक अलंकाराचा केलेला वापर शोभून दिसतो.

प्रश्न 2.
गर्द पोपटी लेऊन वसने मुरडत आली लिंबोणी,
जर्द तांबडी कर्णफुलेही घालून सजली नागफणी।।
उत्तर:
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ललिता गादगे यांनी लिहिली आहे. या कवितेत कवयित्रीने वसंतऋतूच्या आगमनामुळे झालेल्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

वसंत ऋतूमध्ये झाडांना नवी हिरवी पालवी फुटते, त्या हिरव्या पालवीला बघून असे वाटते की, गर्द पोपटी म्हणजे हिरव्या रंगाची वस्त्रे परिधान करून लिंबोणी लचकत, मुरडत आली आहे. गर्द तांबड्या रंगाची कर्णफुले घालून नागफणीची झाडे देखील सजली आहेत. वसंतऋतूच्या आगमनाने साऱ्या सृष्टीत आनंद पसरलेला आहे.

या काव्यपंक्तींमध्ये कवयित्री ललिता गादगे यांनी प्रमाण मराठी भाषेचा वापर केलेला आहे. त्याचबरोबर यमक अलंकाराचा केलेला वापर शोभून दिसतो.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही

प्रश्न 3.
लुसलुस पाने अंगोपांगी झुले वड हा दंग होऊनी,
दुरंगी चुनरीत उभी ही घाणेरी ही नटुनी थटुनी।।
उत्तर:
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ललिता गादगे यांनी लिहिली आहे. या कवितेत कवयित्रीने वसंतऋतूच्या आगमनामुळे झालेल्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

वसंतऋतूत सर्व झाडांना नवीन पालवी फुटते. अशीच मऊ, कोवळी पालवी वडाच्या झाडाखाली फुटते. अशी ही लुसलुशीत पाने अंगोपांगी घेऊन वडाचे झाड दंग होऊन अतिशय आनंदाने डुलत आहे. एवढेच नव्हे तर घाणेरी सुद्धा दोन रंगाची ओढणी आपल्या अंगाखांदयावर परिधान करून वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी नटून थटून उभी आहे असे वाटते.

या काव्यपंक्तीमध्ये कवयित्री ललिता गादगे यांनी प्रमाण मराठी भाषेचा वापर केलेला आहे. त्याचबरोबर यमक अलंकाराचा केलेला वापर शोभून दिसतो.

प्रश्न 4.
सळसळ झळझळ पिंपळ पाने मऊ मुलायम मोरपिसापरी,
सांबर लाल कळ्यांनी लखडून उभे स्वागता पाणंदीवरी।।
उत्तरः
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ललिता गादगे यांनी लिहिली आहे. या कवितेत कवयित्रीने वसंतऋतूच्या आगमनामुळे झालेल्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

वसंतऋतूत सर्व झाडांना नवीन पालवी फुटते. अशीच मऊ, कोवळी पालवी पिंपळाच्या झाडालाही फुटते. असे वाटते जणू वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी पिंपळाचे झाड मोरपिसाप्रमाणे असणारी मऊ व मुलायम पाने आपल्या अंगावर घेऊन सळसळ करत उभे आहे. तसेच सांबर नावाचा वृक्षदेखील रानातल्या चिंचोळ्या वाटेवर (पाणंद) दोन्ही बाजूला लाल कळ्यांनी बहरून वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी उभा आहे.

या काव्यपंक्तीमध्ये कवयित्री ललिता गादगे यांनी प्रमाण मराठी भाषेचा वापर केलेला आहे. त्याचबरोबर यमक अलंकाराचा केलेला वापर शोभून दिसतो.

प्रश्न 5.
पळसफुले ही बहरून आली या मातीच्या अंकावरती,
कुसुमे सारी या जगातली पाहून त्यांना मनात झुरती।।
उत्तर:
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ललिता गादगे यांनी लिहिली आहे. या कवितेत कवयित्रीने वसंतऋतूच्या आगमनामुळे निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

पळसांच्या फुलांना बहर आला आहे. या बहरलेल्या फुलांनी वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी आपला सडाच या मातीवर पसरलेला आहे. ती अतिशय आनंदाने या मातीवर पसरलेली, सुखावलेली आपल्याला पाहायला मिळतात. पळसाला आलेली व मातीवर पसरलेली ती फुले व त्यांची सुंदरता पाहून जगातील सर्व फुले मनातल्या मनात झुरतात.

या काव्यपंक्तीमध्ये कवयित्री ललिता गादगे यांनी प्रमाण मराठी भाषेचा वापर केलेला आहे. त्याचबरोबर यमक अलंकाराचा केलेला वापर शोभून दिसतो.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही

प्रश्न 6.
आंब्याच्या मोहरातून आली कोकिळेची सुरेल तान,
उजाड उघडे माळरानही गाऊ लागले वसंतगान।।
उत्तरः
‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ललिता गादगे यांनी लिहिली आहे. या कवितेत कवयित्रीने वसंतऋतूच्या आगमनामुळे झालेल्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

वसंत ऋतूत सृष्टीत अनेक आनंददायी बदल घडतात. वसंतऋतूत आंब्याच्या झाडाला मोहर येतो. अशा या आनंददायी वातावरणात आंब्याच्या झाडावर बसून कोकिळा सुरेल तान घेत असते. वसंतऋतूच्या आगमनाने उजाड उघडे माळरानही फुलांनी पानांनी बहरून आलेले असते. जणू काही ते माळरानही अतिशय आनंदाने वसंतऋतूचे गीत गात आहे असेच वाटते.

या काव्यपंक्तीमध्ये कवयित्री ललिता गादगे यांनी प्रमाण मराठी भाषेचा वापर केलेला आहे. त्याचबरोबर यमक अलंकाराचा केलेला वापर शोभून दिसतो.

उजाड उघडे माळरानही Summary in Marathi

कवयित्रीचा परिचय:

नाव: ललिता गादगे जन्म
जन्म: 1954
प्रसिद्ध कवयित्री, ‘फसवी क्षितिजे’, ‘अग्निजळ’, ‘संवेदन’ इत्यादी कवितासंग्रह; ‘आयुष्याच्या काठाकाठाने’, ‘दुःख आणि अश्रू’, ‘प्राजक्ताची फुले आणि दाह’ हे कथासंग्रह; ‘नाळबंधाची कहाणी’, ‘खिडकीतलं आभाळ’ हे ललित गदय प्रसिद्ध.

प्रस्तावना:

‘उजाड उघडे माळरानही’ ही कविता कवयित्री ललिता गादगे यांनी लिहिली आहे. या कवितेत कवयित्रीने वसंतऋतूच्या आगमनामुळे होणाऱ्या निसर्गसौंदर्यातील बदलांचे मनमोहक वर्णन केले आहे.

Poetess Lalita Gadge has written a poem named ‘Ujad Ughade Malranhi’. An appealing colourful description of change in nature due to the beginning of spring season has been depicted by the poetess in this poem in a vibrant picturesque manner.

भावार्थ:

स्वागत करण्या ……….. ती नजराणा ।।1।।
वसंत ऋतूच्या आगमनाच्या स्वागताचे वर्णन करताना कवयित्री सांगतात, वसंत ऋतूमध्ये वेगवेगळ्या रंगाची पाने, फुले फुलतात. सारा निसर्ग, सारी सृष्टी वेगवेगळ्या रंगांनी सजलेली आहे. जणू काही वसंत ऋतूच्या स्वागतासाठी हे होत आहे. सर्व दिशा वेगवेगळ्या रंगानी उजळून निघाल्या आहेत. शिशिर ऋतूमध्ये सारी सृष्टी कोरडी, रुक्ष झालेली असते. अशी ही कोरडी, रुक्ष झालेली सृष्टी असा वेगवेगळ्या रंगाचा नजराणा वसंत ऋतूसाठी घेऊन आली आहे.

गर्द पोपटी ……… सजली नागफणी ।।2।।
वसंत ऋतूमध्ये झाडांना नवी हिरवी पालवी फुटते, त्या हिरव्या पालवीला बघून असे वाटते की, गर्द पोपटी म्हणजे हिरव्या रंगाची वस्त्रे परिधान करून लिंबोणी लचकत, मुरडत आली आहे. गर्द तांबड्या रंगाची कर्णफुले घालून नागफणीची झाडे देखील सजली आहेत. वसंतऋतूच्या आगमनाने साऱ्या सृष्टीत आनंद पसरलेला आहे.

लुसलुस पाने ……… नटुनी थटुनी ।।3।।
वसंतऋतूत सर्व झाडांना नवीन पालवी फुटते अशीच ही मऊ, कोवळी, लुसलुशीत पाने अंगोपांगी घेऊन वडाचे झाड दंग होऊन अतिशय आनंदाने डुलत आहे. एवढेच नव्हे तर घाणेरी सुद्धा दोन रंगाची ओढणी आपल्या अंगाखांदयावर परिधान करून वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी नटून थटून उभी आहे.

सळसळ झळझळ ……. स्वागता पाणंदीवरी ।।4।।
वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी पिंपळ आपल्या मोरपिसाप्रमाणे मऊ व मुलायम पाने आपल्या अंगावर घेऊन सळसळ करत उभा आहे. तसेच सांबर वृक्ष देखील रानाच्या त्या चिंचोळ्या वाटेवर (पाणंद) दोन्ही बाजूला लाल कळ्यांनी बहरून वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी उभे आहेत.

पळसफुले ही ……….. त्यांना मनात झुरती ।।5।।
पळसांच्या फुलांना बहर आला आहे. या बहरलेल्या फुलांनी वसंतऋतूच्या स्वागतासाठी आपला सडाच या मातीवर पसरलेला आहे. ती अतिशय आनंदाने या मातीवर पसरलेली, सुखावलेली आपल्याला

आंब्याच्या मोहरातून ……… लागले वसंतगान ।।6।।
वसंत ऋतूत सृष्टीत अनेक बदल घडतात. वसंतऋतूत आंब्याच्या झाडाला मोहर येतो. अशा या आनंददायी वातावरणात आंब्याच्या झाडावर बसून कोकिळा सुरेल तान घेत असते. वसंतऋतूच्या आगमनाने उजाड उघडे माळरानही फुलांनी पानांनी बहरून आलेले आहे. जणू काही ते माळरानही अतिशय आनंदाने वसंतऋतूचे गीत गात आहे.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 उजाड उघडे माळरानही

शब्दार्थ:

  1. स्वागत – आतिथ्य (welcome)
  2. बेरड – निगरगट्ट (hardened)
  3. कोरड – कोरडी, शुष्क (dry)
  4. उधळणे – पसरवणे (to spread)
  5. दिशा – बाजू (a side)
  6. सृष्टी – निसर्ग (a nature)
  7. नजराणा – वरिष्ठाला यायची भेटवस्तू (a respectful gift)
  8. गर्द – दाट (dense)
  9. वसन – वस्त्र (a cloth)
  10. मुरडणे – नटणे (to adorn)
  11. जर्द – दाट, गहिरा (dark or deep)
  12. तांबडा – लाल, आरक्त (red)
  13. कर्णफुले – कानातील दागिना (an ear-ring)
  14. सजणे – नटणे, शृंगारणे (to get dressed up)
  15. लुसलुस – टवटवीत (fresh and healthy)
  16. अंगोपांगी – अंगावर
  17. दंग – तल्लीन, गुंग (deeply engaged)
  18. दरंगी – दोन रंगात काढलेले (in two colours)
  19. चुनरी – दोन्ही खांदयांवरून घेण्याचे स्त्रियांचे एक वस्त्र (a light garment)
  20. सळसळ – ‘सळसळ’ असा आवाज (rustle)
  21. झळझळ – चकाकी (glitter)
  22. पान – पर्ण (a leaf)
  23. मऊ – सौम्य, नरम (soft, mild)
  24. पाणंद – अरुंद पायवाट (a narrow lane)
  25. बहरणे – मोहरणे (to blossom)
  26. कुसुम – फूल (flower)
  27. झुरणे – खंत वाटणे (to pine and waste away)
  28. सुरेल – कर्णमधुर, मंजुळ (sweet sounding)
  29. तान – लकेर, गाण्यातील आलाप (a tune)
  30. माळरान – नापीक मैदान (barren land)
  31. वसंतगान – वसंतऋतूचा आनंद व्यक्त करणारे गीत

टिपा:

  1. लिंबोणी – कडुलिंब (neem tree)
  2. नागफणी – कॅक्टस (cactus) कुळातील काटेरी फूलझाड
  3. वड – वटवृक्ष (a banyan tree)
  4. घाणेरी – उग्र दर्प येणारे रंगीबेरंगी लहान फुलांचे झुडूप
  5. पिंपळ – एक वृक्ष
  6. सांबर – उष्णकटिबंधीय वनांतील एक वृक्ष
  7. पळस – एक वृक्ष
  8. वसंतऋतू – चैत्र व वैशाख या दोन महिन्यांमध्ये येणारा ऋतू (the spring season)

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वाक्प्रचार:

1. दंग होणे – गुंग /मग्न होणे

Maharashtra Board Class 9 My English Coursebook Solutions Chapter 3.1 Coromandel Fishers

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 English Solutions My English Coursebook Chapter 3.1 Coromandel Fishers Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 My English Coursebook Solutions Chapter 3.1 Coromandel Fishers

My English Coursebook Std 9 Guide Chapter 3.1 Coromandel Fishers Textbook Questions and Answers

Warming up:
Chit-chat

  1. What time do you get up in the morning?
  2. What time do you go to bed?
  3. Where do you spend your holidays?
  4. What adventures do you like boating, trekking, scuba diving, mountaineering or something else?
  5. After you finish your education, would you like to work close to nature?
  6. What would you like to do?

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Expanding Horizons

Question (a)
Write as many words as you can, related to the following. You should have at least twenty words each. You may refer to your geography textbook or other sources for that purpose. Then try to find English words/items for the ones you have written.
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Answer:
Maharashtra Board Class 9 My English Coursebook Solutions Chapter 3.1 Coromandel Fishers 2

Question (b)
Prepare a bilingual glossary for each of these topics:

Question (c)
Arrange the glossary in two ways:
1. According to the alphabetical order of letters in your mother tongue.
2. According to the alphabetical order ‘a-z’
[Students may attempt (b) & (c) above on ther own.

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English Workshop:

Answer the following questions.

Question (a)
How many stanzas are there in the poem?
Answer:
There are three stanzas in the poem.

Question (b)
How many lines are there in the poem?
Answer:
There are twelve lines in the poem.

Question (c)
List the rhyming words in each stanza:
Answer:

  1. First stanza: light – night, free – sea
  2. Second stanza: call – all, drives – lives
  3. Third stanza: grove – love, glee – sea

2. You know that many poems have rhyming words or rhymes at the end of the lines in each stanza. The pattern of rhyming is usually shown with the help of small letters such as ‘a’, ‘b’, ‘c’, etc. This pattern of rhyme is known as the rhyme scheme. The rhyme scheme of each stanza in this poem is aabb. Verify.

Question 1.
You know that many poems have rhyming words or rhymes at the end of the lines in each stanza. The pattern of rhyming is usually shown with the help of small letters such as ‘a’, ‘b’, ‘c’, etc. This pattern of rhyme is known as the rhyme scheme. The rhyme scheme of each stanza in this poem is aabb. Verify.

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3. What do the following expressions refer to? Write in a word or phrase:

Question 1.
What do the following expressions refer to? Write in a word or phrase:

  1. leaping wealth of the tide: …………
  2. kings of sea: …………..
  3. at the fall of the sun: …………
  4. the edge of the verge: ………..

Answer:

  1. leaping wealth of the tide: fish
  2. kings of sea : fishermen
  3. at the fall of the sun : at the sunset
  4. the edge of the verge : horizon

4. Match the following:

Question 1.
Match the following:
Maharashtra Board Class 9 My English Coursebook Solutions Chapter 3.1 Coromandel Fishers 3
Answer:
(a) the wind – child
(b) dawn – mother holding her child
(c) sea – mother
(d) cloud – brother
(e) waves – comrades

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5. Find and write the lines in the poem that refer to:

Question 1.
Find and write the lines in the poem that refer to:
(a) early morning
(b) evening
(c) full moon night
Answer:
(a) early morning: Rise, brother, rise; the wakening skies pray to the morning light.
(b) evening: What though we toss at the fall of the sun where the hand of the sea-god drives?
(b) full moon light: And sweet are the sands at the full o’ the moon with the sound of the voices we love

6. Write the lines that show that the fishermen are not afraid of the sea or of drowning.

Question 1.
Write the lines that show that the fishermen are not afraid of the sea or of drowning.
Answer:
He who holds the storm by the hair, will hide in his breast our lives.

7. In the last stanza, two lines refer to a landscape, and two lines refer to a ‘seascape’. Which are they? Copy them from the poem correctly:

Question 1.
In the last stanza, two lines refer to a landscape, and two lines refer to a ‘seascape’. < Which are they? Copy them from the poem correctly:
Maharashtra Board Class 9 My English Coursebook Solutions Chapter 3.1 Coromandel Fishers 4
Answer:

LandscapeSeascape
Sweet is the shade of the coconut glade, and the scent of the mango grove,

And sweet are the sands at the full o’ the moon with the sound of the voices we love.

But sweeter, brothers, the kiss of the spray and the dance of the wild foam’s glee;

Row, brothers, row to the edge of the verge, where the low sky mates with the sea.

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8. Using the internet, find photographs /pictures of landscapes /seascapes to illustrate the images used in the poem.

Question 1.
Using the internet, find photographs /pictures of landscapes /seascapes to illustrate the images used in the poem.

9. Select a few lines from your favourite nature poem in your mother tongue and translate them into English.

Question 1.
Select a few lines from your favourite nature poem in your mother tongue and translate them into English.
Answer:
1. Title: Coromandel Fishers
2. Poet/Poetess: This poem is written by Sarojini Naidu.

3. Theme/Central Idea: The theme of the poem is that when human beings come together for a common purpose, no force or adversary can adversary can block their way. There could be risk in any challenging enterprise, but human progress depends on facing them courageously.

4. Rhyme Scheme: The rhyme scheme of the poem is ‘aabb’.

5. Figure of Speech: Simile, Metaphor

6. Special Feature: This is a didactic poem. A didactic poem is an instructive one. It is aimed at imparting certain advice or some moral principles. “When we come together for a common purpose and put our faith in God, we can accomplish great things” – This is the moral principle of this poem.

7. Favourite Lines: My favourite lines from the poem are :

  • “He who holds the storm by the hair, will hide in his breast our lives”.
  • But sweeter, O brothers, the kiss of the spray and the dance of the wild foam’s glee.

8. Why I like the poem: I like this poem because it imparts a very positive message. It says that if we trust in God and do our work promptly, success is ours.

My English Coursebook 9th Class Solutions Chapter 3.1 Coromandel Fishers Additional Important Questions and Answers

Simple Factual Activities:

Question 1.
Who holds the storm by the hair?
Answer:
God holds the storm by the hair.

Maharashtra Board Class 9 My English Coursebook Solutions Chapter 3.1 Coromandel Fishers

Question 2.
What type of boat do the fishermen use?
Answer:
The fishermen use catamaran boats.

Complex Factual Activities :

Question 1.
As the sea-gull flies away calling it appears as though, he is showing the way-What does the way lead to?
Answer:
The way leads the fishermen to the sea where plenty of fish can be caught.

Paragraph format:

The title of the poem is ‘Coromandel Fishers.’ The poem is written by Sarojini Naidu. The theme of the poem is that when human beings come together for a common purpose, no force or adversary can block their way. There could be risk in any challenging enterprise, but human progress depends on facing them courageously. The fishermen in the poem prove this fact.

The rhyme scheme of the poem is ‘aabb’. The figures of speech in the poem are simile and Metaphor. The special feature of this poem is that it a didactic poem. It is an instructive poem which is aimed at imparting certain advice or some moral principles. “ When we come together for a common purpose and put our faith in God, we can accomplish great things. ” This is the moral principle of this poem.

My favourite lines from the poem are:

1. “He who holds the storm by the hair, will hide in his breast our lives.” This line shows the fishermen put their full faith in the sea-god.
2. “But sweeter, O brothers, the kiss of spray and the dance of the wild foam’s glee.” I like the poem because it gives a very positive message. It says that if we trust in God and do our work promptly, success is ours.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा – संत तुकाराम

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा – संत तुकाराम Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा – संत तुकाराम

Marathi Aksharbharati Std 9 Digest Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा – संत तुकाराम Textbook Questions and Answers

स्वाध्याय :

1. ताक्ता पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
ताक्ता पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा - संत तुकाराम 1
उत्तर:

वाट बघणाराकोणाची वाट बघतोवाट बघण्याचे कारण
चकोरपूर्णिमेचा चंद्रमाचंद्रकिरण हेच त्याचे जीवन
लेंकीमाहेरचे बोलावणे येणेदिवाळीचा सण
भुकेलेले बाळमाउलीचीभूक
संत तुकारामपांडुरंगाचीभेटीची आस

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा - संत तुकाराम

2. योग्य अर्थ शोधा.

प्रश्न 2.
योग्य अर्थ शोधा.
अ. आस लागणे म्हणजे ………….
1. ध्यास लागणे
2. उत्कंठा वाढणे
3. घाई होणे
4. तहान लागणे
उत्तर:
1. ध्यास लागणे

आ. बाटुली म्हणजे ………….
1. धाटुली
2. वाट
3. वळण
4. वाट पहाणे
उत्तर:
2. वाट

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3. भावार्थाधारित. 

प्रश्न अ.
संत तुकारामांनी पांडुरंगाच्या भेटीबाबत दिलेल्या दृष्टान्तातील तुम्हाला आवडलेला दृष्टान्त स्पष्ट करा.
उत्तरः
संत तुकारामांनी पांडुरंगाच्या भेटीसाठी आतुर झालेल्या आपल्या मन:स्थितीचे वर्णन करताना दिलेले लहान बाळाचे उदाहरण अतिशय समर्पक वाटते. ज्याप्रमाणे लहान बाळाचे विश्व हे त्याची आईच असते त्याचप्रमाणे तुकारामांचे विश्व म्हणजे फक्त विठ्ठलच आहे. बाळाला भूक लागल्यावर तो अतिशय आतुरतेने आपल्या आईची वाट पाहते. तिच्या भेटीसाठी आतुर झालेला असतो. तिची भेट होणे हे त्याचे ध्येय असते. त्याचप्रमाणे विठ्ठलाची भेट हे संत तुकारामांच्या जीवनाचे ध्येय आहे. परिणामी हा दृष्टान्त अतिशय समर्पक वाटतो.

प्रश्न आ.
चकोराच्या दृष्टान्तातून संत तुकाराम काय सिद्ध करू इच्छितात, हे तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तर:
संत तुकारामांना विठ्ठल भेटीची आस लागली आहे. ज्याप्रमाणे पौर्णिमेचा चंद्रमा हेच चकोराचे जीवन असते, पौर्णिमेच्या चंद्राची तो आतुरतेने वाट पाहत असतो, त्याचप्रमाणे पंढरपुरच्या विठ्ठलाच्या भेटीची संत तुकारामांना आस लागली आहे. विठ्ठलाचे दर्शन हेच जणू त्याच्या जीवनाचे अंतिम ध्येय आहे.

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उपक्रम :

1. संत बहिणाबाईंचा ‘जलाविण मासा’ हा अभंग मिळवून वर्गात त्याचे वाचन करा.
2. संत कान्होपात्रा यांचा ‘नको देवराया अंत आता पाहू’ हा अभंग मिळवून वाचा.

भाषाभ्यास :

अलंकार

आपण जेव्हा कथा, कादंबरी, कविता, नाटक वगैरे साहित्य वाचतो. तेव्हा दैनंदिन जगण्यातील भाषेपेक्षा थोडी वेगळी भाषा आपल्याला वाचायला मिळते. आपल्याला साहित्य वाचताना आनंद मिळवून देण्यात त्या भाषेचा मोठा वाटा असतो. दैनंदिन व्यवहारातील भाषेपेक्षा साहित्याची भाषा वेगळी ज्या घटकांमुळे ठरते, त्यातील एक घटक म्हणजे ‘अलंकार’. अलंकार भाषेचे सौंदर्य कसे खुलवतात, हे आपल्याला आणखी काही उदाहरणे घेऊन पहायचे आहे.
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Marathi Akshar Bharati Class 9 Textbook Solutions Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा – संत तुकाराम Additional Important Questions and Answers

पुढील पक्ष्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार

कृती करा: कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा
उत्तरः
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प्रश्न 2.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. जीवाला कोणती आस लागली आहे?
उत्तरः
जीवाला विठ्ठल भेटीची आस लागली आहे.

ii. विठ्ठलाची वाट कोण पाहत आहे?
उत्तर:
संत तुकारामांचे मन विठ्ठलाची वाट पाहत आहे.

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iii. अति शोक कोण करत आहे ?
उत्तर :
भुकेलिवा बाळ अति शोक करत आहे.

iv. संत तुकारामांना कशाची भूक लागली आहे?
उत्तरः
संत तुकारामांना श्रीमुख दर्शनाची भूक लागली आहे.

v. संत तुकाराम विठ्ठलाला कोणती विनंती करत आहेत?
उत्तरः
संत तुकाराम विठ्ठलाला श्रीमुख दर्शनाची विनंती करत आहेत.

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प्रश्न 3.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.

  1. तैसें माझें …………………. वाट पाहे । (जीवा, उरि, मन, श्रीमुख)
  2. दिवाळीच्या मुळा ………… आसावली । (मुली, बाया, लेंकी, स्त्रिया)
  3. पाहातसे वाटुली …………. । (आळंदीची, पंढरीची, पंढरपुराची, विठ्ठलाची)
  4. भुकेलिवा बाळ अति ………… करी । (गडबड, मस्ती, दुःख, शोक)
  5. वाट पाहे ……………….. माउलीची । (उरि, दारी, आई, विठाई)
  6. धावूनि ……………………. दांवी देवा। (दर्शन, श्रीमुख, प्रदर्शन, मुखदर्शन)

उत्तर:

  1. मन
  2. लेंकी
  3. पंढरीची
  4. शोक
  5. उरि
  6. श्रीमुख

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प्रश्न 4.
जोड्या जुळवा.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. भेटीलागी जीवा(अ) वाट तुझी
2. तैसें माझें मन(ब) चकोराजीवन
3. पाहे रात्रंदिवस(क) वाट पाहे
4. पूर्णिमेचा चंद्रमा(ड) लागलीसे आस

उत्तर:

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. भेटीलागी जीवा(ड) लागलीसे आस
2. तैसें माझें मन(क) वाट पाहे
3. पाहे रात्रंदिवस(अ) वाट तुझी
4. पूर्णिमेचा चंद्रमा(ब) चकोराजीवन

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
सहसंबंध लिहा.
i. जीवा : आस :: वाट : ………….
ii. लेंकी : आसावली :: उरि : ………….
उत्तरः
i. रात्रंदिवस
ii. माउलीची

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प्रश्न 2.
समान अर्थाच्या काव्यपंक्ती शोधून लिहा.
i. (अ) पूर्णिमेचा चंद्रमा हेच चकोर पक्ष्याचे जीवन असते.
(ब) मी रात्रंदिवस तुझ्या भेटीची आतुरतेने वाट पाहत आहे.
(क) तसेच माझे मन तुझी वाट पाहत आहे.
उत्तर:
(अ) पूर्णिमेचा चंद्रमा चकोराजीवन ।
(ब) पाहे रात्रंदिवस वाट तुझी ।।
(क) तैसें माझें मन वाट पाहे ।।

ii. (अ) हे देवा तुझे श्रीमुख म्हणजे तुझे दर्शन मला व्हावे, म्हणून तू माझ्यासाठी धावून ये.
(ब) हे विठ्ठला, पंढरपुराहून कोणीतरी मला तुझ्या भेटीसाठी न्यायाला येईल याची मी आतुरतेने वाट पाहत आहे.
उत्तर :
(अ) धांवूनि श्रीमुख दांवी देवा।।
(ब) पाहातसे वाटुली पंढरीची।।

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प्रश्न 3.
काव्यपंक्तीवरून शब्दांचा योग्य क्रम लावा.

  1. पाहे, मन, चंद्रमा, जीवा
  2. पंढरीची, श्रीमुख, माउलीची, आसावली
  3. तुका, मुळा, बाळ, शोक

उत्तर :

  1. जीवा, चंद्रमा, मन, पाहे
  2. आसावली, पंढरीची, माउलीची, श्रीमुख
  3. मुळा, बाळ, शोक, तुका

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प्रश्न 4.
जोड्या जुळवा.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. दिवाळीच्या मुळा(अ) अति शोक करी
2. भुकेलिवा वाळ(ब) दांवी देवा
3. तुका म्हणे(क) मज लागलीसे भूक
4. धावूनि श्रीमुख(ड) लेकी आसावली

उत्तर:

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. दिवाळीच्या मुळा(ड) लेकी आसावली
2. भुकेलिवा वाळ(अ) अति शोक करी
3. तुका म्हणे(क) मज लागलीसे भूक
4. धावूनि श्रीमुख(ब) दांवी देवा

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प्रश्न 5.
काव्यपंक्तींचा योग्य क्रम लावा.

  1. धावूनि श्रीमुख दांवी देवा।।
  2. पाहातसे वाटुली पंढरीची।।
  3. वाट पाहे उरि माउलीची।।
  4. भुकेलिवा बाळ अति शोक करी।

उत्तर:

  1. पाहातसे वाटुली पंढरीची ।।
  2. भुकेलिवा बाळ अति शोक करी ।
  3. वाट पाहे उरि माउलीची ।।
  4. धांवूनि श्रीमुख दांवी देवा ।।

प्रश्न 6.
कोण ते लिहा.
उत्तरः
शोक करणारा – भुकेलिवा बाळ |

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प्रश्न 7.
प्रश्न तयार करा.
i. तुका म्हणे मज लागलीसे भूक ।
ii. भुकेलिवा बाळ अति शोक करी ।
उत्तर:
i. भूक कोणाला लागली आहे?
ii. बाळ अति शोक का करत आहे?

कृती 3 : काव्यसौंदर्य

खालील काव्यपंक्तीतील आशयसौंदर्य स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
पूर्णिमेचा चंद्रमा चकोराजीवन।
तैसें माझें मन वाट पाहे।।
उत्तरः
संत तुकारामांना लागलेली विठ्ठल भेटीची ओढ पटवून देताना, संत तुकाराम चकोराचे उदाहरण देतात. ज्याप्रकारे पौर्णिमेचा चंद्रमा हेच चकोराचे जीवन असते, त्याचप्रमाणे विठ्ठल हे संत तुकारामांचे जीवन आहे. त्यामुळे संत तुकारामांचे मन त्या चकोर पक्ष्यासारखे विठ्ठलदर्शनाची अतिशय मनापासून वाट पाहत आहे.

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प्रश्न 2.
दिवाळीच्या मुळा लेकी आसावली।
पाहातसे वाटुली पंढरीची।।
उत्तरः
संत तुकाराम महाराज यांच्या भेटीलागी जीवा’ या कवितेतून वरील काव्यपंक्ती घेतली आहे. संत तुकारामांनी पांडुरंगाच्या भेटीसाठी आतर झालेल्या आपल्या मन:स्थितीचे अचूक वर्णन केले आहे. संत तुकाराम सांगतात, ज्याप्रमाणे सासरी गेलेल्या मुली दिवाळीच्या सणाला माहेरहून कोणीतरी मुन्हाळी आपल्याला न्यायला येईल याची अतिशय मनापासून वाट पाहत असतात. त्याचप्रमाणे हे विठ्ठला, मी देखील पंढरपुराहून कोणीतरी मला भेटीसाठी न्यायला येईल, याची आतुरतेने वाट पाहत आहे.

प्रश्न 3.
तुका म्हणे मज लागलीसे भूक।
धावूनि श्रीमुख दांवी देवा।।
उत्तर:
विठ्ठलभेटीची तीव्र ओढ योग्य उदाहरणातून तुकाराम महाराज व्यक्त करतात, अभंगाच्या शेवटी तुकाराम महाराज सांगतात की, लहान बाळाप्रमाणे मला देखील विठ्ठलदर्शनाची तीव्र भूक लागली आहे. अशावेळी ते विठ्ठलाला विनंती करतात, की हे देवा तुझे श्रीमुख म्हणजे तुझे दर्शन मला व्हावे.

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पुढील ओळींचा अर्थ स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
भेटीलागी जीवा लागलीसे आस ।
पाहे रात्रंदिवस वाट तुझी ।।
उत्तरः
संत तुकाराम विठ्ठलाला उद्देशून सांगतात की, है
विठ्ठला मला तुझ्या भेटीची आस लागली आहे. मी रात्रंदिवस
तुझ्या भेटीची अतिशय आतुरतेने वाट पाहत आहे.

प्रश्न 2.
भुकेलिबा बाळ अति शोक करी ।
वाट पाहे उरि माउलीची ।।
उत्तरः
विठ्ठलभेटीची तीव्र आस व्यक्त करताना संत तुकाराम सांगतात, ज्याप्रमाणे लहान बाळ भुकेपोटी अतिशय व्याकुळतेने शोक करतं म्हणजे रडतं, तळमळत असतं व आपली भूक मिटावी म्हणून आपल्या आईची अतिशय आतुरतेने वाट पाहत असतं त्याप्रमाणे मी देखील तुझी वाट पाहत आहे.

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प्रश्न 3.
भक्त व विठ्ठल आणि चकोर व चंद्र यांतील साधर्म्य तुमच्या शब्दांत सांगा.
उत्तरः
भक्त श्रीविठ्ठलाच्या भेटीसाठी आतुर झालेला असतो. त्याला विठ्ठलाशिवाय दुसरे काहीच सुचत नाही. त्याचे संपूर्ण जीवन हे विठ्ठलमय झालेले असते. विठ्ठलदर्शनाशिवाय त्याला अन्न-पाणी गोड लागत नाही. विठ्ठलदर्शन हेच त्याच्या जीवनाचे साध्य असते. त्याचप्रमाणे चकोर पक्षी चंद्रकिरणांसाठी आतुर झालेला असतो. कविकल्पना आहे की, पौर्णिमेचा पूर्ण चंद्र दिसला की, चकोर पक्ष्याला आनंद होतो. तो फक्त चंद्राचे कोवळे किरणच प्राशन करतो. चंद्रकिरण हेच त्याचे जीवन असते. अशाप्रकारे भक्त व चकोर हे अनुक्रमे विठ्ठल व चंद्र यांच्या भेटीसाठी तळमळत असतात.

प्रश्न 4.
विठ्ठलदर्शन हे सर्व सुखांचे सुख आहे. या विधानातील समर्पकता तुमच्या शब्दांत सांगा.
उत्तरः
विठ्ठलाचे दर्शन हे सर्व सुखांचे सुख आहे. विठ्ठलाचे दर्शन होताच भक्तांची तहान-भूक हरवून जाते. त्यांचे नयन दिपून जातात व त्यांचे हृदय सुखद आनंदाने भरून जाते. विठ्ठलदर्शन ही भक्ताच्या आत्म्याला लागलेली अध्यात्मिक भूक असते. म्हणून विठ्ठलाचे दर्शन घेण्यासाठी दरवर्षी लाखो भाविक पंढरपुरला जातात. एकदा का विठ्ठलदर्शन झाले की
मानवाचे सर्व प्रकारचे पाप-ताप आणि वेदना संपुष्टात येतात.

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प्रश्न 5.
दिलेल्या मुद्द्यांच्या आधारे कवितेसंबंधी पुढील कृती सोडवा.
उत्तरः
1. कवी/ कवयित्रीचे नाव – संत तुकाराम (तुकाराम बोलोबा अंबिले – मोरे)
2. संदर्भ – ‘भेटीलागी जीवा’ हा अभंग संत तुकाराम’ यांनी लिहिला आहे. हा अभंग ‘सकलसंतगाथा खंड दुसरा: श्री तुकाराम महाराजांची अभंगगाथा’ या पुस्तकातून घेतला आहे.
3. प्रस्तावना – ‘भेटीलागी जीवा’ हा अभंग ‘संत तुकाराम’ यांनी लिहिला आहे. या अभंगातून संत तुकारामांनी आपल्या मनातील विठ्ठलाच्या भेटीची ओढ योग्य उदाहरणातून व्यक्त केली आहे.

4. वाङ्मयप्रकार’ – भेटीलागी जीवा’ ही कविता नसून एक अभंग आहे.
5. कवितेचा विषय – विठ्ठलभेटीची अनावर ओढ विविध उदाहरणांद्वारे व्यक्त करणारा संत तुकारामांचा ‘भेटीलागी जीवा’ हा अभंग एक उत्कृष्ट भक्तिगीत आहे.

6. कवितेतील आवडलेली ओळ
दिवाळीच्या मुळा लेकी आसावली।
पाहातसे वाटुली पंढरीची।।

7. मध्यवर्ती कल्पना – संत तुकारामांनी तन, मन, धन अर्पून विठ्ठलाची भक्ती केली. अगदी मनापासून त्याचे नामस्मरण केले. अशा या आपल्या भगवंताच्या म्हणजेच विठ्ठलाच्या भेटीची अनावर ओढ त्यांच्या मनात निर्माण झाली. त्यासाठी अतिशय समर्पक उदाहरणे वापरून त्यांनी ‘भेटीलागी जीवा’ या अभंगातून ती ओढ व्यक्त केली आहे.

8. कवितेतून मिळणारा संदेश –
संत तुकाराम यांना विठ्ठलभेटीची ओढ लागली आहे. त्यासाठी अतिशय योग्य उदाहरणे वापरून त्यांनी ‘भेटीलागी जीवा’ हा अभंग लिहिला आहे. या उदाहरणांचा अभ्यास केला असता संत तुकारामांच्या मनात विठ्ठलाच्या भेटीची किती अनावर ओढ आहे हे लक्षात येते. अशीच आपणही परमेश्वराची भक्ती केली तर आपणासही परमेश्वराची प्राप्ती होईल असाच संदेश ‘भेटीलागी जीवा’ या अभंगातून आपणास मिळतो.

9. कविता आवडण्याची वा न आवडण्याची कारणे –
‘भेटीलागी जीवा’ हा संत तुकारामाचा अभंग मला खूप आवडला आहे. त्याचे कारण म्हणजे विठ्ठलभेटीची ओढ व्यक्त करण्यासाठी त्यांनी निसर्गातील, संसारातील अगदी चपखल उदाहरणांचा वापर केलेला आहे. रोजच्या व्यवारातील उदाहरणे वापरून अपेक्षित परिणाम त्यांनी साधला आहे.

10. भाषिक वैशिष्ट्ये –
संत तुकाराम यांच्या अभंगाची भाषा अतिशय साधी, सरळ व रसाळ आहे. शिवाय भक्ती, व्यवझर आणि अध्यात्म यांची
सुयोग्य सांगड त्यांच्या अभंगातून दिसून येते.

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खालील काव्यपंक्तींचे रसग्रहण करा.

प्रश्न 1.
भेटीलागी जीवा लागलीसे आस।
पाहे रात्रंदिवस वाट तुझी।।
पूर्णिमेचा चंद्रमा चकोराजीवन।
तैसें माझें मन वाट पाहे ।।
उत्तरः
‘संत तुकाराम महाराज’ यांच्या भेटीलागी जीवा’ या कवितेतून वरील काव्यपंक्ती घेतली आहे. संत तुकारामांनी आपल्या मनातील विठ्ठलाच्या भेटीची ओढ समर्पक दृष्टांतातून व्यक्त केलेली दिसून येते. संत तुकाराम विठ्ठलाला उद्देशून सांगतात की, हे विठ्ठला मला तुझ्या भेटीची आस लागली आहे. मी रात्रंदिवस तुझ्या भेटीची अतिशय आतुरतेने वाट पाहत आहे. आपल्याला लागलेली विठ्ठल भेटीची ओढ पटवून देताना, संत तुकाराम चकोराचे उदाहरण देतात.

ते सांगतात, ज्याप्रमाणे पौर्णिमेचा चंद्रमा हेच चकोराचे जीवन असते, त्याचप्रमाणे विठ्ठल हे माझे जीवन आहे. त्यामुळे माझे मन त्या चकोर पक्ष्यासारखे विठ्ठल दर्शनाची अतिशय मनापासून वाट पाहत आहे. संत तुकाराम यांच्या अभंगाची भाषा अतिशय साधी, सरळ व रसाळ आहे. शिवाय भक्ती, व्यवहार आणि अध्यात्म यांची सुयोग्य सांगड त्यांच्या अभंगातून दिसून येते.

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प्रश्न 2.
दिवाळीच्या मुळा लेकी आसावली।
पाहातसे वाटुली पंढरीची।।
भुकेलिया बाळ अति शोक करी।
वाट पाहे उरि माउलीची।।
उत्तर:
‘संत तुकाराम महाराज यांच्या भेटीलागी जीवा’ या कवितेतून वरील काव्यपंक्ती घेतली आहे. संत तुकारामांनी आपल्या मनातील विठ्ठलाच्या भेटीची ओढ समर्पक दृष्टांतातून व्यक्त केलेली दिसून येते.

संत तुकाराम सांगतात, ज्याप्रमाणे सासरी गेलेल्या मुली दिवाळीच्या सणाला माहेराहून कोणीतरी मुन्हाळी आपल्याला न्यायला येईल याची अतिशय मनापासून वाट पाहत असतात. त्याचप्रमाणे हे विठ्ठला मी देखील पंढरपुराहून कोणीतरी मला तुझ्या भेटीसाठी न्यायला येईल, याची आतुरतेने वाट पाहत आहे.

विठ्ठलभेटीची तीव्र आस व्यक्त करताना संत तुकाराम सांगतात की, ज्याप्रमाणे लहान बाळ भुकेपोटी अतिशय व्याकुळतेने शोक करते म्हणजे रडते, तळमळते. आपली भूक मिटावी म्हणून आपल्या आईची अतिशय आतुरतेने वाट पाहत असते, त्याप्रमाणे मी देखील तुझी वाट पाहत आहे. संत तुकाराम यांच्या अभंगाची भाषा अतिशय साधी, सरळ व रसाळ आहे. शिवाय भक्ती, व्यवहार आणि अध्यात्म यांची सुयोग्य सागड त्यांच्या अभंगातून दिसून येते.

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प्रश्न 3.
भुकेलिवा बाळ अति शोक करी।
वाट पाहे उरि माउलीची।।
तुका म्हणे मज लागलीसे भूक।
धावूनि श्रीमुख दांवी देवा।।
उत्तर:
‘संत तुकाराम महाराज’ यांच्या भेटीलागी जीवा’ या कवितेतून वरील काव्यपंक्ती घेतली आहे. संत तुकारामांनी आपल्या मनातील विठ्ठलाच्या भेटीची ओढ समर्पक दृष्टांतातून व्यक्त केलेली दिसून येते.

विठ्ठल भेटीची तीव्र आस व्यक्त करताना संत तुकाराम सांगतात की, ज्याप्रमाणे लहान बाळ भुकेपोटी अतिशय व्याकुळतेनं शोक करते म्हणजे रडते, तळमळते आपली भूक मिटावी म्हणून आपल्या आईची अतिशय आतुरतेने वाट पाहत असतं, त्याप्रमाणे मीदेखील तुझी वाट पाहत आहे.

मलादेखील लहान बाळाप्रमाणे विठ्ठलदर्शनाची तीव्र भूक लागली आहे. अशावेळी ते विठ्ठलाला विनंती करतात की, हे देवा तुझे श्रीमुख मला दिसावे म्हणजे तुझे दर्शन मला व्हावे म्हणून तू माझ्यासाठी धावून ये.

संत तुकाराम यांच्या अभंगाची भाषा अतिशय साधी, सरळ व रसाळ आहे. शिवाय भक्ती, व्यवार आणि अध्यात्म यांची सुयोग्य सांगड त्यांच्या अभंगातून दिसून येते.

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पाठाखालील स्वाध्याय :

प्रश्न 1.
‘तुम्ही तुमच्या जवळच्या मित्र/मैत्रिणीच्या भेटीला आसुसले आहात’ हे सांगण्यासाठी एखादा दृष्टान्त वापरा व तो स्पष्ट करा.
उत्तर:
“दिवाळीच्या मुळा लेकी आसावली पाहातसे वाटुली पंढरीची”
जवळच्या मित्राच्या भेटीला आसुसले आहोत यासाठी वरील दृष्टान्त अतिशय समर्पक वाटतो, कारण ज्याप्रमाणे लग्न होऊन सासरी गेलेल्या मुली माहेरच्या ओढीने व्याकुळ होतात. दिवाळीच्या सणात कोणीतरी मुन्हाळी माहेरहून मला भेटण्यासाठी येईल व काही दिवसांसाठी मला माहेरपणाला घेऊन जाईल या विचाराने त्या भेटीसाठी व्याकुळ झालेल्या असतात. त्याचप्रमाणे मी देखील माझ्या अमेरिकेतील मित्राच्या भेटीसाठी आसुसलेलो आहे.

संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा – संत तुकाराम Summary in Marathi

कवीचा परिचय :

नाव : तुकाराम बोल्होबा अंबिले (मोरे)
कालावधी : 1608-1650 व्यवहार आणि अध्यात्म यांची सुयोग्य सांगड घालणारे वारकरी संप्रदायातील संतकवी. दांभिकता, दैववाद, अहंकारी वृत्ती, दुराचार इत्यादींचा परखड समाचार त्यांनी आपल्या अभंगांमधून घेतलेला आहे. प्रेम, नैतिकता, करुणा व सर्वाभूती ईश्वर या मूल्यांना प्रमाणभूत मानून आपल्या प्रापंचिक जीवनाचा आदर्श ते अभंगातून मांडतात.

प्रस्तावना :

‘भेटीलागी जीवा’ हा अभंग संत तुकाराम यांनी लिहिला आहे. या अभंगात संत तुकारामांनी आपल्या मनातील विठ्ठलाच्या भेटीची ओढ समर्पक उदाहरणांद्वारे व्यक्त केली आहे.

“Bhetilagi Jiva’, this Abhang is written by Saint Tukaram Saint Tukaram explains his affinity of meeting with Lord Vitthala with felicitous examples in this ‘Abhanga

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भावार्थ :

भेटीलागी जीवा ……………. रात्रंदिवस वाट तुझी ।
संत तुकाराम विठ्ठलाला उद्देशून सांगतात की, हे विठ्ठला मला तुझ्या भेटीची आस लागली आहे. मी रात्रंदिवस तुझ्या भेटीची अतिशय आतुरतेने वाट पाहत आहे.

पूर्णिमेचा चंद्रमा ……………. मन वाट पाहे ।
आपल्याला लागलेली विठ्ठल भेटीची ओढ पटवून देताना संत तुकाराम चकोराचे उदाहरण देत आहेत. ते सांगतात, ज्याप्रमाणे पौर्णिमेचा चंद्रमा हेच चकोराचे जीवन असते त्याचप्रमाणे विठ्ठल हे माझे जीवन आहे. त्यामुळे माझे मन त्या चकोर पक्ष्यासारखे विठ्ठल दर्शनाची अतिशय मनापासून वाट पाहत आहे.

दिवाळीच्या मुळा ……………. वाटुली पंढरीची ।
संत तुकाराम सांगतात, ज्याप्रमाणे सासरी गेलेल्या मुली दिवाळीच्या सणाला माहेरहन कोणीतरी मुजाळी आपल्याला न्यायला येईल याची अतिशय मनापासून वाट पाहत असतात. त्याचप्रमाणे हे विठ्ठला मी देखील पंढरपुराहून कोणीतरी मला भेटीसाठी न्यायला येईल, याची आतुरतेने वाट पाहत आहे.

भुकेलिवा बाळ अति …………….. उरि माउलीची ।
विठ्ठल भेटीची तीव्र आस व्यक्त करताना संत तुकाराम सांगतात, लहान बाळ भुकेपोटी अतिशय व्याकुळतेने शोक करते म्हणजे रडत, तळमळत असते व आपली भूक मिटावी म्हणून आपल्या आईची अतिशय आतुरतेने वाट पाहत असते. तशीच मी देखील तुझी वाट पाहत आहे.

तुका म्हणे ……………. श्रीमुख दांवी देवा ।
अभंगाच्या शेवटी तुकाराम महाराज सांगतात, लहान बाळाप्रमाणे मलादेखील विठ्ठल दर्शनाची तीव्र भूक लागली आहे. अशावेळी ते विठ्ठलाला विनंती करतात की, हे देवा, तुझे श्रीमुख म्हणजे तुझे दर्शन मला व्हावे म्हणून तू माझ्यासाठी धावून ये.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा - संत तुकाराम

शब्दार्थ :

  1. भेट – गाठ (meeting)
  2. जीवा (जीव) – आत्म्याला (to the soul)
  3. आस – इच्छा, अपेक्षा, आशा (desire, an expectation)
  4. पूर्णिमा – पौर्णिमा (The full moon day)
  5. चंद्रमा – चंद्र (the moon)
  6. जीवन – आयुष्य (life)
  7. तैसें – तसे (in that way)
  8. मन – चित्त (mind)
  9. मुळा – मुबळी (लग्न होऊन सासरी गेलेल्या मुलीला माहेरी आणण्यासाठी गेलेली माहेरची व्यक्ती)
  10. लेंकी – मुलगी (a daughter)
  11. आसावणे – आतुर होणे, व्याकुळ होणे
  12. वाटुली – वाट, मार्ग, रस्ता (a way, a path)
  13. भुकेलिवा – भुकेलेले (hungry)
  14. शोक – दुःख, खेद (sorrow, grief)
  15. उरी – (येथे अर्थ) हृदयापासून (from the bott heart)
  16. तुका – संत तुकाराम
  17. मज – मला, माझे (to me, to mine)
  18. भूक – क्षुधा, खाण्याची इच्छा (hunger, desire)
  19. मुख – चेहरा (the face)
  20. दावी – दाखव (please show)

टीप :

चकोर पक्षी – एक पक्षी (हा पक्षी चंद्रकिरणांवर जगतो असा कविसंकेत आहे.) (a kind of bird) (It is said that this bird feeds itself on the moonlight)

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 2.1 संतवाणी (अ) भेटीलागी जीवा - संत तुकाराम

वाक्प्रचार :

  1. आस लागणे – उत्कंठा लागणे, इच्छा होणे
  2. वाट पाहणे – प्रतीक्षा करणे
  3. शोक करणे – दुःख करणे, आकांत करणे

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे

Balbharti Maharashtra State Board Class 9 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे

Marathi Aksharbharati Std 9 Digest Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे Textbook Questions and Answers

स्वाध्याय :

1. रिकाम्या जागी योग्य पर्याय लिहून वाक्य पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
रिकाम्या जागी योग्य पर्याय लिहून वाक्य पूर्ण करा.
1. भारतात सर्वांत पहिली रेल्वे …………… येथून सुटली. (ठाणे, मुंबई, कर्जत, पुणे)
2. रेल्वेकडे लोकांना आकर्षित करण्यासाठी …………….. ठेवले. (तिकीट, बक्षीस, इनाम, प्रलोभन)
उत्तर :
1. मुंबई
2. इनाम

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2. आकृतिबंध पूर्ण करा. 

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 1
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 2

3. आकृती पूर्ण करा.

प्रश्न 1.
आकृती पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 3
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 4

4. खालील शब्दांसाठी पाठात आलेले पर्यायी शब्द शोधून लिहा.

प्रश्न 4.
खालील शब्दांसाठी पाठात आलेले पर्यायी शब्द शोधून लिहा.
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 5
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 6

5. कारणे लिहा.

प्रश्न अ.
रेल्वेचा प्रवास धोक्याचा नाही हे पटवण्यासाठी रेल्वेच्या कारभाऱ्यांनी खूप आटापिटा केला.
उत्तर :
स्वातंत्र्यपूर्वकाळात भारतीय लोकांवर अंधश्रद्धांचा प्रभाव खूप जास्त होता. पहिली रेल्वे मुंबई ते ठाणे अशी धावली, तेव्हा ही गाडी म्हणजे इंग्रजांची विलायती भुताटकी आहे. मुंबईला नव्या इमारती आणि पूल बांधताहेत. त्यांच्या पायांत गाडायला जिवंत माणसे फूस लावून नेण्याचा हा डाव आहे अशा अफवा त्यावेळी पसरल्या होत्या. म्हणूनच रेल्वे प्रवासासाठी लोक तयार होत नव्हते. अशावेळी रेल्वेचा प्रवास धोक्याचा नाही हे पटवण्यासाठी रेल्वेच्या कारभाऱ्यांना खूप आटापिटा करावा लागला.

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प्रश्न आ.
इंग्रजांनी देऊ केलेली मुंबई-ठाणे रेल्वे प्रवासाची इनामे काही दिवसांनी बंद करण्यात आली.
उत्तर :
रेल्वे प्रवासाबाबत लोकांमध्ये अनेक चित्रविचित्र अफवा पसरल्या होत्या. त्यामुळे रेल्वे प्रवासासाठी लोक तयार होत नव्हते. कितीही समजावले तरी लोकांचे समाधान काही होत नव्हते. शेवटी दर माणशी एक रुपया इनाम आणि मोफत प्रवासाची योजना सुरू केली. पैशाच्या लालुचीने ठाण्याचे आणि मुंबईचे लोक आगगाडीने जाऊ लागले की, त्यांच्या घरचे लोक आजूबाजूला उभे राहून खूप रडायचे.

त्यांची समजूत काढणे खूप त्रासाचे असायचे. एकदा ते प्रवासी ठाणे-मुंबईची सफर करून सुखरूप परत आले की चौकशी करणाऱ्यांचे घोळके त्यांच्याभोवती जमायचे. रुपयांचे इनाम पुढे आठ आण्यांवर आले. नंतर चार आणे झाले आणि नंतर रेल्वे प्रवासाची लोकांची भीती निघून गेल्याचे पाहून इनामे बंद करण्यात आली.

6. स्वमत

प्रश्न अ.
रेल्वेचा शोध देशाच्या आर्थिक विकासाला गती देणारा ठरला,’ तुमचे मत लिहा.
उत्तर :
आपल्या भारत देशाची आर्थिक राजधानी मुंबई ही होय. याच मुंबईहून पहिली रेल्वे 18 एप्रिल, 1853 या दिवशी मुंबई ते ठाणे अशी धावली होती. या रेल्वेमुळेच ठाणे ते मुंबई हा दिवसभराचा प्रवास अवघा सव्वा तासावर आला. याच रेल्वेने मुंबई -पुणे ही दोन शहरे जोडून टाकली. कारखानदारी, व्यापार, नोकरीधंदा यांमध्ये प्रचंड वाढ झाली.

व्यापारी मंडळी, नोकरदार मंडळी यांचे कामधंदयाचा निमित्ताने येणे-जाणे वाढले, वेळेची बचत झाली, कामाचा पसारा वाढला.कच्च्या व पक्क्या मालाची वाहतूक या रेल्वेमुळे सहजपणे होऊ लागली. त्यामुळेच या शहरांची प्रगती वेगाने होऊ लागली. एकूणच देशाच्या प्रगतीमध्ये भरच पडत गेली. नंतरच्या काळामध्ये रेल्वेचे जाळेच संपूर्ण देशभर विणले गेले. त्याचाच परिणाम म्हणून देशाचा आर्थिक विकास झपाट्याने होऊ लागला. देशाच्या आर्थिक विकासाला गती देण्यामध्ये रेल्वेचे योगदान फार मोलाचे आहे.

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प्रश्न आ.
स्वातंत्र्यपूर्वकाळात भारतीयांवर असलेल्या अंधश्रद्धांच्या प्रभावासंबंधी तुमचे विचार स्पष्ट करा.
उत्तर :
स्वातंत्र्यपूर्वकाळात भारतीय जनमानसांवर अंधश्रद्धांचा फार मोठा पगडा होता. कोणताही आधुनिक बदल सहजासहजी स्वीकारला जात नव्हता. पांरपरिक गोष्टींवर लोकांचा जास्त विश्वास होता.जमशेटजी जिजीभाई आणि जगन्नाथ नाना शंकरशेट यांच्या प्रयत्नाने सुरू झालेल्या रेल्वेला, भारतीयांनी सुरुवातीला इंग्रजांनी सुरू केलेली वाफेची गाडी म्हणजे विलायती भुताटकी आहे. असे म्हटले. लोकांना ठाणे-मुंबई रेल्वे प्रवासाची सवय व्हावी, गोडी लागावी म्हणून मोफत प्रवास रेल्वेच्या अधिकाऱ्यांनी सुरू केला होता.

त्यावेळी मुंबईला नव्या इमारती नि पूल बांधताहेत, त्यांच्या पायांत जिवंत गाडायला फूस लावून माणसे नेण्याचा हा साळसूद डाव आहे, असा विचार केला जात होता. याचाच अर्थ नवी इमारत किंवा नवा पूल बांधायचा असला तर त्याच्या मजबुतीसाठी त्याच्या पायामध्ये माणसांना जिवंत गाडावे लागते किंवा त्यांचा बळी दयावा लागतो, अशी विचित्र अंधश्रद्धा स्वातंत्र्यपूर्वकाळात भारतीयांमध्ये होती.

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प्रश्न इ.
तुमच्या मते रेल्वेप्रवासाचे असलेले फायदे व तोटे सविस्तर लिहा.
उत्तर :
(उतारा 4 मधील कृती 4 : स्वमतचे उत्तर पहा.)

Marathi Akshar Bharati Class 9 Textbook Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे Additional Important Questions and Answers

पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती कराः

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.

  1. आगीनगाडी निघणार त्या मुहूर्ताचा दिवस – [ ]
  2. कलियुगातला हा विंग्रेजी चमत्कार पाहायला आ वासून उभे असलेले – [ ]
  3. एकेरी रस्ता – [ ]

उत्तर :

  1. दिनांक 18 एप्रिल सन 1853 (सोमवार)
  2. लोक
  3. मुंबई ते ठाणे

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प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार घटनांचा क्रम लावा.

  1. बरोबर पाच वाजता आगगाडीने कूक शिटीचा कर्णा कुंकून आपल्या भकभक, फकफक प्रवासाला सुरुवात केली.
  2. मुंबई प्रांतात रेल्वे असावी असा उठाव झाला.
  3. सन 1853 मध्ये ग्रेट इंडियन पेनिनशुला रेल्वेचा एकेरी रस्त्याचा छोटा फाटा सुरू झाला.
  4. मुहूर्ताचा दिवस जाहीर झाला.

उत्तर :

  1. मुंबई प्रांतात रेल्वे असावी असा उठाव झाला.
  2. सन 1853 मध्ये ग्रेट इंडियन पेनिनशुला रेल्वेचा एकेरी रस्त्याचा छोटा फाटा सुरू झाला.
  3. मुहूर्ताचा दिवस जाहीर झाला.
  4. बरोबर पाच वाजता आगगाडीने कूऽक शिटीचा कर्णा फुकून आपल्या भकभक, फकफक प्रवासाला सुरुवात केली.

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. मुंबई प्रांतात रेल्वे असावी असा उठाव मुंबईला प्रथम कोणी केला?
उत्तर :
मुंबई प्रांतात रेल्वे असावी असा उठाव मुंबईला प्रथम सर जमशेटजी जिजीभाई आणि जगन्नाथ नाना शंकरशेट यांनी केला.

ii. लोकांना कोणती कल्पना अचंब्याची वाटली?
उत्तर :
लोखंडी रुळावरून इंग्रज आगीनगाडी चालवणार, ही कल्पना लोकांना अचंब्याची वाटली. –

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iii. किती वाजता पहिली आगगाडी मुंबईहून निघाली?
उत्तर :
सायंकाळी 5 वाजता पहिली आगगाडी मुंबईहून निघाली.

प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा,

  1. ……….. मध्ये ग्रेट इंडियन पेनिनशुला रेल्वेचा पहिला छोटा फाटा मुंबई ते ठाणे-पर्यंत एकेरी रस्त्याचा तयार झाला. (सन-1835, सन – 1853, सन-1930, सन – 1630)
  2. दहा डब्यांची ………….. खुशाल चालली आहे. (माळका, माळ, मालिका, शृंखला)
  3. बरोबर पाच वाजता आगगाडीने कूऽक ………….. कुंकून आपल्या भकभक, फकफक प्रवासाला सुरुवात केली. (गाडीचा कर्णा, शिटीचा कर्णा, इंजिनाचा कर्णा, डन्याचा कर्णा)

उत्तर :

  1. सन – 1853
  2. माळका
  3. शिटीचा कर्णा

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प्रश्न 6.
शब्दजाल पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 9.1

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा.
i. लोखंडी रुळावरून इंग्रज आगीनगाडी चालवणार, ही कल्पनाच…………..
(अ) लोकांना धक्कादायक होती.
(ब) लोकांना मोठी अचंब्याची होती.
(क) रेल्वे कर्मचाऱ्यांना मोठी अचंब्याची होती.
(ड) लेखकाला मोठी अचंब्याची होती.
उत्तर :
(क) रेल्वे कर्मचाऱ्यांना मोठी अचंब्याची होती.

ii. विस्तव आणि पाणी यांची सांगड घालून
(अ) विग्रेजांनी वाफेलाच गाडी ओढायला लावले!
(ब) विंग्रेजांनी पाण्यालाच गाडी ओढायला लावले!
(क) विंग्रजांनी हवेलाच गाडी ओढायला लावले!
(ड) विंग्रजांनी बाप्पाला गाडी ओढायला लावले!
उत्तर :
(अ) विग्रेजांनी वाफेलाच गाडी ओढायला लावले!

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प्रश्न 2.
चूक की बरोबर ते लिहा.

  1. 19 एप्रिल सन 1953, सोमवार रोजी सायंकाळी 4 वाजता पहिली आगगाडी मुंबईहून निघाली.
  2. इंजिनावर अंग्रेजांचे मोठे निशाण फडकत आहे
  3. मुंबई ते पुणे दुतर्फा लाखांवर लोक कलियुगातला हा विंग्रेजी चमत्कार पाहायला आ वासून उभे होते.
  4. विस्तव आणि पाणी यांची सांगड घालून विंग्रेजांनी वाफेलाच गाडी ओढायला लावले!

उत्तर :

  1. चूक
  2. बरोबर
  3. चूक
  4. बरोबर

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्ये लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
i. हि कल्पनाच लोकांना मोठी आचंब्याचि वाटली.
ii. कमल आहे बूवा या विंग्रेजांची!
उत्तर :
i. ही कल्पनाच लोकांना मोठी अचंब्याची वाटली.
ii. कमाल आहे बुवा या विग्रेजांची!

प्रश्न 2.
अचूक शब्द लिहा.

  1. पेनिनशुला, पेनीनशुला, पेनिनशूला, पेनिशूला
  2. झुकझूक, झुकझूख, झुकझुक, झूकझूक
  3. मुहुर्ताचा, मुहुरताचा, मुहुतार्चा, मुहूर्ताचा
  4. विंग्रेजी, ईग्रजी, वीग्रजी, विग्रेजि

उत्तर :

  1. पेनिनशुला
  2. झुकझुक
  3. मुहूर्ताचा
  4. विंग्रेजी

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प्रश्न 3.
वचन बदला.

  1. डबा – [ ]
  2. निशाण – [ ]
  3. रेडे – [ ]
  4. तोरण – [ ]

उत्तर :

  1. डबे
  2. निशाणे
  3. रेडा
  4. तोरणे

प्रश्न 4.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. युक्ती – [ ]
  2. सुमन – [ ]
  3. पताका – [ ]
  4. जल – [ ]
  5. आग – [ ]

उत्तर :

  1. कल्पना
  2. फूल
  3. निशाण
  4. पाणी
  5. विस्तव

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प्रश्न 5.
विरुद्धार्थी शब्दांच्या जोड्या जुळवा.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. मोठा(अ) बरोबर
2. शेवट(ब) छोटा
3. चूक(क) सुरुवात

उत्तर :

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. मोठा(ब) छोटा
2. शेवट(क) सुरुवात
3. चूक(अ) बरोबर

प्रश्न 6.
उताऱ्यातील दोन अनेकवचनी शब्द शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. निशाणे
  2. डबे
  3. खुर्ध्या
  4. लोक
  5. तोरणे

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प्रश्न 7.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दमूळ शब्दसामान्यरूप
मुहूर्ताचामुहूर्तमुहूर्ता
दिवसानेदिवसदिवसा
लाखांवरलाखलाखां
कलियुगातलाकलियुगकलियुगा

प्रश्न 8.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहून वाक्यांत उपयोग करा.
i. आ वासून उभे असणे
ii. पाठबळ असणे
उत्तर :
i. अर्थ : आश्चर्य वाटणे
वाक्य : जादूचे प्रयोग पाहायला लोक आ वासून उभे होते.

ii. अर्थ : पाठिंबा असणे.
वाक्य : सह्याद्रीचे पाठबळ होते म्हणून शिवाजी महाराजांनी स्वराज उभारले.

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प्रश्न 9.
खालील दिलेल्या वाक्यांचा काळ ओळखा.
i. ही कल्पनाच लोकांना मोठी अचंब्याची वाटली.
ii. हा विंग्रेजी चमत्कार पाहायला आ वासून उभे होते.
उत्तर :
i. भूतकाळ
ii. भूतकाळ

प्रश्न 10.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 10

कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
रेल्वेचा शोध देशाच्या आर्थिक विकासाला गती देणारा ठरला. तुमचे मत लिहा.
उत्तर :
रेल्वेचा शोध हे 19 व्या शतकातले फार मोठे आश्चर्य होय. रेल्वेचा शोध लागल्यामुळे विस्तव व पाणी यांच्या समन्वयातून तयार होणाऱ्या वाफेवर रेल्वे गाडी चालू लागली. कमीत कमी वेळात ती लांब लांबचा प्रवास करू लागली. त्यामुळे लोकांचा वेळ वाचु लागला. व्यापारी वर्ग व्यापारासाठी रेल्वेचा वापर करू लागले. अवजड यंत्रे, निरनिराळ्या वस्तू यांची रेल्वेने वाहतूक होऊ लागली.

त्यामुळे त्यांची व्यापारात भरभराट होऊ लागली. दळणवळण सुलभ व प्रगत झाल्यामुळे देशाच्या आर्थिक विकासात हातभार लावला जाऊ लागला. देशाची आर्थिक प्रगती होऊ लागली. म्हणून रेल्वेचा शोध देशाच्या आर्थिक विकासाला गती देणारा ठरला.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 11 Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे 12

प्रश्न 2.
उत्तर लिहा.
लोकात कशाचे पीक पिकले होते?
उत्तर :
लोकात भलत्याच कंड्या नि अफवांचे पीक पिकले होते

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे

प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार घटनांचा क्रम लावा.

  1. दुसऱ्या दिवसापासून लोकांना मोफत ठाणे ते मुंबई आणि परत नेण्या-आणण्याची दबंडी पिटण्यात आली.
  2. मुहूर्तावर निघालेली पहिली आगगाडी ठाण्याला जाऊन मुंबईला सुखरूप परत आली.
  3. एक दोन दिवस सरकारी कचेरीतले कारकून, व्यापाऱ्यांच्या पेडीवरचे गुमास्ते यांना मुंबई ते ठाण्याला नेऊन परत आलेले लोकांना दाखवले.
  4. लोकांत भलत्याच कंड्या नि अफवांचे पीक पिकले होते.

उत्तर :

  1. मुहूर्तावर निघालेली पहिली आगगाडी ठाण्याला जाऊन मुंबईला सुखरूप परत आली.
  2. दुसऱ्या दिवसापासून लोकांना मोफत ठाणे ते मुंबई आणि परत नेण्या-आणण्याची दवंडी पिटण्यात आली.
  3. लोकांत भलत्याच कंड्या नि अफवांचे पीक पिकले होते.
  4. एक दोन दिवस सरकारी कचेरीतले कारकून, व्यापाऱ्यांच्या पेढीवरचे गुमास्ते यांना मुंबई ते ठाण्याला नेऊन परत आलेले लोकांना दाखवले.

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. दुसऱ्या दिवसापासून कोणती दवंडी पिटण्यात आली?
उत्तर :
दुसऱ्या दिवसापासून लोकांना मोफत ठाणे ते मुंबई आणि परत नेण्या-आणण्याची दवंडी पिटण्यात आली.

ii. विंग्रेजांची विलायती भुताटकी कोणती आहे?
उत्तर :
वाफेची गाडी ही विंग्रेजांची विलायती भुताटकी आहे.

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प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.

  1. वाफेची गाडी ही विंग्रेजांची विलायती ……………. आहे. (भुताटकी, राक्षस, यंत्र, मशीन)
  2. तेवढ्यानेही कोणाचे …………… होईना. (समाधान, कौतुक, दुःख, नवल)
  3. मुहूर्तावर निघालेली पहिली आगगाडी ठाण्याला जाऊन …………… सुखरूप परत आली. (पुण्याला, मुंबईला, रत्नागिरीला, कोल्हापुरला)
  4. मुंबईला नव्या इमारती नि ………… बांधताहेत. (बांध, धरण, पूल, रस्ते)

उत्तर :

  1. भुताटकी
  2. समाधान
  3. मुंबईला
  4. पूल

प्रश्न 6.
सहसंबंध लिहा.
कचेरीतले कारकून :: व्यापाऱ्यांच्या पेढीवरचे : ……………….
उत्तर :
गुमास्ते

कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
कोण ते लिहा.

  1. सरकारी कचेरीतले – [ ]
  2. व्यापाऱ्यांच्या पेढीवरचे – [ ]
  3. विंग्रेजांची विलायती भुताटकी – [ ]
  4. खूप आटापीटा करणारे – [ ]

उत्तर :

  1. कारकून
  2. गुमास्ते
  3. बाफेची गाडी
  4. रेल्वेचे कारभारी

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प्रश्न 2.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 3.
सत्य वा असत्य ते लिहा.

  1. आगगाडीत बसणे धोक्याचे आहे.
  2. लोकांत भलत्याच कंड्या नि अफवांचे पीक पिकले होते.
  3. वाफेच्या गाडीत बसायचा लोकांना धीर झाला.

उत्तर :

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
लेखननियमांनुसार वाक्ये शुद्ध करून लिहा.
i. लोकांत भलत्याच कंड्या नी अफवांचे पिक पिकले होते,
ii. तेवढ्यानेही कोणाचे समधान होइना.
उत्तर :
i. लोकांत भलत्याच कंड्या नि अफवांचे पीक पिकले होते.
ii. तेवढ्यानेही कोणाचे समाधान होईना.

प्रश्न 2.
अचूक शब्द लिहा.

  1. साळसूद, साळसुद, साळखुद, साळखूद
  2. मुहूरतावर, मुहूर्तावर, मुहुर्तावर, मुहर्तावर
  3. सुखरूप, सूखरूप, सुरुप, सुकरुप

उत्तर :

  1. साळसूद
  2. मुहूर्तावर
  3. सुखरूप

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प्रश्न 3.
समानार्थी शब्दांच्या जोड्या जुळवा.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. विलायती(अ) धोका
2. फुकट(ब) विदेशी
3. संकट(क) कंड्या
4. अफवा(ड) मोफत

उत्तर :

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. विलायती(ब) विदेशी
2. फुकट(ड) मोफत
3. संकट(अ) धोका
4. अफवा(क) कंड्या

प्रश्न 4.
विरुद्धार्थी शब्दांच्या जोड्या जुळवा.

  1. दुःखाचा × [ ]
  2. उशीरा × [ ]
  3. जुन्या × [ ]
  4. मृत × [ ]
  5. मूर्ख × [ ]
  6. असमाधान × [ ]

उत्तर :

  1. सुखाचा
  2. लवकर
  3. नव्या
  4. जिंवत
  5. शहाणे
  6. समाधान

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प्रश्न 5.
उताऱ्यातील दोन अनेकवचनी शब्द शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. कारकून
  2. गुमास्ते
  3. इमारती
  4. पूल

प्रश्न 6.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
दिवसापासूनदिवसा
धोक्याचेधोक्या
कारभाऱ्यांनीकारभाऱ्या
लोकांतलोकां
सुखाचासुखा
वाफेच्यावाफे
व्यापाऱ्यांच्याव्यापाऱ्यां

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प्रश्न 7.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहा.

  1. दवंडी पिटणे
  2. फूस लावणे
  3. समाधान होणे

उत्तर :

  1. जाहीर घोषणा करणे
  2. गुप्तपणे/फसवून उत्तेजन देणे
  3. तृप्त होणे

प्रश्न 8.
काळ बदला. (वर्तमानकाळ करा)
लोकांच्या मनात भलत्याच कंड्या नि अफवांचे पीक पिकले होते.
उत्तर :
लोकांच्या मनात भलत्याच कंड्या नि अफवांचे पीक पिकले आहे.

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प्रश्न 9.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
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कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
स्वातंत्र्यपूर्व काळात भारतीयांवर असलेल्या अंधश्रद्धांच्या प्रभावांसंबंधी तुमचे विचार स्पष्ट करा.
उत्तर :
स्वातंत्र्यपूर्वकाळात भारत देशात अंधश्रद्धेचे साम्राज्य होते. अंधश्रद्धेने समाजाला पोखरून काढलेले होते. सती जाणे, मांजर आडवे जाणे, केशवपन करणे, विधवेचे दर्शन होणे अशा कितीतरी प्रकारच्या अंधश्रद्धा देशात आ वासून उभ्या होत्या. भारतीय लोक निरक्षर असल्यामुळे ते या सर्व प्रकारच्या अंधश्रद्धांना बळी पडत होते. अर्धश्रद्धेचा लोकांवर इतका पगडा होता की त्यांची मानसिकताच जणू मृतप्राय झालेली होती.

देशाला स्वातंत्र्य मिळण्याअगोदर या अंधश्रदधेने अनेक भारतीयांचे बळी घेतलेले होते. तरी देखील तत्कालीन लोक डॉक्टरकडे न जाता ढोंगी, साधू व मांत्रिकांवरच विश्वास ठेवत असत. खरोखरच देश स्वतंत्र होण्याअगोदर अंधश्रद्धा हा भारतीय समाजाला लागलेला एक फार मोठा कलंक होता आणि त्याचा प्रभाव कमी करण्याकरीता अनेक समाजसुधारकांना आपल्या जिवाचे रान करावे लागले होते.

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. आजूबाजूला उभी राहून ठणाण धाय मोकलणारी
ii. समजूत काढता काढता टेकीला यायचे –
उत्तर :
i. घरची माणसे
ii. रेल्वेचे अधिकारी

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प्रश्न 3.
उताऱ्यानुसार घटनांचा क्रम लावा.

  1. पैशाच्या लालुचीने ठाण्याच्या घंटाळीवरचे आणि मुंबईचे लोक आगगाडीने जाऊ लागले.
  2. इनामे बंद झाली नि सर्रास तिकिटे चालू केली.
  3. दर माणशी एक रुपया इनाम आणि मोफत प्रवासाचा डंका वाजला,
  4. समजूत काढता काढता रेल्वेचे अधिकारी अगदी टेकीला यायचे.

उत्तर :

  1. दर माणशी एक रुपया इनाम आणि मोफत प्रवासाचा डंका वाजला.
  2. पैशाच्या लालुचीने ठाण्याच्या घंटाळीवरचे आणि मुंबईचे लोक आगगाडीने जाऊ लागले.
  3. समजूत काढता काढता रेल्वेचे अधिकारी अगदी टेकीला यायचे.
  4. इनामे बंद झाली नि सर्रास तिकिटे चालू केली.

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. इनामे बंद का झाली?
उत्तर :
रेल्वे प्रवास करताना लोकांचा धीर चेपला म्हणून इनामे बंद झाली.

ii. ठाणे-मुंबईच्या बैलांच्या खटारगाडीचा प्रवास किती दिवस खायचा?
उत्तर :
ठाणे-मुंबईच्या बैलांच्या खटारगाडीचा प्रवास तब्बल एक दिवस खायचा.

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प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकामी जागा भरा.
मग मात्र लोकांची …………… लागली. (झुंबड, तुंबड, चंगळ, मौज)
उत्तर :
झुंबड

प्रश्न 6.
शब्दसमूहासाठी एक शब्द चौकटीत लिहा.
i. प्रवास करणारी व्यक्ती –
उत्तर :
प्रवासी

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कृती 2 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा.
i. समजूत काढता काढता रेल्वेचे ……………
(अ) अधिकारी अगदी टेकौला यायचे.
(व) पदाधिकारी अगदी टेकीला यायचे.
(क) अधिकारी अगदी आनंदी असायचे.
(ड) अधिकारी दु:खी व्हायचे.
उत्तर :
(अ) अधिकारी अगदी टेकौला यायचे.

ii. अवध्या सव्वा तासात ठाण्याचा असामी …………..
(अ) पुण्याला येऊ जाऊ लागला.
(व) कोल्हापूरला येऊ जाऊ लागला.
(क) मुंबईला येऊ जाऊ लागला.
(ड) ठाण्याला येऊ जाऊ लागला.
उत्तर :
(क) मुंबईला येऊ जाऊ लागला.

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प्रश्न 2.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 3.
एका वाक्यात उत्तर लिहा.
ठाण्याचा आसामी मुंबईला किती तासात येऊ जाऊ लागला?
उत्तर :
ठाण्याचा असामी मुंबईला अवघ्या सव्वा तासात येऊ जाऊ लागला.

प्रश्न 4.
सत्य वा असत्य ते लिहा.
i. अखेर दर माणशी दोन रुपया इनाम आणि मोफत प्रवासाचा डंका वाजवला.
ii. घरची माणसे आजूबाजूला उभी राहून ठणाण धाय मोकलायची.
उत्तर :
i. असत्य
ii. सत्य

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कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्य लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
पैशाच्या लालूचीने ठाण्याच्या घंटाळिवरचे आणि मुंबईचे लोक आगगाडीने जाऊ लागले.
उत्तर :
पैशाच्या लालुचीने ठाण्याच्या घंटाळीवरचे आणि मुंबईचे लोक आगगाडीने जाऊ लागले.

प्रश्न 2.
उताऱ्यातील दोन विशेषणे शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. मोफत
  2. दर
  3. एक

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प्रश्न 3.
अचूक शब्द लिहा.
i. खटारगाडीचा, कटारगाडीचा, खटारगाडिचा, खटारडीचा
ii. आजूबाजुला, आजुबाजुला, आजूबाजूला, आजुबाजूला.
उत्तर :
i. खटारगाडीचा
ii. आजूबाजूला

प्रश्न 4.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. बक्षीस – [ ]
  2. तपास – [ ]
  3. धिटाई – [ ]
  4. दिन – [ ]

उत्तर :

  1. इनाम
  2. चौकशी
  3. धीर
  4. दिवस

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प्रश्न 5.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.

  1. सुरुवात × [ ]
  2. विकत × [ ]
  3. रात्र × [ ]
  4. मागे × [ ]

उत्तर :

  1. अखेर
  2. मोफत
  3. दिवस
  4. पुढे

प्रश्न 6.
उताऱ्यातील दोन अनेकवचनी शब्द शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. लोक
  2. माणसे
  3. इनामे
  4. अधिकारी
  5. घोळके
  6. तिकिटे

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प्रश्न 7.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दप्रत्ययविभक्ती
प्रवासाचाचाषष्ठी
पैशाच्याच्याषष्ठी
मुंबईलालाचतुर्थी
लोकांचीचीषष्ठी

प्रश्न 8.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
प्रवासाचाप्रवासा
ठाण्याचाठाण्या
पैशाच्यापैशा

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प्रश्न 9.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहून वाक्यात उपयोग करा,
i. धाय मोकलून रडणे
ii. झुंबड उडणे
उत्तर :
i. अर्थ : मोठमोठ्याने रडणे.
वाक्य : आपल्या आवडत्या कुत्र्याचा अपघात झालेला पाहून रजनी धाय मोकलून रडू लागली.

ii. अर्थ : गर्दी करणे.
वाक्य : माकडाचे खेळ पाहण्यासाठी लहान मुलांची झुंबड उडाली होती.

प्रश्न 10.
काळ बदला. (भविष्यकाळ करा)

  1. ते प्रवासी ठाणे-मुंबईची सफर करून सुखरूप परत येतात.
  2. लोकांची झुंबड लागली होती.
  3. नंतर चार आणे झाले.

उत्तर :

  1. ते प्रवासी ठाणे-मुंबईची सफर करून सुखरूप परत येतील.
  2. लोकांची झुंबड लागेल.
  3. नंतर चार आणे होतील.

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प्रश्न 11.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
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कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
नवीन तंत्रज्ञानाशी मानवाची लगेचच मैत्री होत नाही, असे तुम्हांस वाटते का? स्पष्ट करा.
उत्तर :
तंत्रज्ञान हे नेहमीच बदलत असते. त्यात प्रगती होत असते. नवीन तंत्रज्ञान मानवासाठी एक चमत्कार असतो. त्याच्याशी जवळीक साधण्यासाठी मनुष्याला थोडाफार वेळ लागतो. त्याची रीत, पद्धत वा तंत्र समजून घेण्यासाठी मानवाला थोडा उशीर लागतो. ज्याप्रमाणे देशात सर्वप्रथम रेल्वे सुरू झाली तेव्हा लोकांच्या मानसिकतेत बदल व्हायला व तिचा वापर करण्यास लोकांना फार वेळ लागला होता. त्याप्रमाणे आता एवढा वेळ वा आश्चर्य वाटत नाही पण तरीही नवीन तंत्रज्ञान म्हटले की ते शिकण्यास वा जाणून घेण्यास थोडाफार वेळ लागतोच,

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पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती कराः

कृती 1 : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
i. पुणे ते मुंबईचा रेल्वे प्रवास तासांत व्हायचा – [ ]
ii. घाट – उतरणीला किती तास लागायचे – [ ]
उत्तर :
i. अठरा
ii. चार

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प्रश्न 3.
जोड्या जुळवा.

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. खंडाळयाहून पुण्यापर्यंतचा सपाटीचा रेल्वे-रस्ता(अ) दोन स्टेशने
2. खंडाळा-पुण्याच्या दरम्यान(ब) ‘ओपणिंग शिरोमणि’
3. कंत्राट घेणारा(क) अठरा तासांचा
4. पुणे ते मुंबईचा रेल्वे प्रवास(ड) करशेटजी जमशेटजी

उत्तर :

‘अ’ गट‘ब’ गट
1. खंडाळयाहून पुण्यापर्यंतचा सपाटीचा रेल्वे-रस्ता(ब) ‘ओपणिंग शिरोमणि’
2. खंडाळा-पुण्याच्या दरम्यान(अ) दोन स्टेशने
3. कंत्राट घेणारा(ड) करशेटजी जमशेटजी
4. पुणे ते मुंबईचा रेल्वे प्रवास(क) अठरा तासांचा

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प्रश्न 4.
उताऱ्यानुसार घटनांचा क्रम लावा.

  1. मोठ्या थाटामाटाने ओपणिंग शिरोमणि’ करण्यात आला.
  2. ज्याला त्याला मोठे नवल वाटायचे.
  3. आगगाडीत बसून झुकझुक करीत खुशाल मुंबईला रवाना व्हायचे
  4. मुंबई-पुण्याचा रेल्वेप्रवास ज्यारीने चालू झाला.

उत्तर :

  1. मोठ्या थाटामाटाने ‘ओपणिंग शिरोमणि’ करण्यात आला.
  2. मुंबई-पुण्याचा रेल्वेप्रवास ज्यारीने चालू झाला.
  3. आगगाडीत बसून झुकझुक करीत खुशाल मुंबईला रवाना व्हायचे.
  4. ज्याला त्याला मोठे नवल वाटायचे.

प्रश्न 5.
खालील प्रश्नाचे उत्तरे एका वाक्यात लिहा.
i. कोणत्या रस्त्याचा ‘ओपणिंग शिरोमणि’ मोठ्या थाटामाटाने करण्यात आला?
उत्तर :
खंडाळ्याहून पुण्यापर्यंतच्या सपाटीच्या रस्त्याचा ‘ओपणिंग शिरोमणि’ मोठ्या थाटामाटाने करण्यात आला.

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ii. घाट-उतरणीची सुखसोय नि सरबराई पाहण्याचे कंत्राट कोणी घेतले होते?
उत्तर :
घाट-उतरणीची सुखसोय नि सरबराई पाहण्याचे कंत्राट मुंबईच्या करशेटजी जमशेटजी यांनी घेतले होते.

प्रश्न 6.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.

  1. ……… काम चालले असतानाच मुंबई-पुण्याचा रेल्वेप्रवास ज्यारीने चालू झाला. (मेळघाटाचे, कशेडी घाटाचे, फोंडाघाटाचे, बोरघाटाचे)
  2. खंडाळ्याहून पुण्यापर्यंचा सपाटीचा रेल्वे-रस्ता सन …………. च्या फेब्रुवारीत पुरा झाला. (1858, 1850, 1860, 1958)
  3. सगळा काफिल्ला ………… आला. (देवगिरीला, खोपवलीला, सोनखडीला, राजगीरीला)

उत्तर :

  1. बोरघाटाचे
  2. 1858
  3. खोपवलीला

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कृती 2: आकलन कृती

प्रश्न 1.
योग्य पर्याय निवडून विधाने पूर्ण करा.
i. खंडाळा-पुण्याच्या दरम्यान खडकी आणि तळेगाव अशी ………………
(अ) दोन स्टेशने ठेवण्यात आली.
(ब) दोन उपाहारगृहे ठेवण्यात आली.
(क) दोन माणसे ठेवण्यात आली.
(ङ) दोन ठिकाणे ठेवण्यात आली.
उत्तर :
(अ) दोन स्टेशने ठेवण्यात आली.

ii. पुणे ते मुंबईचा रेल्वे प्रवास
(अ) अवघ्या वीस तासांत व्हायचा.
(ब) अवघ्या दहा तासांत व्हायचा.
(क) अवघ्या अठरा तासांत व्हायचा.
(ड) अवघ्या तीस तासांत व्हायचा.
उत्तर :
(क) अवघ्या अठरा तासांत व्हायचा.

प्रश्न 2.
कोण ते लिहा.
i. बोरघाट पोखरण्याची योजना करणारे – [ ]
ii. प्रवाशांची घाट-उतरणीची सुखसोय नि सरबराई पाहण्याचे कंत्राट घेणारे – [ ]
उत्तर :
i. इंजिनीयर (इजनेर) लोक
ii. करशेटजी जमशेटजी

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प्रश्न 3.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर :
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प्रश्न 4.
सत्य वा असत्य ते लिहा.

  1. पुणे ते मुंबईचा रेल्वे प्रवास अवघ्या अठरा तासांत व्हायचा.
  2. रस्ता दुहेरीच होता.
  3. आगगाडीत बसून झुकझुक करीत खुशाल मुंबईला रवाना व्हायचे.

उत्तर :

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य

कृती 3 : व्याकरण कृती

प्रश्न 1.
खालील वाक्ये लेखननियमांनुसार शुद्ध करून लिहा.
i. त्याचाहि मोठ्या थाटामाटाने ‘ओपणींग शिरोमणि’ करण्यात आला.
ii. बोरघाटाचे काम चालले असतानाच मुंबई-पूण्याचा रेल्वेप्रवास जारीने चालू झाला,
उत्तर :
i. त्याचाही मोठ्या थाटामाटाने ओपणिंग शिरोमणि’ करण्यात आला.
ii. बोरघाटाचे काम चालले असतानाच मुंबई-पुण्याचा रेल्वेप्रवास ज्यारीने चालू झाला.

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प्रश्न 2.
अचूक शब्द लिहा.
i. खंड्याळाहून, खंडाळ्याहून, खंडाळायाहून, खंड्याळहुन
ii. उतरणीची, उतरणिची, उतरणिचि, उतरणिच
उत्तर :
i. खंडाळ्याहून
i. उतरणीची

प्रश्न 3.
समानार्थी शब्द लिहा.

  1. कर्म – [ ]
  2. आश्चर्य – [ ]
  3. गंमत – [ ]
  4. बेत – [ ]

उत्तर :

  1. काम
  2. नवल
  3. मौज
  4. योजना

प्रश्न 4.
विरुद्धार्थी शब्द लिहा.
i. बंद × [ ]
ii. दुहेरी × [ ]
उत्तर :
i. चालू
ii. एकेरी

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प्रश्न 5.
उताऱ्यातील दोन अनेकवचनी शब्द शोधून लिहा.
उत्तर :

  1. लोक
  2. पालख्या
  3. डोल्या
  4. खुर्ध्या
  5. स्टेशने

प्रश्न 6.
तक्ता पूर्ण करा.
उत्तर :

शब्दसामान्यरूप
पोखरण्याचीपुण्याच्या
पोखरण्यापुण्या
खंडाळयालाखंडाळ्या
व्यापाऱ्यानेव्यापाऱ्या

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प्रश्न 7.
वाक्प्रचारांचा अर्थ लिहा.

  1. रवाना होणे
  2. नवल वाटणे
  3. योजना आखणे

उत्तर :

  1. निघून जाणे
  2. आश्चर्य वाटणे
  3. बेत आखणे

प्रश्न 8.
वाक्यांतील काळ ओळखा.
i. रस्ता एकेरीच होता.
ii. ज्याला त्याला मोठे नवलच वाटायचे,
उत्तर :
i. भूतकाळ
ii. भूतकाळ

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प्रश्न 9.
पर्यायी शब्द लिहा.
उत्तर :
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कृती 4 : स्वमत

प्रश्न 1.
तुमच्या मते रेल्वेप्रवासाचे असलेले फायदे व तोटे सविस्तर सांगा.
उत्तर :
रेल्वेमुळे प्रवास लवकर आणि सुखाचा होतो. बाकी गाड्यांच्या तुलनेत रेल्वेचा प्रवास जास्त सुरक्षित असतो. हा प्रवास स्वस्त आणि कमी खर्चिक असतो. एकाच वेळी अनेक शेकडो प्रवासी एकत्रितपणे प्रवास करू शकतात. शिवाय हलक्या तसेच वजनाने जड अशा वस्तू प्रवासात सुरक्षितपणे नेता येतात. रेल्वे फक्त शहराशहरांशी जोडलेली असल्याने गाव-खेड्यांपर्यंत प्रवास करता येत नाही. लांबच्या प्रवासासाठी तिकिट आधीच आरक्षित करावे लागते. अचानक प्रवास करायचा झाल्यास आपल्याला त्रास सहन करावा लागतो. लांबच्या प्रवासासाठी मर्यादित गाड्या असतात. दुर्घटना झाल्यास एकाच वेळी शेकडो प्रवाशांच्या जीवाला धोका असतो. पावसात रेल्वे यंत्रणा विस्कळीत होते व प्रवाशांना याचा त्रास सहन करावा लागतो.

जी. आय. पी. रेल्वे Summary in Marathi

लेखकाचा परिचय :

नाव : केशव सीताराम ठाकरे
कालावधी : 1885 – 1973 इतिहासकार, नाटककार, वृत्तपत्रकार, व्यंगचित्रकार, समाजसुधारक, फर्डे वक्ते. ‘कुमारिकांचे शाप’, ‘भिक्षुकशाहीचे बंड’ हे वैचारिक ग्रंथ; ‘खरा ब्राम्हण’, ‘टाकलेले पोर’, ही नाटके; ‘ग्रामण्यांचा सावंत इतिहास’, ‘हिंदवी स्वराज्याचा खून’, ‘कोंदडाचा टणत्कार’ इत्यादी इतिहासविषयक पुस्तके; ‘संत रामदास’, पंडिता रमाबाई, ‘संत गाडगेमहाराज’ इत्यादी चरित्रात्मक लेखन; ‘माझी जीवनगाथा’ हे आत्मचरित्र प्रसिद्ध.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे

प्रस्तावना :

सन 1853 मध्ये इंग्रजांनी मुंबई ते ठाणे असा एकेरी रेल्वेमार्ग तयार केला. लोखंडी रुळावरून वाफेच्या जोरावर धावणारी रेल्वे पाहून लोकांना होणारे नवल, रेल्वेविषयी पसरलेल्या अफवा व त्यातून मार्ग काढत सुरू झालेला रेल्वे प्रवास, याचे अतिशय सुंदर, मार्मिक व ओघवत्या शैलीत वर्णन लेखकांनी प्रस्तुत पाठात केले आहे.

In the year 1853, british started single railway track between Mumbai to Thane. Marvel of people watching running railway with help of steam, rumours about railway and finally after many hazards starting journey of railway, have beautifully narrated by writer in very easy and subtle language

शब्दार्थ:

  1. रूळ – लोहमार्ग (a railway line)
  2. मार्मिक – सूक्ष्म, भेदक (pointed)
  3. ओघवते – प्रवाही (flowing)
  4. शैली – पद्धत, रीत (style, mode)
  5. प्रांत – प्रदेश, विभाग (territory)
  6. उठाव – बंड (an outbreak)
  7. नामांकित – प्रख्यात (famous, reputed)
  8. पाठबळ – भक्कम पाठिंबा (strength of backing. good support)
  9. फाटा – भाग (part)
  10. आगीनगाडी – रेल्वे, वाफेवर चालणारी रेल्वे (railway train)
  11. अचंबा – आश्चर्य, विस्मय (surprise, wonder)
  12. मुहूर्त – मंगलदायक, शुभ असा क्षण (an auspicious moment)
  13. शृंगार – शोभा, थाट (decoration, adornment)
  14. जामानिमा – पोशाख (dress)
  15. दुतर्फा – दोन्ही बाजूस (to both sides)
  16. – चार युगांपैकी चौथे युग (the forth age)
  17. विंग्रजी – इंग्रजी (British)
  18. विस्तव – (येथे अर्थ) आग (fire)
  19. सांगड – एकत्र जुळणी, जोडणी (Joining together)
  20. धीर – धैर्य, संयम (patience, daring)
  21. दवंडी – जाहीर घोषणा (a public announcement)
  22. सुखाचा – आनंदाचा (happy)
  23. कारभारी – (येथे अर्थ) व्यवस्थापक (a manager)
  24. आटापीटा – कष्ट, मेहनत, परिश्रम (efforts, hardwork)
  25. कंड्या . अफवा, गप्पा (rumours.gossip)
  26. भुताटकी – भुतांची किंवा पिशाच्चांची करामत
  27. फूस – गुप्तपणे दिलेले उत्तेजन (secret instigation)
  28. साळसूद . साधा, प्रामाणिक (honest, simple, innocent)
  29. कचेरी – कार्यालय (an office)
  30. पेढी – जेथे पैशाच्या देवघेवीचे व्यवहार होतात ते ठिकाण (a place wherer money transactions take place)
  31. कारकून – लेखनकाम हिशेब इ. करणारा सेवक (aderk)
  32. गुमास्ते – मुनीम (agent)
  33. डंका – गाजावाजा, प्रसिद्धी (publicity)
  34. लालूच – लोभीपणा (greediness)
  35. घोळके – समुदाय, जमाव (groups)
  36. आठ आणे – पन्नास पैसे
  37. सर्रास – कित्येकवेळा, वारंवार (very frequently)
  38. असामी – व्यक्ती (person)
  39. झुंबड – आतोनात गर्दी (great crowd, rush)
  40. इंजनेर – इंजिनीयर पोखरणे – खणणे, उकरणे (to dig)
  41. योजना – बेत (a plan, a programme)
  42. सपाट – समतल, उंचसखल नसलेला (flat, smooth)
  43. ओपणिंग शिरोमणि – उद्घाटन सोहळा (Opening ceremony)
  44. काफिल्ला – प्रवाशांचा तांडा (a group of travellers)
  45. सरबराई – पाहुणचार, आदरातिथ्य (hospitality)
  46. कंत्राट – मक्ता , ठेका (contract)

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे

टिपा :

  1. सर जमशेटजी जिजीभाई – हे प्रसिद्ध पारशी भारतीय व्यापारी होते. ते परोपकारी होते. चीनसोबत व्यापार करून मोठ्या प्रमाणात संपत्ती निर्माण करण्यात ते ऐतिहासिकदृष्ट्या प्रसिद्ध आहेत.
  2. जगन्नाथ नाना शंकरशेट – (10 ऑक्टोबर, 1800 – 31 जुलै, 1865). हे मराठी शिक्षणतज्ज्ञ, उद्योगपती होते. मुंबई शहराच्या घडणीत त्यांचा मोठा वाटा मानला जातो.
  3. मोरारजी गोकुळदास – हे मुंबईतील कापड उद्योगाचे एक संस्थापक होते. मुंबईत त्यांच्या नावाची एक गिरणी होती.
  4. आदमजी पीरभाई – सर आदमजी पीरभाई हे भारतीय उद्योगपती, परोपकारी आणि मुंबईतील दाऊदी बोहरा समाजाचे प्रतिनिधी होते.
  5. डेविड ससून – डेविड ससून 1817 ते 1892 दरम्यान बगदादचे खजिनदार होते. मुंबईला स्थलांतरित झाल्यावर ते यहुदी समाजाचा नेता बनले. त्यांच्या नावाचे मुंबईला एक बंदर आहे. (Sassoon dock)
  6. बोरघाट – सहयाद्री पर्वतामधला एक घाटरस्ता. हा रस्ता रायगड जिल्ह्यातील खोपोली गावाला व पुणे जिल्हयातील लोणावळा गावाला जोडतो. या घाटाला सामान्यतः खंडाळ्याचा घाट असे म्हटले जाते.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 जी. आय. पी. रेल्वे

वाक्प्रचार :

  1. पाठबळ असणे – पाठिंबा असणे
  2. अचंबा वाटणे – आश्चर्य वाटणे
  3. जाहीर करणे – घोषित करणे, प्रसिद्ध करणे
  4. जामानिमा करणे – नटणे, सर्व पोशाख घालून तयार होणे.
  5. आ वासणे – आश्चर्यचकित होणे
  6. सांगड घालणे – एकत्र जुळणी करणे
  7. दवंडी पिटणे – प्रचार/ प्रसार करणे
  8. फूस लावणे – गुप्तपणे/ फसवून उत्तेजन देणे
  9. डंका वाजवणे – प्रसिद्धी/ प्रसार करणे
  10. धाय मोकलून रडणे – जोरजोरात रडणे
  11. टेकीला येणे – शौण होणे, अतिशय थकवा येणे
  12. धीर चेपणे – भीती नाहीशी होणे
  13. झुंबड होणे – अतोनात गर्दी होणे
  14. रवाना होणे – मार्गस्थ होणे
  15. नवल वाटणे – आश्चर्य वाटणे